Text of RM’s speech at the Flag Off ceremony of Seva Yatra under Seva Sankalp Abhiyan in Varanasi.
साथियो,
ऐसा कहा जाता है कि “ज़िंदगी लंबी ही नहीं, बड़ी भी होनी चाहिए।”
आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन है। हम सब उनकी लंबी आयु की कामना कर रहे हैं। और जहाँ तक ज़िंदगी के बड़े होने का सवाल है, तो वह तो मोदी जी ने अपने व्यक्तित्व, नेतृत्व और कृतित्व से कर ही ली है।
साथियो,
आज जिस यात्रा की शुरुआत हो रही है, यह सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान जाने की यात्रा नहीं है। यह मोदी की जन्मभूमि और कर्मभूमि को जोड़ने की यात्रा है।
एक ओर काशी है, जहाँ से मोदी जी के सार्वजनिक जीवन को नई ऊर्जा मिली और गंगा माँ का आशीर्वाद मिला। दूसरी ओर वडनगर है, जहाँ उन्हें पूजनीय हीराबेन माँ का आशीर्वाद मिला और संस्कारों की नींव पड़ी।
इन दोनों जगहों को जोड़ने के लिए जो माध्यम चुना गया है, वह त्रिवेणी का जल है।
जिस तरह त्रिवेणी में तीन धाराएँ मिलकर एक हो जाती हैं, उसी तरह वडनगर के संस्कार, काशी का आशीर्वाद और मोदी जी का सेवा का संकल्प; एक धारा बन गया है। और यही धारा, भारत माँ की सेवा के संकल्प को आगे बढ़ा रही है।
यानी यह भी कहा जा सकता है कि यह यात्रा संस्कार, साधना और सेवा के संगम की यात्रा है।
साथियो,
काशी से यह यात्रा शुरू हो रही है। यहाँ से जो जल ले जाया जा रहा है; उससे वडनगर के हाटकेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया जाएगा।
इसी तरह गुजरात की पवित्र नदियों और शर्मिष्ठा तालाब से जल लाकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा।
यानी इस यात्रा में काशी की दिव्यता गुजरात जा रही है और गुजरात की आस्था काशी आ रही है।
क्या अद्भुत दृश्य होगा जब जन्मभूमि और कर्मभूमि एक-दूसरे को अपने जल और अपनी आस्था से सींचेंगे? जब सोमनाथ की धरती से बाबा विश्वनाथ की धरती का मिलन होगा!
साथियो,
वडनगर और वाराणसी का रिश्ता बहुत पुराना है। करीब 2 हजार साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने सारनाथ से वडनगर की यात्रा की थी। उस समय यात्रा का उद्देश्य ज्ञान और अध्यात्म को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना था।
आज हम उसी प्राचीन परंपरा को एक नए रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। और सेवा की यह यात्रा कर रहे हैं।
लेकिन इस यात्रा का उद्देश्य केवल जल का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भाव का आदान-प्रदान भी है। मोदी जी के जन्मदिन के उत्सव को सेवा कार्यों से जोड़ना भी है।
इस यात्रा में जितना महत्वपूर्ण गंतव्य है, उतने ही महत्वपूर्ण इस यात्रा के पड़ाव भी है।
इसीलिए, हमने इस यात्रा के रास्ते में सेवा कार्य करने का निर्णय लिया है। लोगों से संवाद और विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
यह समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचने की यात्रा है।
साथियों,
मोदी जी पहले 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और अब पिछले 12 वर्षों से प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। यानी 25 वर्षों से अनवरत जनसेवा कर रहे हैं।
25 वर्ष किसी भी पद पर रहना तो बड़ी बात होती ही है। पर उससे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि इन 25 वर्षों के कार्यकाल में समाज पर कितना और कैसा प्रभाव पड़ा?
