‘ऑपरेशन सिंदूर’ technological warfare का शानदार नमूना था: रक्षामंत्री

Text of RM’s speech at the inaugural ceremony of the North Tech Symposium in Prayagraj, Uttar Pradesh.

सबसे पहले मैं, प्रयागराज की इस पावन धरती को नमन करता हूँ। यह शहर अपने आप में ज्ञान और आस्था के संगम की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। जिस तरह महाकुंभ में हम देखते हैं, कि हर जाति, समुदाय, पंथ, के लोग यहां पर डुबकी लगाते हैं। उसी तरह, एक समागम आज हमें यहां दिख रहा है, जहाँ अलग-अलग domain के experts इस conclave में उपस्थित हैं।

आज, North Tech Symposium में, मैं अपने सामने, एक अलग ही प्रकार का संगम देख रहा हूँ। हमारे बगल में, माँ गंगा और माँ यमुना का संगम है। और यहाँ हमारे सामने ज्ञान और शक्ति का महाकुंभ है। मुझे बताया गया, कि 3 दिनों के इस आयोजन में, हमारी academia, industries और armed forces के लोग मिलकर मंथन करेंगे।

मुझे यह देखकर भी बड़ा अच्छा लगा, कि इस symposium में, आप कई dedicated seminars का आयोजन कर रहे हैं, कई exhibitions का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें unmanned, और counter unmanned aerial system, electronic और cyber warfare, robotics तथा healthcare जैसे important subjects भी cover किये जा रहे हैं। यह सच में एक रक्षा त्रिवेणी संगम है, और इस सुंदर theme के लिए भी, मैं आपको बधाई देता हूँ।

साथियों, हम सब इस बात से परिचित हैं, कि वर्तमान जो दौर चल रहा है, यह एक intensive Technological Revolution का दौर है। और जब भी हम इस Technological Revolution की बात करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से हमारा ध्यान इसके evolution की ओर चला जाता है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि हम इतिहास देखेंगे तो हमें पता चलेगा, कि हर युग में जब भी कोई नई क्रांति आई है, वह अपने साथ अनेक disruptions लेकर आई है। वह established order, को ध्वस्त करती है, उसमें उलट-पुलट करती है। पहले से चला आ रहा संतुलन गड़बड़ा जाता है, सब कुछ अस्त-व्यस्त लगने लगता है। यह हर क्रांति की नियति है। लेकिन, कुछ समय पश्चात, हर क्रांति, एक शांति, या order भी उत्पन्न करती है। जो अफरा-तफरी थी, वह धीरे-धीरे एक संतुलन में बदल जाती है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, जो नया order establish होता है, वह पिछली व्यवस्था से comparatively बेहतर होता है।

जीवन के सभी क्षेत्रों, communication, health, finance, academia, सभी में यह चक्र चलता रहता है। क्रांति आती है, पुराने ढांचे को बदलती है, और अंततः एक बेहतर कल की नींव रखती है।

देश के रक्षा मंत्री के रूप में यदि मैं बात करूँ, तो आप देखिये कि रक्षा क्षेत्र में, यह technological revolution और भी ज्यादा दिख रहा है। यदि हम modern warfare की बात करें, तो आज जिस रूप में यह हमें दिख रहा है, इसके विकास की कहानी भी, मूलतः इस बात की कहानी है, कि किस तरह से technology और engineering का रक्षा क्षेत्र में absorption हुआ है।

इसी absorption ने हर कालखंड में warfare का चेहरा बदला है। जैसे आप example देखिये। Second World War, और उसके बाद के 50-60 वर्षों के दौर को देखिये। इस काल में, हमने battlefield में, बड़े platforms और भारी machinery को main role में देखा।  Air Power ने second world war के दौरान, युद्ध की दिशा बदल दी।  Aircraft वगैरह, strategy के केंद्र में आ गए। जमीन पर भी tanks और बड़े field guns का बोलबाला हुआ। समुद्र में भी, बड़े-बड़े naval vessels, और submarines का बोलबाला भी तेजी से बढ़ा। और इन बड़े platforms ने, दशकों तक अपना प्रभुत्व कायम रखा। यानी second world war के बाद, हमने एक तरफ तो लगातार conventional weapons का improvement होते देखा, और दूसरी तरफ नई-नई advanced technologies का defence system में समावेश भी होता गया।

इसके कुछ उदाहरण मैं आपके सामने रखना चाहूंगा। जैसे, आप एक fighter aircraft को ही लीजिए। शुरुआत में यह बहुत advanced प्लेटफॉर्म नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे इसमें missiles fit की गईं, powerful radars और surveillance systems आए। यानी जिसकी शुरुआत एक basic platform के रूप में हुई, उसमें लगातार technology का समावेश होता गया। और वह समय के साथ और अधिक घातक बनता गया।

लेकिन, 21वीं सदी में आने के बाद, technology के एक नए युग का आगमन हुआ। Information Technology, और Artificial intelligence जैसे dimensions आए। और ये technologies, हमारे defence sector को, बिलकुल new phase में लेकर जा रहे हैं। अब युद्ध केवल land, sky और sea तक सीमित नहीं रहा। बल्कि अब cyber, space और invisible sectors में भी लड़ा जाने लगा है।

और इसमें एक और बात हम notice करें, कि जो बदलाव second world war के 40-50 सालों में gradual तरीके से आए, वही बदलाव अब पिछले 5-10 वर्षों में, एक revolution की तरह आए।

पहले के दौर में, जैसे tanks आए तो 50 साल तक उनका बोलबाला रहा, aircraft आए तो 30-40 साल तक एक पीढ़ी चली। लेकिन अब जो नई चीजें रोजाना सामने आ रही हैं, उनकी life span बहुत छोटी होती जा रही है। Change की यह जो गति है, यह इतनी तेज है, कि वह mind-boggling है। मानव इतिहास में शायद ही कभी, technological change की इतनी विस्फोटक रफ्तार देखी गई हो।

इस un-precedented speed, और un-predictability के, effect को समझने के लिए, Russia-Ukraine conflict का उदाहरण आप देखिये। गौर कीजिए, एक ही conflict के, महज तीन-चार वर्षों के भीतर, उसके nature of warfare में, कितना बड़ा परिवर्तन हो गया। इस conflict के शुरुआती दिनों में हमने देखा, कि यह एक conventional conflict की तरह शुरू हुआ, जिसमें tanks, missiles जैसे equipment relevant थे। लेकिन, धीरे-धीरे यह युद्ध का स्वरूप बदलता गया। हमने देखा, कि किस तरह Drones और sensors, इस युद्ध में game changer बनकर उभरे।

इस change के अलावा, अगर हम युद्ध प्रणाली की un-predictability को देखें, तो पहले के समय में, कम से कम हमें इस बात का मोटा-मोटा अंदाजा होता था, कि सामने वाला क्या कर सकता है। उसकी सैन्य क्षमता, उसके platforms, उसकी doctrine, इन सबका अंदाजा होता था। लेकिन अब, लगातार एक ऐसा surprise element सामने आ रहा है, जिसके बारे में पहले कभी सोचा ही नहीं जा सकता था। जिन चीजों को हम सामान्य नागरिक जीवन का हिस्सा मानते थे, वे अब घातक हथियारों में बदल रही हैं। क्या कोई सोच सकता था, कि एक सामान्य सा लगने वाला पेजर एक बम बन जाएगा? लेबनान और सीरिया में जो पेजर अटैक हुआ, उसने युद्ध पद्धति के बारे में नए तरीके से सोचने पर मजबूर कर दिया। आज के समय में कौन सी चीज हथियार बन सकती है, इसका कोई अंदाजा ही नहीं लग सकता।

सोचिए, अगर पेजर को weaponize किया जा सकता है, तो कल को कोई और सामान्य वस्तु, कोई सॉफ्टवेयर, क्या कुछ weaponize नहीं हो सकता? अब, ऐसी स्थिति में, जब बदलाव का यह विकराल रूप हमारे सामने है, तो भारत जैसे देश की तैयारी तो और भी important हो जाती है।

हालाँकि, मुझे यह कहते हुए ख़ुशी होती है, कि हमारी सेनाओं ने, और हमारी industries ने, बदलती हुई परिस्थितियों का बहुत अच्छे से analysis किया है। आप लोगों की तैयारी, हमेशा Up to date, Up to mark, and up to standard रहती है। और इसके सबसे बड़े उदाहरण के रूप में तो, Operation Sindoor ही हमारे सामने है। इस Operation के 1 वर्ष पूरे हो चुके हैं। जब भी Operation Sindoor की बात आती है, तो मुझे अपनी सेनाओं का शौर्य याद आता है। आतंकियों और उनके सरपरस्तों को, जो मुंहतोड़ जवाब हमारे सैनिकों ने दिया, उससे पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा हो गया। ये तो फिर भी अच्छा हुआ, कि हमने धैर्य दिखाते हुए, केवल आतंकवादियों को ही नेस्तनाबूत किया, नहीं तो हमारी सेनाएँ क्या कुछ करने में सक्षम है, इसका अंदाजा तो पूरी दुनिया को है।

Operation Sindoor अपने आप में technological warfare का एक नमूना था। इस operation में आकाश तीर, आकाश मिसाइल सिस्टम, और ब्रह्मोस जैसी advanced मिसाइल systems के साथ-साथ, अनेक latest equipment का भी उपयोग किया गया। इसने यह साबित किया, कि हमारी सेनाएं बदलाव को समझ भी रही हैं, और उसे आत्मविश्वास के साथ उपयोग भी कर रही हैं।

साथियों, मैंने हमेशा अपनी armed forces और Defence experts से एक बात कही है, और आज फिर दोहराना चाहता हूं, कि हमें सिर्फ active ही नहीं रहना है, बल्कि proactive भी रहना है। हर प्रकार की स्थिति के लिए तैयार  भी रहना है। क्योंकि आज के समय में, कब क्या हो जाए, कुछ भी predictable नहीं है। अन्य क्षेत्रों में, मान लीजिए शिक्षा या चिकित्सा में, अगर कोई नई technology आती है, तो हम उसे एक-दो साल के भीतर अपना सकते हैं, चीजें संभल जाती हैं। लेकिन defence के क्षेत्र में, अगर हम यह सोच लें, कि एक साल बाद इस नई चुनौती से निपटने का उपाय सोचेंगे, तो यह सोच हमारे लिए घातक सिद्ध हो सकती है। एक साल की देरी का मतलब हो सकता है, कि तब तक दुश्मन हम पर हावी हो चुका हो। इसलिए, मैंने कहा, कि हमारा रवैया reactive नहीं, बल्कि proactive होना चाहिए। हमें उन चीजों के बारे में सोचना है, जो अभी existence में भी नहीं हैं।

और जब मैं proactive तैयारी की बात कर रहा हूं, तो उसका एक और important पहलू है– वह है surprise element.  हमें ऐसी क्षमताएँ भी विकसित करनी है, कि जरूरत पड़ने पर हम स्वयं भी एक ऐसा प्रहार कर सकें, जिसके बारे में सामने वाले ने कभी सोचा भी न हो। वह surprised रह जाए। इतिहास गवाह है, कि युद्ध में, decisive edge, हमेशा उसी के पास रही है, जिसके पास surprise element रहता है। मुझे पता है, कि हमारी armed forces इस दिशा में काम कर रही हैं। लेकिन हमें और proactive होकर, इस दिशा में काम करते रहना है।

साथियों, आज के इस complex और तेजी से बदलते परिवेश में, आगे बढ़ने का एक ही मंत्र है, और वह है, Adaptability. बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलना ही हमारी priority होनी चाहिए। Adaptability को लेकर, मुझे चार्ल्स डार्विन की एक बात भी याद आती है, कि “It is not the strongest of the species that survives, nor the most intelligent, but the one most responsive to change.” यही बात आज राष्ट्रों पर भी लागू होती है। जो देश इस तकनीकी क्रांति को तेजी से adapt करेगा, वही future warfare की स्थिति में edge में रहेगा।

हमारी सरकार ने, प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, हमारे defence ecosystem को मजबूत करने के लिए, अनेक कदम उठाए हैं। उसके विस्तार में, मैं नहीं जाना चाहता। आप सब उन initiatives से भलीभांति परिचित ही हैं। चाहे i-DEX हो, ADITI हो, TDF हो, इन सभी प्रयासों से हमने Defence sector में innovation और ज्यादा से ज्यादा private sector का participation बढ़ाने का प्रयास किया है।

इन schemes के अलावा, हमने Defence sector में infrastructure development को भी बढ़ावा दिया है। हम उत्तर प्रदेश में हैं। यदि आप सिर्फ UP को ही देखें, तो Defence sector से related, कई सारे infra projects हमने यहाँ शुरू किये हैं। Defence corridor से लेकर ब्रह्मोस के assembling centre की स्थापना तक, हमारे अनेक प्रयास, आज भारत की Defence capability को enhance कर रहे हैं। Indirectly भी, हम जो infra projects शुरू कर रहे हैं, वो भी हमारे लिए भविष्य में asset ही साबित होंगे। जैसे अभी उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा expressway, गंगा expressway शुरू हुआ है। ये सारे infrastructure हमारे Defence sector के लिए भी उतने ही important हैं।

साथियों, Defence sector में हमारे इन प्रयासों का असर दिख भी रहा है। आप आँकड़े देखिए, हमारा Domestic Defence Production, Financial year 2025-26 में, 1 लाख 54 हजार करोड़ रूपये के record आँकड़े तक पहुँच गया। इसके अलावा हमारा Defence export भी, 2025-26 में 38,424 करोड़ रूपये के record आँकड़े तक पहुँच गया। Obviously, इसमें हमारे private sector का बड़ा अहम contribution है। मुझे यह कहते हुए बड़ी खुशी होती है, कि हमारी industries की चर्चा अब दुनिया भर में होती है। जब भी मैं कहीं बाहर जाता हूँ, तो हमारी industries के प्रति दुनिया में एक positive approach देखने को मिलती है। अभी हाल ही में मैं जर्मनी की visit पर था। मैंने वहाँ के Industry leaders से Indian industry leaders के साथ partnership की चर्चा की। SIDM से भी कुछ साथी वहाँ पर थे। मुझे यह देखकर अच्छा लगा, कि अनेक leaders ने हमारी industry के साथ काम करने को लेकर अपना interest दिखाया। यह कोई छोटी बात नहीं है। हमारी industries ने इसके लिए एक लंबा सफर तय किया है, credibility हासिल की है, और लगातार इस दिशा में hard work कर रहे हैं। इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं। हालाँकि, हमें सिर्फ इतने पर ही नहीं रुक जाना है। हमारे पास पाने के लिए पूरा आसमान है, और मुझे विश्वास है, कि हम इसी तरह से, मज़बूती से आगे बढ़ते रहेंगे।

साथियों, इस तरह मज़बूती से आगे बढ़ने के लिए, हमें एक बड़े important aspect पर ध्यान देना होगा; और वह है research. आज के समय में, Research का कोई विकल्प नहीं है। भविष्य में, युद्ध कैसे लड़े जाएंगे, यह आज के labs में decide हो रहा है।

मुझे यह कहते हुए खुशी होती है, कि सरकार ने, defence research को अपनी priorities के केंद्र में रखा है। DRDO के माध्यम से हमने, research को next level तक ले जाने का प्रयास किया है। और महत्त्वपूर्ण यह है, कि DRDO अब इस सफर में अकेले ही नहीं चल रहा है। ‘If you want to go far, go together’, के मंत्र के साथ DRDO, अपने साथ बड़ी संख्या में industries को भी साथ लेकर चल रहा है।

इस दिशा में आप देखें, तो Defence R&D बजट का 25% हिस्सा industry, academia और start-ups के लिए allocate कर दिया गया है; और अब तक इन सभी के द्वारा लगभग 4,500 करोड़ रूपये से अधिक का उपयोग भी किया जा चुका है।

Transfer of Technology के लिए, नई policy लागू की गई है, जिसमें पहले 20% ToT fee ली जाती थी, लेकिन अब Development cum Production Partner, Development Partner, और Production Agency के लिए यह fee पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इसका result यह है, कि अब तक DRDO द्वारा industries को, 2200 से अधिक technologies transfer की जा चुकी हैं।

इसके अलावा, DRDO ने Indian industries के लिए, अपने patents तक की, free access देने की policy भी शुरू की है, जिससे उनकी technological capability, और global competitiveness दोनों मजबूत होंगी। DRDO की test facilities को भी, अब industries के लिए payment basis पर खोल दिया गया है। हर साल सैकड़ों industries इनका उपयोग कर रही हैं, और R&D support ले रही हैं।

इसके अलावा Export Support, Industry Interaction Group, Industry Outreach जैसे अनेक कदम हैं, जो हमारी industries को मजबूत करने का काम कर रही हैं।

अब वक़्त है, कि हमारी industries अपने पूरे दम खम से सामने आएं, और उन areas में excel करें, जिनमें हमें अभी लंबी दूरी तय करनी है। उदाहरण के लिए-Directed Energy Weapons,

Hypersonic Weapons,

Underwater Domain Awareness,

Space Situational Awareness,

Quantum Technologies,

Artificial Intelligence and Machine Learning,

आदि अनेक ऐसे areas हैं, जहाँ हमारी industries बहुत कुछ Better, Bigger, और Broader कर सकती हैं।

सरकार आपके साथ हर प्रयास में खड़ी है, और मुझे विश्वास है, कि आप सभी इस ओर गंभीरता से आगे बढ़ेंगे।

यहाँ industries और academia के कई लोग बैठे हुए हैं। आप लोगों के सुझावों ने, feedback ने, हमेशा हमारी policy making और implementation को मज़बूत किया है। मुझे आशा है, कि इस symposium से भी, हमारे लिए कुछ concrete suggestions और feedback आएँगे, ताकि हम सब और बेहतर हो सकें। मैं suggest करूँगा, कि जिस तरह से हम defence corridor develop कर रहे हैं, उसी तर्ज पर आप सभी एक knowledge corridor तैयार करें, जिससे हम सभी एक दूसरे से सीख सकें, और आगे बढ़ सकें। ताकि हम उन sectors में भी excellence ला सकें, जिसको अब तक हम explore नहीं कर पाए हैं। हमारा collective प्रयास ही हमें, विश्व पटल पर सबसे सशक्त सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

मुझे यकीन है, कि यह North Tech Symposium उस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आप सबके Cooperation, आपकी मेहनत और आपके innovation से, भारत निश्चित रूप से global power बनेगा। आइए, हम सब मिलकर, पूरी निष्ठा के साथ, एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में जुटें । Technology की इस नई लहर का स्वागत करें, चुनौतियों को अवसर में बदलें, और भविष्य के लिए स्वयं को पहले से ही तैयार रखें।

मैं एक बार फिर इस आयोजन के लिए, Northern Command, Central Command, SIDM, और सभी सहयोगी संस्थाओं को बधाई देता हूं। प्रयागराज की इस पावन धरा से, मैं आप सबके उज्ज्वल भविष्य, और देश की सुरक्षा मे, आपके योगदान की मंगल कामना करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद! जय भारत!