हम दुनिया की किसी भी cutting-edge technology को अपने देश में विकसित कर सकते हैं: रक्षामंत्री

Text of RM’s speech at the Swavlamban-2026 in New Delhi

 

सबसे पहले मैं, Indian Navy, Defence Innovation Organisation और SIDM को स्वावलंबन के 5th edition के लिए बधाई देता हूँ।

आज जो innovators सम्मानित हो रहे हैं, मैं उन्हें अपनी विशेष बधाई देता हूँ। और उन सब को भी, जो emerging तथा frontier technologies पर कठोर परिश्रम कर रहे हैं। मुझे आज स्वावलंबन 5.0 document और Compendium of Technology Imperatives, Problem Statements and Future Concepts जारी करके भी बड़ी खुशी हुई।

ये documents, Defence Industry और research institutions के लिए एक suitable environment develop करने में मार्गदर्शक साबित होंगे। ऐसा मेरा विश्वास है।

साथियों, 2022 में इसके पहले संस्करण से लेकर आज तक, इस मंच ने लगातार, हमारी Navy की operational जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। आज अभी मंच पर आने से पहले, मैंने जो innovations देखे हैं, उन्होंने मेरा विश्वास और भी मज़बूत किया है, कि हमारी industries भरोसेमंद high-end indigenous technologies विकसित कर सकती हैं। कर क्या सकती हैं, करके दिखा रही हैं।

आज जब मैं अपने innovators के साथ हूँ, तो मैं आपसे कुछ ऐसी बातें करना चाहता हूँ, जो आपके आत्मविश्वास जैसी ही महत्त्वपूर्ण चीज है। मैं बात करना चाहूँगा, आत्मनिर्भरता की।

साथियों, आत्मनिर्भरता का नारा, खासकर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का आह्वान, हमारे प्रधानमंत्री जी ने लगभग एक दशक पहले ही दिया था। उनके दिशा निर्देशों के अनुसार, हमने समय के साथ-साथ, अच्छी खासी उपलब्धियां भी हासिल की हैं। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो इस बात पर हमें गौरव भी महसूस होता है, कि हमने इतने कम समय में, इतनी अच्छी दूरी तय की है। हमने आत्मनिर्भरता के रास्ते में आ रही कई रूकावटों को हटाया है, और आज हम एक मजबूत स्थिति में हैं।

आज स्वावलंबन के इस मंच पर जब मैं आया हूं, तो मेरे मन में एक प्रश्न है कि अब आगे क्या? अब यहां से हमें आगे का कौन सा रास्ता चुनना है, और कैसे आगे बढ़ना है। मैं समझता हूं, कि आज का यह जो platform है, यह एक उचित platform है, जब हम आत्मनिर्भरता 2.0 की बात करें। अब वक्त आ गया है जब हम second generation self-reliance की बात करें। हम उन deeper और higher targets की बात करें, जिनको पाने में अभी हमें उतनी सफलता नहीं मिली है।

वैसे भी अपने जीवन में हम simple से complex targets की ओर बढ़कर ही सफलता हासिल करते हैं। और यह बात हर क्षेत्र में लागू होती है। एक बच्चा पहले खड़ा होना सीखता है। फिर चलना सीखता है। आगे चलकर वही बच्चा दौड़ना और तैरना भी सीखता है। वह पहाड़ों की ऊंचाइयों को छूता है, समुद्र की गहराइयों को नापता है।

इसलिए अब हमें उन technological changes की तरफ ध्यान देना है, जो top-end तथा state of the art हैं। हमें आज उन frontiers पर भी विजय प्राप्त करने की मुहिम छेड़नी है, जो कल तक असंभव थी। यही हमारा आत्मनिर्भरता का phase-2 है।  और मैं समझता हूं कि हमने इस phase 2 में प्रवेश करने के लिए, phase 1 में अच्छे-खासे marks हासिल किए हैं।

