Text of RM’s speech at the Convocation Ceremony of King George’s Medical University, Lucknow
आज, King George’s Medical University (KGMU) के इस दीक्षांत समारोह में आप सभी के बीच आकर, मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। कुछ Institutions ऐसे होते हैं जिनका ज़िक्र मात्र होने पर, मन में पहला भाव Respect और Gratitude का आता है। KGMU ऐसा ही एक Institution है।
इसलिए, जब भी मैं यहाँ आता हूँ तो मुझे गर्व की अनुभूति होती है। मुझे 2014 में भी KGMU के Convocation में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ था। उसके बाद 2018 में, मैं आपके Foundation Day के अवसर पर भी यहाँ आया था।
आज Different Streams और Courses के जिन विद्यार्थियों को Degree, Medals, और Awards मिले हैं, उन सभी को, मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। यह उपलब्धि आपके परिश्रम के साथ-साथ आपके शिक्षकों के मार्गदर्शन और आपके परिवार के सहयोग का भी परिणाम है। इसलिए, उन सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना मत भूलिएगा।
यहाँ उपस्थित सभी विद्यार्थियों से मैं कहना चाहता हूँ कि आज आपको केवल एक Degree नहीं मिल रही है। आज आपको एक ऐसा दायित्व सौंपा जा रहा है, जो दुनिया के किसी भी अन्य पेशे से जुड़ी जिम्मेदारियों से अलग है।
एक Medical Professional, इंसान के जीवन के सबसे कठिन क्षणों में उसका साथी बनता है। जब कोई व्यक्ति बीमारी और पीड़ा से घिर जाता है, तब वह ईश्वर और अपने परिवार के बाद, जिसकी ओर सबसे अधिक उम्मीद से देखता है, वह डॉक्टर होता है। यही बात आपके Profession को बाकी Professions से अलग बनाती है।
साथियों,
इस Institution ने चिकित्सा क्षेत्र को ऐसे-ऐसे दिग्गज दिए हैं जो खुद में एक Institution हैं। प्रो. अवतार सिंह पेंटल जी, डॉ. नरेंद्र नाथ विग जी, प्रोफेसर सुनील प्रधान जी, डॉ बाल कृष्ण आनंद जी; ये ऐसे नाम हैं जिन्होंने भारत में Medicine के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। डॉ. बलराम भार्गव जी और डॉ. प्रियदर्शी रंजन जी जैसे अनेक चिकित्सकों ने इस विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है।
इस संस्थान से जुड़े लोगों ने सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है। डॉ. नरेश त्रेहान जी ने कई हजार Open Heart Surgery करके लोगों को नया जीवन दिया है। नेपाल के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. संदुक रुइत जी ने मोतियाबिंद की सर्जरी के खर्चे को 90 Percent तक कम किया है और एक लाख से अधिक लोगों की आँख की सर्जरी करके उनके जीवन में फिर से उजाला लौटाया है।
यह सूची यहीं समाप्त नहीं होती। KGMU ने देश को अनेक ऐसे Doctors दिए हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री और डॉ. बी. सी. रॉय पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है।
इसलिए, आज डिग्री प्राप्त कर रहे आप सभी विद्यार्थी केवल एक डिग्री प्राप्त नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक गौरवशाली और समृद्ध परंपरा का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
साथियों,
भारतीय परंपरा में कहा गया है ‘वैद्यो नारायणो हरिः’ यानी चिकित्सक साक्षात् भगवान विष्णु का स्वरूप होते हैं। इसी तरह की बात American Medical Association के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एल्मर हेस ने भी की है। उन्होंने कहा है कि ईश्वर ने जीवन की रचना की और उसकी रक्षा का दायित्व डॉक्टरों को सौंपा। French दार्शनिक वोल्टेयर ने भी कहा है कि जीवन की रक्षा करना उतना ही महान कार्य है जितना जीवन की रचना करना।
यानी पूरी दुनिया में, डॉक्टर को भगवान के समान माना जाता है।
लेकिन इस सम्मान के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। आपका हर निर्णय केवल एक मरीज और उसके परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे समाज और पूरे देश को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है। जब आप किसी व्यक्ति का उपचार करते हैं, तो देश की Human Capital को बेहतर बनाते हैं।
मुझे विश्वास है कि इस प्रतिष्ठित संस्थान ने आपको Modern Medicine और ‘Patient Care’ के Skills प्रदान किए हैं। लेकिन आपको यह याद रखना है कि आपकी चिकित्सा केवल ‘Patient Care’ तक सीमित न रहे, उसमें ‘Caring for the Patient’ की संवेदना भी हो।
दुनिया के कई नामी Doctors ने Medical Profession से जुड़े लोगों को मानवीय मूल्यों के साथ काम करने की सलाह दी है। उनमें से एक, Dr. Francis Weld Peabody [डॉ. फ्रांसिस वेल्ड पीबॉडी] भी हैं।
उनका लेख “The Care of the Patient” आपको अवश्य पढ़ना चाहिए। उन्होंने उस लेख में लिखा है, and I quote, “The treatment of a disease may be entirely impersonal; the care of a patient must be completely personal.”
मरीज आपके ज्ञान पर विश्वास करेगा, लेकिन वह आपको जीवन भर आपके व्यवहार, आपकी करुणा और आपके समर्पण के लिए याद रखेगा।
कई बार मरीज अस्पताल में डॉक्टर को देखते ही घबरा जाते हैं। इस घबराहट के कारण उनका Blood Pressure बढ़ जाता है। इसे ‘White Coat Syndrome’ कहा जाता है। इसीलिए यह आवश्यक है कि मरीज के प्रति आपका व्यवहार संवेदनशील हो। आपकी वाणी में अपनापन, आपके चेहरे पर आत्मीयता और आपके आचरण में करुणा रहे। और आपके द्वारा दी गई दवा के साथ, आपके व्यवहार में भी Healing Touch हो।
साथियों,
हमारे यहाँ कहा जाता है कि जन सेवा ही प्रभु सेवा है। हमारे देश में ऐसे अनेक लोग हैं जिन्होंने इस कहावत को चरितार्थ किया है। जैसे डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी और डॉ. सुनीता गोडबोले जी पिछले चार दशकों से बस्तर में जनजातीय समाज को स्वास्थ्य सेवाएँ दे रहे हैं।
महाराष्ट्र के डॉ. रविंद्र कोल्हे जी और डॉ. स्मिता कोल्हे जी पिछले कई दशकों से जनजातीय क्षेत्रों में मात्र 2 रुपये की फीस लेकर लोगों का इलाज कर रहे हैं। लद्दाख की पहली Gynecologist डॉ. छेरिंग लंडोल जी ने अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद भी Institutional Delivery को बढ़ावा दिया है।
जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म है। इस धर्म के पालन के लिए हमेशा बहुत सारे Resources और Institutional Support की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकता होती है तो केवल संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प की। यदि मन में यह भावना हो कि किसी का जीवन बचाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है, तो परिस्थितियाँ कभी बाधा नहीं बनतीं।
इसका एक Inspiring Example पश्चिम बंगाल के चाय बागानों में काम करने वाले श्री करीमुल हक जी हैं। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को ही एम्बुलेंस बना लिया और अब तक साढ़े पाँच हजार से अधिक मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचायी है।उनके पास न ज्यादा Resources थे और न ही कोई Institutional Support, था तो बस सेवा का संकल्प।
आपके पास तो Degree भी है, Resources भी हैं, Institutional Support भी है। इसलिए आप जहाँ भी हों, कैसी भी परिस्थिति में हों, सेवा के संकल्प को हमेशा याद रखिएगा। यही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी।
प्रिय विद्यार्थियों,
अमेरिका के मशहूर चिकित्सक Dr. Paul Farmer ने Underdeveloped Countries में गरीब लोगों को विश्व स्तरीय Medical Facilities प्रदान करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा था: “The idea that some lives matter less, is the root of all that is wrong with the world. यानी, यह विचार कि कुछ लोगों का जीवन दूसरों की तुलना में कम मूल्यवान है, दुनिया की लगभग हर बुराई और अन्याय की जड़ है।
जो मरीज बहुत साधन सम्पन्न होते हैं, उनके पास अनेक विकल्प होते हैं। लेकिन एक सामान्य मरीज आपके पास बहुत उम्मीदों के साथ आता है। इसलिए, पूरी संवेदना और करुणा के साथ आपको कमजोर वर्गों की सेवा में तत्पर रहना है। आपको बिना भेदभाव के, समदृष्टि के साथ, अपने पास आने वाले हर व्यक्ति की मदद करनी है।
यह भारत की सांस्कृतिक चेतना का भी मूल संस्कार रहा है। श्री रामचरितमानस में एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग है। जब युद्धभूमि में लक्ष्मण जी मूर्छित होकर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे थे, तब रावण और लंका के राजवैद्य सुषेण ने उनका उपचार किया था। राजवैद्य सुषेण ने यह नहीं देखा कि घायल योद्धा किस पक्ष का है। उस समय केवल एक जीवन बचाना ही उनका लक्ष्य था। यही चिकित्सा का धर्म है।
यही भावना White Coat को मानवता का प्रतीक बनाती है। आज जब आप इस पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, तब यह संकल्प अपने साथ लेकर जाइए कि आप सभी व्यक्तियों को समान रूप से Treatment देंगे।
प्रिय विद्यार्थियों,
एक और Quality जो आपको Cultivate करनी चाहिए और जो आपके Profession में बहुत मददगार साबित होगी, वह है Patience. मशहूर डॉक्टर Sir William Osler, अपने विद्यार्थियों से कहा करते थे कि मरीज की बात बहुत ध्यान से सुनिए, आपको बीमारी का Diagnosis कई बार उनकी बातों में ही मिल जाएगा।
प्रिय विद्यार्थियों,
मैं एक और बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। Medical Professionals बहुत ही तनावपूर्ण Environment में काम करते हैं। इससे आपकी Health भी Negatively Impact होती है। लेकिन अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ यानी सब सुखी हों की कामना करने के बाद, हम ‘सर्वे सन्तु निरामया’ यानी सब स्वस्थ हों की कामना करते हैं। यह कहा जा सकता है कि सुखी होने की सबसे पहली शर्त भी स्वस्थ रहना है।
इसलिए अपने आप को Physically और Mentally Healthy रखने के लिए कुछ समय जरूर निकालें। Yoga और Meditation को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
प्रिय विद्यार्थियों,
गौतम बुद्ध के जीवन के वह चार दृश्य जिसने उन्हें जीवन के Impermanence की अनुभूति कराई थी, उनमे से एक था रोग से पीड़ित एक व्यक्ति का विलाप। उनके सारथी चन्ना ने उन्हें बताया था कि इस संसार में प्रत्येक प्राणी रोग, पीड़ा और मृत्यु के अधीन है। पर इसका मतलब यह नहीं कि यह Realization हमें निराशावादी बना दे। बल्कि हमारा लक्ष्य तो हर पल इसका Antidote खोजने का होना चाहिए और इससे लड़ने का होना चाहिए।
इसी विचार के साथ, लोगों को बीमारी की निराशा से बाहर निकालने और उन्हें एक नया और स्वस्थ जीवन देनें में आप अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज Medical Science तेजी से बदल रहा है। Artificial Intelligence, Synthetic Biology, Gene Editing और Precision Medicine जैसी नई Technologies चिकित्सा की दिशा और दशा दोनों बदल रही हैं। इसलिए आपको सदैव सीखने की प्रक्रिया को जारी रखना है।
इसके लिए आप इस विश्वविद्यालय की पहली महिला Vice-Chancellor, प्रोफेसर डॉ. सरोज चूड़ामणि गोपाल जी से प्रेरणा ले सकते हैं। डॉ. सरोज जी ने वर्ष 2024 में 79 वर्ष की आयु में पीएचडी में प्रवेश लिया था। इससे यह संदेश मिलता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। और नई चीजों के प्रति जिज्ञासा एक व्यक्ति को उसके काम में बेहतर बनाती है।
मैं यहाँ एक और बात जोड़ना चाहता हूँ। आज Artificial Intelligence का युग है। कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है। आपका Field भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन Artificial Intelligence, किसी माँ को यह भरोसा नहीं दिला सकता कि उसका बच्चा ठीक हो जाएगा। वह किसी वृद्ध का हाथ पकड़कर यह नहीं कह सकता, कि “घबराइए मत, हम सब ठीक कर देंगे।” Technology, Intelligent हो सकती है, लेकिन Compassionate नहीं। वह Medical Charts पढ़ सकती है, लेकिन मरीज के मन का दर्द नहीं समझ सकती।
इसलिए आपको Empathy और Compassion के साथ काम करना है।
प्रिय विद्यार्थियों,
हर बड़ा परिवर्तन तब होता है जब कोई व्यक्ति प्रचलित धारणाओं पर सवाल उठाने का साहस करता है। एक डॉक्टर, इग्नाज़ सेमेलवेइस ने केवल इतना कहा था कि यदि डॉक्टर प्रसव से पहले हाथ धो लें, तो हजारों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है। उस समय उनकी बात का मजाक उड़ाया गया। उन्हें नकार दिया गया। लेकिन बाद में पूरी दुनिया ने माना कि वे सही थे।
यही विज्ञान की सबसे बड़ी शक्ति है। विज्ञान; जिज्ञासा और नए प्रश्नों से आगे बढ़ता है। इसलिए शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। शोध की शुरुआत वहीं से होती है, जहाँ कोई यह पूछने का साहस करता है—”क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है?”
मैं आप सभी से आग्रह करूँगा कि अपने जीवन में इस जिज्ञासा को हमेशा जीवित रखें।
जो विद्यार्थी आगे Research को अपना Career बनाने की सोच रहे हैं, मेरा उनसे एक विशेष आग्रह है। अनेक बीमारियों के लक्षण, उपचार और दवाओं का प्रभाव महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग होता है। लेकिन महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर Relatively कम Research हुआ है। Research Studies में महिलाओं का Representation कम रहा है।
मैं चाहता हूँ कि इस दिशा में आप शोध करें जिससे नई समझ Develop हो और Medicine का Field और भी समावेशी बने।
एक और महत्वपूर्ण विषय है जिस पर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।
Organ Donation मानवता को दिया जा सकने वाला सबसे बड़ा उपहार है। जब किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त होता है, तब उसके Organs किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन की नई शुरुआत बन सकते हैं। मेरा विश्वास है कि जिस व्यक्ति के अंग किसी और को नया जीवन देते हैं, वह स्वयं भी उस व्यक्ति में जीवित रहता है। मृत्यु उसके शरीर का अंत करती है, लेकिन उसकी करुणा अमर हो जाती है।
दुर्भाग्य से आज भी Organ Donation को लेकर समाज में अनेक भ्रांतियाँ और झिझक हैं। इन्हें दूर करने में डॉक्टरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आपकी एक सही सलाह, आपका Persuasion, आपकी संवेदनशील बातचीत, किसी परिवार को Organ Donation का निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर सकती है और कई लोगों को नया जीवन दे सकती है।
साथियों,
पिछले 12 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि Accessible, Affordable, और Quality-Driven Health Care System बनाना भी रहा है।
पहले बीमारी के इलाज में लोगों के घर-बार तक बिक जाते थे। लेकिन आज, लोगों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत निशुल्क इलाज मिल रहा है।
आज देशभर के 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों में लोगों को बहुत सस्ती और अच्छी Quality की दवाइयाँ मिल रही हैं।
साथियों,
आज भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मैं आपको इसके कुछ उदाहरण देना चाहता हूँ।
वर्ष 2023 में हमने Affordable, Lightweight, Ultrafast, High Field और पहली स्वदेशी MRI मशीन बना ली है। वर्ष 2024 में हमने First Indigenous Macrolide Antibiotic ‘नैफिथ्रोमाइसिन’ विकसित कर ली है। यह Community-Acquired Bacterial निमोनिया के इलाज में बहुत मददगार साबित होगी।
तीन दशकों बाद, 2024 में भारत में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन फिर से प्रारंभ हुआ है। ‘Production Linked Incentive’ Scheme ने Medical Equipments के स्वदेशी निर्माण को नई गति दी है।
आज भारत Medical Research में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
हीमोफीलिया के उपचार के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल Demonstration हमारे Scientists ने कर लिया है। पुणे के एक Institute के वैज्ञानिकों ने Breast Cancer के उपचार के लिए एक अत्याधुनिक नैनो-मेडिसिन विकसित की है।
आपने CAR-T Cell Therapy का नाम सुना होगा। यह कैंसर के इलाज में अत्यंत उपयोगी होती है। हमने दुनिया की सबसे सस्ती CAR-T Cell Therapy, Develop की है। पहले जो उपचार केवल कुछ विकसित देशों और अमीर लोगों तक ही सीमित था, वह अब भारत में बहुत कम पैसों में उपलब्ध हो रहा है।
यानी, आज भारत जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों का स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है।
साथियों,
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तभी बढ़ सकती है जब पर्याप्त डॉक्टर और विशेषज्ञ उपलब्ध हों। इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने मेडिकल शिक्षा का भी अभूतपूर्व विस्तार किया है।
साथियों,
उत्तर प्रदेश में भी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में बहुत सुधार हुआ है। वर्ष 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रदेश भर में 81 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में 2 AIIMS भी संचालित हैं। यानी, आज उत्तर प्रदेश One District-One Medical College से भी आगे निकल गया है।
साथियों,
कभी गोरखपुर का नाम जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के कारण पूरे देश में जाना जाता था। दशकों तक सैकड़ों परिवार इस त्रासदी का सामना करते रहे। लेकिन आज मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रयासों ने गोरखपुर को इससे मुक्ति दिला दी है।
साथियों,
आज भारत का Health System पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर, सुलभ, किफायती, आधुनिक और जन-केंद्रित बनकर उभरा है।
यहाँ पर मैं यह एक और बात जोड़ना चाहता हूँ कि हमारा ध्यान सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि रोकथाम पर भी है। We Are Not Just Focusing On Cure, But Also On Prevention.
प्रिय विद्यार्थियों,
अनजाने में और व्यक्तिगत जीवन में, हम सभी कई बार गलती करते हैं। यह Human Nature है। पर अपने Professional Commitments को Fulfil करने में अगर कोई जानबूझकर और स्वार्थवश गलती करता है, तो वह बात सिर्फ एक व्यक्ति विशेष की नहीं रह जाती है। बल्कि पूरी Community को उसके कारण शर्मसार होना पड़ता है। इसलिए जब भी कोई निहित स्वार्थ किसी डॉक्टर के कर्तव्य में बाधा बने, उसे Honesty और Integrity से काम करने से रोके, तो उसे अपनी ‘Hippocratic Oath’ फिर से याद करनी चाहिए।
यह Oath इस Profession से जुड़े सभी लोगों के लिए एक Guiding Principle की तरह काम करती है। यह Oath आपको बताती है कि ‘Warmth, Sympathy और Understanding’ हमेशा Surgeon की Knife और Chemist की दवा से अधिक असरदार होते हैं। Compassion आपकी Service का आधार हैं। और मरीज़ का Trust आपके लिए सबसे बड़ा Award है। इसे हमेशा, हर हाल में संभालकर रखिएगा।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज आपके अभिभावक और परिवारजन को आपके ऊपर गर्व है। उन्होंने आपको रात भर पढ़ते देखा है, परीक्षा के तनाव से जूझते देखा है, Anatomy की किताबों से लेकर Clinical Posting तक की यात्रा करते हुए देखा है। लेकिन उनकी प्रसन्नता केवल इसलिए नहीं है कि उनके बच्चे सफल हो गए हैं। उनको गर्व इसलिए भी है कि आज उनका बच्चा मानवता की सेवा के सबसे पवित्र दायित्व का भागीदार बनने जा रहा है।
इसलिए, अंत में मैं यही कहूंगा, कि आप हमेशा अपनी डिग्री, अपनी योग्यता को एक ‘Social Trust’ समझे न कि एक ‘Individual Possession’.
इन्हीं शब्दों के साथ, आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।