भारत के खिलाफ कोई misadventure हुआ तो decisive action होगा: रक्षा मंत्री

सबसे पहले मैं यहाँ मौजूद सभी पूर्व सैनिकों को नमन करता हूँ, उन्हें सैलूट करता हूँ क्योंकि उन्होंने इस देश की रक्षा के लिए अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्र सेवा में लगाया। भले ही हमारे देश में ex-servicemen रिटायर हो जाते हैं, मगर उनके भीतर का सैनिक कभी रिटायर नहीं होता है। क्योंकि Once a Soldier always a soldier।

वैसे तो हमारा केरल भारत के सबसे सुरक्षित states में से एक है, मगर यहाँ के लोगों के अंदर राष्ट्र रक्षा का भाव इतना अधिक है कि केरल के लोग सिर्फ़ Navy ही नहीं, बल्कि Army और एयरफोर्स में भी बड़ी संख्या में मिलते हैं। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों की भी सूची काफ़ी बड़ी है।

कौन भूल सकता है, मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, अशोक चक्र पुरस्कार विजेता की supreme sacrifice को, जब ‘मुंबई टेरर अटैक’ के दौरान उन्होंने आतंकवादियों से लड़ते अपनी जान दे दी।

यह देश का दुर्भाग्य था कि उस समय की कांग्रेस सरकार ने मेजर संदीप उन्नीथन के बलिदान का उचित सम्मान नहीं किया। मगर आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की एनडीए की सरकार के समय में सेना और सैनिकों के सम्मान में हम कोई कमी नहीं रखते हैं।

हमारी सरकार का भी यह मानना है, कि हमारे soldiers और veterans देश के मजबूत स्तम्भ हैं। उनकी देखभाल करना, हमारी moral duty है। हमारी सरकार ने अपने veterans के लिए, बीते वर्षों में कई ठोस फैसले लिए हैं, और आने वाले समय में भी यह सिलसिला रुकेगा नहीं।

लंबे समय से चली आ रही, ‘One Rank – One Pension’ की मांग को, सरकार ने पूरी honesty से implement किया। इसके कारण हमारे वेटरन्स के जीवन में न केवल financial stability आई, बल्कि यह भरोसा भी मजबूत हुआ, कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की leadership में NDA सरकार ने उनके साथ जस्टिस किया है।

साथियों, कांग्रेस ने इस देश के पूर्व सैनिकों की आखों में भी धूल झोंकने का काम किया है। ये कांग्रेस ही है, जो चार दशक तक ‘वन रैंक वन पेंशन’ के नाम पर हमारे पूर्व सैनिकों से विश्वासघात करती रही। कागजों पर सिर्फ 500 करोड़ रुपए रखकर कांग्रेस कहती थी कि वो ‘वन रैंक – वन पेंशन’ लागू करेगी। जबकि इसके लिए हजारों करोड़ रुपए चाहिए थे।

हमने 2013 में लोकसभा इलेक्शन से पहले कहा था कि सरकार बनने पर OROP लागू करेंगे। भाजपा सरकार ने न सिर्फ ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किया बल्कि पूर्व सैनिकों को एरियर भी दिया।   यानि जो हम कहते हैं, वह करके दिखाते हैं।

अपने veterans के अलावा, हम उन सैनिकों का भी उचित सम्मान कर रहे हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए supreme sacrifice दिया। इसी भावना से हमने National War Memorial जैसे स्थान बनवाए, जो हर नागरिक को यह याद दिलाते हैं, कि आज हम जिस शांति और आज़ादी में जी रहे हैं, उसके पीछे कितने बलिदान छिपे हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि आज़ादी के इतने सालों तक देश में राज करने के बावजूद कांग्रेस सरकार एक War Memorial  तक नहीं बना पायी। आज हम देश के अलग-अलग हिस्सों में भी वॉर मेमोरियल बना रहे हैं ताकि    देश की future generations को inspiration मिले कि हमारे सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए क्या काम किया है।

जब 1962 में वॉर हुई, तो भारत के सैनिकों ने रिज़ांग ला में एक करिश्मा किया था। 120 सैनिकों की एक यूनिट ने सामने आ रहे, हज़ार से अधिक दुश्मनों का डट कर मुकाबला किया और They Fought Till Their Last Bullet and Breath. इस बहादुरी के सम्मान में रेज़ांग ला में एक भव्य स्मारक बनाया गया।

इतना ही नहीं गलवान में बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों के भी सम्मान में हमने एक बड़ा वॉर मेमोरियल बनाया है। यह बताता है कि हमारे लिए सैनिकों का कितना महत्व जबकि उस पार गलवान conflict में कितने लोग मारे गए, उसका मेमोरियल तो दूर उसको खुल कर acknowledge भी नहीं किया गया।

साथियों, सेना से retire होने के बाद जीवन का नया chapter शुरू होता है, और हमारी सरकार का यह प्रयास है, कि यह chapter, dignity और self-confidence से भरा हो। इसी सोच के तहत veterans के rehabilitation और employment पर खास ध्यान दिया जा रहा है। उन्हें नए skills सिखाए जा रहे हैं, ताकि वे retirement के बाद भी अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकें।

Public enterprises में उन्हें priority दी जा रही है, और private sector में भी उनके discipline, leadership और integrity को पहचान मिल रही है। जो veterans अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं, सरकार उन्हें भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। Housing schemes हों, loan की facility हो या दूसरी welfare schemes हों, इन सबको veterans के according भी accommodate किया जा रहा है।

साथियों, जब हम भारत के, गौरवशाली इतिहास पर ध्यान देते हैं, तो हमें केरल से जुड़ी कई सारी बातें मिलती हैं। लगभग ढाई हजार वर्ष पहले से लेकर middle ages तक, भारत global trade का एक हब रहा। उस समय भारत knowledge, commerce और culture, तीनों ही क्षेत्रों में lead role निभा रहा था।

उस समय भारत के जहाज़ विशेष रूप से केरल से समुद्री मार्गों के माध्यम से दूर-दूर तक यात्रा करते थे। हमारा संपर्क Roman Empire और मेसोपोटामिया की सिविलाइजेशन तक स्थापित था। श्रीलंका, साउथ ईस्ट एशिया, कंबोडिया और इंडोनेशिया तक भारतीय व्यापारियों और समुद्री यात्रियों की active presence थी।

यह जो बाहरी दुनिया से संपर्क था, वह भी केवल trade तक सीमित नहीं था, बल्कि cultural exchange का भी माध्यम था। भारत ने spices, textiles और handicrafts export किए, लेकिन इसके साथ-साथ हमने philosophy, astronomy, mathematics, और cultural ideas  भी विश्व के साथ exchange किए।

आज भी जब हम, South-East Asia की ओर देखते हैं, तो इस ऐतिहासिक संबंध के अनेक उदाहरण दिखाई देते हैं। आप में से अनेक लोग अवगत होंगे, कि Thailand की प्राचीन राजधानी ‘अयुथ्या’ का नाम, अयोध्या से inspired रहा। Indonesia की national airline का नाम भी “गरुड़” है, जो भारतीय पुराणों की सांस्कृतिक स्मृति को दर्शाता है।

अभी हाल ही में वापस आए, “कौण्डिन्य Ship Project” के माध्यम से, भारत की इसीविरासत को, revive करने का एक प्रयास देश को देखने को मिला। इस initiative का उद्देश्य, प्राचीन भारतीय shipbuilding techniques को समझना, और उन्हें modern perspective में पुनः स्थापित करना था। इसके तहत, Stitched ship method के आधार पर एक special ship का निर्माण किया गया। जिसमें लकड़ी के तख्तों को iron nails से नहीं, बल्कि नारियल की रस्सियों से जोड़ा गया और wooden planks से seal किया गया। यह वही तकनीक थी, जिसका उपयोग हमारे प्राचीन समुद्री यात्रियों द्वारा किया जाता था।

आज भारत ship building में दुनिया की किसी भी बड़ी शक्ति से कम नहीं है। इसी केरल में मौजूद कोचीन शिपयार्ड में भारत का सबसे पहला indigenously developed एयरक्राफ्ट कैरियर बन कर तैयार हुआ। यह कोई छोटी achievement नहीं है। दुनिया के चार पाँच देश ही इस तरफ़ के एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की capability रखते हैं।

साथियों, आज जिस तरह से maritime domain की importance बढ़ रही है, उसे ध्यान में रखते हुए हम अपनी ancient wisdom, और modern technology, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि हम 2047 तक भारत की नेवी को दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर नेवी बनाना चाहते हैं।

आप देखिये, कि आज maritime domain पहले की तुलना में, काफी बदल चुका है। आज के समय में maritime domain, केवल trade routes या naval strength तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह national resilience, economic growth, technological innovation और strategic autonomy का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।

साथियों, मैंने देश के ‘होम मिनिस्टर’ के रूप में काम किया है और आज ‘डिफेंस मिनिस्टर’ के तौर पर देश को अपनी सेवायें दे रहा हूँ। पिछले ग्यारह-बारह वर्षों में, चाहे Internal Security की बात हो, चाहे बाहर के दुश्मनों से सुरक्षा की बात हो, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने National Security को मजबूती दी है। हमने National Security से जुड़े हर मुद्दे पर सरकार के Attitude और Action के तरीके, दोनों को बदला है।

यह बदलाव पूरी दुनिया को हाल ही में हुए, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देखने को मिला है। पहलगाम में हुए आतंकी हमलों में आतंकवादियों ने जिस तरह धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया, उसने पूरे देश को झकझोरा। वह हमला सिर्फ हमारे लोगों पर नहीं था, वह भारत की social unity और हमारे social fabric पर किया गया हमला था। इसके ख़िलाफ़ भारत ने बड़ी और कड़ी कारवाई करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी अड्डों और उससे जुड़े अन्य इंफ्राट्रक्चर को तबाह कर दिया। यह आतंकवाद के ख़िलाफ़ की गई भारतीय इतिहास की आज तक की सबसे बड़ी कारवाई है।

यदि मैं यहाँ सिर्फ आतंकवाद की बात करूँ, तो आप याद कीजिए कि जब कांग्रेस लेड यूपीए गवर्नमेंट का शासन था, तो कैसे हालात थे? आये दिन देश के किसी न किसी हिस्से में या तो आतंकी घटना होती थी, या फिर शहरों में Bumb Blasts की खबरें आती थी। और उस समय सरकार का Response क्या होता था? मोटे – मोटे डॉजियर सौंपे जाते थे, जिन पर कोई Action नहीं लिया जाता था।

जब से सेंटर में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में NDA गवर्नमेंट आई है, आतंकवादी घटनाओं पर न केवल लगाम लगी है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ हमने Decisive Action लिया है। चाहे ‘उरी अटैक’ के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक हो, ‘पुलवामा’ के बाद की गई एयर स्ट्राइक हो या फिर अभी ‘पहलगाम’ की घटना के बाद किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हो, हमने आतंकवाद के खिलाफ जबरदस्त प्रहार किया है।

आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है। वह इसके खिलाफ सरहद के इस पार और उस पार दोनों तरफ़ कार्रवाई करता है।

पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद भारतीय सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को महज 22 मिनट में घुटनों पर ला दिया था। भारतीय Military History में आतंकवाद के खिलाफ किया गया, अब तक का यह सबसे बड़ा ऑपरेशन था। यह ऑपरेशन अभी तक बंद नहीं हुआ है। यदि कोई भी गलत हरकत सरहद पार से हुई, तो उसका मुँह तोड़ जवाब ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि Unprecedented Action होगा।

