SIDM भारत का प्रमुख और एकीकृत Defence Industry Association है: रक्षा मंत्री

Text of RM’s speech at the Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) Champions Awards ceremony in New Delhi.

सबसे पहले, मैं आप सभी को, Society of Indian Defence Manufacturers, यानी SIDM के 8th annual session, and Champion awards के आयोजन पर बधाई देता हूँ। आज इस मंच पर खड़े होकर मुझे वही अनुभूति हो रही है, जो एक किसान को अपनी फसल पकते हुए देखकर होती है। और मैं यह बात हल्के मन से नहीं कह रहा हूँ। मैं गंभीरता से कह रहा हूँ।

मैं लगातार इस कार्यक्रम में आता रहा हूँ। हर बार आपके बीच आता हूँ। आपकी बातें सुनता हूँ। आपके सुझाव सुनता हूँ। और हर बार मुझे यह महसूस हुआ, कि मैं आपकी पूरी यात्रा का एक साथी हूँ। मैंने आपको उस समय भी देखा है, जब लोग आपकी क्षमताओं पर शक कर रहे थे, और कोई यह नहीं मानता था, कि भारत का private sector किसी दिन Defence sector में इतना नाम भी कमा पाएगा।

और मैं आज का दिन भी देख रहा हूँ। जहाँ मेरे सामने पूरा हॉल गौरव के भाव से भरा हुआ है। आपके चेहरे चमक रहे हैं। और ऐसे अनेक लोग बैठे हैं, जिनके नाम पर दुनिया भर में भारत की defence industry का झंडा लहराता है।

साथियों, आज कई sectors में Champion Awards दिए गए हैं। किसी को design के लिए, किसी को product innovation के लिए, किसी को import substitution के लिए, manufacturing excellence के लिए, और किसी को export के लिए। यह हमारे industry के diversified excellence का एक उदाहरण है I मैं आप सभी awardees को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

यह जो award आपको मिला है, यह आप लोगों के अथक परिश्रम का प्रतिफल है। आपने कर्म किया। आपने रात-रात भर जागकर काम किया। आपने prototype बनाए। आपने trial किए। आपने failure झेले। आपने दोबारा उठकर खड़े होना सीखा। उसके बाद आज दुनिया आपको acknowledge कर रही है।

मैं चाहूँगा, कि यह award आपकी दीवार पर, केवल एक frame की तरह न लटका रहे। यह आपके मन में एक ज़िम्मेदारी की तरह बैठ जाए। क्योंकि जो सम्मान आपको मिला है, उसका मतलब है, अब आपसे और भी ज्यादा उम्मीद की जाएगी। और आपको उन सारी उम्मीदों को पूरा करने के लिए और भी मेहनत करनी होगी।

साथियों, हर बार जब मैं आपके बीच आता हूँ, तो मैं केवल business leaders और industrialists को नहीं देखता। मैं nation-builders को देखता हूँ। ऐसे लोगों को देखता हूँ, जिन्होंने अपने आपको, भारत की आत्मनिर्भरता के मिशन को समर्पित कर दिया है। और आज के disruption के इस युग में, हम समर्पण के बिना आगे नहीं बढ़ सकते।

आज इस session की theme भी आप सबने बहुत interesting रखी है- “Sovereign Capabilities, Contested Frontiers: Accelerating India’s Strategic Autonomy in an Era of Disruption.”

यह theme उस दुनिया की सटीक तस्वीर है, जिसमें हम आज खड़े हैं। आज के दौर में National Security की परिभाषाएँ बदल चुकी हैं। अब यह केवल इस बात से तय नहीं होती, कि हमारी सेनाएँ कितनी बड़ी हैं। अब यह इस बात से भी तय होती है कि हमारी सेनाएँ जिन capabilities पर निर्भर करती हैं, उन्हें हम स्वयं design कर सकते हैं, या नहीं। जिन हथियारों की हमें जरूरत है, उन्हें हम स्वयं develop और manufacture कर सकते हैं या नहीं। और जिन परिस्थितियों में हम हैं, उसमें हम स्वयं control कर सकते हैं या नहीं।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जब 2014 में हमारी सरकार चुन कर आई थी, तो उसी समय से ही हमारे प्रधानमंत्री जी का विशेष ध्यान, रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर रहा। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुझे यह देखकर बड़ी खुशी होती है, कि आज हम Defence Industry और global export map पर कितनी दूर तक पहुँच चुके हैं।

एक समय था जब भारत दुनिया के सबसे बड़े defence importers में गिना जाता था। लेकिन आज हम sophisticated military hardware के, एक credible और reliable exporter के रूप में उभर रहे हैं। साथियों, यह बदलाव छोटा नहीं है। यह ऐतिहासिक है।

हमारा defence export, Financial Year 2025-26 में record 38,424 करोड़ रूपये तक पहुँच चुका है। यह पिछले financial year की तुलना में 60% से भी ज्यादा वृद्धि है। और एक बड़ी achievement यह भी है, कि इस landmark milestone में DPSUs का योगदान 54.84% रहा, और private sector का योगदान 45.16% तक देखने को मिला है। सिर्फ इतना ही नहीं, 2029 तक तो हम 50,000 करोड़ रूपये के defence exports के, अपने ambitious target की ओर भी बढ़ रहे हैं।

साथियों, ये केवल आँकड़े नहीं हैं। ये हज़ारों engineers, workers और entrepreneurs के पसीने की कहानी हैं। ये उनकी innovation की कहानी हैं। ये उनके determination की कहानी हैं।

मैं SIDM की उस exceptional भूमिका को acknowledge करता हूँ, जो आपने भारत के domestic defence ecosystem को मज़बूत करने में निभाई है।

2017 में स्थापित SIDM, आज भारत की premier और unified defence industry association बन चुकी है। Large enterprises से लेकर MSMEs तक, start-ups से लेकर academia और foreign OEMs तक, आप हर Segment का प्रतिनिधित्व करते हैं।

साथ ही, policy advocacy के मोर्चे पर भी आप बहुत आगे रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर, आपने उन बड़े reforms को shape करने में मदद की है, जिन्होंने आज हमारा पूरा ecosystem बदल दिया है।

साथियों, जब policies की बात आई है, तो मैं एक चीज पर आपका ध्यान दिलाना चाहूँगा। दुनिया भर में policy-making का एक तरीका रहा है। और वह है, Government और Public sector द्वारा स्थापित roadmaps. ये public policies, Defence सहित सभी sectors में बनाई जाती हैं। ये वो broad guidelines होती हैं, जो इस sector के सभी stakeholders को, एक खास objective की ओर जाने को प्रेरित करती हैं।

जहाँ तक Defence Sector का प्रश्न है, हमने पिछले कुछ वर्षों में, जो policies बनाई हैं, चाहे वह Defence Acquisition Procedure हो, चाहे Defence Procurement Manual हो, चाहे positive indigenisation list हों,  SRIJAN portal हो, iDEX हो,  इन सबका एक ही उद्देश्य है। और वह उद्देश्य है, हमारी Private Defence Industries की क्षमताओं को और उड़ान देना।

इन policies के तहत, हमने एक ऐसे framework बनाने का प्रयास किया है, जिसमें आप पंख फैलाकर अपनी यात्रा तय कर सकें। आप खुद तय करें, कि किस direction में जाना है। कितनी ऊँचाई तक जाना है। और कितनी तेज़ी से जाना है।

Policies होंगी। नियम होंगे। Safety होगी। Quality होगी। Accountability होगी। लेकिन उस Regulation के भीतर भी, आप बहुत ऊँची उड़ान भर सकते हैं। हमने वह जगह छोड़ी है। हमने वह space छोड़ा है। हमने वह भरोसा जताया है। हम अपनी policies के माध्यम से, आपसे यह नहीं कह रहे, कि “यह मत करो”, बल्कि हम आपसे यह कह रहे हैं कि “यह करो”, और हम आपके साथ हैं।

