Hindustan Shipyard Limited भारत की Maritime Capability का Custodian है: रक्षा मंत्री

Text of RM’s speech at the Hindustan Shipyard Limited (HSL) ceremony in Visakhapatnam.

आज, Hindustan Shipyard Limited में आप सबके बीच आकर, मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही है। आप सबसे मिलकर, भारत की maritime capability पर, हमारी naval strength पर, और हमारे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर, मेरा भरोसा और मज़बूत हो जाता है।

आज का दिन तो, वैसे भी बड़ा महत्वपूर्ण है। आज हम नए Slipway एवं गोला-यथ crane का उद्घाटन कर रहे हैं, एक नए Fleet Support Ship की Keel Laying कर रहे हैं और Fleet Support Ship-1, जिसका नाम ‘सूर्या’ रखा गया है, उसको भी Launch कर रहे हैं।

ये उपलब्धियाँ अपने आप में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जब ये सारे एक ही स्थान पर, एक ही अवसर पर सामने हो रही हैं, तो इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। Launch हमारी उपलब्धि का प्रतीक है, Keel Laying हमारे संकल्प का प्रतीक है, और नया Slipway हमारी बढ़ती हुई क्षमता का प्रतीक है। आज HSL में, हम जहाज बनाने के साथ-साथ, भारत की maritime power के भविष्य की नींव को, और मजबूत कर रहे हैं।

साथियों, भारत का maritime sector दुनिया के लिए नया नहीं है। प्राचीन काल से ही, भारत का समुद्र से गहरा संबंध रहा है। Lothal के प्राचीन बंदरगाह से लेकर, चोल साम्राज्य की maritime traditions तक, भारत ने समुद्री व्यापार, navigation और maritime connectivity में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमारे लिए समुद्र, व्यापार के साथ-साथ, हमारी समृद्धि, सुरक्षा, संस्कृति और सभ्यता का भी अभिन्न हिस्सा रहा है।

इसलिए जब हम आज भारत को एक बड़ी maritime power बनाने की बात करते हैं, तो हम कोई नया अध्याय शुरू नहीं कर रहे हैं। हम अपनी उसी गौरवशाली विरासत को पुनः सशक्त करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जिसे भारत ने सदियों पहले स्थापित किया था। और हमारी इस maritime journey में, Hindustan Shipyard Limited का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है।

साथियों, Hindustan Shipyard Limited, भारत की national maritime capability का custodian है। पिछले आठ दशकों से भी अधिक समय से, HSL ने देश की maritime और defence requirements को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशाखापत्तनम में ही, वर्ष 1948 में Jala Usha को launch किया गया था, जो स्वतंत्र भारत में निर्मित पहला जहाज था। यानी स्वतंत्र भारत ने अपनी maritime capability का निर्माण, बड़ी दूरदर्शिता और आत्मविश्वास के साथ प्रारंभ किया था।

आप सबको स्मरण होगा की HSL के financial condition बहुत समय से अच्छी नहीं थी I HSL के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के उपरांत, मंत्रालय एवं आपकी मेहनत से, HSL की आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार हुआ I वर्ष 2025 में, HSL को Miniratna Category-I का दर्जा प्राप्त होना, इसके transformation और पिछले वर्षों में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों का प्रमाण है। मैं, HSL परिवार के प्रत्येक सदस्य को, इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि HSL इस उपलब्धि से प्रेरित होकर maritime के क्षेत्र में, अपने प्रयासों को और तेजी से execute करेगा।

साथियों, हम सब विशाखापट्टनम में उपस्थित हैं। यह शहर अपने आप में, भारत के maritime landscape में, एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ Indian Navy का Eastern Naval Command, Naval Dockyard, Hindustan Shipyard Limited और Visakhapatnam Port ecosystem हैं I ये सभी मिलकर एक ऐसा maritime ecosystem बनाते हैं, जिसकी क्षमता अत्यंत व्यापक है। यहाँ Navy की operational expertise है, यहाँ shipbuilding capability है, यहाँ engineering talent है, यहाँ port infrastructure है, और सबसे महत्वपूर्ण, यहाँ एक ऐसा skilled workforce है, जो भारत के maritime ambitions को, ground reality में बदल सकता है। इसलिए हमें विशाखापट्टनम को केवल, एक shipyard location के रूप में नहीं देखना चाहिए। हमें इसे एक व्यापक Maritime Industrial Hub के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

साथियों, जहाँ तक बात भारत की maritime strength की है, तो मुझे लगता है, कि इसका निर्माण अकेले Navy या अकेले shipyards नहीं कर सकते। इसके लिए एक integrated national maritime ecosystem आवश्यक है। इसलिए मेरी expectations हैं, कि Navy, HSL, DRDO, academia, industry, MSMEs और startups एक integrated team के रूप में काम करें।

आज के इस समारोह का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा Fleet Support Ship programme है। यह Indian Ocean को लेकर हमारे vision को और मज़बूत करेगा। Indian Ocean हमारी economic security, energy security और national security से सीधे जुड़ा हुआ है। हमारा व्यापार और हमारी energy requirements, sea routes की सुरक्षा पर बहुत हद तक निर्भर हैं। Indian Navy ने Indian Ocean Region में, एक First Responder और Preferred Security Partner के रूप में बार-बार अपनी क्षमता सिद्ध की है। इसके अलावा Humanitarian Assistance and Disaster Relief हो, Anti-Piracy Operations हों, Evacuation Missions हों या Maritime Security हो, हमारी Navy ने हर परिस्थिति में अपनी readiness और resolve का परिचय दिया है।

लेकिन एक ऐसी Navy, जो लंबे समय तक समुद्र में दूर-दराज के क्षेत्रों में operational रहती है, उसे केवल warships की आवश्यकता नहीं होती। उसे Logistics, Maintenance, Sustained Support, और Operational Endurance भी चाहिए होता है। और यही भूमिका Fleet Support Ships निभाते हैं। ये ऐसे जहाज हैं, जो शायद हमेशा दिखाई न दें, लेकिन इनके बिना लंबे समय तक sustained naval operations संभव नहीं हैं। इसलिए आज Fleet Support Ship का Launch Indian Navy की reach, endurance और operational effectiveness को, और मजबूत करने की दिशा में, एक महत्वपूर्ण कदम है।

आज इसी Slipway पर Fifth Fleet Support Ship की Keel Laying भी हुई है। Shipbuilders जानते हैं, कि keel केवल जहाज का एक structural component नहीं है। Keel उस जहाज की foundation है, उसकी backbone है। आज जो keel रखी गई है, वह भारत की maritime future की एक और मजबूत नींव है।

साथियों, जैसा कि आप जानते हैं, पिछले एक दशक में भारत के defence manufacturing ecosystem में बड़ा परिवर्तन आया है। हम imported platforms पर निर्भरता से आगे बढ़कर, increasingly sophisticated systems और platforms को भारत में design और manufacture करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आज भारतीय shipyards advanced warships और submarines के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

साथियों, भारत में shipbuilding की immense potential है। लेकिन potential को capability में और capability को global competitiveness में बदलना, हमारी अगली चुनौती है। इस दिशा में हमें कुछ प्रमुख क्षेत्रों जैसे Timely Delivery, Productivity, Indigenous Design Capability, Supply Chain Resilience, Skilled Manpower, Capacity और Cost Competitiveness इत्यादि पर विशेष ध्यान देना होगा।

आज इस अवसर पर मैं HSL के समक्ष कुछ स्पष्ट priorities रखना चाहता हूँ।

पहली यह, कि हमें Timely Delivery को organisational culture बनाना है।

दूसरी यह, कि दुनिया की best shipyards से हम जो कुछ भी सीख सकते हैं, वो सीखें।

तीसरा यह, कि हमें अपनी Indigenous Design Capability को मजबूत करना होगा।

चौथा, हमें MSMEs और Startups को technology partners बनाना होगा।

और पांचवा यह, कि हमें Lifecycle Capability develop करनी होगी। मुझे पूरा विश्वास है, कि इन सुझावों पर आप विचार करेंगे और आत्मनिर्भर भारत की इस यात्रा को और मज़बूत करेंगे।

साथियों, मैं अपने Navy colleagues से भी एक बात कहना चाहूँगा। Navy और Indian shipyards एक ही national capability के दो महत्वपूर्ण अंग हैं। Navy को अपनी requirements को जितना संभव हो उतना early और clearly articulate करना चाहिए, ताकि shipyards infrastructure, manpower, procurement और technology planning समय पर कर सकें। जहाँ operationally feasible हो, वहाँ systems की greater standardisation और commonality को encourage किया जाना चाहिए।

इसके अलावा Feedback loop भी continuous होना चाहिए। जिसमे Operator अपना feedback designer को बताए। Designer अपना feedback builder को बताए। और builder अपना feedback operator को बताए। इसी continuous feedback से एक mature shipbuilding ecosystem develop होगा। हमारा लक्ष्य सरल और स्पष्ट होना चाहिए, Design better. Build faster. Deliver on time. Operate efficiently and do Maintenance effectively.

साथियों, Visakhapatnam के पास वह सब कुछ है जो एक बड़े maritime industrial ecosystem के लिए आवश्यक है। यहाँ major naval presence है, यहाँ established shipyard है, यहाँ port infrastructure है, यहाँ skilled workforce है, यहाँ engineering और industrial capabilities हैं, और यह भारत के eastern maritime gateway से connected है। इसलिए हमें Visakhapatnam को, केवल एक individual shipyard location के रूप में नहीं देखना चाहिए। हमें इसे एक व्यापक Maritime Industrial Hub के रूप में विकसित करना चाहिए। HSL को Andhra Pradesh के wider industrial ecosystem से increasingly connect होना चाहिए। State के MSMEs suppliers बन सकते हैं। Universities research और skill development centres बन सकती हैं। Technology companies digital shipbuilding में योगदान कर सकती हैं। Startups maritime technologies विकसित कर सकते हैं। और logistics तथा port infrastructure एक व्यापक shipbuilding और ship-repair ecosystem को support कर सकते हैं। हमारा उद्देश्य केवल एक shipyard को मजबूत करना नहीं होना चाहिए। हमारा उद्देश्य shipyard के चारों ओर एक complete shipbuilding ecosystem विकसित करना होना चाहिए।

साथियों, हमारा लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं है। हमें globally competitive बनना है। Self-reliance हमारी मंजिल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है; global competitiveness हमारी अगली बड़ी छलांग है। भारत को ऐसी स्थिति प्राप्त करनी होगी, जहाँ हमारे shipyards केवल Indian Navy के लिए ही नहीं, बल्कि friendly nations और international markets के लिए भी ships और maritime services उपलब्ध करा सकें। हमें ships के साथ-साथ Maritime Technology, Ship Repair & Maintenance Services और Engineering Expertise के क्षेत्र में भी global presence बनानी होगी। दुनिया अंततः हमें Quality, Cost, Technology, Delivery, और Reliability जैसे parameters पर judge करेगी। और मैं चाहूँगा, कि Indian shipyards, इन सभी parameters पर, दुनिया के श्रेष्ठ shipyards के साथ खड़े हों।

मैं HSL के प्रत्येक अधिकारी, engineer, technician, worker और कर्मचारी को बधाई देता हूँ। किसी भी जहाज की पहचान केवल उसके hull या उसके systems से नहीं होती। उस जहाज के पीछे हजारों लोगों की मेहनत, skill, discipline और dedication होता है। आज जो ships समुद्र में उतर रहे हैं, उनमें HSL के प्रत्येक कर्मचारी का योगदान दिखाई देता है। आपके हाथों से निर्मित प्रत्येक जहाज केवल steel और technology का combination नहीं है। वह भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। इसलिए मैं आप सभी से कहूँगा, कि अपने काम को केवल एक project के रूप में न देखें। इसे nation building का हिस्सा समझें।

HSL को आज से ही उस Indian Navy की requirements के लिए तैयार होना है, जिसकी आवश्यकता आने वाले वर्षों में होगी। Visakhapatnam को आज से ही उस maritime industry के लिए तैयार होना है जिसकी आवश्यकता आने वाले भारत को होगी। और Andhra Pradesh को आज से ही भारत के maritime future में और बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार होना है।

साथियों, हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, कि हमें 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है। एक ऐसा भारत जो, आत्मनिर्भर हो, सुरक्षित हो, समृद्ध हो, और विश्व पटल पर सम्मान के साथ खड़ा हो । हमारे यहाँ एक प्रचलित कहावत है — “जलमेव यस्य, बलमेव तस्य.” अर्थात— जिसका समुद्र पर सामर्थ्य है, वही वास्तव में शक्तिशाली है। भारत जैसे विशाल coastline, विशाल economy और व्यापक strategic interests वाले देश के लिए मजबूत maritime capability कोई विकल्प नहीं है। यह हमारी आवश्यकता है। और मजबूत maritime capability के लिए हमें Strong Navy, Strong Shipyards, Strong Industry, Strong Technology, Strong Skills, और सबसे बढ़कर भारत को अपनी क्षमताओं पर अटूट विश्वास का होना, इस लक्ष्य की प्राप्ति की, अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब इतिहास यह कहे, कि भारत के shipyards ने केवल जहाज नहीं बनाए थे। उन्होंने भारत की maritime destiny की नींव तैयार की थी। आज रखी जा रही हर keel उस भविष्य की foundation बने। आज launch हो रहा हर ship भारत की आत्मनिर्भरता का संदेश लेकर समुद्र में जाए। और आज inaugurate हो रहा हर infrastructure भारत की बढ़ती maritime capability का आधार बने।

आइए, हम सब मिलकर, HSL को Quality, Productivity और Timely Delivery का benchmark बनाएं। Visakhapatnam को भारत की Maritime Industrial Capability का एक प्रमुख केन्द्र बनाएं। Andhra Pradesh को India’s shipbuilding और maritime ambitions का एक मजबूत pillar बनाएं। और भारत को ऐसा राष्ट्र बनाएं, जो अपने एवं विश्व के लिए जहाज बनाए, और अपनी maritime शक्ति के बल पर, अपने राष्ट्रीय हितों की पूरी मजबूती से रक्षा करे। मैं एक बार फिर Hindustan Shipyard Limited के पूरे परिवार, Indian Navy और Ministry of Defence के officials, हमारे industry partners, और इस महत्वपूर्ण समारोह से जुड़े, प्रत्येक व्यक्ति को हार्दिक बधाई देता हूँ।

मैं आशा करता हूँ, कि हम सब मिलकर भारत की maritime capability को नई ऊँचाइयों तक ले जायेगें। इसी आशा और विश्वास के साथ, अधिक कुछ न कहते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

जय हिन्द!