North East भारत का अंतिम छोर नहीं, प्रथम छोर है: रक्षामंत्री

सुकना (दार्जिलिंग) में आयोजित ‘बड़ाखाना’ के अवसर पर रक्षामंत्री के भाषण का मूल पाठ।

सबसे पहले मैं आप सभी को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएँ देता हूँ। दीपावली को लेकर पूरे देश में उत्साह और उमंग का माहौल है, और ऐसे समय में, मैं सुकना की इस धरती पर आप सभी के साथ दीपावली मनाने आया हूँ।

साथियों, मैं यहाँ रक्षा मंत्री के रूप में किसी औपचारिक दौरे पर नहीं आया हूँ, बल्कि मैं अपने परिवार जनों के साथ दीपावली की खुशियाँ बाँटने आया हूँ। मैं आपके बीच, आपके हौसले को नमन करने और आपके परिवारों का आभार व्यक्त करने आया हूँ।

मैं जानता हूँ, कि दीपावली पर आपको घर की याद आ रही होगी। लेकिन उन यादों को अपने अंदर समाए हुए, आप सभी देशवासियों की सुरक्षा में तत्पर हैं, इस त्याग को, शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

साथियों, आप जिस परिवार से दूर हैं, उस परिवार की सुरक्षा और सम्मान भी हमारी सरकार की ज़िम्मेदारी है। आपकी चिंताओं को हम भली-भांति समझते हैं। मैं आपको आश्वस्त करता हूँ, कि आपका, और आपके परिवार का welfare, हमारा दायित्व है, और हम इस दायित्व को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

साथियों, दीपावली का मतलब सिर्फ़ दीये जलाना, मिठाई खाना और आतिशबाज़ी करना नहीं है। इसका मतलब है, अंधकार से प्रकाश की ओर जाना, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ना, और व्यक्तिगत भावनाओं से सामूहिकता की ओर कदम बढ़ाना। आज का बड़ाखाना, इसी सामूहिकता के उत्सव का एक उदाहरण है।

साथियों, यह बड़ाखाना एक उत्सव है, एक भावना है। जब हम साथ बैठकर भोजन कर रहे हैं, तो यहाँ कोई rank नहीं है, कोई hierarchy नहीं है। यहाँ हम सब एक परिवार हैं, जो मिलकर, बैठकर, इस उत्सव का आनंद ले रहे हैं। बड़ाखाना में तो कई बार शामिल होने का अवसर मिला है, पर आज का यह बड़ाखाना बड़ा यूनिक है। इससे बेहतर संयोग क्या हो सकता है कि एक ओर रंग-बिरंगे दीपक देखने को मिल रहे हों, और एक ओर रंग-बिरंगे खाने के व्यंजन।

साथियों, दीपावली के रंग-बिरंगे दीपकों की तरह ही, आप सब भी देश की अलग-अलग, रंग बिरंगी संस्कृतियों, भाषाओँ और क्षेत्रों से आते हैं। लेकिन यहाँ आकर हम सभी, एक बड़े परिवार के सदस्य बन जाते हैं। यही हमारी खासियत है, और यही हमारी ताकत है। अपनी इस ताकत को हमें किसी भी सूरत में बनाए रखना है।

साथियों, आज का बड़ाखाना इसलिए तो महत्वपूर्ण है ही, क्योंकि यह दीपावली के अवसर पर हो रहा है। इसके अलावा यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, कि आज हम सुकना जैसे important location पर एकत्र हुए हैं।

साथियों, आमतौर पर North East को भारत के दूरस्थ क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। लेकिन मेरा दृष्टिकोण इससे थोड़ा अलग है। मैं North East को भारत के आखिरी छोर के रूप में नहीं, बल्कि देश के प्रथम छोर के रूप में देखता हूँ। यह वह क्षेत्र है, जहाँ भारत में सुबह की पहली किरण दस्तक देती है। सूरज की रोशनी सबसे पहले इसी धरती को स्पर्श करती है और फिर धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों तक पहुँचती है। इसलिए जिस क्षेत्र से भारत के दिन की शुरुआत होती है, उसे देश का अंतिम छोर कहना मुझे उचित नहीं लगता। वास्तव में, North East भारत का अंत नहीं, बल्कि उसकी एक खूबसूरत शुरुआत है।

अगर हम भारतीय भूगोल, संस्कृति और सभ्यता की बात करें, तो North East का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव-विविधता, सांस्कृतिक विविधता और विशिष्ट परंपराओं के कारण भारत की पहचान को एक अलग आयाम देता है। यहाँ की प्रकृति और यहाँ की संस्कृति, दोनों में एक अद्भुत समृद्धि दिखाई देती है।

लेकिन इस पूरे उत्तर-पूर्व में भी, अगर मैं सुकना की बात करूँ, तो मुझे लगता है कि प्रकृति ने इस क्षेत्र पर अपनी विशेष कृपा बरसाई है। यहाँ के विशाल पर्वत, खूबसूरत घाटियाँ, नदियाँ, घने जंगल और अद्भुत जैव-विविधता इसे प्रकृति का एक अनमोल उपहार बनाते हैं।

हम सब सुकना में हैं। आमतौर पर इसे एक सैन्य स्टेशन के रूप में देखा जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि सुकना, पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। आप जिस क्षेत्र में तैनात हैं, वह भौगोलिक रूप से बड़ा संवेदनशील है। यहाँ आपको हर समय ऑपरेशनल रेडिनेस बनाए रखनी होती है।

वैसे भी, आज के समय में जिस तरह से सुरक्षा की चुनौतियाँ बदली हैं, उसे देखते हुए तो इन क्षेत्रों में संवेदनशीलता और भी ज़्यादा बढ़ गई है। आप सब तो देख ही रहे हैं कि आज की सुरक्षा चुनौतियाँ पहले से कितनी बदल गई हैं। पहले युद्ध का मतलब सिर्फ़ सीमाओं पर गोलियाँ या तोपें चलना माना जाता था।

लेकिन आज युद्ध के कई रंग हैं। हाइब्रिड वॉरफेयर, प्रॉक्सी वॉर, साइबर अटैक, ड्रोन घुसपैठ, और Information Warfare, ये सब एक साथ चलते हैं। आज कई बार दुश्मन बॉर्डर पर सीधे नहीं आता, दुश्मन सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाता है। ड्रोन्स से हमारी संवेदनशील जगहों की निगरानी करता है। साइबर हमले से हमारे सिस्टम को कमज़ोर करने की कोशिश करता है। ऐसी परिस्थितियों में आपकी भूमिका केवल लड़ाई लड़ने वाले योद्धा की नहीं रह जाती है, बल्कि आपकी भूमिका एक सतर्क प्रहरी की हो जाती है, जो हर आयाम से अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने के लिए तत्पर होता है।

साथियों, सुकना और इसके आसपास का क्षेत्र logistics के लिहाज से भी बहुत अहम है। यहाँ से सामान, हथियार, खाना, दवा और जवान आगे भेजे जाते हैं। अगर यह कड़ी मज़बूत है, तो आगे की चौकियाँ मज़बूत हैं। मैं चाहता हूँ कि हमारी supply chain इतनी मज़बूत हो, कि किसी जवान को किसी चीज़ की कमी न हो। हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

सड़कें, सुरंगें, border infrastructure और modern equipment, इन पर हमने budget allocation बढ़ाया है। आज देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हमारे start-ups, हमारी industries आज drones बना रही हैं, Anti Drone system विकसित कर रही हैं, और सैनिकों के लिए बेहतर सामान तैयार कर रही हैं। मुझे गर्व है, कि हमारे जवान, भारत में बनी तकनीकों को अपनाने में बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं। आप ड्रोन चलाना सीख रहे हैं, साइबर सुरक्षा के बारे में समझ रहे हैं, और नए तरीकों से training ले रहे हैं। यही बदलाव हमें भविष्य के लिए तैयार करेगा।

साथियों, मैं  खुद अपने स्तर पर यह प्रयास करता रहता हूं कि मुझे जब भी समय मिले, मैं आप लोगों के मध्य बड़ाखाना में सम्मिलित होऊँ। यह मेरी व्यक्तिगत सोच तो है ही, लेकिन इसके साथ-साथ यह हमारी सरकार, व हमारे प्रधानमंत्री जी का विचार भी है, कि हमारी सेनाओं के morale को ऊँचा करने के लिए जो कुछ भी हो, वह किया जाना चाहिए, और यह हम कर रहे हैं।

साथियों, भारत को यदि विकसित राष्ट्र बनना है, तथा दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनना है, तो इसके लिए हमें armed forces के technological advancement के साथ-साथ उनके morale advancement पर भी ध्यान देना होगा। हमारी सेनाओं का morale जितना ऊँचा होगा,  भारत के सैन्य विकास की उड़ान भी उतनी ही ऊंची होगी।

वैसे तो हमारे अधिकारी समय-समय पर ऐसा करते रहते हैं लेकिन फिर भी मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं, कि जब भी हमारे अधिकारियों को समय मिले, वे हमारे जवानों के साथ अच्छा समय बिताएँ, ताकि प्रत्येक जवान अपने आप को आपसे जुड़ा हुआ महसूस करें, ताकि प्रत्येक जवान खुद को इस संस्था से जुड़ा हुआ महसूस करें। हमें अपने प्रयासों से, अपने जवानों को यह एहसास दिलाना है, कि भारत की सरकार व भारत की पूरी जनता उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, हमारा कोई भी जवान खुद को अकेला महसूस कभी नहीं करेगा।

मैं आज एक बात और आपसे कहना चाहूँगा, वह यह कि आपके लिए अपनी mental health का भी ख्याल रखना बहुत ज़रूरी है। हम सब कभी-कभी stress में होते हैं, कभी-कभी घर की याद सताती है, कभी-कभी काम का pressure होता है। यह सब normal है। लेकिन इसे अंदर मत दबाइए। अपने साथियों से खुलकर बात कीजिए। हम सब एक-दूसरे का support system हैं। और हाँ, जब हम खाने पर बैठें, तो सिर्फ़ खाना ही नहीं, दिल की बातें भी share करें। यही हमारी असली strength है। मुझे पूरा विश्वास है, कि आप इन बातों को गंभीरता से लेंगे।

अब मैं अपनी बातों को यहीं विराम देता हूँ। क्योंकि मुझे पता है, कि आप सबको ‘भी’ भूख लगी होगी। मैं आप सभी को, आपके परिवारों को, दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ। आप स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें, खुश रहें। आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहे। आपके घरों में हमेशा खुशियों की रोशनी रहे। इसी विश्वास के साथ,

Happy Diwali

जय हिंद !