Text of RM’s speech at the DRDO–Industry Synergy Meet, ‘VIMARSH 2026’ in New Delhi.
सबसे पहले, मैं आप सभी को, ‘विमर्श-2026’ के इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। मैं DRDO परिवार का आभार व्यक्त करता हूँ, कि आपने मुझे इस विमर्श में आमंत्रित किया।
हमारे यहाँ तो वैसे भी ‘विमर्श’ की परम्परा रही है। हमारे ऋषि-मुनियों ने ज्ञान को संवाद और विमर्श के माध्यम से ही आगे बढ़ाया। हमारे ऋषियों ने कहा है ‘वादे वादे जायते तत्त्वबोधः’ अर्थात, बातचीत से ही सत्य का बोध होता है। विमर्श से ज्ञान का प्रकाश होता है। DRDO और Industry के बीच यही विमर्श,
यही संवाद, नए और सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस विमर्श की जो theme आप सबने रखी है, वह अपने आप में बहुत कुछ बयां करती है। “वार्ता से विकास”, यह theme अपने आप में एक बदलाव का प्रतीक है। वह बदलाव, जो हमारे National Security और industrial capability के दृष्टिकोण में आया है।
आज के इस कार्यक्रम में DRDO, Industries, और Defence sector से जुड़े कई stakeholders मौजूद हैं। आज यहाँ कई important Policies और Guidelines भी release हुई हैं। कई important MoUs भी exchange हुए हैं।
ToTs और Contracts का hand over भी इसी क्रम में हुआ है। आज का यह आयोजन, हमारी thinking और हमारे approach के नए मॉडल का reflection है।
साथियों, DRDO की स्थापना हुए लगभग 70 वर्ष हो चुके हैं। जब इस organization को शुरू किया गया था, तो उस समय भारत एक developing nation था, जिसके पास resources भले limited थे, लेकिन aspirations unlimited थीं। और आज, 2026 में, आप देखिये, कि DRDO ने Missiles से लेकर Radars तक, Combat Aircraft से लेकर Submarines तक, Electronic Warfare Systems से लेकर Artificial Intelligence तक, हर क्षेत्र में अपनी capabilities साबित की हैं।
Defence sector में Research and development के लिए, DRDO आज apex organization है। हालाँकि, एक सच्चाई यह भी है, कि Defence sector में Research and Development के लिए, केवल सरकार या DRDO के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। यह एक collaborative effort है। और यही collaboration ही, इस विमर्श 2026 का core message है। DRDO और Industry के बीच की partnership ही, भारत को Defence Manufacturing का global hub बना सकती है।
अभी पिछले कुछ वर्षों में हमने Defence Sector में जो reforms देखे हैं, वे unprecedented हैं।
हमारे प्रधानमंत्री जी के vision और leadership में हमने कई game-changing फैसले लिए हैं। चाहे वो Positive Indigenisation List हो, ‘Make in India’ initiative हो, iDEX हो, ADITI हो, या फिर Defence R&D budget का 25% private sector के लिए allocation का फैसला हो, ये सब कुछ आपने देखा है, महसूस किया है। हमने वो सब किया, जिससे हम ensure कर सकें, कि हम Defence sector में import पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि self-reliance की ओर बढ़ेंगे।
यहाँ मैं एक बात स्पष्ट करना चाहूँगा। self-reliance जब मैं कह रहा हूँ, तो उसका मतलब केवल यही नहीं है, कि हम कुछ कलपुर्जे, कुछ missile,
कुछ weapon equipment और platform अपने यहाँ develop कर रहे हैं। Self-Reliance हमारे चरित्र का हिस्सा होना चाहिए। हमारे attitude का हिस्सा होना चाहिए। जिस देश के पास अपनी technology है, उसके पास अपना भविष्य तय करने की ताकत भी है। इसलिए हमारी आत्मा में, हमारे मन में, हमारे विचार में, हमारी चेतना में, आत्मनिर्भरता का भाव होना चाहिए।
कोई भी product भारत में develop कर देना important है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है, product बनाने की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करना। इसलिए हमने कई ऐसी schemes launch की, ताकि हम भारत के हर एक शहर,
हर एक कस्बे, हर एक गली-कूचे से talents को सामने ला सकें, और पूरा देश एक साथ आत्मनिर्भरता के सुर में सुर मिला सके। और मुझे कहते हुए खुशी हो रही है कि हम बहुत हद तक सफल भी हो रहे हैं।
आज, चूँकि यहाँ उद्योग जगत के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित हैं, इसलिए मैं DRDO द्वारा Industry के R&D और Manufacturing Ecosystem को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर कुछ बातें करना चाहूँगा।
बीते कुछ वर्षों में Start-ups और MSMEs भारत में Innovation के नए Flag Bearers बनकर उभरे हैं।
यही छोटे उद्यम नए विचारों और नई technologies को जन्म देते हैं। DRDO ने इनके लिए ऐसा framework तैयार किया है, जिसके माध्यम से Start-ups और MSMEs सीधे DRDO की laboratories के साथ interaction कर सकते हैं और Deep Tech तथा Niche Technologies में काम करने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। DRDO उन्हें Technical Mentoring और World-Class Testing Facilities उपलब्ध कराने के लिए committed है।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में MSMEs और Startups की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ये enterprises बड़े defence systems के components और sub-systems से लेकर अत्याधुनिक technologies तक विकसित कर रहे हैं।
आज जारी की गई नई policies और guidelines भी Industry के लिए नई opportunities लेकर आई हैं। इनका focus Industry-led R&D, Startups और MSMEs को funding तथा mentorship, Academia – Industry collaboration और AI, Quantum Computing, Hypersonic तथा Directed Energy जैसे Futuristic Technologies में investment को बढ़ावा देना है।
TDF के माध्यम से Start-ups को grants दिए जा रहे हैं और अनेक technologies production stage तक पहुँच चुकी हैं। iDEX ने भी defence innovation के लिए एक नया ecosystem तैयार किया है, जहाँ Start-ups हमारी वास्तविक operational requirements के आधार पर solutions विकसित कर रहे हैं।
अब DRDO और Industry की partnership केवल production तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। Research, Design, Testing, Certification और Manufacturing की पूरी value chain में साझेदारी बढ़ानी होगी। बड़े उद्योगों के साथ MSMEs और Startups को भी Defence Supply Chain का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
भारत आज Importer से Defence Exporter बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई ऐसे sectors हैं, जहाँ आप बहुत बेहतर कर सकते हैं। जैसे Drone Technology को ही ले लीजिये। Drones का use surveillance, logistics, और combat में तेजी से बढ़ रहा है। Startups के लिए यह huge opportunity है। इसके अलावा Artificial Intelligence और Cyber Security का क्षेत्र भी खुला है, क्योंकि future warfare, AI और cyber पर ही आधारित होगी। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ, इन अवसरों को पहचानिए, innovation को गति दीजिए और भारत की technological तथा strategic strength को नई ऊँचाइयों तक ले जाइए।
आजकल आप देख ही रहे हैं, कि AI जैसी technology का उपयोग करके लोग, कैसे चालीस-पचास साल पहले की, यानी 80s की, तस्वीरें बना रहे हैं। मैं समझता हूँ, कि मज़ा तो तब है, जब AI आदि technologies से आप अगले चालीस-पचास साल आगे की तस्वीर प्रस्तुत करें।
और ऐसा करने में, मुझे पूरा विश्वास है कि आप सफल होंगे।
साथियों, अगले 40-50 वर्षों में हम भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं, इसकी imagination ही हमारे enthusiasm को नई ऊर्जा दे सकती है। जो companies आज नई और emerging technologies में investment करेंगी, वही आने वाले समय की leaders बनेंगी। हमें केवल भविष्य की कल्पना नहीं करनी है, बल्कि भविष्य की technologies को आज ही विकसित करना है। क्योंकि future warfare में वही देश strategic advantage हासिल करेगा, जो technology को lead करेगा। आज की हमारी imagination ही कल की military capability बनेगी।
भारत में defence startups की एक नई wave उठ रही है। ये startups innovative होने के साथ-साथ agile भी हैं और traditional defence manufacturing model को disrupt कर रहे हैं। Funding, mentorship और market access से उनके लिए defence sector में opportunities बढ़ी हैं।
इसी प्रकार, MSMEs, Indian economy की backbone होने के साथ defence ecosystem की भी critical strength हैं। Components, sub-systems और essential services में उनका योगदान महत्वपूर्ण है।
इसलिए MSMEs को quality, delivery, innovation और global standards पर लगातार focus करना होगा तथा बड़ी companies के साथ partnerships बढ़ानी होंगी।
साथियों, जब हम Viksit Bharat 2047 की बात करते हैं, तो हमारा लक्ष्य केवल economically strong भारत नहीं, बल्कि technologically आत्मनिर्भर, socially inclusive, environmentally sustainable और strategically secure भारत का है। Defence sector इस vision का corner-stone है। 2047 तक हमें critical technologies में self-reliance,
indigenous content में significant वृद्धि, defence exports में multi-fold growth और global supply chains में भारत की मजबूत presence ensure करनी होगी।
साथियों, ये सब कुछ हम बिना collaboration के नहीं कर सकते। आज हम इतिहास के एक ऐसे दौर में रह रहे हैं, जहाँ collaboration की संभावनाएँ पहले से कहीं अधिक हैं। प्रारंभ में मनुष्य ने पत्थर के औजार बनाए, आग का आविष्कार किया, पहिया का आविष्कार किया। उस समय काम करने का ढंग अलग था; एक व्यक्ति को कई-कई जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती थीं, और collaboration का दायरा भी limited हुआ करता था।
लेकिन आज ज्ञान, technology और संसाधनों के आदान-प्रदान ने हमें एक साथ मिलकर काम करने का बेहतर अवसर दिया है।
आज DRDO के पास knowledge और technology है, Industry के पास scale और manufacturing capability है, Start-ups के पास innovation और agility है, और हमारे युवाओं के पास नए भारत का सपना है। जब ये चारों शक्तियाँ एक साथ आएंगी, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रह जाएगा। जब ये चारों शक्तियाँ एक दिशा में आगे बढ़ेंगी, तो भारत की defence capability को दुनिया की कोई शक्ति रोक नहीं सकती।
यही है New India की collective strength.
मुझे विश्वास है, कि ‘VIMARSH 2026’ से निकलने वाला विमर्श, laboratories तक जाएगा, industries तक जाएगा, start-ups तक जाएगा, universities तक जाएगा और अंततः देश की सीमाओं की सुरक्षा तथा भारत की अर्थव्यवस्था की शक्ति में दिखाई देगा।
हमारी वार्ता केवल विकास की बात न करे, हमारी वार्ता विकास का रास्ता बनाए।
और यही, VIMARSH 2026 की सबसे बड़ी सफलता होगी।
मैं DRDO के सभी scientists, Industry के सभी representatives, Start-ups, MSMEs, Academia और इस पूरे defence ecosystem से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का आह्वान करता हूँ। हम एक साथ मिलकर, भारत की रक्षा क्षमता को और बढ़ाएँ, यही हमारा प्रयास होना चाहिए। इसी शुभकामना के साथ, मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।