हमारी नौसेना भारत के हितों की रक्षा करने में सक्षम है: राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech at the commissioning ceremony of INS Taragiri in Visakhapatnam.

 

आज, Indian Navy में, State-of-the-Art Warship, ‘तारागिरी की commissioning हो रही है। इस शुभ अवसर पर, आप सभी के बीच उपस्थित होकर, मुझे बड़े गौरव की अनुभूति हो रही है। तारागिरी की commissioning, भारत की बढ़ती हुई सामुद्रिक शक्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर मैं, Mazagaon Dock Shipbuilders Limited, और Indian Navy समेत, सभी देशवासियों को बधाई देता हूँ।

साथियों, आज हम City of Destiny, विशाखापत्तनम में उपस्थित हैं। यह शहर, अपने आप में, भारत की समुद्री शक्ति का साक्षी रहा है। इसलिए विशाखापत्तनम से, INS तारागिरी की commissioning, अपने आप में एक बड़ा क्षण है।

साथियों, हमारी सांस्कृतिक विरासत से लेकर, आज की strategic realities तक, समुद्र ने हमेशा भारत की दिशा तय की है। भारत का तो हमेशा से ही, समुद्र के साथ, अनोखा संबंध रहा है; और समय के साथ, समुद्र से हमारा रिश्ता और भी मजबूत होता गया। एक समय था, जब समुद्र हमारे लिए व्यापार, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम था, लेकिन आज यह हमारे लिए security, sovereignty, और strategic strength का आधार बन चुका है। आज जब हम, अपने आसपास के समुद्री क्षेत्र को देखते हैं, तो यह समझ में आता है, कि समुद्र असल मायने में, हमारे विकास का मार्ग है, हमारी connectivity का आधार है, और हमारी आर्थिक शक्ति का स्तम्भ है।

इतिहास में भी आप देखिए, कि पिछले 200-300 वर्षों में, जिन भी देशों ने marine power पर अपना ध्यान केंद्रित किया, उनका विकास तेजी से हुआ। Colonialism के दौरान भी, strong naval power वाले देशों ने, पूरी दुनिया में अपने उपनिवेश बनाए। व्यापार से लेकर strategic region तक, हर जगह वैसे देशों का वर्चस्व रहा। कम से कम, इतिहास तो हमें यही बताता है, कि अपनी Naval power को मज़बूत किये बिना, कोई भी देश सही मायने में शक्तिशाली नहीं माना जा सकता।

इसलिए साथियों, जब हमारे प्रधानमंत्री जी, 2047 तक, एक विकसित भारत के निर्माण की बात करते हैं, तो उसमें भी marine power की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। 11,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी coastline वाला देश, तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ हमारा देश, अपने विकास को समुद्र से अलग करके नहीं देख सकता। हमारा लगभग 95 प्रतिशत trade समुद्री मार्गों से होता है। हमारी energy security भी समुद्र पर निर्भर करती है। ऐसे में यह स्पष्ट है, कि एक strong और capable Navy हमारे लिए कोई option नहीं, बल्कि एक necessity है।

इस बात को, यानि marine importance को, हम भली-भाँति समझते हैं। इसलिए आपने देखा होगा, कि हमारी Navy, चाहे वह Persian Gulf हो, या Malacca Strait, लगातार, Indian Ocean में अपनी presence बनाए रखती है। जब भी कोई संकट आता है, चाहे evacuation operations हों, या humanitarian assistance प्रदान करना हो, हमारी Navy हमेशा सबसे आगे रहती है। हमारी Navy, भारत के values और commitment का प्रतीक है। INS तारागिरी की commissioning, हमारी Navy की ताकत में, values में, तथा commitment में, और वृद्धि करेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।

साथियों, आज का security environment तेजी से बदल रहा है, और आप सभी यह महसूस कर रहे होंगे, कि maritime domain अब कितना महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में, अथाह समुद्र में अनेक sensitive points भी हैं, जहाँ हमारी Navy ने, goods की smooth supply को ensure करने के लिए, लगातार अपनी active presence दर्ज कराई है। जब भी वहां तनाव की स्थिति बनी है, Indian Navy ने हमारे commercial ships, और oil tankers की security ensure की है। हमारी नौसेना ने यह साबित किया है, कि वह न केवल भारत के हितों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दुनिया भर में, अपने नागरिकों और व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए, हर कदम उठा सकती है। यह capability ही, भारत को एक responsible maritime power बनाती है।

साथियों, हम सब जिस युग में रह रहे हैं, उसमें धरती, सिर्फ सूरज, चाँद, यानि light, हवा और पानी से ही नहीं, बल्कि data से भी चल रही है, internet से भी चल रही है। हम एक तरह के digital युग में रह रहे हैं; और आज के digital युग में, समुद्र की एक और महत्वपूर्ण भूमिका है, जिस पर आम लोगों का ध्यान comparatively कम जाता है। वह भूमिका जुड़ी है, under-sea internet cables से ।

दुनिया का अधिकांश data, इन्हीं cables के माध्यम से, एक देश से दूसरे देश तक पहुँचता है। हमारे financial transactions, communication networks, defence coordination, सब कुछ इन undersea internet cables पर निर्भर करता है। यदि इन cables को कोई नुकसान पहुँचता है, तो उसका प्रभाव केवल एक देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए हमें अपनी maritime security को, traditional दृष्टिकोण से आगे बढ़कर, एक comprehensive, और future-ready framework में देखना होगा। हमें केवल अपने तटों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उन critical sea lanes, choke points और digital infrastructure की भी सुरक्षा ensure करनी है, जो हमारे national interest से जुड़े हैं। मुझे इस बात की खुशी होती है, कि Indian Navy इन सब सुरक्षा कार्यों में, pro-actively engaged है।

सुरक्षा के प्रति हमारा यही दृष्टिकोण, हमें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा, और भारत को एक सशक्त maritime power के रूप में स्थापित करेगा। ऐसे में जब भारत, अपने यहाँ तारागिरी जैसे advanced ships बनाता है, और उन्हें deploy करता है, तो यह पूरे region के लिए peace and prosperity की guarantee होता है।

साथियों, यदि मैं आईएनएस तारागिरी की बात करूँ, तो मुझे लगता है, कि यह हम सबके लिए, एक ख़ास achievement है। इस ship के नाम में भी एक गहरा अर्थ छिपा हुआ है। यह नाम हिमालय की एक पर्वत श्रृंखला से लिया गया है, जो strength, stability और vigilance का प्रतीक है। जैसे पहाड़, अपनी जगह पर अडिग खड़े रहते हैं, और चारों ओर नजर रखते हैं, वैसे ही यह warship हमारे समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा करेगी। इसका crest भी इसी भावना को दर्शाता है, जहाँ एक eagle, ऊँचाई से अपने क्षेत्र पर नजर रखता है। यह symbol अपने आप में, सतर्कता और साहस दोनों का ही प्रतीक है।

नौसेना की परंपरा में यह माना जाता है, कि किसी जहाज का नाम, अपने साथ एक legacy लेकर आता है। पहले भी आईएनएस तारागिरी ने, लंबे समय तक देश की सेवा की थी, और उसने naval self-reliance की नींव मजबूत की थी। आज उसी नाम को, एक modern stealth frigate के रूप में, आगे बढ़ाया जा रहा है। यह continuity हमें यह दिखाती है, कि हमने अपने अतीत से सीखा है, और उसी आधार पर हम आगे बढ़ रहे हैं। आईएनएस तारागिरी, एक journey है, जो past और future, दोनों से जुड़ी है।

आईएनएस तारागिरी, P-17-A class की चौथी ship है, और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है, कि इसे, हमारे अपने Warship Design Bureau के engineers ने design किया है, और मझगाँव डॉक shipbuilders limited ने इसे तैयार किया है। मुझे यह देखकर बड़ा संतोष होता है, कि आज भारत warship design, और development के क्षेत्र में, एक मजबूत position पर खड़ा है। और यह बदलाव अचानक नहीं आया है, यह वर्षों की मेहनत, learning process और लगातार improvement का परिणाम है।

लगभग 7000 टन वज़न वाला यह ship, केवल आकार में ही बड़ा नहीं है, बल्कि अपनी capabilities में भी उतना ही शक्तिशाली है। यह तेज गति से चल सकता है, और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें ऐसे सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, खुद को सुरक्षित रखने, और जरूरत पड़ने पर, तुरंत जवाब देने में मदद करते हैं। इसके साथ ही इसमें आधुनिक radar, sonar और missile systems, जैसे BrahMos और surface to air missiles लगाए गए हैं, जो इसकी ताकत को और बढ़ाते हैं।

साथियों, एक बात हम सभी समझते हैं, कि कोई भी platform कितना ही advanced क्यों न हो, उसकी असली परीक्षा field में ही होती है। जैसे एक तलवार की असली पहचान उसकी धार से होती है, वैसे ही एक warship की पहचान उसकी performance से होती है। आईएनएस तारागिरी को, multi-role operations के लिए तैयार किया गया है। High intensity combat से लेकर, maritime security, anti-piracy operations, coastal surveillance, और humanitarian missions तक, यह हर role में fit बैठता है। यह flexibility ही, इसे एक Unique naval platform बनाती है।

और एक बात जो विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है, वह यह है, कि इस जहाज का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा indigenous है। इसका मतलब यह है, कि shipbuilding में, हम अब केवल consumer नहीं हैं, बल्कि producer बन चुके हैं। यह बदलाव बहुत बड़ा है। पहले हम defence equipment के लिए बाहर देखते थे; आज दुनिया हमारी ओर देख रही है। यही आत्मनिर्भर भारत की असली भावना है, जो ground level पर दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर देखें, तो आईएनएस तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है।

अभी पिछले ही वर्ष, इस श्रृंखला का पहला जहाज, INS नीलगिरी, Navy में शामिल हुआ था, और आज इतने कम समय में श्रृंखला का चौथा जहाज तैयार होकर हमारे सामने है। यह हमारे shipbuilding ecosystem की speed, और efficiency को दिखाता है। जब हम ऐसे उदाहरण देखते हैं, तो यह विश्वास और मजबूत होता है, कि भारत अब defence manufacturing में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह एक clear signal है, कि हम global level पर अपनी पहचान बना रहे हैं। यह एक स्पष्ट संकेत है, कि रक्षा क्षेत्र में भारत की आभा, संपूर्ण विश्व में फैल रही है।

साथियों, हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, defence manufacturing को एक national mission के रूप में आगे बढ़ाया गया है। आज हम केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि global supply chain में भी अपनी जगह बना रहे हैं। आईएनएस तारागिरी, इसी सोच का प्रतीक है, जहाँ design से लेकर development, और deployment तक, हर स्तर पर भारत की भागीदारी है। यह हमें विश्वास देता है, कि हम अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अपने future को भी खुद design करने की क्षमता रखते हैं।

पिछले एक दशक में, देश ने एक बड़ा बदलाव महसूस किया है। सरकार ने युवाओं, और industry के लिए ऐसा ecosystem तैयार करने की कोशिश की है, जहाँ innovation, manufacturing और export को लगातार बढ़ावा मिले। आज जब हम defence sector की बात करते हैं, तो यह साफ दिखाई देता है, कि आत्मनिर्भरता के अलावा हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हमें अपनी सुरक्षा को केवल land, sea और air तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि space, cyber space और economic domain तक भी मजबूत करना है। इसी सोच के साथ, कई बड़े policy decisions लिए गए हैं, जिनका असर आज ground पर दिख रहा है।

मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की भूमिका, इसमें बहुत महत्वपूर्ण रही है। दशकों से यह संस्थान, देश के लिए advanced naval platforms तैयार कर रहा है। Skilled Workforce, Modern Infrastructure और Quality के प्रति Commitment ने, इसे एक trusted name बना दिया है। वैसे भी, भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में, हमारे DPSUs ने, हमेशा सकारात्मक योगदान दिया है। हमारे पास 16 DPSUs हैं, जो defence sector में हमारी आत्म निर्भरता के केंद्र हैं। मुझे यह देखकर बड़ी खुशी होती है, कि आज के इस technological era में तो हमारी DPSUs अच्छा कर ही रही हैं, लेकिन जब एक राष्ट्र के रूप में, हम कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे, तब भी हमारे DPSUs ने, आगे बढ़कर नेतृत्व किया था। हमारी DPSUs ने, हर दौर में यह प्रयास किया है, कि भारत का रक्षा तंत्र और मज़बूत हो। मैं इसके लिए सभी DPSUs, और विशेषकर, मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को बधाई देता हूँ।

अंत में, मैं उन सभी लोगों को बधाई देना चाहता हूँ, जिन्होंने इस उपलब्धि को संभव बनाया। भारतीय नौसेना, Mazagon Dock Shipbuilders Limited, हमारे engineers, scientists, देश भर के MSMEs, और हर वह व्यक्ति, जिसने इस जहाज के निर्माण में योगदान दिया, सभी इस सफलता के हिस्सेदार हैं। यह warship हमारे national pride और collective commitment का प्रतीक है। जब यह जहाज समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह पूरी दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत की ताकत भारत के लोगों में है, उनकी मेहनत में है, उनकी क्षमता में है, और उनके अटूट संकल्प में है।

इसी विश्वास के साथ, मैं आप सभी को, INS तारागिरी की commissioning की बधाई देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।

धन्यवाद।