Text of RM’s speech during an interaction with DRDO scientists.
आज, Defence Research and Development organization द्वारा आयोजित, felicitation ceremony में, आप सभी के बीच आकर, मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही है। अभी मैं एक कार्यक्रम से सीधा आ ही रहा हूँ। इसके बाद तुरंत एक और कार्यक्रम में जाना है। लेकिन इन तमाम व्यस्तताओं के बावजूद भी, जहाँ हमारे scientists को सम्मानित किया जा रहा हो, वहाँ मैं न रहूँ, ऐसा भला कैसे हो सकता है।
आज हम सब, इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले, scientists को सम्मानित कर रहे हैं। लेकिन मुझे ऐसा लगता है, कि इस समारोह को सिर्फ एक सम्मान समारोह के रूप में नहीं देखना चाहिए, यह एक honouring ceremony नहीं, बल्कि gratitude ceremony है। Gratitude, उन असंख्य scientists और technicians के प्रति, जिन्होंने कड़ी मेहनत करके, armed forces के अंदर भरोसा जगाया है, देशवासियों के अंदर भरोसा जगाया है।
मैं आप सभी award winners का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। आपकी उपलब्धियाँ, individual success से कहीं आगे जाती हैं। Tanks, missiles, rocket systems और aircraft में use होने वाली technologies develop करके, आपने देश की सुरक्षा व्यवस्था में मज़बूती लाने का काम किया है। आपके द्वारा develop की गई, हर technology, हर system और हर successful trial, आगे चलकर भारत की strategic strength का हिस्सा बनता है। आपकी achievements, देश की सुरक्षा को मजबूती देती हैं, और भारत के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं। मैं इस अवसर पर, आप सबकी family और friends को भी, विशेष रूप से बधाई देता हूँ। आप इस यात्रा में अकेले नहीं हैं, इसके पीछे आपके परिवार का धैर्य, आपके दोस्तों का सहयोग और समाज का विश्वास लगातार साथ रहता है।
साथियों, एक तरफ यह कार्यक्रम recognition का है, आप सबकी मेहनत को पहचान देने का है, तो दूसरी तरफ responsibility को समझने का भी है। जब DRDO की journey को देखते हैं, तो हमें भारत की पूरी defence journey दिख जाती है। दोनों ही journeys एक जैसी रही हैं।
1958 में DRDO जब शुरू हुआ, तो एक छोटा सा organisation था। उस समय इसके पास सिर्फ 10 laboratories थीं। लेकिन समय के साथ बढ़ते-बढ़ते, आज आप देखिये, कि DRDO भारत की defence capability का backbone बन चुका है।
आज DRDO के पास लगभग 45 laboratories हैं, जो aeronautics, missiles, electronics, armaments, naval systems, life sciences और advanced computing जैसे critical क्षेत्रों में काम कर रही हैं। चाहे missile technology हो, radar systems हों, electronic warfare हों, या Light Combat Aircraft, DRDO ने भारत को equipment के साथ-साथ, self-reliance का आत्मविश्वास दिया है।
लगभग ऐसी ही evolving journey, हमें भारत के defence sector में भी देखने को मिलती है। दशकों तक हमारी defence requirements, विदेशी technologies पर निर्भर रहीं। उस समय परिस्थितियाँ भी ऐसी थीं, और options भी limited थे। लेकिन आज भारत एक अलग दौर में खड़ा है। आज हमारी सोच बदली है, हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है, और हमारा direction भी clear है। हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, आत्मनिर्भरता आज एक national mindset बन चुकी है।
इस परिवर्तन के केंद्र में DRDO की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रही है। Defence sector से जुड़ा शायद ही कोई क्षेत्र होगा, जहाँ DRDO की उपस्थिति न हो। आपने यह साबित किया है, कि Indian innovation किसी भी मामले में global standards से पीछे नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में उनसे आगे खड़ा है। और यह बदलाव अचानक नहीं आया है। इसके पीछे वर्षों की research, continuous testing, failure से सीखने की क्षमता, और armed forces के साथ close coordination रहा है।
आप हर तरीके की परीक्षा में खरे उतरे हैं। आपकी Technology की परीक्षा तो battlefield में भी हो चुकी है। अभी हाल ही में, Operation Sindoor में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमें दिखा। Operation Sindoor ने यह स्पष्ट कर दिया, कि हमारे स्वदेशी systems, भारत की operational readiness को मजबूत कर रहे हैं। यह सब DRDO के scientists, engineers और technical teams की collective effort का परिणाम है।
