Text of RM’s speech at the handing Over ceremony of LCA Tejas FOC Twin Seater Trainers & HTT 40 Basic Trainer Aircraft to IAF and Dhruv NG helicopters to PHL in Bengaluru
आज इस ऐतिहासिक अवसर पर, आप सभी के बीच उपस्थित होना, मेरे लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। आज हम एक साथ तीन important achievements के साक्षी बन रहे हैं। पहला, indigenously designed and developed Dhruv-Next Generation Civil helicopter को DGCA द्वारा Type Certification प्रदान कर handover किया जा रहा है। दूसरा, LCA Final Operational Clearance यानी FOC Trainer के अंतिम batch को Indian Air Force को handover किया जा रहा है। और तीसरा यह, कि आज HTT-40 Basic Trainer series production का पहला Aircraft, Indian Airforce को, handover कर रहे है। मैं इस अवसर पर आप सभी को बधाई देता हूँ।
मेरे साथ आज यहाँ Civil Aviation Minister श्री किंजरापु राममोहन नायडू गारु भी उपस्थित हैं। आज इस कार्यक्रम की सफलता में इनका भी बड़ा योगदान है। मैं इनके सकारात्मक सहयोग के लिए भी इनका आभार व्यक्त करता हूँ।
साथियों, आज का यह दिन केवल एक formal handing-over ceremony भर नहीं है। यह भारत की indigenous aerospace capability, technological self-confidence और आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी प्रगति का एक important milestone है।
आज हम जिन दो उपलब्धियों की चर्चा कर रहे हैं, इन दोनों के ही पीछे एक common national aspiration है। वह Aspiration यह है, कि भारत अपनी aerospace requirements के लिए, capable, self-reliant और globally competitive बने।
साथियों, Aerospace में self-reliant होना समय की जरूरत है। मैं तो चूँकि Physics का student रहा हूँ, इसलिए मेरा वैसे भी Aerospace sector को लेकर विशेष जुड़ाव रहा है। जब से मैंने रक्षा मंत्री का पदभार संभाला है, तब से लेकर आज तक मैंने लगातार हमारी सेनाओं, DPSUs, और खासकर industries के साथ इस sector के ऊपर बात करने का प्रयास किया है। जितने भी stakeholders हैं, उनसे मैंने यह समझने का प्रयास किया, कि किस प्रकार से Aerospace sector में हम तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
आज से लगभग एक दशक पहले की बात करूँ, तो defence sector में projects बड़ी धीमी गति से चलाए जा रहे थे। ज्यादातर चीजों में हम import पर निर्भर हुआ करते थे, चाहे वह technology के sense में हो, चाहे product के sense में हो । Weapons, platform, system, sub-system, इनमें हम import पर dependent थे। उसके बाद, हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, हमने आत्मनिर्भरता के मूल मंत्र के साथ काम करना शुरू किया।
हमने ऐसे कई कदम उठाए, जिससे एक ओर तो हमारे public sector के DPSUs को defence sector में आगे बढ़ने का मौका मिला, तो वहीं दूसरी ओर, हमने private industry को भी प्रोत्साहित किया, ताकि उनको level playing field मिल सके। और इसी का परिणाम है, कि आज हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
जिस तरह से हम एक प्रक्रियागत तरीके से, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, उसी तरह हमें aerospace sector में भी आगे बढ़ना होगा। क्योंकि aerospace systems के development में, अचानक से कोई big bang नहीं आ सकता। एक साथ ही सारी चीजें नहीं हो सकतीं। यह एक बहुत बड़ा, और gradually चलने वाला process है। इसमें हमको कई प्रकार के components देखने पड़ते हैं।
कहने का मतलब यह है, कि इसमें जितने भी products हैं, जितने भी components हैं, ये सब एक लंबी सीढ़ी के छोटे-छोटे सोपान होते हैं। हमें एक-एक step करते हुए आगे बढ़ना है। अब जाहिर सी बात है, कि अगर इतने सारे steps होंगे, तो उनमें बहुत सारे challenges भी होंगे। लेकिन उन challenges को भी, हमें एक बड़े road map का milestones मानना होगा, तभी जाकर हम Aerospace sector जैसे complex और crucial sector में बढ़त हासिल कर पाएंगे।
साथियों, यदि आज के event की मैं बात करूँ, तो मैं इस मंच से Dhruv-NG की उपलब्धि के लिए, HAL और उसके पूरे team को बधाई देता हूँ। मुझे बताया गया, कि पहली बार off-shore operations के लिए, ONGC द्वारा एक indigenous helicopter इस्तेमाल किया जाएगा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही, इसमें DGCA certification प्राप्त indigenous Shakti Engine का integration, भारत की indigenous aerospace capability को और मजबूत कर रहा है।
साथियों, आप सब तो Aerospace से जुड़े हुए लोग हैं, इसलिए आप सबको तो यह बताने की जरूरत ही नहीं है, कि aviation में certification का बहुत ही महत्वपूर्ण role होता है। एक modern helicopter को भी, commercial और civil operations के लिए स्वीकार्य बनाने के लिए, stringent certification requirements को fulfil करना पड़ता है।
लगातार testing होने के बाद ही certification मिलता है। उसके बाद final product हम बाहर निकालते हैं। और आने वाले समय में जब हम इसका बड़े स्तर पर production करेंगे, तो यह जो mechanism है, जो machines हैं, ये न केवल हमारे देश की सुरक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी, बल्कि हमारी economy और हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान में भी बढ़ोत्तरी करेंगी।
साथियों, आज के आयोजन का एक और महत्वपूर्ण aspect है, और वह है Civil aviation और defence aerospace capabilities के बीच बढ़ती synergy का। एक मजबूत aerospace industry का विकास, केवल defence requirements को fulfil करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें ऐसा ecosystem विकसित करना है, जो civil और military aviation, दोनों sectors की requirements को effectively address कर सके।
जब देश में aircraft design, avionics, propulsion, composite materials, flight control systems, manufacturing और certification जैसी capabilities विकसित होती हैं, तो उनका benefit पूरे aerospace sector को मिलता है। इसलिए हमें एक ऐसा integrated aerospace ecosystem बनाना है, जो हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। और मुझे पूरा विश्वास है, कि अपनी सामूहिक शक्ति से, हम ऐसा करने में जरूर सफल होंगे।
साथियों, आज का दूसरा important milestone, LCA FOC Trainer की अंतिम batch को Indian Air Force को hand over किया जाना है। यदि Dhruv-NG हमारी indigenous civil aerospace capability का उदाहरण है, तो LCA FOC Trainer, भारत की indigenous military aerospace capability और fighter aircraft ecosystem की maturity का प्रतीक है।
LCA को CEMILAC द्वारा Final Operational Clearance दिया गया है। यह हमारे certification process के लिए भी, एक बड़ा milestone है। आपमें से बहुत लोगों को पता भी होगा, कि LCA programme भारत की aerospace journey के सबसे ambitious और challenging programmes में से एक रहा है। वैसे भी Modern fighter aircraft का indigenous development अत्यंत complex undertaking है। इसके लिए अनेक प्रकार की sophisticated technologies में competence की आवश्यकता होती है। भारत ने इस journey में, न केवल एक fighter aircraft develop किया है, बल्कि एक comprehensive national aerospace knowledge और technology ecosystem विकसित किया है।
साथियों, इस तरह से indigenously चीज़ें develop करना, भारत के लिए समय की जरूरत है। क्योंकि आज warfare का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। भविष्य में air operations, information-intensive और technology-driven होंगे। ऐसे environment में combat effectiveness को, well-trained personnel, advanced technology, integrated systems और rapid decision-making इत्यादि का combination ही ensure कर पाएगा। LCA FOC Trainer, हमारे pilots को इसी demanding operational environment के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण contribution देगा।
यदि HTT-40 की बात की जाए, तो आप सब यह तो जानते ही होंगे, कि हर fighter pilot का सफ़र किसी frontline jet से नहीं, बल्कि एक basic tranier से शुरू होता है। जहाँ उन्हें discipline सिखाया जाता है, basic knowledge बेहतर की जाती है। कई सालों तक, ये basic training facilities, imported aircraft के सहारे पूरी होती थी I चाहे व Hawk trainer हो या Pilatus aircraft, इनके import से हमारी निर्भरता बढ़ गई थी। लेकिन अब Hindustan Aeronautics Limited ने HTT-40 का indigenously निर्माण कर लिया गया है और इसकी series production का पहला aircraft आज IAF को handover भी किया गया है। इसमें modern avionics और safety features हैं, जो हमारी training की जरूरतों के अनुकूल हैं। और सबसे बड़ी बात, कि अब इस मामले में विदेशों पर हमारी निर्भरता भी खत्म होगी। और HTT-40 के मामले में एक अच्छी बात यह भी है, कि अपने features के दम पर, यह aircraft, export की possibilities भी रखता है। आने वाले समय में निश्चित रूप से, दुनिया भर में इसकी demand होने वाली है। मुझे पूरा विश्वास है, कि यह अपने सारे purposes को fulfill करेगी। यह एक तरह से, भारत के पूरे aerospace ecosystem की, capability का recognition है।
साथियों, अब तक हमने जो प्रयास किये हैं, हम उनमें सफल रहे हैं। जैसे, AMCA, LCA Mk-II, aero engine development, इन सब पर कार्य हो रहा है। ठीक ऐसे ही, मुझे पूरा विश्वास है, कि aerospace technology के self-reliance के प्रयासों में भी, हम लोग पूरी तरह से आने वाले समय में आत्मनिर्भर होंगे।
