लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, अराजकता फैलाना नहीं: रक्षामंत्री

नई दिल्ली में दैनिक जागरण समूह द्वारा आयोजित ‘नरेंद्र मोहन स्मृति व्याख्यान’ में रक्षामंत्री जी के संबोधन का मूल पाठ।

‘नरेंद्र मोहन स्मृति व्याख्यान’ में, आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

हम सभी जानते हैं कि श्री नरेन्द्र मोहन जी ने दैनिक जागरण समूह के प्रधान संपादक के रूप में कार्य किया। उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मूल्यों और आदर्शों को सदैव सर्वोपरि रखा। और अपनी लेखनी के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।

मैं समझता हूँ कि दैनिक जागरण आज भी उन्हीं मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है।

मैं श्री नरेंद्र मोहन जी की स्मृति को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

देवियो और सज्जनो,

श्री नरेंद्र मोहन जी ‘विचार-प्रवाह’ के नाम से एक साप्ताहिक स्तंभ लिखते थे। उस स्तंभ के नियमित पाठकों में से एक मैं भी था। मुझे संसद में उनके साथ करीब से काम करने का अवसर भी मिला। जहां तक मुझे याद है नरेंद्र मोहन जी वर्ष 1996 में राज्यसभा के सदस्य बने थे। उस समय मैं भी राज्यसभा का सदस्य था और BJP का Chief Whip भी था।

संसद में और बाहर भी, उनके साथ बातचीत में हमेशा कुछ नया सीखने को मिलता था। उनके अनुभव, सहजता, सरलता और स्पष्ट शैली ने मुझे हमेशा प्रभावित किया।

जब आपातकाल लगा था, तब 27 जून 1975 के संपादकीय में नरेंद्र मोहन जी ने ‘नया लोकतंत्र? सेंसर लागू, शांत रहें!’ शीर्षक के साथ संपादकीय का स्थान खाली छोड़ दिया था। वह खाली स्थान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंधों के प्रतिकार का प्रतीक था।

साथियो,

यह बात जगजाहिर है कि नरेंद्र मोहन जी एक पत्रकार होने के साथ-साथ एक साहित्यकार भी थे। वे जितना अच्छा गद्य लिखते थे, उतना ही अच्छा पद्य भी लिखते थे। नरेंद्र मोहन जी की कविताएं जीवन मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सहृदयता को दर्शाती थीं।

मुझे लगता है कि नरेंद्र मोहन जी की स्मृति में शुरू किया गया ‘साहित्य सृजन पुरस्कार’ उनके लिए एक Fitting Tribute है।

इस वर्ष यह पुरस्कार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी को दिया जा रहा है। बुद्धिनाथ मिश्र जी का लेखन विपुल और बहुआयामी है। उनकी साहित्यिक साधना दीर्घ है। उन्होंने नवगीत का परचम देश-विदेश तक फहराया है। मिश्र जी के बारे में कहा जाता है कि अगर आप मिश्रजी से कभी मिलेंगे तो शर्तिया आप उनके स्वभाव और व्यक्तित्व के मुरीद हो जाएंगे।

मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ और इसकी पुष्टि करता हूँ। और श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी को इस सम्मान के लिए बधाई देता हूँ।

साथ ही, ‘जागरण साहित्य सृजन सम्मान’ के लिए इतने योग्य साहित्यकार का चयन करने वाली जूरी को भी मैं बधाई देता हूँ।

साथियो,

जब मुझे इस कार्यक्रम का निमंत्रण मिला, तो मुझे तत्काल व्याख्यान का विषय नहीं बताया गया था। मुझे लगा था कि शायद विषय Defence और Security से जुड़ा होगा।

लेकिन जब मुझे बताया गया कि इस व्याख्यान का विषय युवा पीढ़ी, Generation Gap और Policy Making है, तो मुझे यह विषय बहुत दिलचस्प लगा।

लेकिन, साथ ही मुझे थोड़ी चिंता भी हुई कि मैं इस मंच के माध्यम से युवाओं से क्या कहूँगा? क्योंकि अगर मैंने यह बात की कि “हमारे समय में ऐसा होता था”, तो सारी बात व्यर्थ हो जाएगी। क्योंकि युवा यह लाइन सुनते ही Zone Out हो जाते हैं।

इसलिए, मैंने यह तय किया कि मैं यह बिल्कुल भी नहीं कहूँगा कि हमारे समय में क्या होता था। बल्कि मैं यह बात करूंगा कि युवाओं की आकांक्षाओं, आशंकाओं, और आवश्यकताओं को समझते हुए कैसे उन्हें नीति निर्माण के माध्यम से Address किया जाए।

मैं यह बात करूंगा कि हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि युवा नीति-निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दें? और युवाओं के लिए नीतियाँ बनाते समय क्या-क्या चुनौतियाँ आ सकती हैं, और उनका समाधान कैसे किया जाए?

साथियो,

यह मेरा सौभाग्य है कि सार्वजनिक जीवन में होने की वजह से मैंने कई पीढ़ियों के लोगों के साथ काम किया है। भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता के रूप में, मुझे कई पीढ़ियों के नेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला। और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर भी मुझे कई अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के साथ काम करने का अवसर मिला।

आज भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व श्री नितिन नबीन जी कर रहे हैं। वे हमारी पार्टी के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। नई पीढ़ी से आते हैं। नई सोच रखते हैं। और कहीं न कहीं हम सब उनसे भी बहुत कुछ सीखते हैं।

इसी तरह, मुझे उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार में भी कई पदों पर रहने का अवसर मिला है। जब मैं पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बना था, तब मैंने जिन Civil Servants के साथ काम किया उनमें से बहुत से लोग मेरे Contemporaries थे। लेकिन आज मेरे साथ काम करने वाले बहुत से अफ़सर मुझसे 25 से 30 वर्ष तक छोटे हैं।

एक हिसाब से यह कहा जा सकता है कि मुझमें और मेरे मंत्रालय में कार्यरत बहुत से अफसरों और कर्मचारियों के बीच Generation Gap है।

लेकिन मैं मानता हूँ कि यह Generation Gap नहीं है। बल्कि Generational Confluence है। यानी कई पीढ़ियों का संगम है। हर Generation के पास कुछ न कुछ देने के लिए होता है।

किसी के पास अनुभव, तो किसी के पास ऊर्जा। ये एक-दूसरे को पूरा करते हैं। अनुभव, ऊर्जा को दिशा देती है और ऊर्जा अनुभव को नई गति।

देवियो और सज्जनो,

Constituent Assembly में ‘संविधान संशोधन’ से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा करते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Thomas Jefferson के विचार का उल्लेख करते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हर Generation एक अलग Nation की तरह होती है। एक अलग राष्ट्र की तरह होता है। और हर Generation को अपने बारे में निर्णय लेने का अधिकार है। कोई भी Generation अगली Generation को अपने निर्णय मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।

डॉ. आंबेडकर का यह विचार केवल संविधान के संशोधन तक सीमित नहीं है। इसके भीतर एक बहुत गहरी लोकतांत्रिक समझ छिपी है कि समय बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं, इसलिए समाज की आवश्यकताएँ भी बदलती हैं।

यह विचार Generation Gap के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। पीढ़ियों के बीच के अंतर को केवल Gap के रूप में नहीं बल्कि Change के रूप में देखना चाहिए।

इसलिए Policy Making का उद्देश्य केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करना ही नहीं होना चाहिए। बल्कि नीतियाँ बनाते समय हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आज लिए गए हमारे निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों और अधिकारों को कैसे बढ़ाएंगे।

यही सोच हमें Inter-Generational Equity की ओर ले जाती है। इसी सोच के साथ, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है।

2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य हो, या Green Energy को बढ़ावा देना हो, या Semiconductor Industry को बढ़ावा देना, विकास के केंद्र में आज और कल, दोनों की जरूरतों को रखा जा रहा है।

साथियो,

आज जब हम Generation Gap और बदलती पीढ़ियों की बात कर रहे हैं, तो दैनिक जागरण की यात्रा इसका एक अच्छा उदाहरण है। वर्ष 1942 में श्री पूरन चंद्र गुप्त जी ने इसकी शुरुआत की। उस दौर में पत्रकारिता स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बनी थी।

आज़ादी के बाद बड़े सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव आए। पत्रकारिता करने के तौर तरीके बदले। इसमें Technology ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्री नरेंद्र मोहन जी, डॉ. महेंद्र मोहन गुप्त जी और श्री संजय गुप्त जी ने इन बदलावों को समझते हुए दैनिक जागरण की विरासत को आगे बढ़ाया। पीढ़ियाँ बदलीं, नेतृत्व बदला, तकनीक बदली, लेकिन श्री पूरन चंद्र गुप्त जी द्वारा स्थापित किया गया पत्रकारिता का वह मूल मूल्य कायम रहा कि ‘समाचार पत्र लोगों की स्वतंत्र आवाज बने’।

दैनिक जागरण की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब अनुभव, मूल सिद्धांत और नई सोच साथ चलते हैं, तो Generation Gap, Generation Bridge बन जाता है।

साथियो,

एक बड़े ही प्रसिद्ध लेखक हुए हैं। जिनका नाम Douglas Adams है। Generation Gap के संबंध में उनकी एक बात मुझे बहुत प्रासंगिक और सटीक लगती है।

एडम्स के अनुसार जिन चीजों के साथ हम बड़े होते हैं, जिनके बीच हमारा बचपन बीतता है; वे चीजें हमें Natural लगती हैं। सामान्य लगती है। जो चीजें हमारी युवावस्था में आती हैं, वे हमें बहुत Exciting और रोचक लगती हैं। लेकिन युवावस्था के बाद आने वाली हर चीज़ और हर बदलाव लोगों को Unnatural लगते हैं।

मैं समझता हूँ कि इसी कारण से Generation Gap आता है। क्योंकि जब Technology, Society और Lifestyle बदलते हैं, तो वह पुरानी पीढ़ी को असामान्य लगने लगता है। इससे धीरे-धीरे Communication Gap आ जाता है। हर Generation दूसरी Generation को समझने के बजाय Judge करने लगती है।

और धीरे-धीरे पिछली Generation, अगली Generation को Lazy या Entitled कहने लगती है। और अगली Generation पिछली Generation की सोच को बिना समझे ही नकारने लगती है।

लेकिन सच यह भी है कि आने वाली हर अगली पीढ़ी पिछली पीढ़ी से ज्यादा Self-Driven होती है। ज्यादा खुले विचार रखती है। Diversity को ज़्यादा स्वीकार करती है। नई तकनीक के साथ ज्यादा सहज होती है। और हर अगली Generation में अपने विचार व्यक्त करने का अधिक Confidence होता है। यही Natural Progression है।

लेकिन आज की युवा पीढ़ी को भी यह समझना होगा कि उनसे पहले की पीढ़ियों के अपने अनुभव हैं। संघर्षों की सीख है। अनुभव ने उन्हें धैर्य दिया है। और परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने की क्षमता भी।

इसलिए यह हर Generation की जिम्मेदारी है कि एक-दूसरे को Judge न करें, बल्कि समझने की कोशिश करें। और यह भी सभी की जिम्मेदारी है कि Generation Gap, Communication Gap न बने; Communication Gap, Trust Gap न बने; और Trust Gap, Social Gap न बने।

साथियो,

जब भी Generation Gap और Generation Change की बात की जाती है, तो अक्सर इसे नकारात्मक रूप में देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि Generation Gap के कारण लोगों के बीच केवल दूरी बढ़ती है। और टकराव पैदा होता है।

लेकिन मैं इसे दूसरे तरीके से देखता हूँ। मैं मानता हूँ कि समाज के आगे बढ़ने के लिए Generation Change बहुत जरूरी है। कई Generations के बीच होने वाली Thesis, Antithesis और Synthesis की प्रक्रिया से ही Progressive Ideas सामने आते हैं।

फ्रांसीसी दार्शनिक ऑगस्त कॉम्टे का भी मानना था कि जब दूसरी पीढ़ी आती है, तो उसके साथ नई सोच, नए विचार और बदलाव की नई गति भी आती है। नई पीढ़ी, नए सवाल पूछती है, पुरानी बातों को नए नजरिए से देखती है और इसी प्रक्रिया से समाज आगे बढ़ता है।

इसलिए मैं मानता हूँ कि The succession of generations is the moving force in historical progress.

देवियो और सज्जनो,

अंग्रेजी में एक कहावत है—‘Standing on the Shoulders of Giants’ यानी हम अपने पूर्वजों के ज्ञान, अनुभव और उपलब्धियों के आधार पर आगे बढ़ते हैं।

हर पीढ़ी के युवाओं ने अपने समय की समस्याओं को समझा है और कुछ नया करने की कोशिश की है। इसी से नए Innovations हुए हैं। और इसी से समाज के Evolution की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है।

आप सोचिए 1947 में Transistor का आविष्कार हुआ, और यही आविष्कार आज Semiconductor Industry के विकास का आधार बना है।

ऐसे ही 1950 में Mathematician, Alan Turing ने Turing Test का विचार सामने रखा और यह प्रश्न उठाया कि क्या मशीनें मनुष्य के समान व्यवहार कर सकती हैं? बाद में लोगों ने इस पर और विचार किया। शोध किए। इन सबने आज के Artificial Intelligence (AI) Revolution का मार्ग प्रशस्त किया।

वर्ष 1987 में वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया के DNA में Sequences की Study की। बाद में इसके आधार पर ही क्रिसपर (CRISPR) Gene-editing Technology विकसित की गई।

कहने का मतलब यह है कि Generations में बदलाव और Gap हमेशा Negative ही नहीं होता है। यह Knowledge, Innovation और Progress की निरंतरता का आधार भी है।

यानी एक Line में कहें तो पीढ़ियों के बदलाव के बीच में ही भविष्य आकार लेता है।

साथियो,

आज समाज में मुख्यतः छह पीढ़ियाँ साथ-साथ मौजूद हैं: Silent Generation, Baby Boomers, Gen X, Millennials, Gen Z और Gen Alpha.

पहली तीन Generations ने Analog Technology के दौर में जीवन शुरू किया। इसलिए उन्हें कई बार Digital Immigrants भी कहा जाता है। जबकि Millennials ने Analog से Digital की ओर हुए बदलाव को देखा है। और आज की Generation Z और Alpha ने Internet, Smartphone और Social Media के बीच अपना जीवन शुरू किया है। इसलिए वे Digital Natives हैं।

Technology के बदलने के कारण, हर पीढ़ी का काम करने का तरीका बदला है। सीखने का तरीका बदला है। संवाद का तरीका बदला है। मनोरंजन का तरीका बदला है। और Values भी बदली हैं। हर Generation के साथ अपने फैसले खुद लेने और अपनी पहचान खुद तय करने की स्वतंत्रता भी बढ़ती गई है।

यह बदलाव बहुत Positive है। इसने जीवन को बहुत आसान बनाया है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आज की पीढ़ी के सामने कोई चुनौती नहीं है।

जैसे-जैसे Opportunities बढ़ी हैं, तो वैसे-वैसे Competition भी बढ़ा है। आज युवा केवल अपने आसपास के लोगों से नहीं, बल्कि हर दिन Social Media के कारण दुनिया भर के लोगों से अपनी तुलना करता है।

एक समय था जब कहा जाता था कि “देखो, शर्मा जी का बेटा कितना अच्छा कर रहा है।” यानी उस समय पड़ोस में रहने वाले शर्मा जी और वर्मा जी का बेटा ही तुलना का सबसे बड़ा पैमाना हुआ करता था। लेकिन आज पूरी दुनिया Connected है और शर्मा जी के बेटे की जगह पूरी दुनिया ने ले ली है।

इस Chronic Social Comparison के कारण युवाओं के मन में एक अनजाना सा डर घर कर गया है, जिसे मनोवैज्ञानिक Nameless Dread कहते हैं। आज Depression और Anxiety जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

आज World Mental Health Day भी है। इसलिए यह बात और भी प्रासंगिक हो जाती है कि हमारे युवा Materially Wealthy होने के साथ-साथ Mentally Healthy भी रहें।

इसके लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि युवा Self-Centered से Purpose-centered बनें। हमें Sense of Belonging को बढ़ाना होगा। हमें Constant Comparison को भी रोकना होगा। युवाओं को भी यह समझना होगा कि सभी की अपनी-अपनी यात्रा होती है। उन्हें किसी से भी अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए।

जहां तक Policy की बात है, तो हमारी सरकार ने Mental Wellbeing को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। National Mental Health Policy और Mental Healthcare Act ने Affordable और  High-Quality Mental Healthcare को बढ़ावा दिया है।

इसके अलावा, Tele-MANAS के माध्यम से लोगों को दूर-दराज के क्षेत्रों में भी Mental Health Care Service उपलब्ध कराई जा रही है।

साथियो,

आज कई देशों में युवाओं को Excessive Digital Interaction के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जैसे Australia ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सारे Social Media Platforms, Ban कर दिए हैं। UK, Sweden और Spain में भी इसी तरह के Interventions किए जा रहे हैं।

हाल ही में, भारत में भी सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित की जानी चाहिए। कुछ लोगों को इससे भी आपत्ति होगी। वे इसका भी विरोध करेंगे।

लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि हम सभी Stakeholders और Experts के साथ विचार-विमर्श करके, युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे।

साथियो,

बीसवीं शताब्दी में परमाणु बम को मानवता के लिए बड़ा खतरा माना जाता था। आज Artificial Intelligence (AI) को लेकर भी ऐसी ही आशंकाएँ हैं।

‘If Anyone Builds It, Everyone Dies’; ‘Our Final Invention’; और ‘Will AI Murder Us All?’; ये सभी AI पर लिखी गई किताबों के शीर्षक हैं। इन Titles से ही AI से जुड़े खतरों का अंदाजा लगाया जा सकता है। हो सकता है इनमें बहुत अतिरंजना और अतिशयोक्ति हो। यानी Exaggeration हो। लेकिन इस बात को कोई नहीं नकार सकता है कि AI is Unlike Anything Before.

AI के कारण सभी क्षेत्रों में परिवर्तन आ रहा है। इसके कारण Jobs और Required Skills का Nature भी तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव को रोकना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन युवाओं को इसके लिए तैयार करना हमारे हाथ में है।

इस दौर में Technological Skills के साथ-साथ Leadership, Vision, Courage और Emotional Intelligence जैसी Qualities भी बहुत महत्वपूर्ण होंगी। जो युवा अनिश्चितता में निर्णय ले सकेंगे, लोगों को साथ लेकर चल सकेंगे और बदलाव को अपनाने का साहस रखेंगे, वे AI के दौर में भी आगे बढ़ेंगे और भविष्य को गढ़ेंगे।

इसीलिए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के तहत शिक्षा में Critical Thinking, Creativity, Problem Solving और Multidisciplinary Learning को बढ़ावा दिया जा रहा है।

हमारा प्रयास है कि युवा केवल बदलती Technology के इस युग में Job Seekers न रहें, बल्कि अपनी Skills, Leadership और Innovation के बल पर Job Creators और Future Leaders बनें।

साथियो,

हर पीढ़ी की अपनी जरूरतें, अपनी आकांक्षाएं और राष्ट्र के प्रति योगदान देने का अपना तरीका होता है। जैसे जब भारत आजाद हुआ, तब सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्र निर्माण की थी। उस समय युवाओं ने राष्ट्र निर्माण को अपना ध्येय बनाया और इसके लिए सभी सुख-सुविधाओं का त्याग भी किया।

मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। IIT खड़गपुर के शुरुआती Batch में Admission के समय इंटरव्यू में छात्रों से एक सवाल अक्सर पूछा जाता था, कि बिहार में बांध बनाओगे या टाटा स्टील में नौकरी करोगे? Personal Comfort या अधिक Salary को प्राथमिकता देने वाले Student को अक्सर Reject कर दिया जाता था।

और तो और, शुरुआती बैच के विद्यार्थियों के बीच एक Unwritten Code भी था कि कोई भी पाँच सौ रुपये से अधिक Salary नहीं लेगा। उस समय इस बात की बहुत सराहना भी की जाती थी।

लेकिन क्या आज के युवाओं से भी हमें यही अपेक्षा करनी चाहिए? जबाव है, नहीं। और इसकी जरूरत भी नहीं है।

क्योंकि भारत आज बदल चुका है। आज भारत दुनिया की बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। आज, Wealth Creation के साथ रोजगार बढ़ता है। Innovation बढ़ता है। और देश आगे बढ़ता है।

यानि अगर आज का युवा बड़ी कंपनी बनाता है, हजारों रोजगार पैदा करता है, नई Technology विकसित करता है या दुनिया में भारत की Competition करने की क्षमता बढ़ाता है, तो वह राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है।

इसलिए मैं कहता हूँ कि पीढ़ी बदलती है तो चुनौतियाँ भी बदलती हैं। उनके समाधान के तरीके भी बदलते हैं। और उसके साथ नीतियाँ भी बदलनी चाहिए।

लेकिन एक चीज है जो कभी नहीं बदलनी चाहिए, और वह है देश के लिए कुछ करने और ‘राष्ट्र प्रथम-सदैव प्रथम’ की भावना।

देवियो और सज्जनो,

एक अच्छी Policy वह नहीं होती है जो केवल पुरानी व्यवस्था को बचाए रखे। अच्छी Policy वह भी नहीं होती है जो केवल नई होने के कारण अच्छी मानी जाए।

अच्छी Policy वह है जो अनुभव से सीखती है, वर्तमान को समझती है और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखती है।

हिन्दी की एक कविता की एक पंक्ति है, जो मुझे बहुत अच्छी लगती है। वह पंक्ति है; ‘लो अतीत से उतना ही जितना पोषक है, जीर्ण-शीर्ण का मोह मृत्यु का ही द्योतक है।”

यानी हमें अपने अतीत से केवल वे चीजें या विचार अपनाने चाहिए जो हमारे विकास के लिए उपयोगी हों। पुरानी और बेकार हो चुकी रूढ़ियों से चिपके रहना प्रगति को रोकता है और यह मृतप्राय होने का संकेत है।

इसलिए, आज जब हम युवाओं के लिए नीतियाँ बना रहे हैं, तो इस बात को ध्यान में रखकर बना रहे हैं।

जैसे आज एक तरफ Skill India Mission के माध्यम से युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी Skills प्रदान किए गए हैं, तो दूसरी ओर Startup India के माध्यम से Entrepreneurship को भी बढ़ावा दिया गया है।

New Education Policy में एक तरफ जहां Indian Knowledge Systems को बढ़ावा देने की बात की गई है, वहीं दूसरी ओर Machine Learning और Artificial Intelligence को भी आगे बढ़ाने की बात की गई है।

PM Internship Scheme के जरिए युवाओं को Hands-on experience  देने का प्रयास भी किया जा रहा है। वहीं, MY Bharat जैसे Platforms के माध्यम से उन्हें Decision Making में भी भागीदार बनाया जा रहा है।

हम Animation, Visual Effects, Gaming, Comics (AVGC) Sector को बढ़ावा दे रहे हैं। Creative Economy को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे भारत; मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक, डिजिटल कंटेंट, ‘वी आर- एक्स आर’ (VR-XR) जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बन रहा है।

वहीं दूसरी ओर हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि Traditional Industries, Manufacturing और MSMEs को भी बढ़ावा मिले। और 2047 तक हम पैंतीस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करें।

यानी हमारी कोशिश यह है कि हमारा युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहे और “विकसित भारत” के सपने को साकार करने में अधिक से अधिक योगदान दे।

साथियो,

युवाओं के विकास के लिए हमारी Policy कैसी हो, इसको Carpenter और Gardener के उदाहरण से समझा जा सकता है।

एक Carpenter जानता है कि उसे क्या बनाना है। उसके दिमाग में पहले से ही एक तय डिज़ाइन होता है। वह लकड़ी को उस डिज़ाइन में ढालता है, जो उसने पहले से सोच रखा है।

लेकिन एक Gardener किसी पौधे को आकार नहीं देता। बस पौधे को बढ़ने के लिए पानी देता है, खाद देता है, उसकी रक्षा करता है। और फिर पौधा धीरे-धीरे अपनी प्रकृति के अनुसार विकसित होता है।

मुझे लगता है कि एक अच्छी Public Policy का काम भी Carpenter जैसा नहीं, बल्कि Gardener जैसा होना चाहिए। Policy का काम ऐसा वातावरण बनाना होना चाहिए जहाँ हर व्यक्ति अपनी प्रतिभा और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ सके। और आज हमने इसी दिशा में काम किया है।

अगर आज कोई युवा Research और Innovation करना चाहता है, तो Atal Innovation Mission उसे अपने Ideas को आगे बढ़ाने का अवसर देता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पिछले दशक में भारत का Research and Development Expenditure भी दोगुना किया गया है।

वर्ष 2023 में Anusandhan National Research Foundation की स्थापना भी की गई है। यह Foundation, Research के लिए प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करने का कार्य कर रहा है।

अगर कोई युवा AI के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है, तो ‘India-AI’ जैसे Initiatives हैं जो उसे Startup Risk Capital प्रदान कर रहे हैं।

जो युवा Traditional Crafts और Family Trade में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए PM Vishwakarma जैसी Schemes की शुरुआत की गई है।

जो युवा अपना Business शुरू करना चाहते हैं, उन्हें MUDRA योजना के तहत Collateral-free Credit दिया जा रहा है।

अगर कोई युवा Sports में अपना भविष्य देखता है, तो उसके लिए Khelo India और Target Olympic Podium Scheme जैसी पहलें हैं, जो Training और Support प्रदान करती हैं।

हमारे युवाओं को अच्छी Vocational Education और Training मिले इसके लिए हमने ‘पीएम सेतु प्रोग्राम’ शुरु किया है।

कहने का मतलब है कि हमने ऐसा Ecosystem और Policies बनाने की कोशिश की है, जिससे युवा अपने सपनों को पूरा कर सकें। अपना Passion Follow कर सकें।

और साथियों, जब युवाओं को Ecosystem मिला, तो उन्होंने वह कर दिखाया जो पहले असंभव लगता था। मैं आपको इसके कुछ उदाहरण देता हूँ।

पिछले 12 वर्षों में Registered Patents की संख्या कई गुना बढ़ गई है। Global Innovation Index में हम 81वें स्थान से, 38वें स्थान पर पहुँच गए हैं।

साल 2014 तक देश में 500 से भी कम Registered Start-Ups थे। लेकिन आज Start-Ups की संख्या लगभग सवा दो लाख हो गई है।

आप Sports के क्षेत्र में भी देख लीजिए। इस वर्ष हुए Commonwealth Games और Asian Games में हमारे खिलाड़ियों ने कई नए कीर्तिमान बनाए हैं।

युवाओं ने Space-Tech के क्षेत्र में तो ऐसे कार्य किए हैं कि दुनिया में हमारा डंका बज रहा है। अभी हाल ही में Skyroot Aerospace ने India का पहला Private Orbital Rocket Launch किया है। Skyroot की Engineering टीम की Average Age लगभग 28 वर्ष है।

भारत के एक Startup, Agnikul Cosmos, ने दुनिया का पहला Single-Piece 3D-printed Semi-cryogenic Rocket Engine बनाया है। Agnikul Cosmos की टीम की Average Age भी लगभग 23 वर्ष है।

Galax-Eye Startup ने दुनिया का पहला Opto-SAR Satellite लॉन्च किया है। जब यह Startup शुरू किया गया था, तब इसके Founders भी अपने Mid-20s में थे।

मैं आपको डिफेंस सेक्टर के भी कुछ उदाहरण देता हूँ। पहले डिफेंस सेक्टर बहुत हद तक सरकारी कंपनियों पर ही निर्भर था। लेकिन हमने Policy बनाई और युवाओं को अवसर दिए। डिफेंस सेक्टर में स्टार्ट अप्स के लिए दरवाजे खोले गए हैं।

और आज इसका परिणाम है कि भारत में 1000 से अधिक डिफेंस स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। आज हमारे युवा ड्रोन भी बना रहे हैं, Missiles भी बना रहे हैं, एंटी-ड्रोन सिस्टम भी बना रहे हैं। और Bulletproof Jackets भी बना रहे हैं।

और यह सब युवाओं के Skills, Hard Work, Perseverance और Talent के साथ-साथ, अच्छी Policy के कारण संभव हुआ है।

साथियों,

युवाओं के लिए बनने वाली Policy, अब केवल “Policy for Youth” तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। समय की आवश्यकता है कि हम “Policy by Youth” और “Policy with Youth” की ओर आगे बढ़ें। और युवा केवल नीतियों के लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बनें।

इसी सोच को MY Bharat Platform ने आगे बढ़ाया है। यह Platform युवाओं को Volunteering, Leadership, और Civic Participation से जोड़ रहा है। अब तक तीन करोड़ से अधिक युवा इस Platform से जुड़ चुके हैं।

‘Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026’ से देशभर में 50 लाख से अधिक युवा जुड़े हैं। साथ ही 6,000 Young leaders की District-wise Repository भी तैयार की गई है।

इसी तरह National Service Scheme में भी युवाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ी है।

