Text of RM’s speech at the NBT Utsav 2026 in New Delhi.
मुझे बताया गया है कि नवभारत टाइम्स अपने गौरवशाली 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। अक्सर कहा जाता है कि “Age is just a number.” लेकिन नवभारत टाइम्स के लिए 80 केवल एक Number ही नहीं है। यह आठ दशकों तक पत्रकारिता के मूल्यों और जनता के बीच विश्वसनीयता का प्रमाण भी है।
नवभारत टाइम्स की शुरुआत आजादी के समय एक अखबार के रूप में हुई। नवभारत टाइम्स ने समय के साथ स्वयं को लगातार Invent और Re-invent किया है। नवभारत टाइम्स ने Digital Space में भी अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई है।
मैं नवभारत टाइम्स से जुड़े सभी लोगों और पाठकों को इस सफल यात्रा के लिए बधाई देता हूँ।
साथियों,
आज ‘नवभारत भूषण’, ‘नवभारत के नवरत्न’ और ‘प्रेरणा दीप’ सम्मान प्राप्त करने वाले, सभी व्यक्तियों को मैं हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। आप सभी ने विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति उसकी संस्थाओं की विश्वसनीयता में निहित होती है। Justice डी. वाई. चंद्रचूड़ जी ने हमेशा संविधान, न्याय और नागरिक अधिकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। उनका योगदान हमें याद दिलाता है कि विकसित राष्ट्र की नींव केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर भी टिकी होती है। जिनकी रक्षा का दायित्व हम सभी का है।
डॉ. नरेश त्रेहन जी ने अपने कार्यों, ज्ञान, नवाचार और समर्पण से लाखों लोगों को नया जीवन दिया है। डॉ. त्रेहन जी ने अपने जीवन में 48,000 से अधिक सफल Open Heart Surgery (ओपन हार्ट सर्जरी) की हैं। उन्होंने अपने समर्पण और सेवा से यह दिखाया है कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है।
साथियों,
भारत का विकास केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं, बल्कि ऐसे उद्योगपतियों के योगदान से भी हुआ है, जिन्होंने उद्योग को केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम माना है। श्री हर्ष पति सिंघानिया जी ने अपने कार्यों से यही उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने कार्यों में नवाचार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी हमेशा प्राथमिकता दी है।
श्री प्रसून जोशी जी ने अपने प्रभावशाली लेखन से भारतीय संस्कृति, संवेदनाओं और मूल्यों को नई अभिव्यक्ति दी है। हिन्दी भाषा, साहित्य, कला और सिनेमा को समृद्ध किया है। प्रसून जोशी जी ने समकालीन भारतीय मीडिया की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
साथियों,
मनु भाकर ने ओलिंपिक खेलों में मेडल जीतकर न केवल तिरंगे का मान बढ़ाया है, बल्कि देश के लाखों युवाओं को सपने देखने की हिम्मत दी है।
कैवल्य वोहरा ने यह साबित किया है कि Innovation और Risk Taking Ability भारत के युवाओं की नई पहचान बन चुकी है। अरुणाभ कुमार और हुमा कुरैशी ने अपनी प्रतिभा से भारतीय Cinema और कला के क्षेत्र को समृद्ध किया है। मुझे बताया गया है कि अरुणाभ जी ने Rural India की कहानियों को OTT पर Web Series के माध्यम से नई पहचान दी है।
अक्षय पात्र फाउंडेशन के कार्य ‘सेवा परमोधर्मः’ की भारतीय भावना का जीवंत उदाहरण है। अक्षय पात्र फांउडेशन, स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराकर, भूख और कुपोषण की समस्या से लड़ रहा है। करोड़ों बच्चों के बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहा है। यह असाधारण सेवा और अतुलनीय समर्पण का उदाहरण है।
NCRTC ने आधुनिक, तेज़ और सुरक्षित Regional Mobility का एक नया Standard स्थापित किया है। यात्राओं को अधिक सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है।
आप सभी, अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। आपके कार्यक्षेत्र भले अलग-अलग हों, लेकिन आपकी सफलता का आधार एक ही है; समर्पण, परिश्रम, और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव। मुझे विश्वास है कि आप आगे भी अपने कार्यों से देश की प्रगति और जनहित में इसी प्रकार योगदान देते रहेंगे।
साथियों,
आज हम Digital Age में जी रहे हैं। यह दौर Communicative Abundance, यानी संचार प्रचुरता का दौर है। आज Information की नहीं, बल्कि सही और विश्वसनीय Information की कमी है। ऐसे समय में लोगों तक सही खबर पहुँचाने में मीडिया की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
आज Artificial Intelligence जैसे तकनीकी विकास जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहे हैं। इससे पत्रकारिता भी प्रभावित हुई है। लेकिन Artificial Intelligence में संवेदना नहीं होती है। वह डेटा को समझ सकती है, लेकिन समाज की नब्ज़ को नहीं।
मैं मानता हूँ कि Artificial Intelligence चाहे जितनी उन्नति कर ले, वह कभी भी मनुष्य की creative capability और Intellect की जगह नही ले सकता।
इसलिए आने वाले समय में पत्रकारिता की सफलता भी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह Artificial Intelligence की क्षमता और मानवीय संवेदना के बीच सही संतुलन और समन्वय कैसे स्थापित करती है। जहाँ AI पत्रकारिता को अधिक तेज़ और सटीक बनाएगी, वहीं हमारी Emotional Intelligence उसे मानवीय और विश्वसनीय बनाए रखेगी।
साथियों,
इस वर्ष मई में हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष भी पूरे हुए हैं। 200 साल पहले पंडित जुगल किशोर शुक्ल जी ने ‘उदन्त मार्तण्ड’, हिन्दी समाचार पत्र की शुरुआत की थी जिसके साथ हिन्दी पत्रकारिता की नींव पड़ी। नव भारत टाइम्स हिन्दी पत्रकारिता की इस महान विरासत का हिस्सा है।
आज मैं श्री राजेंद्र माथुर जी को भी याद करना चाहता हूँ जो लंबे समय तक नवभारत टाइम्स के संपादक रहे और भारतीय पत्रकारिता को समृद्ध किया। राजेंद्र माथुर जी ने एक बार लिखा था कि भारत की दो बड़ी कमज़ोरियाँ हैं। पहली है संकल्प लेने से बचना, और दूसरी है संकल्प लेने के बाद उसे पूरा न करना।
लेकिन, आज मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि हमारी सरकार ने इन दोनों बुराइयों को राष्ट्रीय जीवन से हटाने का काम किया है। पिछले 12 सालों में भारत, सबसे परिवर्तनकारी काल का साक्षी बना है। हमने संकल्प लिए और उन्हें पूरा करके दिखाया।
साथियो,
वर्ष 2014 से पहले देश ने अपनी कमियों को अपनी नियति मान लिया था। पहले किसी भी काम को करने जाओ तो विशेषज्ञों की एक पूरी टोली रहती थी, यह बताने के लिए कि वो काम क्यों नहीं हो सकता। इसी Mentality के कारण हम अपनी सीमाओं को ही अपनी पहचान मान बैठे थे।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने देश की इस मानसिकता को बदलने का काम किया है। आज यह नहीं पूछा जाता कि “क्या भारत यह कर सकता है?” अब पूछा जाता है कि “भारत कब तक यह कर लेगा?”
मैं आपको इसके उदाहरण देता हूँ।
2021 में हमने India Semiconductor Mission की शुरुआत की। उस समय बड़े-बड़े Experts के Analysis छपे, और बताया गया कि भारत Semiconductor Chip नहीं बना सकता है।
लेकिन हम अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे। हमने पूरे देश में Plug-and-Play Infrastructure Model के आधार पर Semiconductor Parks बनाए। और पिछले वर्ष हमने Made in India semiconductor Chip बनाने में सफलता हासिल कर ली है।
2014 में जब हमने Make in India की शुरुआत की तो विपक्ष ने इस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे Failure तक कह दिया। लेकिन Make in India आज सफलता के नए कीर्तिमान बना रहा है।
मोबाइल मैनुफैक्चरिंग पहले केवल 18000 करोड़ रुपये की वैल्यू की थी, जो आज 28 गुना बढ़ कर 5.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है। मोबाइल एक्सपोर्ट्स तो पहले नाम मात्र का था, जो करीब 163 गुना बढ़ कर 2.6 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
2014 तक भारत 50 हजार करोड़ रुपए के आसपास के ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट करता था। आज भारत एक साल में एक लाख बीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट कर रहा है। भारत ने सौ से अधिक देशों को इलेक्ट्रिक व्हीकल का एक्सपोर्ट शुरू किया है।
आज भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने स्वदेशी High Horsepower Locomotive बनाया है। इतना ही नहीं, पहली बार दुनिया में इस इंजन को Broad-gauge Track पर सफलतापूर्वक संचालित करने का कीर्तिमान भी भारत ने स्थापित किया है।
वर्ष 2026 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन एक लाख 78 हजार करोड़ रुपए से पार हो चुका है। यह 2014-15 के मुकाबले तीन गुना अधिक है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद, मेड इन इंडिया डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा मजबूत हुआ है। डिफेंस एक्सपोर्ट भी रिकॉर्ड 38 हज़ार करोड़ रुपए से ऊपर चला गया है। यह 2013-14 में ₹686 करोड़ था। यानी डिफेंस एक्सपोर्ट में लगभग 57 गुना की वृद्धि हुई है।
भारत में पिछले दस-बारह सालों में एक digital revolution हुआ है। आज हर हाथ में आपको स्मार्टफोन देखने को मिलेगा, जिसमें सारी services converge कर रही हैं। साल 2014 में देश में 6 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन थे, जो आज 100 करोड़ तक पहुँच गए हैं।
आप सभी UPI से परिचित हैं। आपको आश्चर्य होगा कि केवल अप्रैल महीने में 22.35 बिलियन UPI ट्रांजैक्शंस हुए हैं और इनकी वैल्यू है 29 लाख करोड़ रुपए। आज UPI की सुविधा कई देशों में भी पहुँच गई है।
UPA के समय में देश 2जी और 3G नेटवर्क पर था आज देश 5G में चल रहा है। हमने अपना पूरा 5G स्टैक देश में ही विकसित किया है। हमने मेड इन इंडिया 5G बनाया है और सबसे तेजी से देश भर में पहुंचाया है। देश के 99.9 परसेंट डिस्ट्रिक्ट में 5G नेटवर्क की कवरेज हो चुकी है। अब हम मेड इन इंडिया 6G पर तेज़ी से काम कर रहे हैं।
साथियों,
2014 से पहले क्या मानसिकता थी, मैं आपको इसके और उदाहरण देता हूँ। हमसे पहले यह मान लिया गया था कि Leakage और Corruption तो रुक ही नहीं सकते हैं। Bribe Immunity देने तक की बातें देश में हो रही थीं। ऐसा माना जाता था कि कुछ भी कर लिया जाए, सरकार जो पैसा भेजती है वो पूरा आम जनता तक पहुँचेगा ही नहीं।
लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी ने Corruption और Leakage को सिरे से खत्म करने का संकल्प लिया। Direct Benefit Transfer, Jan Dhan, Aadhaar और Mobile Trinity के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों के खातों में पहुँचाया गया।
सरकार ने देश में जो JAM नेटवर्क तैयार किया उसके कारण लोगों के बैंक खातों में 51 लाख करोड़ रुपए का Direct Benefit Transfer हुआ है और करीब 4.3 लाख करोड़ रुपए की लीकेज को रोका गया है।
इसी तरह जब हमने GST लागू करने की बात की तो बहुत से लोग Federalism की आड़ लेकर इसे भी Criticise करने लगे। लेकिन आज GST, Cooperative Federalism का Classical Example बनकर उभरा है।
और यह बात मैं नहीं कह रहा हूँ। यह बात Justice डी. वाई. चंद्रचूड़ जी ने कही है। वे आज हम सभी के बीच में हैं। आप चाहे तो बाद में उनसे Confirm भी कर सकते हैं।
कुछ लोग कहते थे कि नरेंद्र मोदी कितनी बार भी देश के प्रधानमंत्री बन जाएं तो भी वह जम्मू कश्मीर से Article 370 नहीं हटा पाएंगे। बहुत से लोग कहते थे कि नक्सलवाद कभी खत्म नहीं हो पाएगा। लेकिन हमने Article 370 भी हटाकर दिखाया और नक्सलवाद भी समाप्त करके दिखाया।
साथियों,
