ताजिकिस्तान के दुशांबे में SCO Council of Heads of Government (CHG) की बैठक में रक्षा मंत्री के संबोधन का मूल पाठ।
Your Excellency, Prime Minister Kokhir Rasulzoda
Excellencies,
मैं ताजिकिस्तान की सरकार और लोगों को उनकी warm hospitality के लिए और Dushanbe में आयोजित SCO Council of Heads of Government की बैठक में हमें आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद देता हूं। भारत, ताजिकिस्तान के साथ अपनी long-standing friendship और Central Asia के देशों के साथ हमारे चिरस्थायी bonds को बहुत महत्व देता है।
Bishkek में SCO Summit में, हमारे leaders ने Shanghai Cooperation Organization की 25 वर्षीय यात्रा को रेखांकित किया था। वह अवसर, हमारी साझा यात्रा की समीक्षा के साथ-साथ, भविष्य की दिशा पर विचार विमर्श का भी था। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने Security, Connectivity और Opportunity के मुद्दों पर concrete steps उठाने का SCO संगठन से आह्वान किया था।
वह संदेश, SCO Council of Heads of Governments के लिए विशेष रूप से relevant है। हमारी जिम्मेदारी हमारे नेताओं के political vision को ऐसे सहयोग में convert करना है जो हमारे लोगों के जीवन में visible हो।
आज हम एक अनिश्चित Global economic environment के दौर में है। Conflicts और geopolitical tensions की वजह से trade और supply chains भी disrupt हो रही हैं। Energy और food security
हमारे लिए चिंता के विषय हैं। नई टेक्नोलॉजी अर्थव्यवस्थाओं को बदलने के साथ-साथ नए divides भी पैदा कर रही हैं। ऐसे में, SCO का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि क्या वह common ground ढूंढ सकता है और उस पर कार्रवाई कर सकता है या नहीं।
भारत का यह मानना है कि हमारी economic engagement, inclusive होने के साथ-साथ, प्रत्येक सदस्य देश के लिए beneficial हों। हमें और अधिक resilient supply chains बनाने, trade और investment को अधिक सुविधाजनक बनाने, development के लिए technology का उपयोग करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। हमें, यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि economic cooperation का लाभ हमारे समाज के सभी sections तक पहुंचे। भारत Multilateral Trade और Economic Cooperation Programme पर 2026 से 2030 के लिए action plan को अपनाने का समर्थन करता है।
Bishkek में, माननीय प्रधानमंत्री ने SCO के लिए security, connectivity और opportunity के भारत के दृष्टिकोण को दोहराया था। ये तीनों स्तंभ mutually reinforcing हैं। Security, investments को संभव बनाती है, और connectivity, trade को प्रशस्त करती है I Opportunity वह है जो security और connectivity, दोनों को हमें हमारे लोगों के लिए प्रदान करना चाहिए।
Terrorism, peace और development के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बना हुआ है। Terrorism के कारण न केवल निर्दोष जीवन को हानि पहुँचती है। बल्कि investment और commerce भी बाधित होते हैं। Terrorism, societies को radicalise करता है और हमारे युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है जिनके वे हकदार हैं।
इसलिए terrorism के लिए कोई justification नहीं हो सकता है, इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता है, और उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती है जो आतंकवादियों को finance, support या safe havens उपलब्ध कराते हैं। Terrorism के पूरे ecosystem का मजबूती से और collectively समाप्त किया जाना चाहिए।
भारत ताशकंद में Universal Centre और Dushanbe में Anti-Drug Centre को SCO की permanent bodies बनाने के Bishkek में लिए गए फैसलों का स्वागत करता है।
उनकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी अच्छी तरह coordinate करते हैं और कितनी जल्दी कार्यों को अंजाम देते हैं।
Excellencies, हमारी shared prosperity के लिए connectivity भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत ऐसी connectivity का समर्थन करता है जो markets को जोड़ती है, व्यापार को सुविधाजनक बनाती है और विकास के नए अवसर बनाती है। International North-South Transport Corridor और Chabahar Port जैसे Initiatives, मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने के लिए पर्याप्त रूप से योगदान दे सकते हैं।
परन्तु, Connectivity, consultation पर और उसके साथ शामिल प्रत्येक देश की sovereignty और territorial integrity के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। जो परियोजनाएँ, इन सिद्धांतों का सम्मान नहीं करती हैं, वे टिकाऊ नहीं होंगी।
हमें physical connectivity से परे भी देखना चाहिए। Simplified customs procedures, digital documentation, efficient logistics और interoperable digital solutions,
हमारे पूरे क्षेत्र में व्यापार करने की लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। SCO को इस तरह के practical measures पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई में Central Asia में Infrastructure Projects की Financing पर एक Symposium आयोजित किया गया। मैं इस event में हमारे Central Asian और SCO Partners के robust participation के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूँ। इस Symposium के साथ ही पहली बार SCO Asian Economic Dialogue का भी आयोजन किया गया।
तीसरा pillar, opportunity, के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने सहयोग को People Centric रखें। हमारी सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जाना चाहिए कि हम अपने युवाओं के लिए क्या संभावनाएँ बनाते हैं, अपने entrepreneurs के लिए कौन-से नए बाज़ार खोलते हैं, अपने किसानों और छोटे उद्द्मियों को कौन सी टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराते हैं I और अपने समाजों का कैसा connection बनाते हैं। भारत, इस वर्ष के अंत में, पहले SCO Civilisational Dialouge Forum की मेजबानी करेगा I हम सभी SCO सदस्य देशों को, इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।
भारत का अपना development experience, technology और innovation की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है, भारत का अनुभव यह भी दर्शाता है कि किस तरह इन्हें व्यापक स्तर पर लागू किया जाए और इनमें innovation को केंद्र में रखा जाए। हमारे Digital Public Infrastructure ने public service की delivery को बदल दिया है और financial inclusion को बढ़ाया है। भारत ने दुनिया के सबसे बड़े start-up ecosystems में से एक का निर्माण किया है।
विकास में महिलाओं के नेतृत्व पर हमारा जोर, इस विश्वास पर टिका है, कि महिलाओं को, विकास की दिशा निश्चित करनी है |
हमारी global initiatives भी इसी सोच को दर्शाती हैं। International Solar Alliance और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, सस्ती clean energy और climate-resilient development में योगदान दे रहे हैं। मिशन LiFE, sustainable lifestyles और responsible consumption को बढ़ावा देता है, जबकि Global Biofuel Alliance, अधिक साफ और सम्यक sustainable energy solutions को बढ़ावा देना है। भारत इन क्षेत्रों के साथ अन्य पारस्परिक हितों से सम्बंधित क्षेत्रों में मिलकर भी SCO पार्टनर्स के साथ अपना अनुभव साझा करने और काम करने के लिए तैयार है।
आज जब SCO अपने आगामी पच्चीस सालों की यात्रा की ओर कदम बढ़ा रहा है, SCO को खुद को लगातार बेहतर बनाते रहना होगाl Bishkek में लिए गए निर्णय के अनुसार SCO charter में बदलाव कर, english को official language संबंधित प्रावधान को भारत एक जरूरी कदम समझता है।
भारत यह भी मानता है कि SCO को efficient बने रहना चाहिए और इसमें sovereignty equality, consensus और mutual respect के सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए।
ज्यादा संस्थाओं का मतलब ज्यादा उपलब्धियों नहीं होती है। नए mechanisms को साफ तौर पर पहचानी गई जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए, duplication से बचना चाहिए और Member States को practical value देने पर फोकस करना चाहिए।
पिछले पच्चीस सालों ने SCO को एक मजबूत आधार दिया है। अब हमें इसी आधार पर हमारी आगे की रुपरेखा बनानी है । भारत एक ऐसा SCO चाहता है जो आम सहमति से काम करे और नतीजे दे I भारत इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए Member States के साथ काम करता रहेगा।
धन्यवाद !