Text of RM’s speech at the ‘Aaj Tak Suraksha Sabha’ in New Delhi.
साथियो,
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया में, ‘आज तक’ चैनल की विशेष पहचान रही है। वर्षों से ‘आज तक’ ने देश-दुनिया की घटनाओं से लोगों को अवगत कराने का काम किया है। साथ ही, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श बढ़ाने का भी सराहनीय प्रयास किया है।
आज की इस ‘सुरक्षा सभा’ का आयोजन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यहाँ आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
मुझे बताया गया है कि आज देश की सुरक्षा को लेकर यहाँ पूरे दिन चिंतन और मंथन हुआ है। मैं सुप्रियो प्रसाद जी और उनकी पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए बधाई देता हूं।
मैं आशा करता हूँ कि ‘आज तक’ आने वाले वर्षों में भी राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर, ऐसे ही सार्थक चर्चाओं का आयोजन कराता रहेगा।
साथियो,
भारत की रक्षा नीति के संदर्भ में, लंबे समय तक, कुछ रक्षा विशेषज्ञ एक Term का इस्तेमाल करते थे। वह Term था ‘पानीपत सिंड्रोम’। दरअसल, यह भारत की रक्षा नीति पर एक कटाक्ष था।
इसका आशय था कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर Active नहीं, बल्कि Reactive रहा है। यानी, भारत तब तक कोई Action नहीं लेता था, जब तक कि खतरा बिल्कुल सिर पर न आ जाए।
लेकिन, आज यह सोच बदल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अब भारत की रक्षा नीति Reactive नहीं रही है, बल्कि Active से भी एक कदम आगे बढ़कर Pro-active हो गई है।
मैं आपको इसका एक उदाहरण देता हूँ। भारत 2016 से पहले Missile Technology Control Regime (MTCR) का सदस्य नहीं था। जिसके कारण हम ब्रह्मोस मिसाइल की Range एक सीमा से आगे नहीं बढ़ा सकते थे।
लेकिन मोदी जी की सक्रिय Diplomacy और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण हम MTCR के सदस्य बने। उसके बाद ब्रह्मोस की रेंज बढ़ाने पर काम हो पाया।
और आपको पता ही होगा कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल की क्या भूमिका रही है? अभी हाल ही में, मैं एक विडिओ देख रहा था जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खुद स्वीकार कर रहे थे कि ब्रह्मोस ने पाकिस्तान में कितना कहर बरपाया था।
साथियो,
सीमाओं की सुरक्षा बेहतर करने की बात हो, या सेनाओं का Modernisation करने की बात; रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना हो, या Ordnance Factories का कायाकल्प करना हो; हमने सभी मोर्चों पर काम किया है।
और आज इसी का परिणाम है कि भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बना है, और आत्मविश्वासी भी। आप सोचिए UPA सरकार के कार्यकाल में Indigenous Defence Production लगभग 40,000 करोड़ रुपये के आस पास था। लेकिन आज यह लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
आज हम 100 से अधिक देशों को लगभग 38,500 करोड़ रुपये का Defence Export कर रहे हैं। यानी 2014 से पहले जितना हमारा Defence Production था, उतना तो लगभग आज हम सिर्फ Export कर रहे हैं।
हमने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में Licensing Rules सरल किए हैं। Defence Acquisition Procedure (DAP) के माध्यम से स्वदेशी सिस्टम्स को प्राथमिकता दी है।
आज हमारी सेनाओं के पास स्वदेशी Air Defence Control System ‘आकाशतीर’ है। Next Generation Air Defence Missile ‘आकाश’ है। हमारे पास Pinaka Rocket Launcher है। Air-to-Air missile ‘अस्त्र’ है। प्रचंड और ध्रुव जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टर हैं। तेजस लड़ाकू विमान है। अर्जुन टैंक है। आधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम हैं। और भारत का पहला स्वदेशी Aircraft Carrier INS विक्रांत भी भारतीय नौसेना में शामिल हो गया है।
यानी यह कहा जा सकता है कि भारत की रक्षा नीति अब तथाकथित ‘पानीपत सिंड्रोम’ से नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और परिपक्वता से परिभाषित होती है।
साथियो,
यह बहुत ही Well-Documented Fact है कि 2014 से पहले Defence Deals में बहुत भ्रष्टाचार था। कुछ लोग चंद रुपयों के लिए देश की सुरक्षा तक दांव पर लगा देते थे। 2014 से पहले देश ने बोफोर्स घोटाला देखा। HDW पनडुब्बी घोटाला देखा। टाट्रा ट्रक घोटाला देखा। अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला देखा।
गौर करने वाली बात है कि पिछले 12 वर्षों में भारत का रक्षा बजट ढाई लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग आठ लाख करोड़ रुपये हो गया है। लेकिन आज तक एक पाई भी इधर से उधर नहीं हुई है। पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ एक-एक रुपया भारत की सुरक्षा को मजबूत करने में लगा है।
साथियो,
National Interest की रक्षा करना, किसी भी देश की सुरक्षा नीति और विदेश नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के एक बड़े विद्वान हान्स मोर्गेंथ्यू (Hans Morgenthau) ने माना है कि National Interest का मतलब है देश की सीमा की सुरक्षा। देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा। और देश की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना।
हमारी सरकार ने इन सभी मोर्चों पर काम किया है। आज Border Infrastructure पर Investment 400 प्रतिशत तक बढ़ गई है। Article 370 हटाकर भारत की Integrity और Sovereignty को और अधिक मजबूत किया गया है।
जहां तक भारत की सांस्कृतिक पहचान की बात है, तो हमने उसे सुरक्षित ही नहीं किया है बल्कि भारत की ताकत बनाया है। आज पूरी दुनिया ‘योग दिवस’ मना रही है। नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से वैश्विक ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ऐसा भी कहा जा सकता है कि भारत एक Civilizational Leader बनकर उभरा है। आप सोचिए, आज भारत International Solar Alliance और Global Biofuels Alliance जैसे Initiative के माध्यम से विश्व को नेतृत्व प्रदान कर रहा है।
आज दुनिया में ऐसा कोई मंच नहीं है, जहां भारत की बात न सुनी जाती हो। 2019 से लगातार भारत को G-7 की बैठकों में आमंत्रित किया जा रहा है। 2023 में हमने G-20 की अध्यक्षता की थी। उस दौरान दुनिया में बहुत मतभेद थे। लेकिन फिर भी हमने सर्वसम्मति से New Delhi Leaders’ Declaration पारित कराया।
Voice of Global South Summit और MAHA-SAGAR जैसे Initiatives के माध्यम से भारत विकासशील देशों की आवाज़ को नई ताकत दे रहा है। जब हमारे पड़ोसी देशों पर कोई संकट आता है तो, भारत First Responder के रूप में सबसे पहले सहायता के लिए पहुँचता है।
यानी यह कहा जा सकता है कि भारत के पास Diplomatic Access भी है और Diplomatic Leverage भी है।
साथियों,
मैं मानता हूँ कि राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक सुरक्षा की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आर्थिक मजबूती केवल विकास का आधार ही नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला भी है।
जिस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, वही आधुनिक सैन्य क्षमताओं में निवेश कर सकता है और संकट के समय अपनी Strategic Autonomy बनाए रख सकता है।
आज पूरी दुनिया में आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। ऐसी परिस्थिति में भी भारत 7.8 % के Growth Rate के साथ आगे बढ़ रहा है। हमने Supply Chains को मजबूत किया है। Critical Sectors में आत्मनिर्भरता बढ़ाई है और स्वदेशी Manufacturing को बढ़ावा दिया है। आज भारत अपना Semiconductor Ecosystem खड़ा कर रहा है। इसी तरह Production Linked Incentive Scheme के जरिए बहुत से क्षेत्रों में Manufacturing को बढ़ावा दिया गया है।
साथियो,
आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं। पूरी दुनिया में बहुत से देश Sides चुनने को मजबूर हैं। किसी न किसी Blocs का हिस्सा बनने के लिए मजबूर हैं।
लेकिन भारत Independent Agency और Strategic Autonomy के साथ आगे बढ़ रहा है। यानी भारत अपनी प्राथमिकताएं खुद तय कर रहा है। आज जब भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है।
साथियो,
किसी भी देश की सुरक्षा मुख्यत तीन चीजों पर निर्भर होती है: राष्ट्रीय नेतृत्व की सोच, संसाधनों की उपलब्धता और सेनाओं का सामर्थ्य।
भारत की सेनाओं का सामर्थ्य और जवानों का साहस, हमेशा दुनिया के सामने मिसाल रहा है। 2014 से पहले कमी अगर कहीं थी, तो एक ऐसे राजनीतिक नेतृत्व की जो सेनाओं को खुला हाथ दे और संसाधनों की कमी न होने दे।
हमारे सैनिक हमेशा भारत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार रहे हैं। उनका शौर्य और युद्ध-कौशल अद्वितीय है। लेकिन कांग्रेस की सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश के जवानों के हाथ बांध दिए थे।
याद कीजिए, जब मुंबई पर आतंकवादी हमला हुआ, तो पूरे देश में कितना गुस्सा था। देश के सभी लोग न्याय चाहते थे। भारत की सेनाएं और जवान इसके लिए तैयार थे। लेकिन उस समय की सरकार सिर्फ डॉजियर दिखाती रह गई।
लेकिन, हमने अपने जवानों को खुली छूट दी है। हमने अपनी सेनाओं से कहा, “कृते प्रति कृतिं” यानी जो जैसा करे, उसके साथ वैसा ही करो।
मोदी जी के नेतृत्व में हमने सेनाओं को पर्याप्त संसाधन दिए है। और हमारी सेनाओं को जब स्वतंत्रता और संसाधन मिले तो, उन्होंने किसी बात की चिंता किए बिना, दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारा।
साथियों,
साल 2014 में, प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जब हमारी सरकार बनी, तो हमारे सामने कई चुनौतियां थीं। जैसे कि सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले बहुत लंबे समय से लटके पड़े थे।
हमारे देश में Defence Manufacturing से ज्यादा Import पर जोर था। और सबसे बड़ी चुनौती थी कि भारत को अपनी क्षमताओं पर विश्वास नहीं था।
आज यह सब बदल चुका है। आज हम Missiles भी बना रहे हैं और Drones भी। बड़े-बड़े Ships भी बना रहे हैं और छोटे-छोटे Screws भी। हम सिर्फ़ 5th Generation Fighter Jets ही नहीं, बल्कि 6th Generation Fighter Jets बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
आज हमारा Defence Export लगभग 56 गुना बढ़ा है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक भारत का Defence Export, 50 हज़ार करोड़ रुपए पहुँच जाये। और जिस गति से हम आगे बढ़ रहे हैं यह होकर ही रहेगा।
भारत में आज Defence Manufacturing का Ecosystem पूरी तरह बदल चुका है। अभी पिछले सप्ताह ही मैंने सभी 16 Defence Public Sector Undertakings (DPSUs) का Review किया है।
आज एक भी DPSU घाटे में नहीं है। सभी DPSUs नई ऊर्जा के साथ काम करते हुए रिसर्च और डेवलपमेंट पर अपना खर्च लगातार बढ़ा रही हैं। और निर्यात के नए अवसर तलाश कर रही हैं।
आज केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, 16,000 से अधिक MSMEs भी रक्षा उत्पादन कर रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में Defence Manufacturing हो रही है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के Defence Industrial Corridors में अब तक करीब 70,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं और लगभग 10,000 करोड़ रुपये निवेश हो भी चुका है।
साथियों,
iDEX और iDEX – Prime जैसी योजनाओं के माध्यम से हम Defence Innovations को बढ़ावा दे रहे हैं। साल 2018 में जहाँ रक्षा क्षेत्र में कुछ दर्जन स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या दो हजार से अधिक हो चुकी है। यानी आज भारत के युवा भारत की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं।
मैं युवाओं से हमेशा से कहता हूँ कि आप केवल नौकरी खोजने वाले मत बनिए। आप नौकरी देने वाले बनिए। और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इसमें आपको जो भी सहायता या संसाधन चाहिए, वह सब हम आपको देंगे।
मैं ‘आज तक’ के माध्यम से सभी युवाओं से कहता हूँ कि रक्षा मंत्रालय के द्वार आप सभी के लिए खुले हैं। यदि आपके पास अच्छा Idea है, तो आप कभी भी मुझसे आकर मिल सकते हैं।
साथियों,
आज DRDO, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों को एक साथ जोड़ रहा है। इस साल मई में DRDO ने Scramjet Combustor का भी सफल परीक्षण किया है। यह दुनिया की सबसे जटिल रक्षा तकनीकों में से एक है। और इससे हम हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की दिशा में आगे बढ़े हैं।
अभी पिछले महीने ही हमने यह निर्णय लिया है कि DRDO द्वारा विकसित Conventional Missile Systems की Technology, Indian Industries को भी Transfer की जाएगी।
यानी अब हमारे देश की प्राइवेट कंपनियां मिसाइल का उत्पादन कर सकेंगी। और भारतीय सेनाओं को मिसाइल्स की और भी समय से डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी।
साथियो,
भारत के दुश्मन भारत की सुरक्षा को कमजोर करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद, चार तरीकों का इस्तेमाल करते रहे हैं। जैसे कश्मीर में युवाओं को बहकाते थे। Anti-Indian Activities के लिए खूब Funding की जाती थी। हिंसा और आतंक फैलाया जाता था। समाज में फूट और दरार पैदा करने की कोशिश की जाती थी। जैसे पहलगाम में धर्म पूछ-पूछकर लोगों को मारा गया।
ऐसा लगता था कि हम खुद आचार्य चाणक्य का और भारत का पारंपरिक ज्ञान भूल गए थे। लेकिन 2014 के बाद से हमने चारों मोर्चों पर जवाब देने का काम किया है।
पहले, हमने राह भटक चुके, लेकिन सुधर सकने वाले, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। दूसरा, उनको Rehabilitate और De-radicalise करके, रोजगार और कारोबार से जोड़ा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से तो जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व विकास हुआ है। और वहाँ का युवा भी आज बहुत खुश है क्योंकि उसे नई-नई Opportunities मिल रही हैं।
तीसरा, हमने दंड का भी प्रयोग किया। Surgical Strikes, Balakot Airstrike और Operation Sindoor में हमारी सेनाओं ने आतंकवादियों और उनके आकाओं को ख़ाक में मिलाने का काम किया।
इसी तरह हमने Indus Waters Treaty, Suspend करके, पाकिस्तान का दाना-पानी बंद कर दिया। और यह संदेश दिया कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते हैं।
चौथा, हमने भारत में फूट डालने की कोशिश भी नाकाम की है। जैसे भारत की एकता और सामाजिक सद्भाव को तोड़ने के लिए पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हिन्दू मंदिर, सिख गुरुद्वारा, और Christian Convent को निशाना बनाया।
यह एक सोची-समझी साजिश थी। लेकिन भारत के लोगों ने इस मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया। हम सभी सबसे पहले और सबसे अंत में भी, भारतीय ही हैं। यानी Indian First, Indian Last.
साथियों,
आज युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। Land, Air, Sea, के साथ-साथ Space और Cyber भी युद्ध के नए मैदान बन रहे हैं। AI, Drones, Autonomous Systems और Precision Weapons System का प्रयोग बढ़ रहा है।
यानी भविष्य में सुरक्षा का क्षेत्र और युद्ध का मैदान और भी ज्यादा Technology-Driven होगा। इसीलिए, आज मोदी जी के नेतृत्व में, भारत की Defence Strategy को Future-ready बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
हम इस बात पर भी Focus कर रहे हैं कि आने वाले सभी बदलावों के लिए हमारा सुरक्षा तंत्र तैयार हो। और हम इस दिशा में काम कर रहे हैं कि भारत Technology को Import न करे। बल्कि भारत खुद Technology, Develop करे।
साथियो,
यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत शांति में विश्वास करता है। भारत युद्ध नहीं चाहता है। भारत किसी देश की जमीन पर कब्जा करना नहीं चाहता है। लेकिन, शांति और कमजोरी में अंतर होता है।
मैं मानता हूँ कि वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराए, वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए।
हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई देश भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद को बढ़ावा देगा तो फिर डायलॉग नहीं होगा। फिर भारत की सेनाएं, उसका जवाब देंगी।
मैं समझता हूँ कि ‘आज तक’ की इस सुरक्षा सभा के माध्यम से यह संदेश फिर से दुनिया को जाएगा।
साथियो,
इस सभा से, आज एक और संदेश जाना चाहिए। जब-जब कोई देश समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ा है और ज्यादा सभ्य हुआ है, तब-तब उसका चरित्र भी उदार हुआ है। वहाँ कला और संस्कृति का भी विकास हुआ है। लेकिन अक्सर इस Evolution में, उस देश के लोगों में Fighting Spirit कमज़ोर पड़ने लगती है। इसका फायदा बाहरी आक्रांता और लुटेरे उठाते हैं। भारत के इतिहास में भी हमने यह कई बार देखा है।
इसलिए, आज जब हम विकसित राष्ट्र बनने की ओर आगे बढ़ रहे हैं तब यह याद रखना आवश्यक है कि हमारी Fighting Spirit कमज़ोर न हो। हमें देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा और सम्मान के लिए सदैव तत्पर रहना है। क्योंकि सुरक्षा के बिना समृद्धि हमेशा खतरे में रहती है।
साथियो,
भारत का लक्ष्य केवल Defence Sector में आत्मनिर्भर बनना ही नहीं है। हम एक ऐसा Defence Ecosystem तैयार कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा को मजबूत करे, अर्थव्यवस्था को गति दे और Global Security Architecture में भारत की भूमिका को और मजबूत बनाए।
अंत में, मैं यही कहूँगा कि जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक विकसित देश ही नहीं होगा। बल्कि वह Technology, Economy, Defence; और ऐसे विभिन्न क्षेत्रों में आत्मविश्वास के साथ दुनिया को नेतृत्व भी प्रदान करेगा।
मैं एक बार फिर से ‘आज तक’ की पूरी Team को इस आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। और इन्हीं शब्दों के साथ, अपनी बात समाप्त करता हूँ।
धन्यवाद!