Text of RM’s speech at the meeting of Parliamentary Consultative Committee for MoD in Jaisalmer.
मुझे ख़ुशी है, कि हम एक बार फिर Consultative Committee की बैठक में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय के साथ मिल रहे हैं। आप सभी के साथ बैठकर Defence Sector से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना मेरे लिए हमेशा एक सुखद अनुभव होता है।
साथियों, इस बार हम लोग जैसलमेर में मिल रहे हैं। जहाँ तक मुझे याद है, इससे पहले हम लोग पुणे में मिले थे। ये जो दिल्ली से बाहर हमलोग बैठकें कर रहे हैं, इसके पीछे एक-दो खास कारण हैं। पहला तो यह, कि हम सभी को आपस में बातचीत करने का dedicated time मिल जाता है। सामान्यतः संसद सत्र के दौरान बैठकें आयोजित होने पर समय की कमी हो जाती है, जल्दबाजी हो जाती है। लेकिन यहाँ ऐसा नहीं होता है।
और दूसरा यह, कि इन क्षेत्रों में meeting करने से, हमें ground level की reality, सीमावर्ती क्षेत्रों और forward इलाकों की स्थिति से भी, अवगत होने का अवसर मिलता है। आप लोगों ने इस बार जैसलमेर का सुझाव दिया, और आपके सुझावों के अनुसार ही स्थान तय किए जाते हैं। आपके सुझाव हमेशा से हमारे लिए फायदेमंद रहे हैं।
साथियों, आज का हमारा विषय है, ‘भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण’। यह विषय आज के वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में बड़ा ही प्रासंगिक है। दुनिया में जिस तरह के geo-political बदलाव हो रहे हैं, वे हमारी सुरक्षा संबंधी priorities को भी प्रभावित कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन conflict हो, या इज़राइल-ईरान संघर्ष हो, इन घटनाक्रमों ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को हमारे सामने रखा है। आज Drones, Missiles और Air Defence Systems जैसी तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इससे यह स्पष्ट होता है, कि हमारी सेनाओं को वर्तमान ही नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा।
Modernization एक बहुत बड़ा विषय है। इतने कम समय में इसके हर पहलू पर चर्चा संभव नहीं है। लेकिन मैं इसे तीन प्रमुख रूपों में आपके सामने रखना चाहूंगा, और बताना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने इन तीनों पर क्या काम किया है।
पहला है – Budget और Capital acquisition. जैसा कि हम सब जानते हैं, कि Modernization के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता कुछ है, तो वह है financial resources की availability. इसको ध्यान में रखते हुए हमने, Modernization Budget को साल दर साल बढ़ाया है, और खर्च भी किया है। सेनाएं भी अच्छी तरह समझती हैं, कि सरकार उनकी जरूरतों के लिए committed है। वे अति महत्वपूर्ण चीजों को प्राथमिकता पर रखते हैं, और बजट को अच्छे से utilize भी करते हैं।
मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है, कि वित्त वर्ष 2026-27 में हमारा कुल रक्षा बजट बढ़कर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इसमें modernization और capital procurement के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपये का Capital Outlay निर्धारित किया गया है। यह हमारी उस सोच को दिखाता है, जिसके अंतर्गत armed forces की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ, Indian Industries और domestic manufacturing को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
साथियों, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी प्रगति Defence Production और Defence Exports में भी दिखाई देती है। वित्त वर्ष 2014-15 में हमारा रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपये हो गया। हमारा Defence export वर्ष 2014 में दो हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब बढ़कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हमारा लक्ष्य वर्ष 2029 तक defence production को 3 लाख करोड़ रुपये, और Defence export को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
दूसरा है – Technology. आज के बदलते समय में तकनीक युद्ध का अभिन्न अंग है। DRDO द्वारा नई-नई schemes launch की जा रही हैं, नए हथियारों, मिसाइलों और प्रणालियों का परीक्षण हो रहा है। साथ ही, हमने private sector को बढ़ावा दिया है, उन्हें level playing field प्रदान किया है। MSME से लेकर बड़ी कम्पनियाँ तक आज रक्षा क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। यह एक whole of the nation approach है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है, कि अब मुझे सरकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर के कार्यक्रमों में भी बराबर जाने का अवसर मिलता है, और उनका काम देखकर दिल खुश होता है, गौरव की अनुभूति होती है।
Modernization का तीसरा आयाम है – Human Capital या Human Resource। बात केवल technology या capital तक सीमित नहीं है। युद्ध में सफलता की सबसे बड़ी शक्ति हमारा Human Resource है। जिस तेजी से दुनिया में warfare और war-fighting systems में बदलाव आ रहा है, वह हमें इस बात पर भी विचार करने के लिए बाध्य कर रहा है कि हमारी सेनाएँ और उनके formations भी आधुनिक युद्ध की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, हमारी तीनों सेनाओं ने अपने structures और formations में लगातार सुधार और बदलाव किए हैं। उदाहरण के लिए, हमारी Army में असनी, भैरव और शक्तिबाण platoons जैसी नई formations आज की operational requirements और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बहुत उपयोगी साबित हो रही हैं।
साथियों, Modernization का अर्थ केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है। इसका अर्थ है अपनी सेनाओं की Operational Preparedness को मजबूत करना, उन्हें आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करना और देश के भीतर ऐसी क्षमताओं का विकास करना, जिन पर हम लंबे समय तक भरोसा कर सकें। इसी दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर भारत का हमारा संकल्प महत्वपूर्ण हो जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में Strategic Autonomy और स्वदेशी तकनीकी क्षमता हमारी आवश्यकताएं हैं।
साथियों, हमारा उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसा Defence Ecosystem तैयार करना है, जिसमें हमारी सेनाओं की जरूरतों के अनुरूप तकनीक का विकास हो, भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश की रणनीतिक निर्भरता कम हो।
जैसा कि मैंने कहा, कि Armed forces modernization तो अपने आप में बहुत व्यापक विषय है। इसलिए, अब मैं चाहूंगा कि हमारे अधिकारी इस विषय पर एक विस्तृत Presentation आपके समक्ष रखें। मैं आप सभी से भी अनुरोध करूंगा, कि आप Presentation को ध्यानपूर्वक देखें, और उसके बाद अपने महत्वपूर्ण सुझाव खुलकर साझा करें। निश्चित रूप से, आप सभी के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
धन्यवाद।