आजादी के बाद दशकों तक भारत में Socialist Economic Philosophy की आड़ में गरीबी का बहुत महिमामंडन हुआ। Wealth Creation की बात न करके बस Wealth Distribution की बात होती थी। लेकिन मैं एक सीधा-सा प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि जब Wealth Creation ही नहीं हो रहा था, तो बाँटा क्या जा रहा था? हमने इस मानसिकता को खत्म किया है।
हमने कहा कि उद्यमी समस्या नहीं, समाधान है। उद्यमी देश में Employment Generate करते हैं, Wealth Creator की भूमिका निभाते हैं। इसलिए हमने Entrepreneurship को बढ़ावा दिया। हमने ‘जन विश्वास’ पहल की शुरुआत की। 500 से अधिक Minor Offences को Decriminalise किया।
और इसका परिणाम है कि आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में स्टार्ट-अप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गई है। यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर सवा सौ हो गई है।
हमारा मानना है कि Wealth Creation और Social Justice एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। इसी सोच का परिणाम है कि भारत जब चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना तो चौथा सबसे समतामूलक देश भी बना। 25 करोड़ लोगों गरीबी से बाहर भी निकले। 4 करोड़ लोगों को घर मिला है। 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को LPG Cylinder मिला है।
साथियों,
पिछले एक दशक की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं है कि भारत ने क्या-क्या हासिल किया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह भी है कि भारत ने अपनी सोच बदली है।
साथियों,
पिछले 12 वर्षों में तमाम Global Challenges के बावजूद भी भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ी है। भारत की GDP दोगुनी हो गई है। Infrastructure का अभूतपूर्व विकास हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हो गई है। National Highways का निर्माण पहले की तुलना में तीन गुना तेज़ी से हो रहा है। Metro Network चार गुना बढ़ा है।
यह केवल आँकड़ों का परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती क्षमता, आत्मविश्वास और नए सामर्थ्य का प्रमाण है। आज भारत Hi-Tech बन रहा है, तो Human Dignity भी सुनिश्चित कर रहा है।
हमारी सरकार ने देश में काम करने की संस्कृति भी बदल दी है। एक समय था जब परियोजनाओं का शिलान्यास तो हो जाता था, लेकिन वे वर्षों तक अटकी रहती थीं। लेकिन आज जिसका शिलान्यास हम करते हैं, उसका उद्घाटन भी हम ही करते हैं।
साथियों,
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने अपनी सोच बदली है। कहा जाता है: You can not solve problems using the same mindset that created them. जब भारत की मानसिकता बदली, तो दुनिया ने भी भारत को देखने का अपना Lens बदल दिया।
आज भारत वैश्विक एजेंडा तय करता है। पिछले 7 सालों से भारत लगातार G-7 का Special Invitee रहा है। यह दिखाता है कि आज दुनिया केवल भारत की Presence ही नहीं चाहती, बल्कि भारत का Participation और Perspective भी चाहती है।
2023 में हमने G-20 की अध्यक्षता की थी। उस दौरान दुनिया में बहुत मतभेद थे। लेकिन फिर भी हमने सर्वसम्मति से New Delhi Leaders’ Declaration पारित कराया।
कोरोना महामारी के समय वैक्सीन मैत्री के माध्यम से भारत ने लगभग 100 देशों तक वैक्सीन पहुँचाकर पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की चिंता करता है।
अगर Climate Change की बात करें तो भारत ने जो Targets Set किए थे उसमें से कई Targets तय समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं। नए सोलर प्लांट लगाने की रफ्तार के मामले में, भारत अब अमेरिका से भी आगे निकल गया है। हमने International Solar Alliance के जरिए One Sun, One World, One Grid के मूल्य को आगे बढ़ाया है।
ये सब परिवर्तन संयोग नहीं हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी जी के निर्णायक नेतृत्व, आत्मविश्वास से भरी विदेश नीति, भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक शक्ति, और 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम हैं।
साथियों,
आज, 4 जुलाई का दिन स्वामी विवेकानंद जी का निर्वाण दिवस भी है। स्वामी विवेकानंद जी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के सबसे बड़े अग्रदूत थे। मैं मानता हूँ कि हमारी संस्कृति; हमारी पहचान, हमारी एकता और हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार है। इसलिए हमने विकास के साथ-साथ अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत को भी बहुत महत्व दिया है।
वर्षों के Colonial Rule के कारण हमारी मानसिकता भी Colonial हो गई थी। जब तक हम सोच में आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक हम विकसित भी नहीं हो सकते। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने अगले 10 वर्षों में इस मानसिकता से मुक्ति का आह्वान किया है।
हमने भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी पुनर्स्थापित करने का कार्य किया है। श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण, उज्जैन में महाकाल लोक निर्माण, असम में ‘माँ कामाख्या दिव्य लोक परियोजना’ जैसे कार्य किये गए हैं। नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किया गया है। वंदे मातरम् के गौरव को पुनर्स्थापित किया गया है।
हमारी सरकार द्वारा भारत की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए गए हैं। कई देशों से बहुत सी प्राचीन वस्तुएँ सफलतापूर्वक भारत वापस लाई गई हैं। हमारे प्राचीन Manuscripts को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें Digitise किया जा रहा है।
यही नए भारत की पहचान है। अपनी जड़ों से जुड़े रहकर, सही मायनों में आधुनिक होना। Tradition और Technology का यह संगम 21वीं सदी में भारत की एक सबसे बड़ी ताकत है। आज का भारत अपनी आस्था में अडिग है। अपनी संस्कृति पर गौरवान्वित है। विकास में अग्रणी है। और भविष्य के प्रति आत्मविश्वास से भरा हुआ है।
साथियों,
महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर ने कहा था “Those who are steadfast in their determination will achieve exactly what they have envisioned.” अर्थात्, जिनका संकल्प अटल होता है, वे अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करते हैं। पिछले 12 वर्षों में भारत की उपलब्धियाँ अटल संकल्प का परिणाम हैं।
पहले कार्यकाल में हमने अभावों को दूर किया और अवसरों का विस्तार किया। कार्य संस्कृती को बदला।
दूसरे कार्यकाल तक हमने आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदला और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ाया।
हमारे तीसरे कार्यकाल में विकसित भारत की इमारत तेजी से बन रही है। Reform, Perform, Transform की नीति के परिणाम सामने आ रहे हैं।
पिछले 12 वर्षों में भारत की यात्रा अभाव से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास, आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की ओर बढ़ने की यात्रा रही है।
और मैं आपको बता दूँ कि प्रधानमंत्री मोदी जी के चौथे कार्यकाल के दौरान दुनिया विकसित भारत का उदय होते हुए भी देखेगी।
साथियों,
आज भारत का मीडिया परिदृश्य अभूतपूर्व गति से विस्तार कर रहा है। पिछले एक दशक में देश में Registered Publications की संख्या लगभग एक लाख से बढ़कर डेढ़ लाख से अधिक हो गई है। निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। यह केवल मीडिया का विस्तार नहीं है, बल्कि भारत में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति और संवाद की बढ़ती शक्ति का भी प्रमाण है।
पत्रकारिता की वास्तविक शक्ति केवल सूचना देने में नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने, सत्य को सामने लाने और लोकतंत्र को सशक्त बनाने में है।
कई बार ऐसी गलत बातें फैल जाती हैं जो समाज को, सेनाओं के मनोबल को, बुरी तरह प्रभावित करती है।
मैं आज इस मंच से मीडिया जगत के लोगों से एक आग्रह करना चाहता हूँ। पत्रकारिता में सबसे पहले खबर देना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सबसे सही खबर देना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। विशेषकर जब विषय हमारी सेनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा और शहीदों के सम्मान से जुड़ा हो, तब हर शब्द केवल समाचार नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व बन जाता है।
मैं इस अवसर पर जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ जी की कही एक बात याद दिलाना चाहता हूँ। उन्होंने पत्रकारिता से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा था कि Fake News में समाज में तनाव पैदा करने की क्षमता होती है। और यदि इसे रोका न जाए, तो यह लोकतंत्र को भी बहुत नुकसान पहुँचा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा है कि दुष्प्रचार और फेक न्यूज़ में लोकतांत्रिक विमर्श को स्थायी रूप से क्षति पहुँचाने की क्षमता होती है। झूठी खबरों के बोझ तले विचारों के स्वतंत्र आदान-प्रदान की पूरी व्यवस्था ही चरमरा सकती है।
इसलिए Media को Accuracy, Objectivity और Impartiality के मूल्यों को हमेशा याद रखना चाहिए।
साथियों,
कहने को बहुत सी बातें है लेकिन समय की सीमाएं हैं।
इसी शुभकामना और विश्वास के साथ कि नवभारत टाइम्स आगे भी Impartial, Objective और Public Interest के मूल्यों के साथ हमेशा सच कहता रहेगा, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
धन्यवाद।