साथियों, आप सब तो जानते ही हैं, कि Defence Sector अपने आप में एक अनूठा sector है। इस Sector में Private Industries पहले allowed नहीं थीं। इसके कई कारण रहे होंगे I लेकिन हमारी सरकार ने Industrial participation को बहुत बढ़ावा दिया है।  आज हम Participatory Approach से कहीं आगे बढ़कर, Autonomy तक पहुंच चुके हैं। यानी आज आप खुद decide करें, कि technology कौन सी बनानी है। आप खुद तय करें कि market कौन सा है। आप खुद तय करें कि partner कौन होगा। और सरकार हर मामले में आपके साथ खड़ी है।

और मैं आपसे कहना चाहता हूँ — जब हमने आपको autonomy दी, तो हमने आप पर एक भरोसा जताया। और मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है, कि आपने उस भरोसे को हर साल और मज़बूत किया है।

मुझे पिछले साल की एक बात याद आ रही है। मैंने इसी मंच से आपसे एक आह्वान किया था। मैंने कहा था, हमारे कुल Defence Production में private sector का हिस्सा लगभग चौबीस प्रतिशत है। और मैंने कहा था, इसे जल्द से जल्द पचास प्रतिशत पर ले जाना चाहिये।

मैं आज फिर दोहरा रहा हूँ, कि पचास प्रतिशत तक पहुँचना कोई बड़ी बात नहीं है। आपकी जो capacity है, जो talent है, जो जोश है, उसके आगे यह लक्ष्य बहुत छोटा है। मुझे यह जानकर ख़ुशी है कि, पिछले 12 वर्षों में, private sector का contribution लगभग नगण्य से बढ़कर, आज 24% के स्तर पर आ गया है। यह वृद्धि एक कठिन समय में हुई है, जब Covid एवं अन्य कारणों से पूरी दुनिया की supply chains हिल गई हैं, जब logistics महँगा हो गया है, जब हर तरफ uncertainty है।

लेकिन मैं इस वृद्धि के बावजूद यह कहना चाहूँगा, कि मैं संतुष्ट नहीं हूँ। मैं चाहता हूँ, कि आप यहाँ से आगे बढ़ें। मैं चाहता हूँ, कि आप मुझे अगली बार यह बताएँ कि हम 30% पर पहुँच गए। 35% पर पहुँच गए। 40% पर पहुँच गए। क्योंकि साथियों, यह मेरा लक्ष्य नहीं है, यह आपका लक्ष्य है। यह हमारा साझा लक्ष्य है। मुझे पूरा विश्वास है, कि जल्द ही आप ये लक्ष्य पूरा कर लेंगे।

साथियों, आप सब Defence sector में हो रहे changes से भी वाकिफ हैं। आज warfare का चेहरा बदल गया है। Conventional warfare से चीज़ें बढ़कर अब technological warfare की ओर शिफ्ट हो गई हैं। Drones, missiles और air defence ने, आज के warfare में न सिर्फ नए-नए आयाम जोड़े हैं, बल्कि ये नए-नए technological challenges भी सामने लेकर आए हैं। इन सब की technology भी बड़ी तेजी से बदल रही है।

मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। Ukraine और Russia के बीच जो संघर्ष चल रहा है, उसमें हमने देखा। जैसे ही किसी पक्ष ने एक drone मार गिराया, फिर पता चला कि उसका पूरा system decode हो चुका है। यानी मार गिराने के तुरंत बाद, उसकी programming समझ ली गई। उसकी frequency समझ ली गई। उसका communication तोड़ दिया गया।

यानी आजकल के युद्ध केवल हथियारों के नहीं है। यह update होने का युद्ध है। इसमें जो तेज़ है, वह जीतता है। और जो एक कदम पीछे है, वह हार जाता है।

तो ऐसे में प्रश्न उठता है, कि हमारी agility कितनी है? यदि कल कोई conflict हो जाए, तो हम कितनी तेज़ी से खुद को ढाल सकते हैं?

आवश्यकता पड़ने पर, हम कितने दिनों में, अपने equipment को modify कर सकते हैं या softwares को update कर सकते हैं? कितने दिनों में नया software बना सकते हैं? कितने दिनों में नया hardware बना सकते हैं?क

इसलिए मैं आपसे एक आग्रह करता हूँ। आप अपने R&D पर लगातार focus बनाए रखिए। R&D पर जो खर्च होता है, उसे खर्च नहीं समझिए। उसे investment समझिए। यह वह investment है, जो संकट के समय आपको edge प्रदान करेगा। यह वह investment है, जो आपको बाज़ार में आगे रखेगा। यह वह investment है, जो देश को सुरक्षित रखेगा।

इसके अलावा एक और विषय है, Surge Capacity और Production Capacity का। मान लीजिए आज चीजें शांतिपूर्ण हैं। मान लीजिए सब ठीक है। लेकिन क्या हम यह मानकर चल सकते हैं कि सब ठीक रहेगा? नहीं।

क्योंकि हमने Operation Sindoor के दौरान भी देखा है। एक तरह से हम युद्ध के कगार पर खड़े थे। हम लड़े, और हम जीते। हमारे जवानों ने कमाल किया। हमारे systems ने कमाल किया। लेकिन वो सारी चीज़ें अचानक हुईं थीं।

हमें इस चीज का भी ध्यान रखना है, कि यदि वह लड़ाई लंबी चल जाती, तो production capacity कैसे react करती। हमें सोचना होगा, कि अचानक से युद्ध दरवाजे पर आ जाए, तो क्या हम production दोगुना कर सकते हैं? तिगुना कर सकते हैं? क्या हमारी factories उस गति से चल सकती हैं, जिस गति से युद्ध की माँग बढ़ेगी?

हमें यह ensure करना होगा कि हम कछुए की चाल से न चलें। हमें खरगोश की तरह तेज़ होना होगा, और खरगोश की तरह धैर्यवान भी। दोनों गुण चाहिए। लेकिन जब देश की सुरक्षा की बात आए, तो गति सबसे ज़्यादा मायने रखती है। मुझे पूरा विश्वास है, कि आप सभी industry sector से जुड़े हुए लोग, हमारी production capacity को आवश्यकतानुसार बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे। इस पर कुछ नए, innovative और revolutionary solutions भी ले कर आएँगे।

साथियों, हमारे पास talent है। हमारे पास क्षमता है। हमारे पास मेहनत करने वाले लोग हैं। हमारे पास युवा हैं। दुनिया की सबसे बड़ी young population है। और अब तो policy support भी है, government का साथ भी है, बाज़ार भी है। तो कहीं कोई doubt रह ही नहीं जाता है कि हम defence sector में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक हों।

हमने policies बनाई हैं। हमने procedures सरल किए हैं। हमने अपने उद्यमियों को incentives दिए हैं। हमने नए नए रास्ते खोले हैं, जिनसे होते हुए आप बड़ी लंबी दूरी तय कर सकते हैं। आप विश्वास रखें, सरकार हमेशा आपसे कदम से कदम मिला कर चलने को तैयार है और रहेगीI

आप सब आपस में बैठकर बात करें, विचार करें, व एक अच्छे conclusion के साथ सामने आएँ, यही इस आयोजन की सफलता होगी।

इसी के साथ, मैं आप सभी को अपनी ढेर सारी शुभकामनाएं देता हूँ। आपने इस बेहद महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए मुझे आमंत्रित किया, इसके लिए आप सभी का आभार व्यक्त करते हुए, मैं  अपना निवेदन समाप्त करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद