Text of RM’s speech at the Sansad Khel Mahakumbh-2026 in Lucknow.
पिछले वर्ष लखनऊ के इसी ऐतिहासिक के डी सिंह बाबू स्टेडियम में सांसद खेल महाकुंभ की शुरुआत हुई थी। इस साल, इस प्रतियोगिता का बेहतर और भव्य संस्करण आप सबके सामने है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से लखनऊ में सांसद खेल महाकुंभ को प्रारंभ किया गया है और यह सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।
किसी भी देश या समाज में विकास का जो पैमाना होता है, उसमें वहाँ पर GDP के साथ-साथ देश के एथलीटों का दुनिया भर के स्पोर्टिंग इवेंट्स में कैसा Performance होता है और Sports GDP Contribution पर भी निर्भर होता है। यानि उस देश की GDP में स्पोर्ट्स का कितना योगदान है, यह भी एक बड़ा पैमाना होता है।
पिछले साल मैं ऑस्ट्रेलिया गया था। वहाँ पर मैंने देखा कि खेलों के प्रति वहाँ लोगों का इतना अधिक रुझान है कि वहाँ पर खेल उनकी ज़िंदगी का हिस्सा है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ वे क्रिकेट के खेल में अच्छे हैं, वहाँ हर खेल के अच्छे खिलाड़ी हैं। जबकि वहाँ की आबादी बमुश्किल तीन करोड़ है यानि लगभग दिल्ली की आबादी के बराबर।
जब हम भारत में खेलों की बात करते हैं तो हम यह देख सकते हैं कि भारत में खेलों को कभी वह महत्व नहीं मिला जिसका वह हकदार रहा है।
इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि समाज में खेल और खिलाड़ियों के महत्व को न केवल समझा जाये बल्कि उन्हें फलने-फूलने का पूरा अवसर भी दिया जाये।
भारत में पिछले दस-बारह वर्षों में खेलों को लेकर माहौल काफ़ी बदला है। पहले हम केवल एक क्रिकेट और हॉकी खेलने वाले देश के रूप में जाने जाते थे। जब बात ओलंपिक खेलों की आती थी तो हम मेडल्स टैली में अपना नाम तक दर्ज नहीं करा पाते थे। लेकिन अब भारत बड़े-बड़े स्पोर्टिंग इवेंट्स में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल साबित हो रहा है।
हमारा लखनऊ शहर, अपनी स्पोर्टिंग कल्चर के लिए पहले के समय में भी जाना जाता था। आजादी के बाद जब पहली बार National Games का आयोजन किया गया तो 1948 में हमारे-आपके इसी शहर में किया गया।
उसके बाद भी समय-समय पर यहां नेशनल और इंटरनेशनल स्पोर्टिंग इवेंट्स आयोजित होते रहे हैं। और अब यह सांसद खेल महाकुंभ भी लखनऊ के स्पोर्टिंग कैलेंडर में जुड़ चुका है। इसके दो संस्करण हो चुके हैं। मेरी कोशिश रहेगी कि यह सिलसिला लगातार बना रहे।
साथियों, पिछले ग्यारह वर्षों में भारत में खेल का एक नया युग शुरु हुआ है। ये नया युग विश्व में भारत को सिर्फ एक बड़ी खेल शक्ति बनाने भर का ही नहीं है। बल्कि ये खेल के माध्यम से समाज के सशक्तिकरण का भी नया दौर है।
एक समय था जब हमारे देश में खेलों को लेकर एक उदासीनता का ही भाव था। स्पोर्ट्स भी एक करियर हो सकता है, ये कम ही लोग सोचते थे। और इसकी वजह थी कि स्पोर्ट्स को सरकारों से जितना समर्थन और सहयोग मिलना चाहिए था, वो मिलता नहीं था।
ना तो स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर उतना ध्यान दिया जाता था और ना ही खिलाड़ियों की ज़रूरतों का ध्यान रखा जाता था। खेलों के प्रति आम भारतीय परिवारों में भी कोई आकर्षण नहीं था। उसकी वजह से खेल सिर्फ एक टाइम पास वाली चीज़ बन गई थी।
जो लोग खेलना भी चाहते थे, उनके लिए छोटे शहरों में भी स्पोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिलता था। कई खिलाड़ियों की प्रतिभाएं इन अभावों के चलते दम तोड़ दिया करती थीं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार, आज खेल और खिलाड़ियों से जुड़ी इन समस्याओं का भी समाधान कर रही है। Urban sports infrastructure के लिए जो योजना थी, उसमें भी पहले की सरकार ने 6 साल में सिर्फ 300 करोड़ रुपए खर्च किए।