साथियों, हम आज जिस समय में खड़े हैं, वह भारत के लिए बहुत निर्णायक समय है। दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है। Technology हर दिन नया रूप ले रही है। ऐसे में जाहिर सी बात है, कि इस नई दुनिया से सामंजस्य बिठाने के लिए, हमें research and development पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
जब भी हम, Research and development पर focus करते हैं, तो वह केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। किसी भी research का असर हमारी overall economy पर भी पड़ता है, हमारे उद्योगों पर पड़ता है, हमारे युवाओं के रोजगार पर पड़ता है, और हमारी technological confidence पर पड़ता है।
Defence research का इस्तेमाल सिर्फ defence sector में ही नहीं होता, बल्कि उसका इस्तेमाल transport में होता है, health sector में होता है, agriculture में होता है और disaster management में होता है। यही दिशा हमें भी अपनानी है। आपका defence research, national research बनना चाहिए। Soldiers के लिए बनाई गई कोई technology, जब किसी farmer के काम आती है, या किसी doctor के काम आती है, तब उस research की सार्थकता और बढ़ जाती है।
साथियों, अगर हम दुनिया के विकसित देशों के, research organizations के प्रभाव का आकलन करें, तो हमें दिखता है, कि उनकी research का प्रभाव कितना व्यापक है। आप USA की Defense Advanced Research Projects Agency का उदाहरण देख लीजिये, कि कैसे वो लोग research में risk को भी बढ़ावा दे रहे हैं। वहाँ आमतौर पर, ऐसे projects को बढ़ावा दिया जाता है, जो पहले असंभव लगते हैं। हर project सफल नहीं होता, लेकिन जो सफल होता है, वह पूरी दुनिया को दिशा देता है।
साथियों, हमें भी अपने research culture में यही आत्मविश्वास लाना होगा, कि नया सोचना है, तेज़ी से सोचना है, और प्रयोग करने से डरना नहीं है। तेजी से सोचने पर भी ध्यान देना है, क्योंकि आज के दौर में technology बहुत तेजी से बदल रही है। आज जो technology नई है, हो सकता है, 4-5 वर्षों बाद वह irrelevant हो जाय।
इसलिए, आज के समय में, खासकर लड़ाई के मैदान में, ‘Survival of the fittest’ ही नहीं, बल्कि ‘Survival of the Fastest’ की theory को ध्यान में रखते हुए हमें आगे बढ़ना है । जो देश तेजी से सोचता है, तेजी से निर्णय लेता है, और तेजी से technology को deploy करता है, वही आगे रहता है। Research से लेकर Prototype तक, Prototype से लेकर Testing तक, और Testing से लेकर Deployment तक के बीच का समय कम करना होगा। Armed forces में timely induction, हमारी Performance का सबसे बड़ा parameter होना चाहिए। यही आज की असली चुनौती है।
साथियों, industry-production linkage की मज़बूती भी हमारे focus में होना चाहिए। DRDO आमतौर पर design और prototype पर focus करता है, लेकिन production करना industries का role है, इसलिए इस gap को कम करना जरूरी है। International models की तरह हमारे यहाँ भी co-development approach अपनाई जा सकती है, जहाँ design से production तक industry early stage से जुड़ी हो।
साथियों, आज के दौर में, दुनिया में काम करने के तौर-तरीकों में एक बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। Trade हो या governance, हर जगह बदलते समय के अनुसार act करने की जरूरत है। इसी भावना के साथ 2025 को हमने, रक्षा मंत्रालय में, Year of reforms भी घोषित किया। इस दौरान हमनें कई reforms भी किये। इसी क्रम में, DRDO में भी Review Committee की recommendations के आधार पर, अधिकांश सुझावों को लागू किया जा चुका है। मुझे पूरा विश्वास है, कि ये reforms DRDO के साथ-साथ पूरे Defence ecosystem को और अधिक सशक्त बनाएंगे।
साथियों, किसी भी research organization की सबसे बड़ी पूंजी उसके लोग होते हैं। आपके scientists, आपके engineers, और आपके technicians ही, आपकी असली ताकत हैं। उन्हें सीखने के अवसर देने होंगे, उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी देनी होगी और उन्हें यह भरोसा देना होगा, कि उनके ideas को सुना जाएगा। Research में failures भी होते हैं, उनसे सीखना होगा। ज़रूरी यह है, कि हर अनुभव से कुछ नया सीखा जाए।
साथियों, अच्छी बात यह है, कि आप सबने लगातार अपने अनुभवों से कुछ न कुछ सीखा है। मुझे याद है, कुछ समय पहले, मैंने DRDO के बड़े officials के साथ बातचीत में, एक लक्ष्य DRDO को दिया था। मैंने कहा था, कि अगर हम DRDO के हर lab के लिए, एक mission mode project को identify करें, 1 वर्ष में complete करें, तो हर वर्ष हम 80 से 100 projects पूरे कर सकते हैं।
मुझे यह जानकर बहुत ख़ुशी हुई, कि आपने मेरे सुझावों पर काम करते हुए, इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किये, और अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया। मैंने बस focused तरीके से, एक sense of urgency में काम करके, results produce करने की बात की थी, और आपने उसे चरितार्थ कर दिखाया। लेकिन, मैं यह भी आपसे कहना चाहूँगा, कि आपने जिस तेजी से, जिस quality के साथ इन targets को achieve किया है, वह इतिहास का हिस्सा बनकर न रह जाय। वह सिर्फ one time achievment बनकर न रह जाय। आपको अब इस speed को अपना स्वभाव बना लेना होगा। जिस Survival of the fastest की बात मैंने की, उसे अब DRDO के work culture में, पूरी तरह inculcate करना होगा।
साथियों, अंत में, मैं कुछ और सुझाव भी आपको देना चाहूंगा। आप defence के क्षेत्र में apex research organization हैं। जाहिर सी बात है, आपकी जिम्मेदारियाँ भी बहुत ज्यादा हैं। इसलिए मैं समझता हूँ, आपको research के क्षेत्र में risk लेने का भी साहस करना चाहिए। आप उन sectors से अब आगे बढ़िए, जहाँ private sector ने, पहले ही अपनी capability develop कर ली है। आप organization के अंदर ही, अलग से एक wing बना सकते हैं, जो उन sectors में जोखिम उठाए, जहाँ वैसे तो, सफलता की संभावना दिखने में तो बहुत कम है, लेकिन अगर उसमें सफलता मिलती है, तो वह historic हो।
इसके अलावा मैं आपसे यह कहना चाहूँगा, कि आप public sector undertakings और private sector के साथ, बढ़-चढ़कर सहयोग करिये। खुले मन से अपना knowledge उनके साथ share कीजिए। मैं जानता हूँ, कि scientists अपने intellectual property rights को लेकर, थोड़े से protective रहते हैं। लेकिन अब समय आ गया है, कि हम conventional areas से बाहर निकलें। जैसे, इसका एक example आप देखिये, यह DRDO और Hindustan Aeronautics Limited के बीच, knowledge sharing का ही प्रमाण है, कि Light combat aircraft तेजस, हमारे लिए एक बड़ी achievment के रूप में सामने आया है। ऐसी ही अनेक उपलब्धियाँ हमारा इंतज़ार कर रही हैं, इसके लिए जरूरी है, कि आप Academia के साथ मिलकर, public और private sector के साथ, knowledge share करें।
सरकार तो अपनी तरफ से प्रयास कर ही रही है, लेकिन Government support तभी meaningful होगा, जब DRDO, एकाधिकार वाले R&D model से निकलकर, collaborative ecosystem की ओर बढ़ेगा, और public sector, private industries, MSMEs, start-ups, तथा academia के साथ सहयोग करेगा। तभी हम आत्मनिर्भर भारत की तरफ मज़बूती से कदम बढ़ा पाएँगे।
साथियों, आज भारत, रक्षा क्षेत्र में जिस आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है, उसकी एक और कसौटी यह है, कि हमारी defence export capability कितनी बढ़ रही है। 2014 के समय भारत का जो Defence export, 1,000 करोड़ रुपये से भी कम हुआ करता था, वही आज बढ़कर record 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। लेकिन अभी तो ये बस शुरुआत है। हमें इसमें और वृद्धि करनी है। इसमें और तेजी लाने के लिए DRDO को systems design करते समय, शुरू से ही export markets को ध्यान में रखना चाहिए, खासकर Drones, Radars, Electronic Warfare systems, और Ammunition पर हमें ध्यान देना होगा। Export पर focus करने से, Cost recovery भी होती है, Global credibility भी बनती है, और Strategic partnerships भी मजबूत होती है।
मुझे पूरा विश्वास है, कि आप सब इस दिशा में काम करेंगे। आपकी आत्म शक्ति और ज्ञान शक्ति मिलकर, भारत की समग्र शक्ति को बढ़ाने का काम करेंगे।
2047 तक, जिस विकसित राष्ट्र के निर्माण का लक्ष्य हम सबने रखा है, उसमें बहुत बड़ा योगदान, आप सभी का होने वाला है। आप सभी के प्रयासों से, भारत न सिर्फ scientific रूप से, बल्कि सोच और आत्मबल के स्तर पर भी, और अधिक सशक्त बनेगा।
इसी विश्वास के साथ, कि आप सभी इसी तरह, लगातार भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में, अपना योगदान देते रहेंगे, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।