यह सभी बातें बताती हैं कि युवा केवल नीति के Subject नहीं हैं; वे संवाद के सहभागी हैं। समाधान के साझेदार हैं। और राष्ट्र-निर्माण के नेतृत्वकर्ता भी बन रहे हैं।

साथियो,

हमारी परंपरा में जाता है; ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ यानि दुनिया की सभी दिशाओं से हमारे पास श्रेष्ठ विचार आएँ।

मैं देश के सभी युवाओं से कहना चाहता हूँ कि हमें हर Best Practice से सीखना चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी ध्यान में रखना है कि इस प्रक्रिया में अपनी विरासत, अपनी संस्कृति, अपनी सभ्यता के प्रति हीनता का भाव न आने पाए।

हमें आधुनिकता के वेग में अपनी जड़ों से नहीं कटना है। आप Artificial Intelligence अपनाएं, लेकिन Human Values को न भूलें। दुनिया के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में पढ़ें, लेकिन भारत की समस्याओं के समाधान के लिए वापस आएं। Global Companies बनाएँ, और साथ ही Local Communities को भी सशक्त करें।

साथियों,

हर Generation में युवा-वर्ग सबसे ऊर्जावान होता है। उसमें सबसे अधिक साहस होता है। इतिहास गवाह है कि बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलावों में युवाओं ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आप सोचिए कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में युवाओं ने अपने साहस और संकल्प से दुनिया की सबसे बड़े साम्राज्य को हिला कर रख दिया था। ऐसे ही, आजादी के बाद जब देश में Emergency लगाई गई, तब युवाओं ने लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ी थी।

लेकिन हर कालखंड में यह चुनौती भी रही है कि युवाओं की ऊर्जा किसी संकीर्ण स्वार्थ की भेंट न चढ़े और युवाओं की ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र और समाज के हित में हो।

कोई उन्हें गलत दिशा न दे दे। क्योंकि गलत दिशा मिलने पर कई बार बहुत शिक्षित युवा भी रास्ता भटक जाते हैं। या नशे की आदत में फंस जाते हैं। या उग्र विचारधाराओं के प्रभाव में आ जाते हैं और Radicalisation का शिकार हो जाते हैं।

मैं Physics का शिक्षक रहा हूँ। तो मैं Nuclear Fission और Fusion  की प्रक्रियाओं के माध्यम से यह बात समझाना चाहता हूँ। सूर्य को ऊर्जा देने वाली प्रक्रिया Fusion है। जबकि Power plants में होने वाली Reaction, Nuclear Fission है। इन दोनों ही Reactions में ऊर्जा उत्पन्न होती है। लेकिन Nuclear Fission में Radioactive Waste निकलता है। जबकि Fusion में ऐसी समस्या नहीं आती।

युवाओं की ऊर्जा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। युवाओं की ऊर्जा सही दिशा और सही कार्य में लगेगी तो उससे सृजन और निर्माण होगा। लेकिन यदि यह ऊर्जा दिशा भटक जाए या गलत काम में लग जाए तो उससे विनाश ही होगा।

लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, अराजकता फैलाना नहीं। संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उनकी विश्वसनीयता को सुनियोजित ढंग से कमजोर करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

इसलिए यह बड़ों की जिम्मेदारी है कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिले। लेकिन मैं मानता हूँ कि आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z खुद बहुत जागरूक है। वे अपनी जिम्मेदारी भली-भांति समझते हैं। उन्हें Vested Interests द्वारा, थोड़े से समय के लिए, भ्रमित तो किया जा सकता है। लेकिन उन्हें राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य से भटकाया नहीं जा सकता है।

देवियो और सज्जनो,

अंत में, मैं बस यही कहूँगा कि हमें अपने युवाओं पर पूरा भरोसा है। लेकिन भरोसे के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। अधिकार के साथ उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है। स्वतंत्रता के साथ अनुशासन भी जुड़ा होता है। शक्ति के साथ संयम जुड़ा होता है। सामर्थ्य के साथ सेवा का भाव जुड़ा होता है।

और मैं मानता हूँ कि इन सभी मूल्यों को साथ में लेकर चलते हुए, हमारा युवा देश के विकास में योगदान देता रहेगा। इसी के साथ मैं, अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

जय हिन्द! जय भारत! धन्यवाद।