भाइयो और बहनो,
किसी नेता की सबसे बड़ी विरासत सिर्फ वह नहीं होती जो सरकारी फाइलों में दर्ज होती है; वह होती है जो लोगों की यादों में बसती है। भावनाओं में दिखती है।
भविष्य में जब मोदी जी की विरासत लिखी जाएगी, तो उसमें लिखा जाएगा कि मोदी जी ने भारत को कैसे नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई थी। कैसे जम्मू और कश्मीर से धारा 370 समाप्त करके भारत की एकता और अखंडता मजबूत की गई थी? कैसे करोड़ों-करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया था? कैसे संसद में महिलाओं को बराबर की भागीदारी दिलाई गई थी।
और जब भी दुनिया के किसी कोने में भारतीय मुश्किल में फंसे, चाहे सीरिया हो, अफगानिस्तान हो या रूस-यूक्रेन युद्ध हो, मोदी जी के नेतृत्व में उन्हें कैसे सुरक्षित भारत वापस लाया गया था।
लेकिन इन सभी बातों के ऊपर यह लिखा जाएगा कि उन्होंने कैसे भारत के लोगों को अपनी सभ्यता पर गर्व करना सिखाया था। कैसे अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना सिखाया था। कैसे भारत के युवाओं के सपनों को पंख दिए थे।
साथियों,
एक अच्छा नेता बेहतर सड़कें बनवाता है। Infrastructure बनवाता है। पुल बनवाता है। लेकिन एक महान नेता लोगों को स्वावलंबी बनाता है। उनकी क्षमताओं को पहचानकर, उनका जीवन बेहतर करता है। लोगों में आत्मविश्वास बढ़ाता है।
अगर ये दोनों काम किसी ने किए हैं तो मोदी जी ने किए हैं।
आज मुद्रा योजना ने छोटे कारोबारियों को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। Startup India ने युवाओं को यह भरोसा दिया कि उनका Idea भी एक बड़ा Business बन सकता है।
Skill India ने युवाओं के हुनर को रोजगार से जोड़ने का रास्ता बनाया है। और Self-Help Groups और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है।
साथियो,
जहां लोगों की सोच खत्म होती है, वहाँ मोदी जी का Vision शुरू होता है। मैं आपको इसका उदाहरण देता हूँ।
2001 में गुजरात में भूकंप से बहुत तबाही हुई थी। ऐसे मुश्किल समय में मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। लोगों को लग रहा था कि गुजरात दोबारा खड़ा नहीं हो पाएगा।
लेकिन मोदी जी ने उन सभी लोगों को गलत साबित कर दिया। उन्होंने गुजरात के विकास को Test मैच से One-Day Cricket Match में बदल दिया। गुजरात को विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ाया और एक Model बना दिया।
मोदी जी सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। जैसे उन्होंने गुजरात में ‘समरस ग्राम योजना’ की शुरुआत की थी। जिससे गांवों वालों की आपसी सहमति से और बिना वोट डाले ग्राम प्रधान बनाया जा सके।
जब ऐसे ग्राम प्रधान चुने जाते हैं तो गाँव, ‘फुलेरा पूरब’ और ‘फुलेरा पश्चिम’ में नहीं बँटते हैं। यानी गांव खेमों में नहीं बँटते हैं। जो भी प्रधान बनता है, वह विकास का काम बिना किसी पक्षपात के करता है।
इन सभी से एक बात साफ होती है। जहाँ दूसरे लोग समस्या देखते हैं, वहाँ मोदी जी समाधान और संभावनाएँ देखते हैं। और यही Vision, यही सोच और यही कार्यशैली आज भारत को विकास के एक नए रास्ते पर आगे ले जा रही है।
साथियो,
हमारे देश के हर जिले में कुछ न कुछ खास बात होती है। कहीं कारीगरों की कला है, कहीं कोई खास कृषि उत्पाद है, तो कहीं कोई पारंपरिक उद्योग है।
पहले ये सब हुनर, ये चीजें अपने जिले तक ही सीमित रह जाते थे। किसी ने नहीं सोचा कि इन चीजों को दुनिया के सामने लेकर जाया जाए।
मोदी जी ने One District One Product की पहल के साथ इन स्थानीय खूबियों को पहचानकर, उन्हें देश और दुनिया के बाज़ारों से जोड़ा है।
काशी में बनी सिल्क की चीजें, प्रयागराज की मूंज से बनी चीजें, जौनपुर की दरियाँ, मिर्जापुर के कालीन, चंदौली का काला चावल, गाजीपुर की जूट से बनी दीवार पर टांगने वाली सजावटी वस्तुएं; आज दुनिया भर में जानी जा रही हैं।
आज मोदी जी जब दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं से मिलते हैं, तो उन्हें उपहार में हमारे देश की यहीं चीजें देते हैं।
जैसे उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी से बना पीकॉक ब्रोच दिया था। फ्रांस के राष्ट्रपति को लखनऊ के ज़री-जरदोज़ी बॉक्स में कन्नौज का इत्र दिया था। जर्मनी के चांसलर को मुरादाबाद में बना पीतल का कलश भेंट किया था।
यानी मोदी जी का हर उपहार अपने साथ भारत के किसी कारीगर की मेहनत, किसी शहर की पहचान और हमारी सदियों पुरानी परंपरा लेकर दुनिया तक पहुँचता है।
साथियो,
बारह वर्ष पहले, जब पहली बार मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि आने वाला दशक भारत के इतिहास का अब तक का सबसे शानदार दशक होगा और विकसित भारत का आधार बनेगा।
2014 से पहले भारत के हाथ से अवसर निकल जाते थे, और कांग्रेस की सरकारें या तो सोती रहती थीं, या बस कुर्सी बचाने में लगी रहती थीं।
मैं आपको एक छोटी सी घटना बताना चाहता हूँ।
आज लगभग हर Electronic Item, सेमीकंडक्टर चिप से चलता है। आपके Mobile से लेकर Brahmos Missile तक सभी चीजों में यह चिप लगती है। इस चिप को बनाने वाली विश्व की एक सबसे बड़ी कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाना चाहती थी लेकिन कांग्रेस की सरकार ने उस कंपनी को दो बार Permission ही नहीं दी। थक हारकर वो कंपनी चीन चली गई।
सोचिए कितने हजारों करोड़ों रुपये का बिजनेस देश से बाहर चला गया। रोजगार का कितना बड़ा अवसर हमने खो दिया।
साथियों,
मोदी जी ने Semiconductor Industry को बढ़ावा देने की बात की तो बहुत से लोग आए और बोले, यह कैसे होगा? कुछ ने तो यह भी कह दिया था कि यह करने की जरूरत ही क्या है?
आपको यह जानकर खुशी होगी कि ऐसे लोगों के मुँह पर तमाचा मारते हुए हमने पिछले साल देश की पहली Made-in-India सेमीकंडक्टर चिप बना ली है।
साथियो,
मोदी जी के नेतृत्व में भारत सिर्फ एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में ही नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी उभरा है।
आज पूरी दुनिया Yoga कर रही है। आप सभी देख ही रहे हैं कि काशी का आधुनिक सुविधाओं के साथ कैसे कायाकल्प किया गया है। इसी तरह उज्जैन के महाकाल लोक से लेकर गुवाहाटी में माँ कामाख्या के मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया है। और अयोध्या जी में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है।
आज जब मोदी जी ने बड़े नेताओं से मिलते हैं तो उन्हें श्रीमद भगवद्गीता देते हैं। तमिल साहित्य का ग्रंथ तिरुक्कुरल देते हैं।
हमने आज पूरी दुनिया को बता दिया है कि हमारे पास Technology, भी है, Talent भी है और गर्व करने के लिए महान Traditional Wisdom यानी पारंपरिक ज्ञान भी है।
साथियो,
पिछले 12 वर्षों में मोदी जी ने उन विषयों के बारे में बड़े से बड़े मंच से बात की जिनका कोई ज़िक्र भी नहीं करना चाहता था। जैसे अपने स्वतंत्रता दिवस के पहले संबोधन में लाल किले की प्राचीर से, मोदी जी ने खुले में शौच की समस्या की बात की और हर घर में शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा।
एक प्रधानमंत्री के लिए लाल किले से ऐसी बात करना कोई साधारण बात नहीं थी। लेकिन मोदी जी ने गरीब के सम्मान को, नागरिकों के स्वास्थ्य को और महिलाओं की गरिमा को लाल किले से देश के सामने रखा।
मोदी जी की भावनाओं को जनता ने समझा और उनकी अपील को खुले दिल से समर्थन भी दिया।
इसका सबसे भावुक करने वाला उदाहरण छत्तीसगढ़ की 104 वर्षीय कुँवर बाई जी थीं। मोदी जी की बात सुनकर, उन्होंने घर में शौचालय बनवाने की ठानी। कुँवर बाई जी के पास पैसे नहीं थे। लेकिन, जहां चाह, वहाँ राह। उन्होंने अपनी बकरियाँ बेच दीं। लेकिन घर में शौचालय बनवाया।
सोचिए लाल किले से कही गई बात जब एक दूरदराज गाँव की 104 वर्ष की महिला का संकल्प बन जाए, तो यह केवल किसी योजना की सफलता ही नहीं, नेतृत्व की शक्ति का प्रमाण भी है।
यही नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी है कि एक नेता कितने लोगों को देशहित में काम करने के लिए प्रेरणा देता हैं।
साथियो,
‘मन की बात’ कार्यक्रम भी इसी बात का प्रमाण है। प्रधानमंत्री जी इस कार्यक्रम में सिर्फ़ योजनाओं की बात नहीं करते हैं; वे देश के लोगों की बात करते हैं। उन्हें जागरूक करने का काम करते हैं।
मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे, जो छोटी-मोटी तकलीफ़ होने पर, बिना डॉक्टर की सलाह के ही Antibiotic की गोली खा लेते होंगे।
लेकिन मोदी जी ने लोगों को इस आदत से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह के Antibiotic दवाओं का सेवन न करने की Appeal की। आप सोचिए, कितने लोगों ने इस Appeal के बाद बिना वजह Antibiotic खाना छोड़ दिया होगा।
देवियो और सज्जनो,
साथियो,
किसी भी बदलाव को समझने का सबसे आसान तरीका क्या है? Before and After Pictures.
आप जानते हैं ना यह Before and After Pictures क्या होती है? आप देखते होंगे कि जब कोई सड़क बन जाती हैं तो उसकी पहले की और फिर बाद की फोटो फ़ेसबुक पर डाली जाती है। ताकि आप अंतर ख़ुद देखें और तय करें कि काम कैसा हुआ है, कितना हुआ है।
उसी तरह अगर आप मोदी जी के कार्यकाल में आए बदलाव को समझना चाहते हैं तो एक बार 2014 से पहले के भारत और 2014 के बाद के भारत की तस्वीर देखिए।
विश्वास करिए, आप पहचान ही नहीं पाएंगे कि यह वही भारत है।
जैसे 2014 से पहले की बात करें तो, जब बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बात होती थी तो उसमें, भारत सबसे कमज़ोर पाँच अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा दिखता था। वही 2014 के बाद की फोटो में भारत दुनिया की पाँच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा दिखता है।
2014 से पहले की तस्वीरों में बस 40,000 करोड़ रुपये का स्वदेशी Defence Production दिखता था। 2014 के बाद की तस्वीरों में लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये का स्वदेशी Defence Production दिख रहा है।
2014 से पहले की तस्वीरों में आतंकवादी हमलों के सामने विवश भारत दिखता था। नक्सली हमलों से लहूलुहान भारत दिखता था।
लेकिन 2014 के बाद की तस्वीर में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद को समाप्त करता भारत दिखता है। नक्सली हिंसा से मुक्ति पा चुका भारत दिखता है।
2014 से पहले की तस्वीर में खाना बनाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करती और चूल्हे के धुएं में बैठी करोड़ों महिलायें दिखती थीं। 2014 के बाद की तस्वीर में घर-घर में LPG Cylinders दिखता है।
2014 से पहले की तस्वीर में, इलाज के लिए अपनी जमीन गिरवी रखता गरीब इंसान दिखता था, लेकिन 2014 के बाद की तस्वीर में आयुष्मान कार्ड दिखाकर फ्री इलाज पाता भारत का आम नागरिक दिखता है।
2014 से पहले की तस्वीर में बिजली के अभाव में केरोसिन तेल के लैम्प में पढ़ता छात्र दिखता था। 2014 के बाद की तस्वीर में हर घर में LED बल्ब के नीचे पढ़ता छात्र दिखता है।
2014 से पहले की तस्वीर में Internet का प्रयोग करता सिर्फ़ बड़े शहर का युवा दिखता था। 2014 के बाद की तस्वीर में दूर-दराज के गांवों में बैठा युवा भी, 5G Internet चलाता हुआ दिखता है।
साथियो,
2014 से पहले देश में निराशा के अंडकार में डूबा हुआ था। भ्रष्टाचार आम हो चुका था। सुरक्षा व्यवस्था बेहाल थी। अधिकारी काम नहीं कर रहे थे। मोदी जी ने सबसे पहले देश को उस रसातल से बाहर निकाला।
2014 से 2026 तक भारत में 843 अरब डॉलर से अधिक का FDI आया है।
आज हमने European Union और अमेरिका जैसे बड़े देशों के साथ Trade Deals भी किए हैं।
लेकिन मोदी जी यहीं नहीं रुके। उन्होंने देश के सामने विकसित बनने का लक्ष्य रखा है। और हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
साथियो,
अच्छे Leaders केवल बड़े सपने नहीं देखते, बल्कि उन सपनों को जमीन पर उतारते हैं।
जैसे कोई सोच भी नहीं सकता था कि हर नागरिक तक बैंक की सुविधा पहुंचेगी। लेकिन मोदी जी ने सोचा भी और करके भी दिखाया। जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए।
UPI ने पैसे के लेन-देन का तरीका ही बदल दिया। आज एक सेकंड में वे UPI से पैसे भेज सकता है और प्राप्त कर सकता है।
मोदी जी ने Technology को बड़े शहरों और दफ्तरों से निकालकर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया है और Technology ने आम आदमी का जीवन आसान बनाया है।
साथियो,
मोदी जी पहले मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के रूप में, लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कभी भी सत्ता को अधिकार नहीं समझा। बल्कि जनता की ओर से मिली जिम्मेदारी माना है। जनता के विश्वास को उन्होंने कभी भी टूटने नहीं दिया है।
इसी का परिणाम है कि पिछले बारह वर्षों में हमारी सरकार के किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है।
प्रधानमंत्री जी के द्वारा कही गई वो बात कि “न खाऊँगा, न खाने दूँगा”, सिर्फ एक नारा नहीं रहा, बल्कि काम करने की संस्कृति का हिस्सा बन गया।
साथियो,
और साथियों इन 25 वर्षों में तो, मोदी जी की अभी सिर्फ Half Inning हुई है, अभी तो उन्हें दशकों भारत की सेवा करनी है।
इसी शुभकामना के साथ, अंत में यही कहना चाहूँगा कि मोदी जी ने सेवा की प्रेरणा दी; अब सेवा का संकल्प हम सबका होना चाहिए। और इस यात्रा से उस संकल्प को एक नयी ऊर्जा मिलेगी, यह मेरा पूरा विश्वास हैं।