भारत सरकार और HAL द्वारा Production Capacity बढ़ाने की दिशा में भी, महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं: रक्षा मंत्री

आज, Hindustan Aeronautics Limited  के Koraput Division में, आप सबके बीच आना, मेरे लिए बड़े ही हर्ष और गौरव का विषय है। HAL Koraput द्वारा 2,000वें Aero-Engine की Delivery तथा Shakti Engine की 2nd Manufacturing Line तथा, आपकी राष्ट्रसेवा की गौरवपूर्ण यात्रा के लिए, मैं आपको और देशवासियों को बधाई देता हूँ।

साथियों, आज का अवसर, हमारे लिए केवल numbers का celebration नहीं है। इन 2,000 Engines की delivery का अर्थ है, हमारी Armed Forces की Operational Capability में 2,000 महत्वपूर्ण contributions. यह हमारी अनेक पीढ़ियों के Engineers, Technicians, Supervisors, Scientists और Skilled Workers की प्रतिबद्धता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का परिणाम है।

आज इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी जी भी हमारे बीच उपस्थित हैं। मैं उनका और ओडिशा सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। Koraput में HAL का यह केंद्र और Visakhapatnam में विकसित हो रहा Defence, Naval और Shipbuilding Ecosystem, दोनों मिलकर पूर्वी भारत के लिए, एक नई औद्योगिक और रणनीतिक पहचान बनेंगे।

साथियों, वर्ष 1964 में, अपनी स्थापना के बाद से ही HAL Koraput, भारत की Aero-Engine Capability के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। यहाँ निर्मित और Supported Engines ने MiG-21, MiG-27, MiG-29 और Su-30MKI जैसे Frontline Aircraft को शक्ति प्रदान की है। इसलिए 2,000वें Engine की उपलब्धि, केवल HAL के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की Aerospace Journey का भी एक महत्वपूर्ण Milestone है।

मुझे यह जानकर भी बड़ी खुशी हुई, कि इस Division द्वारा 9,000 से अधिक Engines का Overhaul किया जा चुका है। Overhauling, किसी भी स्तर पर, Production से कम महत्त्वपूर्ण नहीं होता। Production, एक Aircraft को नई Capability प्रदान करता है। वहीं, Overhaul एक Aircraft को नई जीवन-क्षमता प्रदान करता है, और Military Preparedness के लिए दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

इसी संदर्भ में, Ministry में HAL Koraput द्वारा engines के Repair और Overhaul से संबंधित Files जब नियमित रूप से हमारे समक्ष आती हैं, तो हमें इस capability के वास्तविक महत्व का अनुभव होता है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि HAL Koraput ने ऐसे अत्यंत specialised कार्यों के लिए देश में एक मजबूत और विश्वसनीय capability विकसित की है। Components के indigenisation से लेकर turnaround time में सुधार तक, HAL द्वारा किए जा रहे ये प्रयास हमारी Armed Forces की operational readiness को भी मजबूत कर रहे हैं। मैं HAL Koraput के सभी Engineers, Technicians और पूरी team को उनके dedication, technical expertise और इस महत्वपूर्ण national capability को निरंतर मजबूत करने के लिए विशेष रूप से बधाई देता हूँ।

वैसे तो आप सभी Aerospace sector से नज़दीकी से जुड़े हुए हैं। इस sector की संभावनाओं के बारे में भी आप सभी भली-भांति परिचित हैं। लेकिन साथियों, बदलते हुए इस दौर में हमें एक बात को और गहराई से समझना होगा, आखिर Aero-Engine Sector इतना महत्वपूर्ण क्यों है? और आखिर क्यों, Aero-Engine Sector में महारत हासिल करना हमारे लिए जरूरी है।

साथियों, किसी Aircraft में Advanced Airframe हो सकता है, Sophisticated Radar हो सकता है, Powerful Weapons और Advanced Avionics हो सकते हैं। लेकिन इन सारी क्षमताओं को आकाश में प्रभावी रूप से उपयोग में लाने के लिए Propulsion का होना आवश्यक है। इसलिए कहा जाता है कि Engine किसी भी Aircraft का Heart है।

और साथियों, जैसा कि आप जानते हैं, कि Aero-Engine कोई सामान्य Machine नहीं है। यह मानव द्वारा निर्मित सबसे Complex Machines में से एक है। इसकी जटिलता को आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं। Modern Gas-Turbine Engines में, High-Pressure Turbine में प्रवेश करने वाली Gas का Temperature बहुत अधिक होता है। यह Turbine Blades में प्रयुक्त Materials के Melting Temperature से भी अधिक हो सकता है।

अब सवाल उठता है कि जब Temperature इतना अधिक है, तो Turbine Blades काम कैसे करती हैं? यह संभव होता है Advanced Superalloys, Thermal-Barrier Coatings और अत्यंत Sophisticated Cooling Technology के संयोजन से। यानी एक Aero-Engine के पीछे केवल एक Technology नहीं, बल्कि कई अत्याधुनिक Technologies एक साथ काम करती हैं।

एक और महत्वपूर्ण तथ्य है। एक Modern Aero-Engine में दसियों हजार Precision-Engineered Components और Parts हो सकते हैं। और इन Components में से प्रत्येक को अत्यधिक Temperature, Pressure, Vibration और Rotational Speed में विश्वसनीय ढंग से कार्य करना होता है।

साथियों, High-Speed Rotating Component में एक अत्यंत छोटी गलती भी कहीं अधिक गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है। इसलिए Aero-Engine Manufacturing केवल Mechanical Engineering तक सीमित नहीं है। यह Metallurgy, Precision Manufacturing, Materials Science, Testing और Quality Assurance जैसी अनेक अत्याधुनिक तकनीकों का संगम है। और यही बात Aero-Engine Sector को इतना महत्वपूर्ण बनाती है।

इन सभी कारणों से एक मूलभूत सत्य हमारे सामने स्पष्ट होता है, Aero-Engine पर Mastery का अर्थ है, आधुनिक Industry की कुछ सबसे Advanced Technologies पर Mastery प्राप्त करना। पूरे विश्व में कुछ ही देश हैं, जो यह हासिल कर पा रहे हैं। और भारत उनमें से एक है।

साथियों, Aerospace क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के जिस रास्ते पर हम चल पड़े हैं, वह केवल Aircraft बनाने तक सीमित नहीं है। जब हम उसके सबसे Complex और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक Aero-Engine पर भी अपनी क्षमता और Mastery स्थापित करेंगे, तब जाकर हम सही मायनों में आत्मनिर्भरता हासिल कर पाएंगे। आप सभी हमारे 5th Generation Fighter Advanced Medium Combat Aircraft यानि AMCA Programme के बारे में अवगत होंगे I AMCA का एक critical component है उसका High-Thrust Engine I AMCA को पूरी तरह indigenize करने में यहाँ बन रहे engines की technical know-how, बहुत कारगर साबित होगी I मुझे, यहाँ Indigenous High-Thrust Engine Capability विकसित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों को देखकर प्रसन्नता है।

आज के कार्यक्रम में उल्लिखित लगभग ₹5,000 करोड़ के Investment की दिशा में किए जा रहे प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। MIDHANI के साथ Partnership में Raw Materials के Indigenisation की दिशा में किए जा रहे प्रयास भी equally important हैं।

Indigenous Expertise का उपयोग करते हुए, भारत की पहली High-Thrust Engine Testing Facility की स्थापना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। क्योंकि एक Engine Ecosystem केवल एक Assembly Line से नहीं बनता। बल्कि इसके लिए हमें, Indigenous Materials, Design, Processes, Testing Facilities, तथा Indigenous MRO Capability इत्यादि चाहिए। तभी हम कह सकेंगे, कि हमने वास्तव में Sovereign Aerospace Capability का निर्माण किया है।

साथियों, मैं Su-30MKI के लिए AL-31FP Engines के Production में, HAL Koraput की Team द्वारा, दिखाई गई commitment की भी सराहना करना चाहूँगा। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने HAL को 240 AL-31FP Engines का Order दिया। Global Supply-Chain Disruptions और Raw Materials से संबंधित चुनौतियों के बावजूद, पहला Engine निर्धारित समय से पहले Deliver किया गया। दूसरे वर्ष के अंत तक 60 Engines के Target के मुकाबले उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, अब तक 63 Engines Deliver किए जा चुके हैं।

यह दिखाता है, कि जब Engineering Capability को Sense of Urgency और National Mission की भावना के साथ जोड़ा जाता है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। मैं HAL से अपेक्षा करता हूँ, कि वह इस Culture को बनाए रखे। क्योंकि जब कोई Engine Combat Aircraft को Power देता है, तब Production में बचाया गया प्रत्येक दिन, Operational Availability में जुड़ा हुआ, एक अतिरिक्त दिन होता है।

साथियों, भारत सरकार और HAL द्वारा Production Capacity बढ़ाने की दिशा में भी, महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। HAL द्वारा AL-31FP Engines की Annual Production Capacity को, 30 से बढ़ाकर 50 Engines प्रति वर्ष किया जा रहा है, जिसके लिए 335 करोड़ रूपये का Investment किया जा रहा है। HAL द्वारा Shakti Engines के लिए, दूसरी Production Line भी स्थापित की जा रही है, जिसमें 218 करोड़ रूपये का Investment किया जा रहा है। यह Additional Capacity, Advanced Light Helicopter और Light Combat Helicopter, जैसे Indigenous Helicopters की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करेगी।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के Helicopter Ecosystem को केवल Airframes ही नहीं, बल्कि Reliable Indigenous Propulsion की भी आवश्यकता है। हमारी Armed Forces को ऐसे Engines चाहिए, जो आवश्यकता के समय उपलब्ध हों, उनके पूरे Lifecycle में Supported रहें, और Technology के विकसित होने के साथ Upgrade किए जा सकें।

साथियों, हमें चुनौतियों के बारे में भी स्पष्ट और यथार्थवादी होना होगा। Aero-Engine Development एक Long-Term Endeavour है। इसके लिए Sustained Investment, Patient Research, Specialised Testing, Highly Skilled Manpower और एक व्यापक Industrial Ecosystem की आवश्यकता होती है।

और हमारी चुनौती केवल एक सफल Prototype बनाने की नहीं है। हमारी चुनौती है Repeatable, Reliable और Scalable Production Capability स्थापित करना। इसलिए मैं HAL और उसके Partners को सुझाव देना चाहूँगा कि वे, Design Capability, Materials, Critical Materials और Superalloys का Development और Production जैसी Priorities पर विशेष ध्यान देंI

इसके अलावा, HAL को MSMEs, Start-ups, Private Industry, Academia और Research Institutions को Propulsion Ecosystem के साथ और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा। Aero-Engine का Development कोई एक Organisation अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए एक National Ecosystem की आवश्यकता होती है।

साथियों, आज हम Koraput में उपस्थित हैं, लेकिन इस स्थान का महत्व केवल इस Facility तक सीमित नहीं है। Odisha का भारत के Defence Ecosystem में एक महत्वपूर्ण और निरंतर बढ़ता हुआ स्थान है। भारत के Eastern Coast पर स्थित Odisha के पास Strategic Geography, एक लंबी Coastline, Ports, Mineral Resources, Engineering Capabilities, Industrial Infrastructure और Skilled Manpower का एक मजबूत आधार है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Odisha में पहले से ही महत्वपूर्ण National Defence और Strategic Infrastructure मौजूद है। चाँदीपुर में DRDO का Integrated Test Range अनेक Missile और Weapon Trials का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वर्ष 2026 में भी Odisha में कई Missile सहित, कई महत्वपूर्ण Defence Testing Activities सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई हैं।

यह Odisha को एक विशिष्ट Strategic Position प्रदान करता है। Odisha भारत के Strategic और Industrial Geography का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है, और HAL Koraput इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि देश के Traditional Industrial Centres से बाहर भी क्या हासिल किया जा सकता है।

मैं मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी जी के नेतृत्व में Odisha Government द्वारा State के Industrial और Aerospace-Defence Ecosystem को मजबूत करने के लिए की जा रहे, recent Initiatives की भी सराहना करना चाहूँगा। Odisha government ने ढेंकानाल के गजमरा में Aerospace and Defence Equipment Manufacturing Complex स्थापित करने को मंजूरी दीI ये Initiatives एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने में सहायक हो सकते हैं, जो Modern Defence Manufacturing के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मैं HAL से भी कहूँगा, कि वो Koraput को केवल एक Engine Production Facility के रूप में न देखें। इसे एक व्यापक Aerospace Propulsion Ecosystem के Nucleus के रूप में विकसित करें, Suppliers को Develop करें, MSMEs को Mentor करें, Young Engineers और Start-ups को Difficult Technology Areas में अवसर दें, Universities और Research Institutions के साथ मिलकर कार्य करें, Local Skilled Youth के लिए Opportunities पैदा करें, और जहाँ भी संभव हो, केवल Complete Engines ही नहीं, बल्कि उनमें प्रयुक्त Critical Components के Manufacturing की Capability भी विकसित करें।

HAL Koraput के प्रत्येक Engineer, Technician, Officer और Worker से मैं कहूँगा कि आप Quality में, Productivity में, Indigenisation में, Innovation में, Delivery Timelines में, और सबसे बढ़कर, Ambition में अपने standards को और भी ज्यादा बढ़ाएँ।

आज के 2,000वें Engine की delivery को हम केवल एक Milestone के रूप में न लें, बल्कि अगले 10 हज़ार, अगले 1 लाख,  और एक ऐसी Indian Aerospace Industry के निर्माण के संकल्प के रूप में लें, जो दुनिया की सबसे Advanced Propulsion Systems को Design, Develop, Manufacture और Support करने में सक्षम हो।

मैं इस महत्वपूर्ण अवसर पर, पूरे HAL Koraput परिवार, Indian Air Force, MIDHANI, हमारे Private-Sector Partners, MSMEs, Scientists, Engineers, Technicians और Odisha की जनता को हार्दिक बधाई देता हूँ। और मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सब, भारत को एक aerospace industry के रूप में विकसित करने के लिए इसी Confidence, Discipline और Determination के साथ आगे बढ़ते रहेंगे  इसी आशा और विश्वास के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

जय हिन्द!