लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, अराजकता फैलाना नहीं: रक्षामंत्री

आज, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने ‘दैनिक जागरण’ समूह द्वारा आयोजित ‘नरेंद्र मोहन स्मृति व्याख्यान’ को संबोधित किया। श्री नरेंद्र मोहन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मूल्यों और आदर्शों को सदैव सर्वोपरि रखा। इस आयोजन में रक्षा मंत्री ने साहित्यकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र को ‘जागरण साहित्य सृजन सम्मान’ से सम्मानित किया और उनकी दीर्घ साहित्यिक साधना और नवगीत के क्षेत्र में योगदान की तारीफ भी की।

रक्षा मंत्री ने ‘युवा पीढ़ी, पीढ़ी अंतराल और नीति निर्माण’ विषय पर बात करते हुए कहा कि युवाओं के लिए नीतियां बनाते समय उनकी आकांक्षाओं, आवश्यकताओं और बदलती परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय की मांग के अनुसार हम ‘Policy for Youth’ से आगे बढ़कर ‘Policy by Youth’ और ‘Policy with Youth’ की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

पीढ़ियों के बीच के अंतर पर विचार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इसे केवल ‘Generation Gap’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘Generational Confluence’ अर्थात विभिन्न पीढ़ियों के संगम के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी के पास समाज को देने के लिए कुछ न कुछ होता है। वरिष्ठ पीढ़ी के पास अनुभव होता है, जबकि युवा पीढ़ी के पास ऊर्जा, नवीन विचार और बदलाव को गति देने का सामर्थ्य होता है। “अनुभव ऊर्जा को दिशा देता है और ऊर्जा अनुभव को नई गति प्रदान करती है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि हम अपने पूर्वजों के ज्ञान, अनुभव और उपलब्धियों के आधार पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि Generations में बदलाव और Gap, Knowledge, Innovation और Progress की निरंतरता का आधार भी है। “पीढ़ियों के बदलाव के बीच में ही भविष्य आकार लेता है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि हर पीढ़ी की अपनी परिस्थितियां और आवश्यकताएं होती हैं। इसलिए नीति निर्माण का उद्देश्य केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अवसरों और अधिकारों को भी सुरक्षित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम इसी दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि लगातार तुलना करने की प्रवृत्ति युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उनका आर्थिक रूप से सशक्त होना। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम और टेली-मानस जैसी पहलों के महत्व को रेखांकित किया।

रक्षा मंत्री ने Excessive Digital Interaction के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कदम उठाने की बात की। उन्होंने कहा “हम सभी Stakeholders और Experts के साथ विचार-विमर्श करके, युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे।”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि AI रोजगार के स्वरूप और आवश्यक कौशलों को तेजी से बदल रहा है। इस परिवर्तन को रोकना संभव नहीं है, लेकिन युवाओं को इसके लिए तैयार करना हमारे हाथ में है।

रक्षा मंत्री ने कहा “हमारा प्रयास है कि युवा केवल बदलती Technology के इस युग में Job Seekers न रहें, बल्कि अपनी Skills, Leadership और Innovation के बल पर Job Creators और Future Leaders बनें।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्येक पीढ़ी की जरूरतें और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के तरीके अलग होते हैं। इसलिए बदलती चुनौतियों के अनुरूप नीतियों का विकास आवश्यक है, लेकिन ‘राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम’ की भावना सदैव कायम रहनी चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा “अच्छी Policy वह है जो अनुभव से सीखती है, वर्तमान को समझती है और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखती है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि जब युवाओं को अनुकूल वातावरण, संसाधन और अवसर मिलते हैं, तो वे असाधारण उपलब्धियां हासिल करते हैं। उन्होंने भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार, वैश्विक नवाचार सूचकांक में देश की प्रगति और अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवा उद्यमियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया।

रक्षा मंत्री ने कहा एक Carpenter’ लकड़ी को अपने पूर्वनिर्धारितडिजाइन के अनुसार आकार देता है, जबकि Gardener’ पौधे को उसकीप्रकृति के अनुरूप विकसित होने के लिए अनुकूल वातावरण, पोषण औरसंरक्षण प्रदान करता है। इसी प्रकार, एक अच्छी नीति ऐसा वातावरणतैयार करती है , जिसमें प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा, रुचि और क्षमता केअनुरूप आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार इसी दृष्टिकोण के साथकार्य कर रही है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे दुनिया की श्रेष्ठ परंपराओं और विचारों से सीखें, लेकिन अपनी संस्कृति, सभ्यता और विरासत के प्रति हीनभावना न रखें। “हमें आधुनिकता के वेग में अपनी जड़ों से नहीं कटना है।”

युवाओं की ऊर्जा का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि युवाओं ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, उनकी ऊर्जा को गलत दिशा में जाने से रोकना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं को नशे, उग्र विचारधाराओं और कट्टरपंथी प्रभावों से बचाने तथा उनकी क्षमता को रचनात्मक कार्यों में लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि “यह बड़ों की जिम्मेदारी है कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिले।” उन्होंने आगे कहा कि “आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z खुद बहुत जागरूक है। उन्हें Vested Interests द्वारा, थोड़े से समय के लिए, भ्रमित तो किया जा सकता है। लेकिन उन्हें राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य से भटकाया नहीं जा सकता है।”

रक्षा मंत्री ने कहा “लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, अराजकता फैलाना नहीं। संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उनकी विश्वसनीयता को सुनियोजित ढंग से कमजोर करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”

अपने संबोधन के समापन में रक्षा मंत्री ने कहा कि अधिकारों के साथ उत्तरदायित्व, स्वतंत्रता के साथ अनुशासन, शक्ति के साथ संयम और सामर्थ्य के साथ सेवा का भाव आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय युवा इन मूल्यों के साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।