मगर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी हमने ख़त्म नहीं किया है, क्योंकि हमारा neighbour आजकल जो situation है उसमें कोई भी misadventure कर सकता है। अगर उसने ऐसा किया तो भारत का एक्शन unprecedented  और decisive होगा।

साथियों, आज हम सब एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। आज हम देख रहे हैं कि West Asia में बड़ा conflict चल रहा है। केरल के बहुत सारे लोग इन देशों में रहते और काम करते हैं, मगर उन्हें चिंता नहीं करनी है, क्योंकि हम अपने भारतीय नागरिकों की रक्षा और सुरक्षा में हर कदम उठाने में न केवल सक्षम हैं बल्कि तैयार भी हैं।

लोग West Asia के इस conflict के कारण कई तरह का झूठ फैला कर Panic फैलाना चाहते हैं। न तो देश में पेट्रोल – डीजल की कमी है, न ही कुकिंग गैस सिलिंडर की। भारत इस किसी भी Energy Crisis से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारी नेवी Strait of Hormuz से भारतीय टैंकरों को सुरक्षित निकाल रही है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी रोज़ अपने Diplomatic Skills का प्रयोग करते हुए भारतीय हितों की रक्षा कर रहे हैं। जबकि विपक्ष इस संकट के समय देश के साथ खड़े होने के बजाय petty politics करने का काम कर रहा है।

साथियों, आज West  Asia में जिस तरह की परिस्थितियां है, उससे आप सब परिचित हैं। West Asia में जो Conflict चल रहा है, वह काफी गंभीर है। हमारे केरल के काफी लोग West Asian Countries में रहते है। हमारी सरकार हालात पर पैनी नजर बनाये हुए है। We are Closely  monitoring  the  Situation  and  preparing  ourself to face any situation.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी CCS की बैठकों के माध्यम से लगातार सरकार को Action Plan बनाने के लिए Direction दे रहे है। उन्होंने मेरी अध्यक्षता में West Asia की Situation को लेकर एक EGoM भी बनाया है। उसकी एक बैठक हो चुकी है। आज शाम, फिर हम लोग दिल्ली में बैठेंगे।

हमारी सरकार हर परिस्थिति में निपटने में सक्षम और तैयार है। यह समय पूरे देश के एकजुट होने का है। संकट के समय में भाजपा ने हमेशा देश का साथ दिया है। यह समय Party Politics करने का नहीं है, बल्कि सभी Political Parties को एक साथ आने का है, ताकि भारत और भारतीयों के हितों की रक्षा की जा सके।

आप सब लोग समझदार हैं। आप जानते हैं –  कौन देश के हितों की रक्षा कर सकता है और कौन नहीं, इसलिए आने वाले चुनावों में सही पोलिटिकल पार्टी का चुनाव करिए। और वह पार्टी है –  BJP.

बीजेपी के साथ है – “मोडीयुदे गारंटी” ।     यानि ‘पीएम मोदी की गारंटी’, क्योंकि उनकी लीडरशिप ‘24 कैरेट गोल्ड’ की तरह है, जो कि हर तरह से tried एंड tested है।

साथियों, आज भारत जो कभी केवल हथियारों के Import के लिए जाना जाता था। अब Exports के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2014 में भारत का Defence Exports लगभग 600 करोड़ रुपये था, वह आज बढ़कर 38,500 करोड़ तक (38,424 करोड़ रु.) तक पहुँच गया है। जी हां, अभी जो Latest Data आया है, उसमें पिछले साल के Comparison  में 2025-26 में भारत के Defence exports में 62.66 प्रतिशत का Record Jump आया है।

Defence Production के मामले में हम 1.50 लाख करोड़ रुपये का Milestone पहले ही cross  कर चुके हैं। हमारा लक्ष्य है, 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ तक पहुँचाना।