और मुझे यह देखकर बड़ी खुशी होती है, कि पिछले कुछ वर्षों में हमने एक बड़ी छलांग लगाई है। नौसेना के 229 iDEX challenges पर startups और MSMEs की तरफ से चार हज़ार से अधिक proposals का आना, Indian Talent की गहराई को दिखाता है। यह हमारे entrepreneurs के enthusiasm को दिखाता है।

सामान्यतः देखा जाय, तो एक innovator, जो एक research laboratory में काम कर रहा होता है, वह सीधे उस end user से नहीं मिलता, जो finally उस system का उपयोग करता है। इसलिए यह जरूरी है, कि हमारे innovators,अपने products को, operational environment की needs के अनुसार tailor-made बनाएं।

साथियों, किसी भी critical defence challenge को solve करने के लिए, एक futuristic दृष्टिकोण चाहिए होता है। और साथ में एक scientific discipline भी चाहिए होता है। मुझे यह देखकर बड़ी खुशी होती है, कि आज आप सभी innovators में ये दोनों ही चीज़ें हैं। आप सभी निश्चित रूप से, भारत की आत्मनिर्भरता के phase 2 में, एक impact player की भूमिका निभाएंगे।

साथियों, आत्मनिर्भरता के इस phase में, हमें न केवल अपने देश में production करना है। बल्कि ऐसा production करना है, जो cost-effective भी हो। जो operational रूप से बेहतर हो। जो global level पर competitive भी हो। यानी यहाँ केवल quantity का सवाल नहीं है। यहाँ quality का सवाल भी है। Efficiency का सवाल भी है। और Affordability का सवाल भी है। और ये सारे सवाल आपको solve करने हैं।

जैसे इसका एक उदाहरण मैं आपके सामने रखता हूँ। Naval vessels का निर्माण, स्वभावतः highly capital intensive होता हैं। इनकी लागत बहुत अधिक होती है। और जिस प्रकार Indian ocean region के आस-पास स्थितियाँ बन रही हैं,  उससे स्पष्ट है, कि इनकी जरूरत भी लगातार बढ़ती जा रही है। और चूँकि यह सब capital intensive है, इसलिए cost भी बढ़ेगी।

इसलिए आज हमें यह भी सोचना है, कि जब हम domestic production कर रहे हैं, तो इसकी cost में कमी कैसे आए? हमारी आत्मनिर्भरता हमें केवल सुरक्षा न दे। हमें आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाए। इसपर मुझे लगता है, कि आप सभी innovators को भी विचार करना चाहिए।

साथियों, इसी प्रकार, एक और बात यह है, कि आज के complex technological environment में, हम लंबी supply chains की बात करते हैं। यह जो लंबी और complex supply chains हैं, इनकी जड़ें विदेशों तक जाती हैं। और कई प्रकार की limitations का कारण भी बनती हैं। और ये मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं।

पहली वे, जो raw material से जुड़ी हैं। जो हमारे देश में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। जैसे rare earth materials. और दूसरी, वैसी technologies जो हमारे देश में उपलब्ध नहीं हैं। और हमारी complex supply chains, इन दो limitations से conditioned होती हैं।

अब कुछ items तो ऐसे हैं जिनके लिए बाहरी dependence कुछ समय बनी रहेगी। यह हमें accept करना होगा। जब तक हम alternatives नहीं खोज लेते। जब तक उन resources की देश के अंदर उपलब्धता नहीं हो जाती।

लगभग एक दशक के experience के बाद, अब हमें यह पता चल जाना चाहिए, कि हमारी supply chain vulnerabilities कहाँ-कहाँ हैं? यह जानना आवश्यक है, कि हमारी कौन-सी चीज़ें बाहर से आती हैं। कौन-सी चीज़ों में हमारी dependency सबसे अधिक है। और कौन-सी चीज़ों में हमें सबसे पहले आत्मनिर्भर होना चाहिए। और उसके बाद, हमें यह भी तय करना है। इन vulnerabilities को किस प्रकार address किया जाए?

मेरे विचार से अब हमारे पास, एक ऐसा roadmap, एक ऐसा living plan होना चाहिए, जिसमें यह decide हो, कि किस वर्ष तक किस item में आत्मनिर्भरता प्राप्त करनी है। किस technology का विकास किस industry के माध्यम से करना है। और किस प्रकार के specific resources की आवश्यकता हमें भविष्य में होगी।

क्योंकि साथियों, Supply chain management केवल technical समस्या नहीं है। यह एक strategic समस्या है। आज हम जिन चीज़ों पर निर्भर हैं, वे हमारी national security का हिस्सा हैं।

इसलिए हमें यह सोचना होगा, कि एक supply route बंद हो जाने की अवस्था में, हमारे पास क्या-क्या विकल्प मौजूद होंगे। हमारे पास कितना buffer stock है? हमारे पास घरेलू उत्पादन की क्षमता है या नहीं? इन सारे प्रश्नों के उत्तर हमें संकट के समय नहीं, बल्कि अभी तैयार करने हैं। और आज के discussion में यह प्रश्न, हमें एक ही दिशा की ओर ले जाता है, और वह है- Research and development.

मुझे ऐसा लगता है, कि जो talent हमारे पास है, उसके कारण, हम दुनिया की किसी भी cutting-edge technology को अपने देश में विकसित कर सकते हैं। बशर्ते हम R&D पर focus करें।

अब R&D के साथ एक चिंता यह है, कि यह अपने स्वभाव से risky होता है। और सरकारें,  यानी public sector स्वभाव से risk-averse होती है। सरकारी संस्थाएँ तो खर्च से ज्यादा audit से डरती हैं। क्योंकि Public money के साथ जवाबदेही आती है। और जवाबदेही के साथ एक दबाव आता है, कि हर खर्च का परिणाम दिखना चाहिए। लेकिन R&D में परिणाम हमेशा तुरंत नहीं दिखते। और कभी-कभी तो परिणाम कुछ और ही होता है, जो हमने सोचा था ही नहीं।

यहाँ तक कि दुनिया के सबसे विकसित देशों में, जहाँ R&D ecosystem बहुत मजबूत है, वहाँ भी failure का rate बहुत high है। और यह असफलता शर्म की बात नहीं है। यह तो research की प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है।

ऐसे में यह risk aversion एक तरफ तो स्वाभाविक है। लेकिन दूसरी तरफ यह हमें opportunity भी देता है। कि क्या हम ऐसे funding mechanisms बना सकते हैं, जो high-risk, high-reward वाले projects को support कर सकें? क्या हम private sector को R&D में और अधिक आकर्षित कर सकते हैं, क्योंकि private sector में risk-taking का स्वभाव अधिक होता है? हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना है, हम एक तो private sector और दूसरे low-cost technologies, इन दोनों क्षेत्रों में किस प्रकार आगे बढ़ सकते हैं। Private sector में risk-taking की क्षमता अधिक होती है। और low-cost technologies में हम छोटे-छोटे प्रयोग करके बड़े परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

साथियों, आज defence में R&D का जो deep culture होना चाहिए, कहीं न कहीं उस expected result को पाने में, हम कुछ पीछे रह जा रहे हैं। मैं उस culture की बात कर रहा हूँ, जो इजराइल में है। जो दक्षिण कोरिया में है। जो अमेरिका में है।

उन देशों में R&D की एक ऐसी संस्कृति विकसित हुई है, जहाँ innovation को जीवन का एक तरीका माना जाता है। वहाँ असफलता को सीखने का अवसर माना जाता है। वहाँ युवा अपने ideas लेकर आगे आते हैं। और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए पूरा ecosystem मौजूद होता है।

हमें अपने academic institutions में research को बढ़ावा देना होगा। हमें industry और academia के बीच के संबंध और मजबूत करने होंगे। हमें युवाओं को research के क्षेत्र में career बनाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। तभी हम एक ऐसी deep R&D culture विकसित कर पाएंगे,  जिसके अंतर्गत हम वह सब कुछ कर पाएंगे, जो हम करना चाहते हैं। मुझे विश्वास है, कि इस ओर भी आप सभी ध्यान देंगे।

साथियों, आज iDEX के माध्यम से ऐसी अनेक technologies develop हो चुकी हैं, जो पहले हमें विदेशों से आयात करनी पड़ती थीं। हमारे startups ने naval systems के क्षेत्र में, Sensor technologies के क्षेत्र में, Communication systems के क्षेत्र में, और अनेक अन्य critical क्षेत्रों में solutions develop किए हैं। इनमें से कई technologies ऐसी हैं, जिनका विकास केवल इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि हमने innovators को एक मंच दिया। उन्हें challenge दिया। और उन्हें अपने ideas को वास्तविकता में बदलने का अवसर दिया।

एक समय था, जब हमारे innovators बड़े सपने तो देखते थे, लेकिन उनके सामने उन सपनों को पूरा करने के अवसर नहीं आते थे। कई बार तो financial hurdles के कारण, उनके सपने मर जाते थे। लेकिन आज ऐसा नहीं है। हमारी सरकार ने यह ensure किया है, कि हमारे किसी भी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की उड़ान में, funding की कमी तो बाधा बिल्कुल नहीं बनेगी।

1,900 करोड़ रूपये से भी अधिक के naval contracts, यह इस बात का प्रमाण हैं, कि हमारे प्रयास केवल बातों तक सीमित नहीं है। इसके ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। हमारी Navy का लगातार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना, इस बात का प्रमाण है।

हालाँकि अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ import dependency बनी हुई है। विशेष रूप से Buyer Nominated Equipment, के मामले में। इस पर भी हमें और ध्यान देना है। BNE पर से import dependence को कम करना, हमारी अगली बड़ी चुनौती है।

इसी प्रकार, हमें एक Dual Technology Roadmap पर काम करना होगा। क्या हम एक ऐसी list बना सकते हैं? जिसमें हम उन dual technology items की पहचान करें, जिनका हम indigenization कर सकते हैं?

आज जब मैं आत्मनिर्भरता के phase 2 की बात कर रहा हूं, तो इसमें हमें इस बात पर भी विचार करना चाहिए, कि क्या हम उन technologies और products के development पर एक priority list बना सकते हैं, जिनकी civil और military दोनों shipping में आवश्यकता है। जब मैं इस प्रकार की lists बनाने की बात कर रहा हूँ, तो यह बात अच्छी तरह मेरे दिमाग में है कि हमारी services और DPSUs द्वारा already अनेक defence items की Positive Indigenization Lists जारी की जा चुकी हैं। पर मैं चाहता हूँ, कि हमारा ध्यान ऐसे प्रयासों को और अधिक deeper, और wider करने पर हो।

इसी प्रकार, civil-military jointness से आगे बढ़ते हुए, अब क्या हम उन technology को प्राथमिकता दे सकते हैं, जो तीनों services और coast guard में उपयोग की जा सकती हैं। यह inter service jointness का एक technological प्रयोग होगा, और आत्मनिर्भरता के इस phase 2 का एक important milestone होगा।

अगर हम ऐसी चीज़ों की पहचान करें। और उनमें आत्मनिर्भरता प्राप्त करें। तो इसका लाभ तीनों सेनाओं को एक साथ मिलेगा। यह एक बहुत बड़ी opportunity है। जिसे हमें capture करना चाहिए।

मुझे यह देखकर संतोष होता है, हमारी Armed forces, उद्योग जगत और हमारे academic research institutions, भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम कर रहे हैं। जिस तरह आप Quantum systems, AI in warfighting और un-crewed systems जैसे कठिन challenges एक-दूसरे के सामने रख रहे हैं, उन्हें पूरा कर रहे हैं, उसके लिए मैं आपकी सराहना करता हूँ।

इस प्रकार की नई technologies के development के लिए perseverance चाहिए। और मैं उन सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ, जो इस काम को दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इस भावना के साथ, आप 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

अंत में, इस विश्वास के साथ, कि ‘Ideation to Adoption’ का चक्र ऐसे ही चलता रहेगा, मैं आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएँ देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद