AFHQ Civilian Services रक्षा मंत्रालय की रीढ़ हैं: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech on the occasion of AFHQ Civilian Services Day in New Delhi.

सबसे पहले, मैं आप सभी को Armed Forces Headquarters Civilian Services day की बधाई देता हूँ।

मैं आज के सभी awardees को बधाई देता हूँ। आपको मिला यह सम्मान, आपके dedication, आपके talent और आपके hard work को मिला सम्मान है।

इसके अलावा, आज एक biannual magazine, ‘Samvad’ को भी release किया गया है। साथ ही, Sparrow portal, तथा CAO office के तहत कई और portals को भी launch किया गया है। इन सभी initiatives के लिए, मैं आप सभी को बधाई देता हूँ।

साथियों, आज का दिन, निश्चित ही हम सबके लिए एक बड़ा दिन है। किसी भी सेना को, शक्ति केवल हथियारों और गोला-बारूद से ही नहीं मिलती है, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी मिलती है, जो हमेशा उसके पीछे उसके support में खड़े रहते हैं। AFHQ Civilian Services, उन्हीं अदृश्य लेकिन निर्णायक शक्तियों में से एक है, ऐसा मैं समझता हूँ। आज का दिन उन officers के, और उन personnel के contribution को पहचानने का अवसर है, जिन्होंने dedication और professionalism के साथ, इस defence establishment की सेवा की है। साथ ही, आज का दिन, एक प्रकार से reflection और introspection का भी होना चाहिए।

मुझे लगता है, कि ऐसे अवसर पर किसी संस्था को स्वयं से दो प्रश्न अवश्य पूछने चाहिए। पहला यह कि हम कहाँ से कहाँ तक पहुँचे हैं? और दूसरा यह, कि अब हमें यहाँ से कहाँ जाना है? जब बात राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी संस्थाओं की आती है, तो उनके लिए तो दूसरे प्रश्न का महत्व और भी बढ़ जाता है।

चूँकि हमारी Armed Forces के साथ, Technology, Industry, Academia तथा Innovation Ecosystem का जुड़ाव भी लगातार बढ़ रहा है। इसलिए, जब इतने सारे dimensions पर हम आगे बढ़ रहे हैं, तो ऐसे में हमारी armed forces को सहयोग देने वाली संस्थाओं को भी, निरंतर विकसित होते रहना होगा।

AFHQ services, रक्षा मंत्रालय की institutional memory है। क्योंकि AFHQ cadre एक ऐसी संस्था है, जो रक्षा मंत्रालय को continuity, domain speciality और policy stability प्रदान करती है। इसके साथ ही civil-military synergy को सुदृढ़ करने में भी, AFHQ एक important bridge की भूमिका निभाती है।

साथियों, मुझे याद है, पिछली बार जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने आपके साथ इस service के future को लेकर कुछ विचार साझा किए थे। मैंने इस cadre की capabilities को बढ़ाने, उन्हें better career opportunities provide करने, तथा Command level, Service Headquarters level, और रक्षा मंत्रालय के स्तर पर उनकी expertise को और अच्छे से utilise करने पर जोर देने की बात की थी। मैंने CDS और तीनों सेनाध्यक्षों से भी यह कहा था, कि AFHQ Civil Services को, हमारे defence establishment में, और अधिक योगदान के अवसर कैसे दिए जा सकते हैं, इस पर विचार करें।

मुझे इस बात की प्रसन्नता, है कि इनमें से कुछ विषयों पर आप लोगों के द्वारा कार्य भी किया गया है, और कई suggestions को practical shape देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। जिस तरह से आप लोग ideas को action में convert करते हैं,

यह आपकी institutional capacity को दिखाता है, जिसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं।

साथियों, मुझे मालूम है कि आपकी service को एक खास mandate दिया गया है, जो service rules, regulations, और orders के उचित implementation के लिए है। आपकी service वह service है, जो इन विषयों पर specialize करती है, और चूंकि आपकी सेवाएँ केवल MoD में ही हैं, इसलिए आपकी specialization और खास है। पर साथ ही, आज जब इतने महत्त्वपूर्ण अवसर पर हम सभी एकत्र हुए हैं, तो मैं समझता हूँ, कि इनसे आगे जाते हुए, कुछ और बिंदुओं पर आप सबको विचार करना चाहिए। मैं दो-तीन बातें रखना चाहूंगा, जो मैं इस संस्थान को लेकर सोचता हूँ।

मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि समय और परिस्थितियाँ बड़ी ही dynamic होती हैं। ये निरंतर बदलती रहती हैं। इतिहास का पूरा evolution ही इसी dynamism का प्रमाण है। लेकिन यदि हम पुराने समय और आज के युग की तुलना करें, तो पाएँगे कि बदलाव की यह गति पहले से कहीं अधिक तेज हो गई है। जो बदलाव पहले 100 वर्षों में होते थे, वे आज 5 या 10 वर्षों में ही दिखाई देने लगते हैं। यह बात हर क्षेत्र पर लागू होती है। परन्तु defence sector में यह dynamism और भी अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। इसलिए रक्षा क्षेत्र में हो रहे इन परिवर्तनों का विश्लेषण करना जरूरी हो जाता है।

साथियों, Defence का इतिहास मानव सभ्यता के इतिहास जितना ही पुराना है। मानव के विकास के साथ ही उसकी सुरक्षा की आवश्यकताएँ भी विकसित हुईं। आदिमानव काल के tribal warfare से लेकर land-based warfare, colonial warfare, World Wars और आज के modern warfare तक, प्रत्येक दौर की अपनी विशेषताएँ रही हैं।

लेकिन traditional और modern warfare में सबसे बड़ा अंतर technological dynamism का है। पिछले 25–30 वर्षों में जिस गति से तकनीक ने warfare को बदला है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। पहले युद्ध मुख्यतः भूमि पर लड़े जाते थे, फिर naval systems का महत्व बढ़ा, उसके बाद air power प्रमुख बनी। वास्तव में आज रक्षा तकनीक का वास्तविक आधार उस embedded knowledge में निहित हो गया है, जिससे वह तकनीक विकसित होती है।

इसलिए मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ, कि आप अपने  mandate और role से आगे बढ़कर, defence technology research, Geo-strategic thinking, और नए विचारों के माध्यम से, देश के defence ecosystem को और सशक्त बनाने में योगदान दें। आप रक्षा मंत्रालय के permanent cadre हैं, आपके पास गहरा domain knowledge है। इसलिए Defence के मूल विषयों पर भी आपकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

रक्षा मंत्रालय तो वैसे भी निरंतर विचार, संवाद और मंथन से ही आगे बढ़ता आया है। हमारे यहाँ seminars, conclaves, service-level discussions और institutional reviews के माध्यम से अनेक महत्वपूर्ण सुझाव और नए विचार सामने आते रहते हैं। इसी प्रकार, AFHQ Civilian Services Day जैसे अवसर भी केवल एक ceremonial event नहीं होते, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाले विचार-विमर्श के महत्वपूर्ण मंच होते हैं। इन्हीं विचारों से भविष्य की दिशा तय होती है।

अब इनमें से कुछ सुझाव ऐसे होते हैं, जिन पर तुरंत action लिया जा सकता है। कुछ ऐसे होते हैं, जिनका और गहराई से examination करने की आवश्यकता होती है। और स्वाभाविक रूप से, कुछ सुझाव ऐसे भी हो सकते हैं, जो practical reasons के कारण आगे न बढ़ पाएँ। लेकिन मेरा मानना है, कि जो भी meaningful suggestion सामने आए,

वह केवल discussion तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसके आगे क्या हुआ, उसका review हुआ या नहीं, उस पर कोई decision लिया गया या नहीं, इसकी एक proper institutional process होनी चाहिए।

मेरा सुझाव है, कि आप सब इस दिशा में भी एक suitable institutional mechanism विकसित करने पर विचार करे। ऐसा mechanism, जो AFHQ Civilian Services Day जैसे institutional forums सहित, अलग-अलग seminars, conferences, reviews और discussions से निकलने वाले, important ideas को capture करे, उनमें से जिन सुझावों में potential हो, उनकी पहचान करे, उनका detailed examination कराए, और उन पर हुई progress को, समय-समय पर review भी करे।

साथियों, इसी continuity की भावना के साथ, मैं आज इस चर्चा को एक कदम और आगे ले जाना चाहता हूँ। अब हमें केवल यह नहीं सोचना है, कि AFHQ Civilian Services को उसकी मौजूदा structure के भीतर और बेहतर कैसे बनाया जाए। हमें इससे आगे बढ़कर एक बड़ा सवाल भी पूछना होगा, अगले 20, 30 या 50 वर्षों में भारत का रक्षा क्षेत्र कैसा होगा, और उसमें AFHQ Civilian Services की भूमिका क्या होगी?

आज हमारी permanent civilian defence service पुरानी सोच और पुराने तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रह सकती । उसे भी समय के साथ evolve करना होगा, नई capabilities develop करनी होंगी। हमें यह ensure करना होगा कि आने वाले वर्षों में इस Service की पहचान भी उसकी evolving role, professional excellence और specialised contribution को reflect करे।

साथियों, एक modern professional service की पहचान, केवल इस आधार पर नहीं होनी चाहिए,  कि उसके officers किस office या Headquarters में posted हैं। उसकी identity, उनकी professional expertise, capability और Defence sector से जुड़े objectives को पूरा करने में, उनकी responsibility से होनी चाहिए। किसी भी संस्था की सबसे सशक्त पहचान उसके कार्यक्षेत्र से नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य, उसकी expertise और राष्ट्रहित में उसके योगदान से बनती है। AFHQ Civilian Services को भी इसी दृष्टि से आगे बढ़ना होगा।

इसलिए मेरा मानना है, कि आने वाले समय में, हमारा प्रयास AFHQ Civilian Services को धीरे-धीरे, Defence Management के, एक professional cadre के रूप में विकसित करने का होना चाहिए। ऐसा cadre, जो रक्षा क्षेत्र के अलग-अलग dimensions को समझता हो, joint environment में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके, और बदलती security तथा technology की जरूरतों के अनुसार, अपनी expertise को लगातार upgrade करता रहे। यदि ऐसा हुआ, तो आने वाले वर्षों में AFHQ Civilian Services केवल एक Administrative Cadre नहीं रहेगा, बल्कि भारत के Defence Management Architecture का Strategic Brain बनकर उभरेगा।

AFHQ Civilian Services में आने वाले, हर officer को, अपने career के दौरान, Defence Administration के अलग-अलग dimensions में काम करने, और व्यापक अनुभव प्राप्त करने का, अवसर मिलना चाहिए। Organisational requirements और individual suitability को ध्यान में रखते हुए, रक्षा मंत्रालय के विभिन्न Departments तथा Defence Establishment की महत्वपूर्ण institutions में भी, उन्हें exposure मिलना चाहिए। इससे officers की professional understanding व्यापक होगी, और Ministry को ऐसे professionals मिलेंगे, जो Defence Administration को,
केवल किसी एक desk, या department के नहीं, बल्कि larger perspective से समझते हों।

साथियों, आज हमारी Armed Forces, greater jointness और integration की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में AFHQ Civilian Services के लिए भी, यह एक बड़ी opportunity है। मेरा मानना है, कि military और civil components के बीच भी, jointness और integration के नए आयामों पर विचार होना चाहिए, ताकि institutional memory, institutional stability, और rules & regulations के प्रभावी application के साथ, defence ecosystem में और अधिक jointness लाई जा सके।

उदाहरण के लिए, cyber warfare आज की युद्ध प्रणाली का एक important component है। यदि AFHQ Civilian Services के talented और expert officers, अपनी expertise के आधार पर, defence-specific common cyber tools विकसित करने पर विचार करें, तो वह हमारी Armed Forces के लिए अत्यंत उपयोगी होगा।

इसी प्रकार Indian military history के अध्ययन के लिए भी, एक ऐसा forum develop किया जा सकता है, जहाँ civilian perspective से, military history का अध्ययन हो। इससे नए विचार, नए आयाम और नई समझ विकसित होगी। ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में भी, अपनी expertise का उपयोग कर, AFHQ Civilian Services रक्षा क्षेत्र में, और अधिक meaningful contribution दे सकती है।

हमें यह समझना होगा, कि military integration और administrative integration, अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे हमारे joint और integrated structures develop होंगे, वहाँ policy, administration, Human Resource Management, financial processes, logistics और institutional knowledge, इन सभी क्षेत्रों में continuity और expertise की आवश्यकता होगी। आज भारत में Uniform, और Civil Services, दोनों का एक ही commitment है, राष्ट्र प्रथम, Nation First. जब उद्देश्य एक हो, तो व्यवस्था की हर शक्ति राष्ट्रीय सामर्थ्य में बदल जाती है।

इसलिए मुझे लगता है, कि civilian और military officers के बीच, structured cross-exposure को और बढ़ाने की आवश्यकता है। जहाँ appropriate हो, वहाँ joint training programmes हों, developmental assignments हों, और ऐसे अवसर तैयार किए जाएँ, जहाँ दोनों sides एक-दूसरे के experience से सीख सकें।

हमारे military officers अपने साथ operational experience, command perspective और warfare की understanding लेकर आते हैं। वहीं हमारे civilian officers administrative continuity, policy experience, government processes की understanding और institutional memory लेकर आते हैं। जब ये दोनों strengths एक साथ आती हैं, तो हमारी decision-making अधिक informed, balanced और effective होती है।

मुझे पूरा विश्वास है, कि जिस dedication और professionalism के साथ, AFHQ Civilian Services की अनेक generations ने, देश और हमारे Defence Establishment की सेवा की है, उसी commitment के साथ आप सभी इस transformation को भी आगे बढ़ाएँगे।

इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर AFHQ Civilian Services के सभी officers और कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण अवसर पर हार्दिक बधाई देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिन्द!