शांति हेतु शक्ति भी आवश्यक है: रक्षामंत्री

 Text of RM’s speech at the Times Now National Defence Conclave 2026.

साथियों, राष्ट्र की रक्षा किसी भी सरकार का सर्वोच्च दायित्व है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में जब सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार नए रूप ले रही हैं, तब Defence Preparedness पर संवाद और विचार-विमर्श का महत्व और भी बढ़ जाता है।

ऐसे में Times Now Defence Conclave जैसे आयोजन हमें न केवल वर्तमान चुनौतियों का आकलन करने, बल्कि भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को समझकर अपनी रणनीति बनाने का अवसर भी देते हैं। मैं इस Conclave के आयोजन के लिए Times Now को बधाई देता हूँ और इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक विमर्श की पहल की सराहना करता हूँ।

ऐसा कहा जाता है कि “Only the Dead have Seen the End of Wars.” यह विचार एक ओर हमें युद्ध की निरर्थकता और उससे होने वाली अपार मानवीय क्षति का एहसास कराता है, तो दूसरी ओर यह भी याद दिलाता है कि युद्ध की संभावनाएँ कभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं और हमें हमेशा कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।

Strategic Community में माना जाता है कि “Hope for the best, but Prepare for the Worst. इसी तर्ज़ पर मैं कहता हूँ कि Hope for Peace but Prepare for War.

War that may be Necessary to Protect our Country’s Sovereignty, Territorial Integrity, and National Security. यानि शांति की आशा रखिए, लेकिन युद्ध के लिए तैयार रहिए।

शांति की कामना करना हमारी सभ्यतागत चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों का अभिन्न अंग है। हमारी संस्कृति हमें संवाद, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण समाधान का मार्ग दिखाती है। लेकिन शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को हमारी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। शांति बनाए रखने के लिए शक्ति और सामर्थ्य भी आवश्यक हैं।

आज Hybrid, Hi-tech और Hyper Warfare के इस दौर में, इस विचार की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आज हम ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ हम हर क्षण एक लड़ाई लड़ रहे हैं। और हमें हर क्षण किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना है।

आज के Digital युग में किसी भी राष्ट्र को पाँच स्तर पर ख़तरा हैं। इसे मैं 5D Security Threat कहता हूँ। यह 5D हैं:  Disinformation, Destabilization, Disruption, Deception, और Destruction.

हर क्षण, हर पल; हम Misinformation और Disinformation Campaigns से लड़ने का काम कर रहे हैं। हाल के समय में दुनिया के कई देशों में जो अस्थिरता पैदा हुई है, उसके पीछे Disinformation Campaigns थे।

जिन लोगों ने आतंकवाद का रास्ता चुना है, वे अब ज्यादा दिन इस रास्ते पर चल नहीं पाते हैं। हमारी सेनाएं उनको बहुत जल्दी ही ऊपर पहुंचा देती हैं। और 2014 के बाद से तो अधिकांश आतंकवादियों की ‘Shelf life’ 1 साल से भी कम हो गई है। यानि भारत के खिलाफ हथियार उठाने के एक वर्ष के भीतर ही हमारे सुरक्षा बलों ने अधिकतर आतंकवादियों को  मार गिराया है।

नफरत से भरे एक Lone Wolf  की मंशा पर मानवता में विश्वास रखने वाले एक Lone Individual का साहस भारी पड़ सकता है। कैप्टन स्मित माच्छार का साहस इसी विश्वास को मजबूत करता है कि आतंक की ताकत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, मानवता के प्रति समर्पित एक व्यक्ति का संकल्प उसे परास्त कर सकता है।

A lone wolf may be driven by hatred, but there will always be a dedicated individual driven by humanity. And when the two stand face to face, it is the courage of the committed individual that can overpower the hatred of the lone wolf.

ऐसी घटनाओं से एक बात और समझ में आती है कि आज ख़तरा केवल Terrorist Groups का नहीं, बल्कि White Collar Terrorism का भी है।

जब White Collar Terrorism और Lone Wolf Attacks मिल जाते हैं तो, सुरक्षा एजेंसियों के सामने और बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे Radical लोगों को पहचानना बहुत कठिन हो जाता है।

ऐसे Attacks को रोकने  में साहसी, सतर्क और जिम्मेदार नागरिकों की भूमिका बहुत बढ़ जाती है। कई बार एक Lone Wolf को रोकने के लिए एक साहसी Lone Citizen ही काफी होता है। एक Lone Wolf के सामने एक जागरूक Lone Citizen खड़ा हो जाए, तो आतंक की पूरी साज़िश नाकाम हो सकती है।

साथियो,आज Defence और Security के लिए Hard Power के साथ Soft Power भी जरूरी है। Precision-Guided Weapons के साथ Loitering Munitions भी चाहिए। Hi-Tech Weapons के साथ Low-Cost Weapons भी जरूरी हैं। Human Intelligence के साथ Artificial Intelligence भी चाहिए। High-End Systems के साथ Low-Cost, Agile और Adaptable Systems भी विकसित करने होंगे। यानी आज सिर्फ More Power ही नहीं, बल्कि Defence और Security के लिए Smart Power भी जरूरी है।

साथियो,आपको याद होगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक संकल्प लिया था। उन्होंने कहा था,  “सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं झुकने दूँगा।” यह केवल एक चुनावी भाषण की पंक्ति नहीं थी। जब परीक्षा की घड़ी आई तो उन्होंने इस संकल्प को अपने फैसलों से सिद्ध करके दिखाया।

जब-जब आतंकवादियों ने भारत की धरती को लहूलुहान करने की कोशिश की, तब-तब भारत ने करारा जवाब दिया। उस जवाब की गूंज आज तक आतंकवादियों के आकाओं को सुनाई देती होगी। आप याद कीजिए 2016 में उरी आतंकवादी हमले के बाद हमारे वीर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक की थीं और आतंकवादियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था।

आप याद कीजिए, 2019 में जब पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो हमारी सेनाओं ने, बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थीं। और आप याद कीजिए पिछले साल जब पहलगाम में आतंकवादियों ने हमारे निर्दोष नागरिकों को मारा, तो हमने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों के ठिकानों को तबाह कर दिया था। यह भारत के इतिहास में पहली बार था जब भारत की सेनाओं ने आतंकवाद के सीने पर करारा प्रहार किया था।

यह केवल सैन्य कार्रवाइयों की बात नहीं है। यह बात बदली हुई सोच की है। पहले आतंकवादी हमला करते थे, तो पहले की सरकारें दुनिया के सामने अपना दुखड़ा रोती थीं। लेकिन यह नया भारत है। आज हम दुखड़ा नहीं रोते हैं। अब भारत की सेनाएं आतंकवाद की नर्सरी तक पहुँचकर, उसे जड़ से उखाड़ने का काम कर रही हैं। मैं यहाँ पर यह बात दोहराना चाहूँगा कि यदि आगे पाकिस्तान की तरफ़ से कोई भी आतंकी हरकत हुई तो पिछली बार से भी बड़ा प्रहार होगा।

साथियो, भारत के इस नए आत्मविश्वास के पीछे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए सुधार, काम करने के तौर तरीकों में बदलाव और बदली हुई सोच का हाथ है।

पिछले साढ़े बारह वर्षों में हमारे Defence Sector की न केवल क्षमता बढ़ी है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने को लेकर, हमारे Approach में भी बड़ा बदलाव आया है। अब हमारा ध्यान केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि आज हम आत्मनिर्भर और Future-Oriented Defence Ecosystem बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों का हमने एक लंबा सिलसिला प्रारम्भ किया है। सबसे पहले उन नियमों को बदला गया जो वर्षों से भारत डिफेंस प्रोडक्शन के विकास की गति रोक रहे थे। उदाहरण के लिए पहले देश में बहुत से ऐसे products थे जिनको बनाने के लिए डिफेंस प्रोडक्शन का लाइसेंस लेना पड़ता था। हमने वह लिस्ट घटा दी।

रक्षा उत्पादन के लिए जो लाइसेंस व्यवस्था थी उसको भी हमने काफ़ी simplify कर दिया है।  पहले की तुलना में लाइसेंस के लिए मंजूरी देने वाली एजेंसियों की संख्या कम की गई। Defence Manufacturing के लिए ‘Ease of Doing Business’ को नई प्राथमिकता दी गई। आज परिणाम हमारे सामने है।

इसका बड़ा परिणाम देश में एक Dynamic Defence Ecosystem के निर्माण के रूप में दिखाई दिया। जहाँ कुछ वर्ष पहले रक्षा क्षेत्र में बहुत कम कंपनियाँ काम कर रही थीं, वहीं आज पाँच सौ से अधिक कंपनियाँ Defence Manufacturing का काम कर रही हैं और सैकड़ों नए औद्योगिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। और मैं तो यहां तक कहता हूं कि आज भारत में Defence Manufacturing की यूनिट लगाना किसी भी अन्य सामान्य इंडस्ट्री जैसा ही है। यह बदलाव Policy Making का है।

नीतियाँ बदलने के साथ-साथ सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया। निर्णय यह कि भारत की सेना के Modernisation का फायदा भारत के उद्योगों को मिले। इसीलिए Defence Procurement में व्यापक सुधार किए गए। हमने नए Defence Procurement Manual बनाये। नई Defence acquisition Procedure के माध्यम से ‘Buy Indian-IDDM’ जैसी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट का 75 फीसदी भाग भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए सुरक्षित किया गया। वैसे आप लोगों की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि हम जो नया DAP लेकर आ रहे हैं, उसके अंदर कई बड़े रिफार्म  किए गए हैं जिसके कारण देश में Defence Production को एक नई रफ़्तार और ताक़त मिलेगी।

मुझे यह देखकर भी बड़ी ख़ुशी होती है, कि इस पूरे परिवर्तन की प्रक्रिया में Public Sector और Private Sector, दोनों कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। पिछले साढ़े बारह वर्षों में मोदीजी के नेतृत्व में, हमने Public sector और Private sector के बीच की खाई को, लगभग पाट दिया है।

आज हम ‘Whole of Government Approach’ के साथ ही नहीं, बल्कि ‘Whole of Country Approach’ के साथ चल रहे हैं। और मैं तो कहता हूँ, कि अब तो हम ‘Whole of the People Approach’ तक भी पहुँच गए हैं। चाहे Individual Innovator हो, बड़ी कंपनी हो, स्टार्टअप हो, या MSME हो, हर कोई राष्ट्र रक्षा के इस महायज्ञ में अपनी Nation First की भावना से आहुति दे रहा है। यह जो Public-Private Partnership का मॉडल हमने अपनाया है, उसने Defence Manufacturing को एक closed environment से निकाल कर, जन आंदोलन बना दिया है।

साथियों, ऑपरेशन सिंदूर के बारे में हम सब जानते हैं। वह अपने आप में technological warfare का एक शानदार नमूना था। इस operation में आकाश तीर, आकाश मिसाइल सिस्टम, और ब्रह्मोस जैसी advanced मिसाइल systems के साथ-साथ, अनेक latest equipment का भी उपयोग किया गया। इसने यह साबित किया, कि हमारी सेनाएं बदलाव को समझ भी रही हैं, और उसे आत्मविश्वास के साथ उपयोग भी कर रही हैं। यह सब इसलिए संभव हो रहा है क्योंकि पिछले बारह वर्षों में एक नई ज़मीन तैयार की गई है।

साथियों, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता भारत के उद्योगों पर विश्वास का प्रमाण है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए, हमारी सेनाओं द्वारा, 5 positive Indigenization lists जारी की गई हैं। इनमें शामिल defence equipment, weapon system और platforms की कुल संख्या 509 है। इनका production, अब अनिवार्य रूप से भारत की धरती पर किया जा रहा है। एक छठी लिस्ट भी भारतीय सेनाओं ने मिलकर तैयार कर ली है जिसको जल्द ही जारी किया जायेगा।

इसी प्रकार, हमारी DPSUs द्वारा भी, 5 lists जारी की गई हैं। इनमें शामिल strategically-important LRUs, यानि Line Replacement Units, Sub-systems, Spares & Components समेत कुल items की संख्या 5,012 हैं। इनमें से 3255 आइटम्स को indigenised कर चुके हैं।

साथियों, आज देश का रक्षा उत्पादन लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है। जबकि 2014 के आसपास जहाँ हमारा domestic defence production लगभग 40 हजार करोड़ रूपये का ही था। इस साल हमारा टारगेट है कि डिफेंस प्रोडक्शन दो लाख करोड़ रुपए के माइलस्टोन को पार कर जाये। दो तीन साल पहले हमने हमारा लक्ष्य साल 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए का defence production करने का बनाया था, और जैसी रफ़्तार दिख रही है उसको देख कर मुझे पूरा विश्वास है कि हम अपने लक्ष्य को अवश्य हासिल करने में कामयाब होंगे।

आपको यह जानकर भी ख़ुशी होगी कि साल 2013-14 में भारत से होने वाला जो डिफेंस एक्सपोर्ट केवल 686 करोड़ का था वह आज 2025-26 में बढ़ कर 38000  करोड़ से अधिक हो गया है। करीब सौ देशों को हमारे देश में बने डिफेंस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं।

हमारा पिछले साल यह टारगेट था कि डिफेंस एक्सपोर्ट तीस हज़ार करोड़ रुपये हो और वह हमने बहुत ही शानदार तरीके से हासिल किया है। अब हमारा लक्ष्य है कि साल 2029 तक भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पचास हज़ार करोड़ रुपए पहुँच जाये। मुझे पूरा विश्वास है कि हम यह लक्ष्य भी हासिल कर लेंगे।

साथियों, भारत का केवल रक्षा निर्यात नहीं बढ़ा है। मैं मानता हूँ, इससे भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। भारतीय तकनीक पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है।

यह सब कैसे हुआ? हमने निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाया। डिफेंस एक्सिम पोर्टल शुरू किया। ऑनलाइन अनुमोदन व्यवस्था लागू हुई। ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस जैसी व्यवस्था लाई गई। Quality Certification की प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया। ग्रीन चैनल नीति लागू हुई। सेल्फ सर्टिफिकेशन व्यवस्था लाई गई। इन सुधारों ने भारतीय उद्योगों को Global Competition के लिए तैयार किया है।

साथियों, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल बड़े उद्योगों को लगा देने से संभव नहीं होगी। इसके लिए Research, Development और Innovation का माहौल भी चाहिए। नई सोच चाहिए। युवा प्रतिभा चाहिए।

साथियों, इसी सोच के साथ हमने innovative ideas लाने वाले युवाओं को डिफेंस सेक्टर में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। मैं यहाँ विशेष रूप से innovations for defence excellence, यानि iDEX का जिक्र करना चाहूँगा। iDEX को हम defence sector में innovation, तथा technology को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए हैं। इसके अंतर्गत हम innovative solutions लाने के लिए challenge post करते है और जो startups select होते हैं, उनको हम 1.5 करोड़ रुपए तक की financial assistance प्रदान करते हैं। अब हम iDEX से आगे बढ़ते हुए iDEX prime ले आए और 1.5 करोड़ की मदद को हमने बढ़ाकर 10 करोड़ तक किया है।

हमारी DPSUs, और services ने जितने भी challenges दिए, हमारे युवाओं ने उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, और सफलतापूर्वक उन challenges को स्वीकार करके उसे अंजाम दिया। अब इस मुहिम में आगे बढ़ते हुए, हमने prime को भी upgrade करके ‘ADITI’ scheme को launch किया, जहां हम अपने युवाओं को तथा उनके startups को, उनकी innovation में मदद के लिए पूरे 25 करोड़ तक की financial assistance दे रहे हैं।

साथियों, हमारा एकदम clear target है कि हमारी स्टार्टअप्स और एमएसएमई के हाथों को मज़बूती दी जाए। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने 2400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी स्टार्टअप्स/एमएसएमई से करने की मंजूरी दी है, और 1500 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स new technology के development के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

हमने मार्च 2026 तक IDex के माध्यम से 676  स्टार्टअप्स और innnovators को engage किया और 551 कांट्रैक्ट्स हमने साइन किए हैं। आज देशभर के स्टार्टअप्स ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक Defence Technologies पर काम कर रहे हैं।

साल 2018 में जहाँ रक्षा क्षेत्र में कुछ दर्जन स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या दो हजार से अधिक हो चुकी है। सैकड़ों स्टार्टअप्स को रक्षा मंत्रालय द्वारा Challenges दिए गए है, उन्हें आर्थिक सहायता मिली, प्रोटोटाइप बने और अनेक तकनीकों की खरीद के लिए approvals भी दिए गए है।

यानि आज भारत का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं है। वह भारत की सुरक्षा का Technological Partner बन चुका है। डीआरडीओ ने भी इस परिवर्तन को नई दिशा दी है।

आज डीआरडीओ केवल Defence Research & Development करने वाला संस्थान नहीं है। वह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाला National Innovation Platform बन चुका है।

देशभर में Centre of Excellence स्थापित किए गए हैं। Young Scientists Labs का विस्तार किया गया है। प्रत्येक वर्ष हजारों इंजीनियर और ट्रेनीज डीआरडीओ के साथ जुड़ रहे हैं।

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी Entrepreneur spirit है। आज रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आज हमारे साथ DPSUs हैं, जो कि coporatization के बाद Loss Making entities की जगह Profit Making entities बन चुकी है। Private Industries हैं। सोलह हजार से अधिक एमएसएमई हैं। हजारों Supply Units हैं। देशभर के Innovation Centres हैं। यही भारत का नया रक्षा औद्योगिक परिवार है।

लेकिन आज यह सब बदल चुका है। साथियों, आज Defence Procurement में पूरी Transparency और Accountability के साथ काम हो रहा है। हमारी Defence का Modernisation भी किया जा रहा है। और Indigenisation भी किया जा रहा है।

आप सोचिए, आज भारतीय सेना की Inventory में 175 में से 159 Ammunition Variants स्वदेशी हैं। यानी Ammunition Variants में हमने 90 प्रतिशत से ज्यादा आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।

यानी पिछले 12 वर्षों में भारत के Defence Sector में Groundbreaking, Institutional और Structural Reforms हुए हैं। इससे हमारी Defence Preparedness को और बल मिला है। Defence Manufacturing को नई गति मिली है और National Security भी और अधिक मजबूत हुई है।

एक समय था जब Defence में छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी हर ज़रूरत के लिए, हम बाहर की ओर देखते थे। Import पर निर्भर थे। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। आज हम छोटी जरूरतों से लेकर बड़े और अत्याधुनिक Defence Systems तक, अपने देश में बनाने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।

जैसे मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। आज, भारत 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट निर्यात कर रहा है। भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है, जिसने International Norms के अनुरूप बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए National Standard Set किया है।

आज हम Artillery Guns बना रहे हैं, तो Aircraft Carriers भी बना रहे हैं। हम High Mobility Trucks बना रहे हैं, तो Tanks भी बना रहे हैं। हम Bullet Proof Vehicles बना रहे हैं तो Air Defence Systems भी बना रहे हैं। हम Radios और Radars भी बना रहे हैं, तो Warships भी बना रहे हैं।

आज हम एक ऐसा Defence Ecosystem तैयार कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा को मजबूत करे, अर्थव्यवस्था को गति दे और Global Security Architecture में भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाए।

जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक विकसित देश ही नहीं होगा। बल्कि वह Technology, Economy, Defence; और ऐसे विभिन्न क्षेत्रों में आत्मविश्वास के साथ दुनिया को नेतृत्व भी प्रदान करेगा।

साथियों, मैं केवल इतना कहना चाहूँगा कि देश की सुरक्षा केवल हमारी सेनाओं की तैयारी की तस्वीर मात्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के संकल्प, सामर्थ्य का भी प्रतिबिंब है।

शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पूरी तरह बरकरार है, मगर भारत की सेनायें हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

हमारा लक्ष्य स्पष्ट है–एक ऐसे भारत का निर्माण जो शांति का पक्षधर होने के साथ-साथ, अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हो और अपनी संप्रभुता, अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम भी हो।

अंत में, मैं एक बार फिर से ‘Times Now’ की पूरी Team को इस आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। और इन्हीं शब्दों के साथ, अपनी बात समाप्त करता हूँ। आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।