भारत एक Civilisational Power हैं: रक्षामंत्री

Text of RM’s speech at the NDTV Defence Conclave in New Delhi.

NDTV द्वारा आयोजित इस Defence Conclave में, आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। साल 2024 में भी, मैं इस Conclave में आया था। तब मैंने देश की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे थे।

इस साल जब यह conclave हो रहा है, तो ऐसे समय में हो रहा है जब Global situation काफी complicated दिख रही है। हम देख सकते है कि कैसे Modern Warfare तेजी से बदल रहा है।

ऐसे में, इस तरह के आयोजनों की जरूरत और भी बढ़ जाती है, जिससे कि National Security और Defence से जुड़े विषयों पर गंभीर और व्यापक संवाद हो सके। नए Ideas मिल सकें। और समस्याओं का समाधान ढूंढने की दिशा में हम आगे बढ़ सके।

मुझे बताया गया है कि इस Conclave का यही उद्देश्य है कि Defence Experts, Industry Leaders, Innovators और बाकी सभी Stakeholders  एक साथ, एक ही जगह आ सकें, और महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन कर सकें।

इस आयोजन के लिए मैं NDTV की पूरी टीम को बधाई देता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि यहाँ हुए Discussions रक्षा क्षेत्र से जुड़े विमर्श को और समृद्ध करेंगे।

साथियो,

पिछले 12 वर्षों में हमारे Defence Sector की न केवल क्षमता बढ़ी है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने को लेकर, हमारे Approach में भी बड़ा बदलाव आया है। अब हमारा ध्यान केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि आज हम आत्मनिर्भर और Future-Oriented Defence Ecosystem बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

साथियो,

पिछले 12 वर्षों में भारत के Defence Sector में Groundbreaking, Institutional और Structural Reforms हुए हैं। इससे हमारी Defence Preparedness को और बल मिला है। Defence Manufacturing को नई गति मिली है और National Security भी और अधिक मजबूत हुई है।

पिछले तीन दशकों में हमने Telecommunication के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखा है। First Generation यानी 1G से शुरू होकर 2G, 3G, 4G और अब 5G तक की यात्रा केवल Mobile Network की Speed और Connectivity बढ़ने की ही कहानी नहीं है। हर एक Generation ने,  न केवल Communication की हमारी क्षमता को बढ़ाया, बल्कि Communication के पूरे System को पूरी तरह बदल दिया।

जैसे 1G से 5G तक मोबाइल नेटवर्क की Speed, Connectivity और Capabilities बढ़ती गईं और इसके साथ Communication के तरीके भी बदलते गए हैं, ठीक उसी तरह Defence Sector में भी Technology के विकास के साथ हथियारों, सैन्य क्षमता और युद्ध लड़ने के तरीकों में लगातार बदलाव आया है।

इस बदलाव को दिखाने के लिए Warfare की अलग-अलग Generations की बात की जाती है। जैसे आज हम 5th Generation Warfare के दौर में हैं, जहां Land, Water, Air के साथ-साथ Cyber, Space और Human Mind भी युद्ध के नए क्षेत्र बन चुके हैं।

आज Supply Chains भी Geopolitical Conflict का नया Ground बन चुका है। Drones, Artificial Intelligence (AI), Quantum और Hypersonic जैसी नई Technologies पूरे Defence Sector का स्वरूप बदल रही हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, भारत की Defence Preparedness भी, इस बदलते Security Environment के अनुरूप बदली है। मैं आपको इसके कुछ उदाहरण देता हूँ।

Artificial Intelligence (AI) को बढ़ावा देने के लिए एक Defence AI Council और AI Project Agency की स्थापना की गई है। हमने Reliable और Resilient, AI Use सुनिश्चित करने के लिए Framework और Guidelines भी जारी किए हैं।

ऐसे ही Indigenous Quantum Capabilities को बढ़ावा देने के लिए DRDO ने एक Research Centre स्थापित किया है। Quantum Technologies को तीनों सेनाओं में Integrate करने के लिए एक Policy Framework भी जारी किया गया है।

अगर मैं Hypersonic Technology की बात करूँ तो हमने Long-Range Hypersonic Missile का Successful Flight Trial कर लिया है।

और तो और Long-Duration Scramjet Engine भी Test कर लिया गया है।

इन सभी बातों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि चाहे वह Contact Warfare हो या No-Contact Warfare, Kinetic Warfare हो या Non-Kinetic Warfare, भारत की सेनाएँ हर Dimension में अपनी क्षमता और Preparedness को लगातार और भी मजबूत कर रही हैं।

साथियो,

Defence और Strategic Studies में एक Term है, “Fulda Gap” (फुल्डा गैप)। वैसे तो यह एक Geographical Location का नाम है, लेकिन इसका उपयोग Strategic Vulnerability (स्ट्रैटेजिक वल्नरेबिलिटी) या Critical Weak Point दिखाने के लिए एक Metaphor की तरह भी किया जाता है।

आज, Fulda Gaps केवल Borders पर ही नहीं, बल्कि Technology, Energy, Data और Supply Chains में भी हो सकते हैं। पिछले 12 वर्षों में ऐसी सभी Vulnerabilities को हमने समाप्त करने का काम किया है, जो कि हमारे Defence और National Security के लिए खतरा बन सकती थीं।

जैसे, Semiconductor के क्षेत्र में हम पूरी Supply Chain को भारत में ही विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इसी तरह Critical Minerals में Import Dependency कम करने के लिए National Critical Mineral Mission शुरू किया गया है।

हमने अपने Energy Sources को भी Diversify किया है, ताकि किसी एक Source पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। Renewable Energy, Nuclear Energy और Green Hydrogen को बढ़ावा दिया जा रहा है। तेल की आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Strategic Petroleum Reserves भी बनाए गए हैं।

साथियो,

अंग्रेजी में दो कहावतें हैं। पहली है, “If you want peace, prepare for war.” यानी युद्ध न हो, इसके लिए आवश्यक है कि युद्ध की तैयारी पूरी हो। और दूसरी कहावत है, “The more you sweat in peace, the less you bleed in war.” यानी, शांति काल में की गई तैयारी युद्ध के समय होने वाली हानि को सीमित कर देती है।

हमने दोनों बातों को ध्यान में रखा है। Defence के क्षेत्र  में हमारी तैयारी पूरी भी है और मजबूत भी है। हम बदलते समय के साथ लगातार अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियो,

2026-27 में Defence Ministry को ₹7.85 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा allocation मिला है। जबकि साल 2013-14 में यह करीब ₹2.53 लाख करोड़ था।

हमारी सरकार ने डिफेंस बजट में capital allocation में भी अच्छी खासी वृद्धि की है। इतना ही नहीं आज capital acquisition budget का लगभग 75 प्रतिशत, ₹1.39 लाख करोड़—domestic defence industry से procurement के लिए earmark किया गया है।

इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ है, जब हमारी सेना modernise होगी, तो भारत की factories भी modernise होंगी। जब हमारे सैनिकों के हाथों में नए weapons आएंगे, तो भारत के engineers को नए अवसर मिलेंगे।

जब हमारे armed forces के लिए नया platform बनेगा, तो उसके पीछे हजारों MSMEs की supply chain विकसित होगी।

साथियों, आज का युद्ध केवल सैनिक बनाम सैनिक नहीं है। आज का युद्ध multi-domain है। Land, Air, Sea, Space, Cyber, Electronic warfare, Information warfare, AI, Drones, Autonomous systems और precision weapons.

हम समझ सकते हैं कि भविष्य में सुरक्षा का क्षेत्र और युद्ध का मैदान technology-driven होगा। जो देश technology में आगे होगा, वह battlefield में advantage में होगा। इसीलिए हमने भारत की defence strategy को future-ready बनाने पर जोर दिया है। आज हमारा focus केवल आज के weapons पर नहीं है।

हम आने वाले 10, 20 और 25 वर्षों के warfare को ध्यान में रखकर capability बना रहे हैं। हम चाहते हैं कि भारत केवल technology को import न करे। भारत technology define करे। भारत केवल दूसरे देशों की military technology का उपयोग न करे। भारत अपनी military technology बनाए।

साथियों, रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए, हमारी सेनाओं द्वारा, 5 positive Indigenization lists जारी की गई हैं। इनमें शामिल defence equipment, weapon system और platforms की कुल संख्या 509 है। इनका production, अब, अनिवार्य रूप से भारत की धरती पर किया जा रहा है।

ठीक इसी प्रकार, हमारी DPSUs द्वारा भी अब तक 6  लिस्ट  जारी की गई हैं। यह छठी लिस्ट जिसमें 405 items शामिल थे, वह पिछले महीने ही जारी की गई है।  इनमें शामिल strategically-important LRUs, यानि Line Replacement Units, Sub-systems, Spares & Components समेत कुल items की संख्या 5417 हैं। इनमें से करीब 3300 आइटम्स को indigenised कर चुके हैं।

हमारे DPSUs strategically important components और systems के indigenisation की दिशा में बहुत अच्छा काम कर रहे है। हमारी philosophy बहुत simple है, जो भारत में बन सकता है, उसे बाहर से क्यों खरीदें? और जो अभी नहीं बन सकता, वह भारत में क्यों नहीं बन सकता, इस पर काम करें। यही आत्मनिर्भरता है।

यह आत्मनिर्भरता केवल missile या बड़े जहाज़ बनाने तक सीमित नहीं रहने वाली। यह आत्मनिर्भरता एक स्क्रू से लेकर sophisticated electronics तक है। एक component से लेकर complete weapon system तक है। और यही वह approach है जो भारत को strategic autonomy की ओर ले जा रही है।

आज भारत में एयरोप्लेन के इंजन से लेकर ड्रोन इंजन तक बनाने के लिए, बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। सिर्फ़ fifth generation fighter जेट्स ही नहीं भारत sixth generation फाइटर जेट बनाने की दिशा में काम कर रहा है। मैं जानता हूँ, इस राह में कई समस्याएं आयेंगी, मगर हमारा संकल्प अटूट है। अगले दस वर्षों में भारत डिफेंस मैनुफैक्चरिंग में एक बड़ी छलाँग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

साथियों, आज दुनिया भारत को केवल defence importer के रूप में नहीं देखती। 2025-26 में भारत का defence export ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जबकि 2013-14 में यही आंकड़ा केवल ₹686 करोड़ था। यानि बारह वर्षों में defence exports में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

हमने पिछले साल यह टारगेट दिया था कि हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट तीस हज़ार करोड़ रुपये हो और वह हमने बहुत ही शानदार तरीके से हासिल किया है। अब हमारा लक्ष्य है कि साल 2029 तक भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पचास हज़ार करोड़ रुपए पहुँच जाये। हम मानते हैं कि यह होकर रहेगा।

आज भारतीय defence products दुनिया के 100 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। इन देशों में एशिया और अफ्रीका के साथ-साथ लैटिन अमेरिका और यूरोप के देश भी शामिल हैं।

यह केवल एक economic statistic नहीं है। यह भारत की बदलती हुई global image है। क्योंकि जब कोई देश भारत में बना defence product खरीदता है, तो वह केवल एक missile, radar, ammunition या platform नहीं खरीदता। वह भारत की, technology पर भरोसा करता है, quality पर भरोसा करता है, delivery capability पर भरोसा करता है और मैं कहूँगा कि वह भारत पर भरोसा करता है।

इसीलिए मैं कहता हूं, Made in India अब केवल एक manufacturing label नहीं है। यह धीरे-धीरे, Trust in India का symbol बन रहा है। अब भारत की factory में केवल हथियार नहीं, भारत के प्रति भरोसा बनता है।

आज मैं यह बात पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि अब भारत का Approach केवल युद्ध के लिए तैयार रहने का ही नहीं है। हमारी कोशिश ऐसी Defence Capability और Ecosystem बनाने की है जो युद्ध को रोकने के लिए Credible Deterrence भी साबित हों। और यदि चुनौती सामने आए तो उसका प्रभावी ढंग से जवाब देने में सक्षम भी हो।

साथियों,

2014 से पहले Defence के क्षेत्र में Private Sector को बहुत सीमित अवसर मिलते थे। इससे देश में मौजूद प्रतिभा और क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं हो पाया। बहुत Potential भी Waste हुआ। और Opportunities भी Miss हुई।

2014 से पहले Defence Sector में Private Sector के लिए बहुत छोटी Window खुली हुई थी। लेकिन आज हमारी सरकार ने Private Companies, Start-ups और Research Institutions के लिए Defence Sector के दरवाजे खोल दिए हैं। इसका परिणाम भी साफ दिखाई दे रहा है।

आप बस कल्पना कीजिए कि 2013–14 में जितना हमारा Total Indigenous Defence Production था, लगभग उतना Production तो आज सिर्फ Private Sector कर रहा है। (2013-14 में Indigenous Defence Production 43,746 करोड़ रुपये था। आज सिर्फ Private Sector 42,000 करोड़ रुपये का Defence Production कर रहा है।)

साथियों, भारत में आज defence manufacturing का ecosystem पूरी तरह बदल चुका है। DPSUs हैं। Private industries हैं। 16000 से अधिक MSMEs हैं। Startups हैं। Universities हैं। Research institutions हैं। Individual innovators हैं। यह नया defence industrial complex केवल दिल्ली या किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश से तमिलनाडु तक। गुजरात से महाराष्ट्र तक। कर्नाटक से तेलंगाना तक। देश के अलग-अलग हिस्सों में defence manufacturing का नया network बन रहा है।

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के Defence Industrial Corridors में अब तक करीब ₹70,000 करोड़ के investment proposals आये  हैं और लगभग ₹10,000 करोड़ निवेश हो चुका है।

रक्षा मंत्रालय ने ‘SRIJAN’ पोर्टल के माध्यम से रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सेनाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले आयातित उपकरणों की सूची उद्योगों के लिए उपलब्ध कराई है। इस सूची में करीब 33000  ऐसी चीज़ें हैं जिनका import substitution हमारा लक्ष्य है। आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि 15700 आइटम्स का अब तक indigenisation हो चुका है।

‘SRIJAN DEEP’ पोर्टल के माध्यम से चालीस हजार से अधिक Manufacturers & Sellers के साथ-साथ लाखों उत्पादों का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है। इससे भारत की डिफेन्स सप्लाइ चेन पहले से कहीं अधिक मजबूत और संगठित बनी है।

साथियों, एक और महत्वपूर्ण रिफार्म हमने किया है, जिसकी चर्चा देश भर में करने की आवश्यकता है। वह है, OFBs का corporatisation. हमने देखा, कि जो हमारी Ordnance factories हैं, वो उस पुरानी व्यवस्था में भी अच्छा काम कर रही थीं, लेकिन नए समय को देखते हुए, नई जरूरतों को देखते हुए, हमने Ordnance factories का Corporatisation किया गया, ताकि वह और ज्यादा technology friendly बन सकें, वह और ज्यादा output दे सकें, उनकी accountability बढ़ सके। और ऐसा नहीं है, कि हमने बिना सोचे-समझे उनका Corporatisation किया। हमने उनके employees के हितों का भी ध्यान रखा, और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी ध्यान रखा।

नतीजा हमारे सामने है आज Ordnance Factories अपने नए स्वरूप में बहुत ही अच्छा काम कर रही हैं और loss making entities की जगह profit making units बन चुकी हैं। अभी पिछले सप्ताह ही मैंने सभी 16 DPSUs का review किया है, और आपको खुशी होगी कि आज एक भी DPSU घाटे में नहीं है। सभी DPSUs नई ऊर्जा के साथ काम कर रही है। इतना ही नहीं हमारी DPSUs रिसर्च और डेवलपमेंट पर अपना खर्च लगातार बढ़ा रही है और Exports के नए अवसर तलाश रही है।

साथियों, मैं विशेष रूप से भारत के युवाओं की बात करना चाहता हूं। हमने युवाओं से कहा, आप केवल नौकरी खोजने वाले Job Seeker मत बनिए। आप job creator बनिए। लेकिन defence sector में हमने उससे भी आगे की बात कही, आप Nation’s Security के technology partner बनिए। iDEX इसी सोच का परिणाम है। iDEX और iDEX – Prime जैसी योजनाओं के माध्यम से हम Defence Innovations को बढ़ावा दे रहे है।

और अब ADITI जैसे programmes के माध्यम से advanced technologies और innovation को support किया जा रहा है।

मार्च 2026 तक iDEX के माध्यम से 676 startups और innovators को engage किया गया और 551 contracts sign किए गए। आज भारत के युवा, AI पर काम कर रहे हैं।

Drones बना रहे हैं, Robotics पर काम कर रहे हैं, Quantum technologies विकसित कर रहे हैं। Cyber security solutions बना रहे हैं। Autonomous systems पर काम कर रहे हैं। यानि  भारत का युवा अब केवल भविष्य की नौकरी के लिए तैयार नहीं हो रहा। वह भारत के भविष्य के युद्ध के लिए technology तैयार कर रहा है।

हमारा एकदम clear target है कि हमारे स्टार्टअप्स और एमएसएमई के हाथों को मज़बूती दी जाए। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने 2400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी स्टार्टअप्स/एमएसएमई से करने की मंजूरी दी है, और 1500 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स new technology के development के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

साल 2018 में जहाँ रक्षा क्षेत्र में कुछ दर्जन स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या दो हजार से अधिक हो चुकी है। सैकड़ों स्टार्टअप्स को रक्षा मंत्रालय द्वारा Challenges दिए गए है, उन्हें आर्थिक सहायता मिली, प्रोटोटाइप बने और अनेक तकनीकों की खरीद के लिए approvals भी दिए गए है।

साथियों, यदि मैं DRDO की बात करूं तो आज डीआरडीओ केवल Defence Research & Development करने वाला संस्थान नहीं है। वह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाला National Innovation Platform बन चुका है।

देशभर में Centre of Excellence स्थापित किए गए हैं। Young Scientists Labs का विस्तार किया गया है। हमारा प्रयास है कि DRDO  का पूरा फोकस रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर रहे।

इसलिए अभी पिछले महीने ही हमने निर्णय किया है कि संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योगों को भी transfer की जाये। इस निर्णय के बाद निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाली भारतीय प्राइवेट कंपनियां भी इन मिसाइल सिस्टम्स का उत्पादन कर सकेंगी। इस फैसले से भारतीय सेनाओं की तैयारी और अधिक मजबूत होगी और मिसाइल्स की टाइमली डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी।

साथियों, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत को केवल आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य नहीं दिया। उन्होंने भारत को अपने सामर्थ्य पर विश्वास करना सिखाया है। यह बदलाव defence sector तक सीमित नहीं है।

Space में हमने देखा। Digital technology में हमने देखा। Semiconductor में हम देख रहे हैं। मैनुफैक्चरिंग  में हमने देखा। Startups में हमने देखा।

पहले प्रश्न पूछा जाता था,  क्या भारत यह बना सकता है? आज सवाल बदल गया है, भारत इसे कितनी जल्दी बना सकता है?

पहले पूछा जाता था, क्या भारतीय company global competition कर सकती है? आज पूछा जा रहा है, भारतीय company दुनिया में कितनी बड़ी बन सकती है? यही वह बदलाव जो भारत की सुरक्षा को मज़बूत करने का काम कर रही है।

साथियों, मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं। भारत शांति में विश्वास करता है। भारत युद्ध नहीं चाहता। भारत किसी देश की जमीन पर कब्जा नहीं चाहता। भारत किसी देश को धमकाना नहीं चाहता। लेकिन, शांति और कमजोरी में अंतर होता है। भारत शांति चाहता है। लेकिन भारत अपनी सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करेगा।

भारत डायलॉग में विश्वास रखता है। लेकिन यदि कोई देश भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद को हवा देगा तो डायलॉग की गुंजाइश ही ख़त्म हो जाती है। अभी SCO की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कहा है कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं, आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगा कि आतंकवाद किसी के लिए स्ट्रेटेजिक एसेट नहीं हो सकता। जब तक हमारा पड़ोसी देश आतंकवाद की state policy पर कायम रहेगा, भारत भी आतंकवाद के खिलाफ हर तरह के strikes के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

साथियों, भारत cooperation चाहता है। लेकिन national interest की कीमत पर नहीं। भारत global stability चाहता है। लेकिन अपनी strategic autonomy छोड़कर नहीं।

हमारी policy बहुत स्पष्ट है, भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

साथियो,

राजनीतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक Term बहुत Famous है। आपमें से बहुत से लोग इसके बारे में जानते होंगे। वह Term है Thucydides Trap । Thucydides Trap का अर्थ यह होता है कि जब किसी देश का उदय होता है, तो अक्सर उसका टकराव पहले से स्थापित शक्तिशाली देश से होता है। यानी Revisionist Power और Status Quoist Power के बीच संघर्ष लगभग हमेशा होता ही है।

लेकिन यह बात संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है। हमें ऐसी किसी भी Binary में नहीं फंसना चाहिए।

भारत के संदर्भ में तो यह बात बिल्कुल भी फिट नहीं बैठती। भारत न Status Quoist Power है, न Revisionist Power है। मैं मानता हूँ कि हम एक Civilisational Power हैं।

हमारे उदय का उद्देश्य किसी दूसरे देश को पीछे छोड़ने या मौजूदा व्यवस्था को तोड़ने के लिए नहीं है। बल्कि सामूहिक और समावेशी विकास है। हमारा लक्ष्य है—Rise without Rupture, Positive Change without any Conflict.

हम एक ऐसी दुनिया चाहते हैं, जहाँ भारत आगे बढ़े और हमारे साथ-साथ पूरी दुनिया भी आगे बढ़े।

कई लोग यह पूछ सकते हैं कि इस बात का क्या प्रमाण है? मैं इस बात के कई प्रमाण दे सकता हूँ।

पहला प्रमाण हमारी लोकतांत्रिक और सभ्यतागत सोच है। भारत में लोकतंत्र की जड़ें 2000 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। यानी हमारी सोच में यह बात बहुत पुरानी है कि निर्णय संवाद से हों, सबकी बात सुनी जाए और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।

दूसरा प्रमाण हमारे मूल्य हैं। भारत ही अकेला वो देश हैं जहां कहा गया है “वसुधैव कुटुम्बकम्” यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। यही कारण है कि भारत दुनिया को Zero-Sum Game की नज़र से नहीं देखता। हम यह नहीं मानते कि अगर भारत आगे बढ़ेगा तो किसी और को पीछे जाना पड़ेगा। हमारी सोच “सबका साथ, सबका विकास” की है।

तीसरा प्रमाण हमारे strategic vision के पाँच स्तंभ हैं। ये 5 स्तम्भ हैं— सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा और संस्कृति।

भारत दुनिया के साथ सम्मानजनक संबंध चाहता है। संवाद के रास्ते से हर समस्या का समाधान चाहता है। सभी के लिए साझी समृद्धि चाहता है। हम Collective Security के मूल्य में विश्वास रखते हैं। और हमारी संस्कृति एवं सभ्यता के मूल्यों में पूरी मानवता के कल्याण का भाव निहित है।

जैसे आप देखिए, वैक्सीन मैत्री के तहत, हमने 100 से ज्यादा देशों को 30 करोड़ से अधिक कोविड वैक्सीन भेजी हैं। आज भारत की Image पूरी दुनिया में विश्व बंधु के रूप में स्थापित हो चुकी है।

भारत आर्थिक प्रगति और सिद्धांत-आधारित नीति के साथ बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक Responsible Power के रूप में उभरा है। आज Indo-Pacific और Global South के देश भारत को एक Trusted Partner के रूप में देख रहे हैं।

भारत Global South के हितों को Voice of Global South Summits जैसे मंचों के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है। आवश्यकता के समय, Global South के देशों के साथ खड़ा होना और उन्हें हर संभव सहायता एवं सहयोग देना, भारत की Global South के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

We Walk the Talk. चाहें दवाइयाँ उपलब्ध कराना हो या Digital Payments को बढ़ावा देना, भारत अपनी Expertise, Experiences और Resources को Global South के देशों के साथ साझा कर रहा है।

हमारी सोच है कि Competition के साथ Cooperation भी हो।  यानी प्रतिस्पर्धा में भी सहयोग हो। शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी से हो। और विकास में सभी की साझेदारी हो। इसलिए यह कहा जा सकता है कि भारत का उदय सिर्फ भारत के हित में ही नहीं, बल्कि सभी के हित में है।

देवियो और सज्जनो,

आज जब हम National Security और Defence की बात करते हैं, तो हम Warfare की बात करते हैं। Technology की बात करते हैं। Border पर Infrastructure की बात करते हैं। अपने सैनिकों को हर तरीके से सक्षम बनाने की बात करते हैं।

लेकिन इन सभी के साथ एक और महत्वपूर्ण बात है जो National Security और Defence के लिए जरूरी है। वह है हमारी Unity यानी एकता।

हमें यह याद रखना चाहिए कि जब-जब हमारी एकता क्षीण हुई है, तब-तब हमारी आज़ादी खतरे में आई है। तब-तब भारत का Defence कमजोर हुआ है।

इस संबंध में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी ने अपनी पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ में बहुत सुंदर बात लिखी है। उन्होंने लिखा है कि आदमी पहले कमजोर होता है, और पराजय उसके बाद होती है। उसी तरह देश की एकता पहले टूटती है और उसके बाद दासता आती है। अगर, भारत में एकता होती, तो किसकी मजाल थी कि भारत को ग़ुलाम बनाता?

उन्होंने लिखा है कि जब हमारी एकता खिड़की के रास्ते से बाहर गयी, तब आज़ादी को तो मुख्य द्वार से बाहर जाना ही था।

यानी यह कहा जा सकता है कि देश की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात हमारे सैनिकों की ही जिम्मेदारी नहीं है। यह हम सभी का सामूहिक दायित्व भी है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि धर्म, जाति, पंथ, मजहब, भाषा, क्षेत्र या अन्य किसी आधार पर समाज में वैमनस्य न हो। नागरिकों में आपसी विश्वास हो। और सभी राष्ट्रहित को व्यक्तिगत तथा संकीर्ण हितों से ऊपर रखें।

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं NDTV की पूरी टीम को इस Defence Conclave के आयोजन के लिए एक बार फिर बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिन्द! जय भारत! धन्यवाद।