सबसे पहले, मैं इस मंच के माध्यम से, अपने उन सभी वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए, अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उनके बलिदान के कारण ही, हम आज यहां एक सुरक्षित वातावरण में न केवल बैठे हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के भविष्य पर एक सार्थक चर्चा भी कर रहे हैं।
मैं पूरी ANI family को, इस National Security Summit 2.0 के आयोजन के लिए बधाई देता हूं।
आपने इस conclave की थीम “AI, Deterrence और New World Order” रखी है। यह विषय, contemporary भी है, और भविष्य की दिशा तय करने वाला भी है। इस सभागार में Technology, Policy, Diplomacy और Defence से जुड़े विशेषज्ञ भी उपस्थित हैं। ऐसे में मुझे पूरा विश्वास है, कि आज का संवाद आने वाले समय की एक मजबूत रूपरेखा तैयार करेगा।
साथियों, आपके कार्यक्रम की जो theme है, “AI, Deterrence और New World Order.” इसके order को मैं थोड़ा सा बदलते हुए अपनी बात रखना चाहूँगा। पहले मैं New World Order की बात करूंगा, फिर Deterrence पर आऊंगा, और अंत में AI की भूमिका को रखूंगा। अब जब दुनिया का order ही बदल रहा हो, तो theme का order तो बदल ही सकते हैं। क्योंकि पहले यह समझना जरूरी है, कि हम किस world order में खड़े हैं।
आप सब तो जानते ही हैं, पूरी दुनिया में लगातार बदलाव आ रहे हैं। कहीं conflict है, कहीं instability है। यूरोप में tension है, West Asia में भी, युद्ध की विभीषिका हम रोज देख रहे हैं। Global order जिन सिद्धांतों पर टिका था, वे लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अगर मैं कहूँ, कि “The new world order is a world with no order”, तो यह कोई exaggeration नहीं होगाI आज की multipolar दुनिया में, power politics तेजी से हावी हो रही है। National Interests पहले से कहीं अधिक मुखर होकर सामने आ रहे हैं। Rule based system, जिन्हें हमने कई दशकों में गढ़ा था, आज उनकी relevance पर प्रश्न उठ रहे हैं। International organizations कमजोर पड़ रही हैं। Technology, Supply chains और यहां तक कि Digital tools को भी एक-दूसरे के खिलाफ weaponize किया जा रहा है। ऐसे में भारत को, इस बदलते world order में, और भी alert होकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
साथियों, अभी हाल ही में, मैंने किर्गीस्तान में, SCO Defence Ministers’ Meeting में भारत को represent किया। वहाँ भी, New world order पर मैंने अपने कुछ विचार रखे। मैंने वहां कहा, कि हमें खुद से यह पूछना होगा, कि क्या हमें एक ‘New world order’ चाहिए, या एक ऐसा new world चाहिए, जो ज्यादा orderly हो? क्योंकि इस बदलते दौर में, हमें ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा मिले; जहां कोई भी मतभेद विवाद का रूप न लें, और कोई भी विवाद, विनाश का कारण न बनें। यह मुद्दा आज के सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों में से एक हैI
हालाँकि, यह हमारे लिए अच्छी बात है, कि हम इस new world order की जरूरतों को भी समझ रहे हैं, और इसके different dimensions के अनुसार खुद को बदल भी रहे हैं। इसका एक उदाहरण यदि मैं आपको दूँ, तो आप देखिये, कि अभी Operation Sindoor को लगभग एक साल पूरे हो रहे हैं। और हमारा Operation Sindoor भी, इसी new world order का एक symbol है। वह एक ऐसा मोड़ था, जिसने पूरी दुनिया को यह संदेश दे दिया, कि भारत, अब उस पुरानी सोच के साथ चलने वाला भारत नहीं रहा, जहां हमारी धरती पर आतंकी हमले हों, और हम केवल diplomatic होकर बयान जारी करते रहें। मनसा, वाचा से आगे बढ़ते हुए, हमने कर्मणा भी, अपने firm commitment को दिखाया, और पूरी दुनिया ने उसे देखाI
प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में हमारी सरकार का यह stand रहा है, कि किसी भी आतंकी गतिविधि को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और पहलगाम की घटना के बाद ऑपरेशन सिंदूर की कार्यवाई की है। यह आतंकवाद के खिलाफ हमारे stand का manifestation है।
साथियों, आतंकवाद एक विकृत मानसिकता है। यह पूरी मानवता पर कलंक है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सुरक्षा से जुड़ा सवाल नहीं है, यह मानवता के मूलभूत मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह उस बर्बर सोच के खिलाफ लड़ाई है, जो सभी मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। हमने देश में और विदेशों में भी भारत की इस सोच को पूरी ताकत से रखा है।
साथियों, जब तक आतंकवाद है, यह हमारी सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। कई बार आतंकवाद को मजहबी मुलम्मे में लपेटकर या किसी हिंसक विचारधारा (नक्सलवाद) से जोड़कर उसे जायज ठहराने का प्रयास किया जाता है। मैं मानता हूँ कि यह बहुत खतरनाक है और यह एक प्रकार से आतंकवादियों को कवर फ़ायर देने जैसा है ताकि वो अपने लक्ष्य की तरफ धीरे धीरे आगे बढ़ते रहें।
Terrorism is not just an anti national act, it has multi dimensions. Terrorism can only be dealt with if we tackle it in all its three dimensions.
operational,
ideological,
political.
आतंकवाद का असली आईपी एड्रेस उसकी Ideological & Political जमीन में मिलता है, जहाँ वह पनपता है। आतंकवाद को वैचारिक पोषण और राजनीतिक संरक्षण, रावण की नाभि का वो अमृत है जो एक सिर काटने पे दूसरा सिर फिर से खड़ा कर देता है। अतः आतंकवाद को संजीवनी देने वाली इस नाभि को सुखाना बहुत आवश्यक है।
साथियों, हमने हमेशा देखा है कि पाकिस्तान जैसे देश लगातार आतंकवाद को समर्थन देते आए हैं। यही कारण है कि भारत और पाकिस्तान दोनों एक ही समय आज़ाद हुए, लेकिन आज भारत को पूरी दुनिया में जहाँ IT यानि Information Technology के लिए जाना जाता है, वहीं पाकिस्तान दूसरे IT यानि International Terrorism का मरकज माना जाता है।
साथियों, मुझे वह दिन याद है। जैसे ही पहलगाम में निर्दोष नागरिकों के ऊपर कायराना हमले की सूचना मिली, तो मैंने स्वयं, Chief of Defence Staff, तीनों सेना प्रमुखों, और Defence Secretary के साथ meeting की। वैसे तो आमतौर पर मैं, अपनी सेनाओं से, हमेशा कहता रहता हूं, कि आपको हर स्थिति में, हर पल, हर situation के लिए तैयार रहना है। लेकिन उस दिन जब मैंने उनसे पूछा, कि हम कितने तैयार हैं, तो मुझे बताते हुए गर्व होता है, कि तीनों सेनाओं ने एक स्वर में कहा– हम पूरी तरह तैयार हैं; बस आदेश की देरी है। उसके बाद जो हुआ, उससे आप सब भली भांति अवगत हैं। Operation Sindoor, हमारे सेनाओं के बीच, joint-ness की भी एक मिसाल थी। Army, Navy, Air Force, सबने एक साथ, एक योजना के तहत, यह दिखा दिया, कि भारत की सैन्य शक्ति, अब silos में काम नहीं करती, बल्कि यह एक joint, integrated और global power के रूप में उभर चुकी है।
यही कारण था, कि हमने अपनी शर्तों पर, अपने समय पर, उस operation को अंजाम दिया, और अपनी शर्तों पर ही उसे समाप्त भी किया। Operation के दौरान भी, हमने precisely उन्हीं को target किया, जिन्होंने हमारे ऊपर हमला किया था। और मैं यहां फिर से स्पष्ट कर देना चाहता हूँ, कि हमने वह operation इसलिए बंद नहीं किया, कि हमारी क्षमता कम हो गई थी। हमने उसे अपनी मर्जी से, अपनी शर्तों पर रोका। अगर जरूरत पड़ती, तो हम लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह से तैयार थे। हमारी surge capacity, यानी अचानक जरूरत के समय, क्षमता विस्तार करने की ताकत भी, हमारे पास मौजूद थीI थी ही नहीं, बल्कि अभी भी है, और पहले से और अधिक दुरुस्त है। इसलिए ….. ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा मैंI
हमारे military industrial complex ने भी, समय-समय पर यह साबित किया है, कि वह केवल शांतिकाल की जरूरतों के लिए नहीं, युद्धकाल की तेज आपूर्ति के लिए भी तैयार है।
हालाँकि उस बीच, हमें nuclear हमले की धमकी तक दी गईI लेकिन हम उस bluff में आए नहीं। हमने उन धमकियों को नकारते हुए, कोई तवज्जो न देते हुए, वही किया, जो हमें करना था; जो राष्ट्रहित में जरूरी था। और यही है New World Order, यानी नई दुनिया का नया भारत। यह वह भारत है, जो दुनिया को बता रहा है, कि terrorism और उसके sponsors के बीच कोई अंतर नहीं किया जाएगा। यह हमारे प्रधानमंत्री जी की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को भी बदल दिया है।
साथियों, यदि मैं Deterrence की बात करूँ, तो Operation Sindoor, Deterrence का ही एक मूर्त रूप था। Deterrence पर मुझे एक ही पंक्ति याद आती है, ‘भय बिनु होइ न प्रीति’। कुल मिलाकर Deterrence का सार यही है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी यही सच है। शांति और स्थिरता के लिए, एक powerful Deterrence जरूरी है।
भले ही Operation Sindoor, 72 घंटों में संपन्न हो गया, लेकिन उसके पीछे की तैयारी बहुत लंबी थी। जैसा कि मैंने अभी कहा, कि हमारे पास आवश्यकता पड़ने पर लंबी लड़ाई लड़ने की भी पूरी तैयारी है। हमारी surge capacity, हमारी भंडारण क्षमता, हमारे स्वदेशी हथियारों की credibility, ये सब हमारी Deterrence का हिस्सा बन चुके हैं।
और इसी का परिणाम है, कि Operation Sindoor के बाद हमारे स्वदेशी हथियारों और रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता में, दुनिया भर में एक गज़ब का positive approach देखने को मिला। आज स्थिति यह है कि अनेक देशों ने, हमारे यहां से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में interest दिखाया है। आप आँकड़े उठाकर देखिये, तो आँकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। Financial year 2025-26 में हमारा defence export, record 38,424 करोड़ रूपये का रहा। यानी पिछले साल से, 62.66% का उछाल हमें देखने को मिला। हम इन आंकड़ों को और भी बेहतर करने की दिशा में, लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
अभी हाल ही में मैं जर्मनी की यात्रा पर गया था। वहां मुझे यह देखकर बड़ा अच्छा लगा, कि जर्मनी और यूरोप की बड़ी-बड़ी कंपनियां, हमारी प्राइवेट रक्षा कंपनियों और public sector units, दोनों के साथ मिलकर काम करने को अत्यंत उत्सुक हैं। यह हमारी बढ़ती हुई credibility का प्रतीक है। आज दुनिया में भारत की जो धाक जमी है, उसमें हमारी सैन्य ताकत के साथ-साथ Deterrence create करने की हमारी ताकत के कारण भी वृद्धि हुई है।
लेकिन साथियों, आज की दुनिया में इस Deterrence का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल सेनाओं की संख्या, या weapons और platforms का खेल नहीं रह गया है। आज Cyber domain, Space war, और Information technology भी, Deterrence के अभिन्न अंग बन गए हैं। और इस पूरे बदलाव के केंद्र में एक बड़ा disruption बैठा है, जिसे हम सब, Artificial Intelligence के नाम से जानते हैं।
AI का तो आज इतना विस्तार हो चुका है, कि धरती से लेकर आसमान तक इसकी utility हो गई है। यानि कहीं भी देख लीजिए, Healthcare, Education, Tourism, Transportation, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जहाँ AI की उपस्थिति नहीं हो। लेकिन मैं मूल रूप से, रक्षा क्षेत्र में ही इसकी उपयोगिता पर बातें करूँगा। Defence Sector में AI का उपयोग, कहीं अधिक व्यापक और गहरा है। और भारत की armed forces तथा हमारी सरकार इसकी गंभीरता को भी समझती है।
हालांकि मैं इस खुले मंच पर सब कुछ नहीं बता सकता, लेकिन इतना अवश्य कहूंगा, कि Operation Sindoor में ब्रह्मोस जैसी हमारी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर, हमारे surveillance platforms तक, हर जगह AI का बड़ा प्रभावी इस्तेमाल हुआ है। इसने हमारी precision और मारक क्षमता को next level का बनाया है। बड़े Operations की जानकारी तो फिर भी आप सब तक पहुँच जाती है I पर कितने ऐसे छोटे operations और processes होते हैं, जो खतरा आने के पहले ही active होकर उसे ख़त्म कर देते हैं, और आम जन तक उसकी भनक भी नहीं लग पाती हैI और इन सब में AI का भरपूर इस्तेमाल किया जाता हैI
यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगा, कि AI को लेकर मेरा नजरिया केवल लड़ाई तक सीमित नहीं है। मुझे यह बताते हुए खुशी होती है, कि आज AI हमारे working culture का, हमारे जवानों के कल्याण का, और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने का भी एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
हमने अपने पेंशनर्स और veterans के लिए SPARSH पोर्टल विकसित किया। इसमें AI enabled chatbots के माध्यम से हमने, पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाओं को और easy बनाया। अब हमारे veterans को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती। उनकी शिकायतों के तुरंत निवारण से लेकर, उनके medical record की monitoring तक, सब कुछ AI system के तहत हो रहा है। इतना ही नहीं, हम उनके बच्चों की शिक्षा के लिए भी AI based tools का उपयोग कर रहे हैं, ताकि हमारे जवानों का परिवार शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में कभी पीछे न रहे।
यानी, हमारे यहां AI का उपयोग theoretical नहीं, बल्कि पूरी तरह से practical है। यह आतंकवादियों को ढूँढने, और उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने में भी सहायक है, और अपने सैनिकों के जीवन को सुगम बनाने में भी सहायक। मैं कहूंगा कि हमारे लिए AI का एक अर्थ ‘Augmented Infantry’ भी है। ‘AI’ हमारी सेनाओं का एक अभिन्न अंग बन चुका हैI यह हमारे Foot on Ground, यानि हमारी सेनाओं की क्षमताओं में वृद्धि भी कर रहा है। आज के समय के युद्ध के हिसाब से, हम हमारी सेना को, एक technology-driven, और integrated fighting machine बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैंI इसके लिए Army में ‘रूद्र’ brigades, ‘भैरव’ battalions, ‘Shaktibaan’ Artillery Regiments, और ‘दिव्यास्त्र’ batteries जैसी agile, self-sufficient combat units विकसित की गईं हैं, जो modern hybrid threats का तुरंत, और मज़बूती के साथ जवाब दे सकें I
इस New World Order में, AI हमारी strategic preparedness का एक अनिवार्य हिस्सा बन रहा है। हम इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, और हमारी सरकार ने इसे केवल सेना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे देश के skill development और research के लिए एक सुनियोजित strategy बनाई है। आप ‘IndiaAI’ Mission के बारे में जानते हैं। हम देश भर में computing infrastructure का democratization कर रहे हैं, ताकि छोटे-छोटे शहरों के नौजवान भी AI की दुनिया में अपना योगदान दे सकें। 10,000 से अधिक GPUs की क्षमता, FutureSkills जैसे कार्यक्रम, और Data और AI लैब्स की स्थापना जैसे हमारे प्रयास, इस बात का प्रमाण हैं, कि हम तकनीकी क्रांति के इस दौर में पीछे नहीं रहना चाहते।
हमने हाल ही में, India AI Impact Summit 2026 का सफल आयोजन किया, जिसमें 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और 89 देशों-संगठनों ने हमारे AI घोषणापत्र का समर्थन किया। Global AI standards को आकार देने में, भारत आज एक अग्रणी भूमिका में है। हम ‘AI for All’ के मंत्र पर चल रहे हैं, और यह ensure कर रहे हैं, कि तकनीक का लाभ केवल कुछ विशेष देशों तक सीमित न रह जाए, बल्कि Global South तक भी पहुंचे।
लेकिन साथियों, जब हम Deterrence की बात करते हैं, तो AI की सिर्फ rosy picture ही नहीं देखी जा सकती। मुझे एक रक्षा मंत्री के रूप में, देश के Security System को बेहद बारीकी से समझने का अवसर मिला है। इसलिए मुझे इससे जुड़ी चिंताएं भी दिखती हैं। आज deep fake, cyber warfare, और autonomous weapon system नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। इन challenges को भी हमें ध्यान में रखना होगा। क्योंकि आने वाले समय में ये challenges और बढ़ेंगे ही।
हमें यह भी समझना होगा, कि हर तकनीक के दो पहलू होते हैं। और जब बात AI की हो, तो यह dual-use dilemma, और भी विकराल हो जाती है। अभी हाल ही में, एक Company ने अपना बड़ा powerful AI model develop किया हैI यह एक general-purpose language model है, जो softwares में ऐसी vulnerabilities खोज सकता है, और उनका exploitation भी कर सकता है, जो खामियाँ सालों से नहीं खोजी गई थीं। इसने ऐसा कर के दिखाया भी है।
अब आप सोचिये, कि यही मॉडल जो आपके बैंकिंग सिस्टम, आपके अस्पतालों, आपकी बिजली ग्रिड की सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, वही गलत हाथों में जाकर पूरे का पूरा बैंकिंग infrastructure या मेडिकल सिस्टम को ध्वस्त कर सकता है। मैं इसे हमारी पौराणिक कथा के भस्मासुर जैसा मानता हूं। भगवान शिव ने भस्मासुर को वरदान दिया, कि वह जिसके भी सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। लेकिन वही शक्ति स्वयं भस्मासुर के लिए खतरा बन गई। ठीक वैसे ही, AI अगर अनियंत्रित हो गया, तो जिसे हमने अपनी रक्षा के लिए बनाया, वही हमारे विनाश का कारण भी बन सकता है।
इसलिए हमारा प्रयास हो, कि AI हमें राह दिखाने वाली शक्ति बने, न कि राह भटकाने वाली। AI हमें आगे बढ़ाने वाली शक्ति बने, न कि पीछे ले जाने वाली। AI हमारी strength बने, न कि हमारी weakness.
और इसीलिए मैं कहता हूं, हमें AI का सिर्फ उपयोग ही नहीं करना है, बल्कि हमें AI को सही दिशा भी देनी है। Collective efforts से और International Cooperation से ही हम AI की इस शक्ति का सदुपयोग कर पाएंगे। मुझे इस बात की ख़ुशी होती है, हमारा देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा हैI भारतीय, अब न केवल नए नए model ला रहे हैं, बल्कि ऐसे model ला रहे हैं, जो दुनिया के किसी भी model की तुलना में बेहतर हैंI
एक रक्षा मंत्री के रूप में भी, मैं यह assure कर सकता हूँ, कि battlefield surveillance, autonomous systems, logistics optimization और command decision support तक में, AI के role का हम बड़ी बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। सुदर्शन Air Defence के बारे में आप सभी अवगत होंगेI एक बहुत ही बड़ा और महत्त्वाकांक्षी project है यह, जो AI के बेहतरीन इस्तेमाल का बड़ा उदाहरण हैI हमारी armed forces ने AI, Machine Learning और Big Data science का उपयोग करके, emerging AI-based challenges के अनुरूप अपनी क्षमताओं को मजबूत करने का एक रोडमैप तैयार किया है। जो आने वाले भविष्य में, उन्हें और accommodative बनाने में कारगर साबित होगी। इस तरह की new emerging technologies से हमारा देश न केवल और अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि वह और अधिक सशक्त और समृद्ध भी होगा, ऐसा मेरा विश्वास हैI
यह बड़ी ख़ुशी की बात है, कि भारत में, आप लोगों द्वारा ऐसे मुद्दों पर conferences हो रहे हैं, चर्चाएँ हो रही हैं। आप सबकी बातचीत से, निश्चित रूप से हमारे लिए एक बेहतर रास्ता निकलेगा। मैं आप सभी को, तथा पूरे ANI परिवार को इस conclave के आयोजन के लिए बधाई देता हूँ।
मैं एक बार फिर, हमारे देश के शूरवीरों को नमन करता हूं, और उन सभी वैज्ञानिकों, engineers और उद्यमियों का आभार व्यक्त करता हूं, जो हमारी रक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने में दिन-रात जुटे हैं।
अंत में, मैं इस conclave की, सफलता की कामना करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।