मैं इस अवसर पर HAL की प्रशंसा करना चाहूँगा। आपने भारत के aerospace capability-building journey के अपने आपको एक important pillar के रूप में स्थापित किया है। HAL ने aircraft manufacturing, helicopter development, overhaul, repair, maintenance और aerospace engineering में valuable capabilities develop की हैं। लेकिन यह भी एक सत्य है, कि आज की requirement इससे आगे की है। हमें HAL को एक ऐसे organisation के रूप में देखना होगा, जो design, development, manufacturing, certification, lifecycle support और global marketing, इन सभी क्षेत्रों में world-class capability को demonstrate करे।
परन्तु कुछ मुद्दे हैं जिनपर हमें काम करने की आवश्यकता है I एक अहम् मुद्दा delays का है। अलग-अलग कारणों से, technological कारणों से, कई जो हमारे technical projects चल रहे होते हैं, वो delays का सामना कर रहे होते हैं। इन delays को हमको गंभीरता से लेना है। इन delays की वजह से हमारी जो crucial defence requirements हैं, उनमें gap बनते हैं, उनकी requirements पूरी नहीं हो पातीं। इसके अलावा ये delays हमको cost escalation के लिए भी मजबूर करते हैं। जितना delay होता जाएगा, उतनी उसकी cost बढ़ जाएगी। कई बार ऐसा महसूस होता है, कि जब तक हम एक particular technology के रूप में, वह equipment हासिल कर पाते हैं, उनका production कर पाते हैं, तब तक कई बार होता है, कि दुनिया में कहीं न कहीं, उससे बेहतर technology आ चुकी होती है। जिसे आप सब technology obsolescence के नाम से भी जानते हैं I यानी जो हमने बनाया, वह हमारे हाथ में आते ही outdated हो चुका होता है।
तो इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए, जो project की हमारी timeline है, उसे हमको realistic रखना होगा। इसके लिए हमारे जो business processes हैं, अगर उनको re-engineering करने की जरूरत पड़ रही है, नए तरीके से सोचने की पड़ रही है, तो मेरी आप लोगों से appeal है, कि आप लोग उस पर गंभीरता से ध्यान दें।
जहाँ तक R&D का प्रश्न है, तो वह भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। उस पर भी आप लोगों को ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन मैं समझता हूँ, कि R&D एक ऐसा sector है, जहाँ अकेला व्यक्ति भी चमत्कार कर सकता है। कई बार देखता हूँ कि अकेला व्यक्ति भी R&D में बड़ा कमाल कर जाता है। और यही R&D की ताकत है। हमें अपने young scientists, engineers, designers, test pilots और technicians को प्रोत्साहित करना चाहिए, कि वे ऐसी technologies create करें, जो आज exist नहीं करतीं।
हमारे young scientists, engineers, designers, test pilots और technicians को आज एक challenge देना चाहता हूँ, “To create technologies that do not exist today.” आपको ऐसी capabilities develop करनी हैं,जो भारत को आने वाले दशक में global aerospace technology landscape में एक leading position प्रदान करें।
अंत में, मैं एक और महत्वपूर्ण बात कहना चाहूँगा, वह यह कि, अब समय है कि हम public versus private को competition के रूप में न देखें, बल्कि public and private sector को एक दूसरे के supplement के रूप में देखें।
यहाँ पर Air chief Marshal A.P. Singh उपस्थित हैं। आप अभी तो Indian Airforce जैसे organisation की piloting कर ही रहे हैं, आप एक अच्छे test pilot भी रहे हैं। आपके कार्यकाल में इस प्रकार के initiatives के लिए मैं आपको बधाई देता हूँ।
यहाँ पर Secretary, Civil aviation समीर सिन्हा उपस्थित हैं। आपका रक्षा मंत्रालय से पुराना नाता रहा है। पूर्व में आपने DG acquisition का पदभार संभाला है, और वर्तमान में young, और dynamic leader, Civil Aviation Minister नायडू गारू के नेतृत्व में aviation सेक्टर में भी, आप अपना सराहनीय योगदान दे रहे हैं। मैं आपकी भी प्रशंसा करता हूं।
मैं इस अवसर पर Department of Defence Production के Secretary, श्री संजीव कुमार जी, और Hindustan Aeronautics Limited के chairman, Shri Ravi Kota जी को इन उपलब्धियों पर बधाई देता हूँ। मैं आपको भविष्य की योजनाओं के लिए शुभकामनाएँ भी देता हूँ।
Aeronautical Development Agency, जिनकी, aircraft की design में बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है, मैं आपकी भी सराहना करता हूँ, और भविष्य के आपके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें, कि हम भारत को aerospace technology के क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि विश्व का अग्रणी देश बनाएँगे। इसी आशा और विश्वास के साथ, मैं अपना निवेदन समाप्त करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।