‘भारत राइस’ की शुरुआत एवं MoU हस्ताक्षर समारोह में रक्षा मंत्री के संबोधन का मूल पाठ।
सबसे पहले, मैं आप सभी को, भारतीय सेना में ‘भारत rice’ के शुभारंभ, और Army तथा Food Corporation of India के बीच sign हुए MoU के लिए बधाई देता हूँ।
साथियों, आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज हम यहाँ केवल एक खाद्य सामग्री को भारतीय सेना के ration में शामिल करने के लिए, या फिर एक administrative agreement पर हस्ताक्षर करने के लिए ही एकत्र नहीं हुए हैं। बल्कि आज का occasion, इससे कहीं अधिक व्यापक, और National Importance का है।
मैं विशेष रूप से मंत्रिमंडल में अपने सहयोगी, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री, श्री प्रल्हाद जोशी जी का आभार प्रकट करता हूँ। प्रह्लाद जी न केवल खाद्य वितरण के क्षेत्र में, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने, अनेक नवाचार किए हैं, जिनका सीधा लाभ हमारे सैनिकों और नागरिकों को मिल रहा है।
यह जो ‘भारत rice’ हम शुरू कर रहे हैं, यह केवल rice की बात नहीं है। यह उस विश्वास की बात है, जो किसान के खेत से शुरू होता है, और सैनिकों के भोजन की थाली तक पहुँचता है। यह उस सामूहिक संकल्प की बात है, जिसमें किसी किसान का परिश्रम, किसी सैनिक की शक्ति बनता है। एक ओर हमारे किसान हैं, जो खेत में अन्न उगाते हैं; दूसरी ओर हमारे जवान हैं, जो उसी धरती की रक्षा करते हैं। किसान देश का पेट भरते हैं, सैनिक देश की सीमाओं को सुरक्षित रखते हैं। दोनों के कार्यक्षेत्र अलग हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य राष्ट्र को मजबूत बनाना ही है। आज भारत Rice की शुरुआत, किसानों और जवानों के बीच के संबंधों को दिखा रहा है, और ‘जय जवान-जय किसान’ की भावना को मूर्त रूप दे रहा है।
साथियों, जैसा कि आप सब जानते हैं, हमारी Army, संख्या की दृष्टि से, दुनिया की सबसे बड़ी Armies में से एक है। अब जाहिर सी बात है, कि इतनी बड़ी सेना के खान-पान के लिए resources भी बड़ी मात्रा में चाहिए होंगे। हमारी Army की चावल की जो annual need है, वह लगभग 1 लाख 25 हज़ार metric tonnes है। यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है। इतनी बड़ी मात्रा में quality rice उपलब्ध कराना, उसकी proper packaging करना, उसे समय पर forward locations तक पहुँचाना और उसकी quality ensure करना, यह एक बहुत बड़ा exercise है, एक challenge है।
आज ‘भारत rice’ के माध्यम से, हम इन तमाम चीज़ों को ensure कर रहे हैं। Superior Quality का यह चावल, standard specifications के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा Ergonomic Packaging भी ensure की जा रही है। यह बदलाव भले ही छोटा दिखाई दे, लेकिन जो जवान दुर्गम क्षेत्रों में राशन पहुँचाते हैं, उनके लिए यह बहुत बड़ा operational relief है।
और साथियों, यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। मैं तो हमेशा अपने सैनिकों के बीच जाता रहता हूँ। बड़ाखाना के माध्यम से, बड़ाखाना मतलब जहाँ किसी खास मौके पर अधिकारी और सैनिक सभी एक साथ dinner करते हैं, उसमें, या फिर सामान्य बातचीत के माध्यम से, मैं हमेशा पूछता रहता हूँ, कि किस तरह से हम अपने सैनिकों की सुविधाओं में वृद्धि कर सकते हैं। मुझे लगातार सैनिकों से feedback और suggestions भी प्राप्त होते रहते हैं। उन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, सभी stakeholders के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही भारत Rice को आगे बढ़ाया गया है।
साथियों, जब हम अपने सैनिकों के बारे में सोचते हैं, तो हमारे मन में उनकी वर्दी, उनके हथियार, उनका साहस और उनके शौर्य के बारे में बातें याद आती हैं। लेकिन एक सैनिक की operational readiness, केवल हथियारों से नहीं बनती। एक सैनिक की शक्ति का आधार, उसका शारीरिक स्वास्थ्य, उसका मानसिक संतुलन, उसका मनोबल, उसकी stamina और उसकी निरंतर operational preparedness होती है। कारगिल की बर्फीली ऊँचाइयों पर तैनात सैनिक हों, राजस्थान के तपते मरुस्थल में ड्यूटी कर रहे जवान हों, या पूर्वोत्तर के घने और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपना कर्तव्य निभा रहे जवान हों, हमारे हर सैनिक का शरीर और मन, हर दिन कठिन परिस्थितियों की परीक्षा से गुजरता है।
जब हम चैन की नींद सोते हैं, तो हमारे सैनिक यह ensure कर रहे होते हैं, कि देश की सीमाओं से होकर कोई खतरा, हमारे घर तक न पहुँचे। इसलिए हमारे सैनिकों का welfare हमारे लिए कोई peripheral issue नहीं है। यह national security का integral component है।
जब हम अपने सैनिक को अच्छा भोजन, अच्छा equipment, अच्छी training और अच्छी सुविधाएँ देते हैं, तो हम एक तरह से उनके मनोबल को मजबूत करते हैं। और एक मजबूत मनोबल वाला सैनिक ही, किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। यह सब करना हमारा धर्म है, और हम अपना धर्म भलीभाँति निभा रहे हैं।
इसी क्रम में आज Army, और Food corporation of India के बीच Strategic Logistics partnership MoU की signing भी, National security को enhance करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। आप सब देख ही रहे हैं, कि आजकल युद्ध की प्रकृति, कितनी तेजी से बदल रही है। Modern Warfare में केवल Weapons, Platforms और Technology महत्वपूर्ण नहीं हैं। Logistics itself is combat power. आज के युद्ध केवल frontline पर नहीं जीते जाते। युद्ध के पीछे supply chains की मजबूती, storage की क्षमता, transportation networks, warehousing infrastructure और timely replenishment की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। हम सब तो अक्सर कहते भी हैं, कि combat troops सेना की भुजाएँ हैं। तो मैं उसमें यह भी जोड़ूंगा, कि यदि Combat Troops सेना की भुजाएँ हैं, तो Logistics सेना की रक्तवाहिकाएँ हैं, सेनाओं की veins हैं। यदि supply लगातार और सुरक्षित रूप से आगे नहीं पहुँचती, तो सबसे सक्षम combat force भी लंबे समय तक प्रभावी ढंग से operate नहीं कर सकती।
Operation SINDOOR के strategic analysis ने भी हमें यह संकेत दिया है, कि भविष्य के conflicts में, warning time बहुत कम हो सकता है। Zero-warning situations और warfare में technology के inclusion जैसी परिस्थितियाँ, हमारी preparedness की गंभीर परीक्षा ले सकती हैं। ऐसे conflicts हमारी logistics chain और supply networks की endurance की भी परीक्षा ले सकते हैं। इसलिए हमें अपने sustained operations के लिए, अपनी logistics resilience भी तैयार करनी है। यह MoU, उसी दिशा में एक important step है।
Food Corporation of India के पास, देश के विभिन्न हिस्सों में warehouses हैं। Storage infrastructure है। Modern silos हैं। Material Handling Equipment और Trained Manpower है। और महत्वपूर्ण बात यह है, कि इसकी presence ऐसे क्षेत्रों के निकट भी है, जो operationally हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। यानी कि, देश की existing national capacity को, आवश्यकता के समय national security की requirements के साथ भी जोड़ा जा सकता है।
इस MoU के अंतर्गत, operational contingencies की स्थिति में, भारतीय सेना designated FCI warehousing infrastructure और resources का उपयोग कर सकेगी। एक तरह से यह Dual Use method होगा। यानी कि देश की अधिकांश infrastructure और capabilities केवल एक ही उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि civil और military, दोनों ही आवश्यकताओं के लिए उपयोग की जा सकें।
जैसे इसका example देखिये, कि कुछ समय पहले हमारे देश में fighter aircraft ने, expressways पर landing की थी। यह इस बात का प्रमाण था, कि हमारे highways केवल यातायात के लिए नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सैन्य हवाई अड्डों के विकल्प के रूप में भी काम कर सकते हैं।
ऐसे ही हमारा BRO, सीमावर्ती इलाकों में जो सड़क और पुल आदि बनाता है, उसका सामान्य नागरिक भी उतना ही उपयोग करते हैं।
इसी प्रकार, FCI के godowns अब केवल खाद्य भंडारण तक सीमित नहीं रहेंगे, वे सेना की supply chain का हिस्सा बनेंगे।
ऐसा करने से resource optimisation भी होगा, और national resilience भी मजबूत होगी। यदि देश में पहले से मौजूद infrastructure को operational planning के साथ integrate किया जाए, तो हम समय भी बचा सकते हैं, और resources का बेहतर उपयोग भी कर सकते हैं। इसीलिए यह MoU, केवल एक administrative arrangement ही नहीं है। यह operational preparedness का force multiplier भी है, और हमारे ‘Whole of Government’, और ‘Whole of Nation’ approach को भी दिखाता है।
साथियों, पिछले कुछ वर्षों में हमने अपने सैनिकों के welfare के, हर पहलू पर काम किया है। हथियारों और technology से लेकर clothing, equipment और training तक, हर क्षेत्र में self-reliance और modernization पर बल दिया गया है। आज भारत अपनी Defence needs का बड़ा हिस्सा, अपने देश में produce कर रहा है।
साथियों, आज हम जो important initiative शुरू करने जा रहे हैं। मैं चाहूँगा, कि इस पहल को एक larger journey के रूप में देखा जाए। हमें लगातार यह ensure करते रहना होगा, कि हमारे सैनिकों को बेहतर quality और कैसे मिल सकती है? हमारी supply chain को और तेज कैसे बनाया जा सकता है? Forward areas में delivery को और reliable कैसे बनाया जा सकता है? और civilian infrastructure का और बेहतर उपयोग national security के लिए कैसे किया जा सकता है? मेरा मानना है, कि इन सभी प्रश्नों का उत्तर हमें innovation और coordination के माध्यम से देना होगा।
जब देश की सीमा पर हमारे जवान खड़े हों, तो उनके मन में एक विश्वास हमेशा रहना चाहिए, कि पूरा देश उनके पीछे है। हमारे सैनिकों का मनोबल हमारी प्राथमिकता है। और यह commitment केवल सरकार का नहीं है। यह किसानों का भी है। यह cooperative sector का भी है। यह civil administration का भी है। और सबसे बढ़कर, यह पूरे राष्ट्र का commitment है।
मैं इस अवसर पर एक बार फिर, हमारे साथी श्री प्रल्हाद जोशी जी, रक्षा मंत्रालय और NAFED, NCCF, FCI और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सभी अधिकारियों, और कर्मचारियों का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। आप सभी मिलकर यह सिद्ध कर रहे हैं, कि जब राष्ट्र की अलग-अलग क्षमताएँ एक उद्देश्य के लिए साथ आती हैं, तो उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
मैं आशा करता हूँ कि भारतीय सेना और Food Corporation of India के बीच यह सहयोग भविष्य में और भी नए आयाम स्थापित करेगा। हम अपनी व्यवस्थाओं को अधिक आधुनिक, अधिक सक्षम और अधिक भरोसेमंद बनाएँगे, ताकि हमारे जवान हर परिस्थिति में पूरी तत्परता के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकें।
इसी विश्वास के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। आप सभी को, भविष्य के लिए, ढेर सारी शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।