जबकि खेलो इंडिया अभियान के तहत हमारी सरकार स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब-करीब पाँच हजार करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। बढ़ते हुए स्पोर्ट्स इंफ्रा की वजह से अब ज्यादा खिलाड़ियों के लिए खेल से जुड़ना आसान हो गया है।
आज गांवों के पास भी आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। देश के दूर-सुदूर में भी अब बेहतर मैदान, आधुनिक स्टेडियम, आधुनिक ट्रेनिंग फैसिलिटी बनाई जा रही हैं। यूपी में भी स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट्स पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
लखनऊ में भी खेल सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मगर मेरी इच्छा है कि लखनऊ में हर खेल की वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी बन कर तैयार हो।
जैसे अभी यहाँ इकाना में अटलजी स्टेडियम है। यह केडी सिंह बाबू स्टेडियम है मगर लखनऊ जैसे शहर में स्पोर्टिंग फैसिलिटीज़ का और अधिक विस्तार करने का मेरा प्रयास होगा।
जैसे यहाँ पर विश्वस्तरीय ट्रैक एंड फील्ड इवेंट ऑर्गेनाइज करने के लिए स्टेडियम हो। ओलंपिक स्तर का यहाँ स्विमिंग पूल बने, जहाँ युवा पीढ़ी तैरना सीख सके। शूटिंग रेंज का निर्माण भी लखनऊ में हो इसके बारे में भी मैं सोच रहा हूँ।
लखनऊ में स्पोर्टिंग कल्चर को और अधिक विकसित करने के उद्देश्य से ही यह सांसद खेल महाकुंभ का आयोजन शुरू किया गया है। इसमें हजारों की तादाद में पूरे लखनऊ संसदीय क्षेत्र से नौजवान, बेटे-बेटियों ने खेल-कूद में भाग लिया है। इस तरह के आयोजन अन्य स्थानों पर भी हो रहे हैं।
आज देश को इसके सुखद परिणाम भी मिल रहे हैं। बीते वर्षों में कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हमारे खिलाड़ियों ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। ये दिखाता है कि भारत के हमारे युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास आज कितना बुलंद है।
हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पोर्ट्स को एक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। देश की पहली राष्ट्रीय खेल यूनिवर्सिटी के निर्माण से इसमें और मदद मिलेगी।
अब राज्यों में भी स्पोर्ट्स स्पेशलाइज्ड हायर एजुकेशन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश बहुत प्रशंसनीय काम कर रहा है। मेरठ में मेजर ध्यान चंद खेल विश्वविद्यालय का उदाहरण हमारे सामने है।
इसके अलावा आज देशभर में 1000 खेलो इंडिया सेंटर्स की भी स्थापना की जा रही है। करीब 2 दर्जन नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस भी खोले गए हैं। इन सेंटर्स पर प्रदर्शन को सुधारने के लिए ट्रेनिंग और स्पोर्ट्स साइंस सपोर्ट दिया जा रहा है।
खेलो इंडिया ने भारत के पारंपरिक खेलों की प्रतिष्ठा को भी पुनर्स्थापित किया है। गटका, मल्लखंब, थांग-टा, कलरीपयट्टू और योगासन जैसी विभिन्न विधाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भी सरकार स्कॉलरशिप्स दे रही है।
खेलो इंडिया प्रोग्राम से एक और उत्साहजनक परिणाम हमारी बेटियों की भागीदारी को लेकर आया है। देश के अनेक शहरों में खेलो इंडिया वीमेन्स लीग का आयोजन किया जा रहा है। इनमें महिलाओं की भागीदारी काफ़ी अधिक है।
साथियों, आप सभी युवा साथियों ने एक ऐसे समय में खेल के मैदान में कदम रखा है, जब भारत अपनी अज़ादी का अमृतकाल मना रहा है। आपकी प्रतिभा भारत की प्रगति से जुड़ी हुई है। कल को जब आप अपने खेलों में चैंपियन बनेगें तो आपके ऊपर इस बात की जिम्मेदारी है कि आप भारत को हर जगह एक चैंपियन देश बनने में अपना योगदान करें।
आप लोग भारत के भविष्य ही नहीं विकसित भारत के अग्रदूत भी हैं। इसलिए खेलते रहिए और खिलते रहिए। आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद!