Text of RM’s speech at the ‘News 18 DefCon 2026’ in New Delhi.
देवियो और सज्जनो,
सबसे पहले मैं Network18 और News18 India को ‘DEFCON 2026’ के आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। मुझे बताया गया है कि यह Platform, Defence Sector से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर Constructive Dialogue Initiate करने का काम कर रहा है।
मैं मानता हूँ कि ऐसे Discussions और Dialogues से भारत की Security और Defence Preparedness को लेकर नए Ideas सामने आते हैं। और भारत की सुरक्षा से जुड़ी Priorities को Streamline करने में भी मदद मिलती है। इसलिए मैं मानता हूँ कि यह एक सराहनीय प्रयास है।
साथियो,
यहाँ आज Defence Preparedness, National Security Priorities, Self-reliant और Future-ready Armed Forces जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है। मैं मानता हूँ कि ये सभी विषय आपस में Closely Linked हैं।
अगर हमें राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, तो हमें आज की चुनौतियों के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा। इसके लिए ज़रूरी है कि हम यह स्पष्ट रूप से समझें कि आज Security-Related Challenges का Extent और Nature किस तरह बदल रहा है?
पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा को देश की सीमाओं की सुरक्षा के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन 21वीं शताब्दी में राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा बहुत बढ़ चुका है।
अब चुनौती केवल सीमा पर दुश्मनों द्वारा Arms and Artillery के उपयोग से ही नहीं आती है। आज राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
Drones और Unmanned Aerial Vehicles के जरिए हमारे देश को निशाना बनाया जा सकता है। Cyber Attacks के जरिए हमारे Critical Infrastructure और Defence Systems को प्रभावित किया जा सकता है। Lone Wolf Attacks के जरिए अचानक से खतरा पैदा किया जा सकता है। और Smear Campaigns या Disinformation के जरिए समाज में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा सकती है।
National Security, Economic और Energy Security से भी जुड़ी हुई है। इसलिए Hostile Actors हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं। Energy Supply Chains को Disrupt करने की कोशिश कर सकते हैं।
यही कारण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल Geographical Boundaries को सुरक्षित करने के संदर्भ में देखना ‘Perimeter Fallacy’.
आज राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा बहुत बढ़ चुका है। Borders, Fixed हैं लेकिन Threats की Boundary बहुत Fluid हो चुकी है। इसलिए आज राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए हमें Holistic Approach अपनाना होगा।
और इसी सोच के साथ, हम लगातार अपनी Defence Preparedness बढ़ाने और अपनी Armed Forces को Future-Ready बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
साथियों,
भारत की Strategic Thinking में कभी भी Wisdom की कमी नहीं रही है। हम Idealism के साथ Realism की भी अच्छी समझ रखते थे।
प्राचीन भारत में आचार्य चाणक्य और सम्राट अशोक ने शासन और राज्य-व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण आयाम हमारे सामने रखे।
आचार्य चाणक्य ने Realism, पर आधारित Power, Intelligence, Alliances और Deterrence के महत्व को समझाया। वहीं सम्राट अशोक ने यह दिखाया कि शक्ति का अंतिम उद्देश्य केवल विस्तार नहीं, बल्कि शांति और लोगों का कल्याण सुनिश्चित करना भी होता है।
यानी भारत की परंपरा में शक्ति और शांति का विचार एक-दूसरे के विरोध में नहीं रहा है।
लेकिन समस्या तब पैदा हुई जब, आजादी के बाद भारत का नेतृत्व करने वाले कुछ Leaders ने, दोनों को साथ लेकर चलने के बजाय, शक्ति और नैतिकता को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में देखा।
देवियो और सज्जनो,
भारत पर कई युद्ध थोपे गए। जिसे हमारी सेनाओं ने बहादुरी से लड़ा। इन सभी Conflicts ने यह समझ दी कि Wishful Thinking के आधार पर सुरक्षा नीति नहीं बनाई जा सकती। एक अच्छी सुरक्षा नीति के लिए Ground Reality और National Interest को ध्यान में रखना जरूरी है।
Soft Power, Hard Power का पूरक हो सकता है, लेकिन उसका विकल्प नहीं हो सकता। Diplomacy बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन Diplomacy को बल तब मिलता है, जब उसके पीछे Capability हो।
1960 के शुरुआती वर्षों में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वयं स्वीकार किया था कि हम Reality से Out of Touch थे और अपने ही बनाए एक Artificial Atmosphere में रह रहे थे।
लेकिन बाद में भी, भारत का नेतृत्व करने वाले बहुत से Leaders ने इससे सीख नहीं ली। और Strategy में बदलाव नहीं किया। हमारे Security और Defence Policy में एक प्रकार का ‘False Consensus Effect’ दिखाई देता था।
इसका अर्थ है कि लंबे समय तक भारत का नेतृत्व करने वाले कुछ लोग यह मान कर चल रहे थे कि भारत की तरह बाक़ी सब भी शांति के पक्षधर हैं।
लेकिन आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की इस सोच में बदलाव आया है। हमने यह साफ कर दिया है कि हमारे पास ‘Power of Argument’ भी है और ‘Argument of Power’ भी है; जिसे जो भाषा समझ आए, उसी भाषा का उपयोग हम करेंगे।
आज हम Diplomacy के माध्यम से, विश्व भर में शांति स्थापित करने के लिए भी काम कर रहे हैं। तो साथ में अपनी Defence और Strategic Capability को भी हर संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार कर रहे हैं।
हम Democracy और Diplomacy के माध्यम से समाधान के पक्षधर हैं। लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए Decisive Action भी ले सकते हैं।
जैसे Surgical Strikes, Balakot Air Strike और Operation Sindoor ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है।
देवियों और सज्जनों
मैं यह मानता हूँ कि बिना Diplomacy के सैन्य तैयारी Confrontation और Security Dilemma पैदा कर सकती है। लेकिन बिना सामर्थ्य के, सिर्फ Diplomacy के आधार पर आगे बढ़ना कमजोरी की निशानी माना जाता है और National Security के लिए घातक भी है। इसलिए दोनों का संतुलन जरूरी है।
देवियो और सज्जनो,
पिछले 12 वर्षों में, जहां एक तरफ़ हमने दुनिया भर के देशों के साथ Dialogue और Diplomacy बढ़ाई है। वहीं दूसरी ओर Defence के क्षेत्र में Capability बढ़ाने के लिए भी लगातार काम किया है। Strategic Autonomy बढ़ाने की दिशा में कार्य हुआ है। और Defence के स्वदेशीकरण और National Security के सशक्तिकरण का भी कार्य हुआ है।
मैं आपको इसके कुछ उदाहरण देता हूँ।
हमने Diplomacy के माध्यम से Global Challenges के समाधान के लिए Consensus बनाने का काम किया है। आज हम QUAD के माध्यम से Free, Open और Rules-based Indo-Pacific बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
I2U2 Group (I2U2 यानी India, Israel, UAE, और USA) के माध्यम से भारत ने इज़राइल, UAE और USA के साथ नए क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया है। BIMSTEC, BRICS और SCO जैसी Multilateral Organisations में भारत की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है।
यानी भारत ने Strategic Partnerships को मजबूत किया है, सहयोग के नए मंच बनाए हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी Diplomatic Reach को भी बढ़ाया है।
दूसरी ओर हमने Operation Sindoor से यह भी स्पष्ट किया है कि भारत अब Nuclear Blackmail नहीं सहेगा। Terrorism और Talks साथ नहीं चलेंगे। Terrorism और Trade साथ नहीं चलेंगे। हमने यह भी संदेश दिया कि कोई भी सीमा; हमें Terrorist Infrastructure को समाप्त करने से रोक नहीं पाएगी। Terrorists और उनके Sponsors के बीच में अब कोई अंतर नहीं किया जाएगा। भारत ने Indus Waters Treaty को Suspend करके यह भी साफ कर दिया है कि Blood और Water साथ नहीं बहेंगे।
यह भी कहा जा सकता है कि अब हमारी Approach ‘Strategic Containment’ और ‘Deterrence by Denial’ से आगे बढ़कर ‘Deterrence by Punishment’ की ओर बढ़ी है।
साथियो,
आप सभी को पता है कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया था। इसको अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के एक बड़े विशेषज्ञ ने “Crossing the Rubicon” की संज्ञा दी है। यानी एक ऐसा फैसला जिसके बाद हमारी National Security और Foreign Policy की दिशा बिल्कुल बदल गई। इसने दुनिया को यह भी साफ कर दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। कोई दबाव नहीं सहेगा।
22 अप्रैल को यानी पहलगाम हमले के दिन पाकिस्तान ने वह लक्ष्मण रेखा पार कर दी, जिसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से अपनी नई नीति को स्पष्ट कर दिया।
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पाकिस्तान की धरती से होने वाला हर आतंकी हमला, भारत के खिलाफ ‘Act of War’ माना जाएगा और उसी के अनुरूप उसका जवाब दिया जाएगा।
देवियो और सज्जनो,
चाणक्य ने तीन प्रकार की शक्तियों का उल्लेख किया है। उनमें से एक है ‘प्रभाव शक्ति’ या Physical Power. उनका मानना था कि किसी भी राज्य की Physical Power के दो आधार होते हैं; एक मजबूत अर्थव्यवस्था और एक मजबूत सेना। आज भी यह बात उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी लगभग 2400 वर्ष पहले थी।
जब अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, तो National Security और Defence Preparedness के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं। और जब देश सुरक्षित होता है, तभी विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां मिलती हैं।
यानी यह कहा जा सकता है कि National Security और National Development एक-दूसरे के पूरक हैं।
इसलिए पिछले 12 वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा को देखना भी बहुत महत्वपूर्ण है। आज भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। आज, भारत दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ, हमने Defence पर भी लगातार Investment बढ़ाया है। 2013–14 में भारत का रक्षा बजट लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये था। जो आज 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यानी हमारा रक्षा बजट लगभग तीन गुना बढ़ा है।
आज एक भी DPSU घाटे में नहीं है। पिछले एक दशक में Indigenous Defence Production में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। हमारा Defence Production लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सेनाओं का Modernisation किया गया है। Ordnance Factories का कायाकल्प किया गया है।
देवियो और सज्जनो,
भारत एक शांतिप्रिय देश है, जिसने कभी भी युद्ध का समर्थन नहीं किया है। लेकिन भारत वो देश भी है, जिसने न्याय और धर्म की स्थापना के लिए महाभारत भी लड़ा।
हम युद्ध के पक्षधर नहीं हैं पर अपनी अखंडता, संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए हमें ख़ुद को इस दिशा में हमेशा तैयार रखना होगा।
देवियो और सज्जनो,
किसी भी युद्ध में Three ‘T’ बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। Three T यानी: Terrain , Technology और Thinking.
Modern Warfare केवल Land, Air और Sea तक सीमित नहीं है। Cyber और Space भी युद्ध के नए क्षेत्र बन चुके हैं। बदलते Terrain की इस चुनौती से निपटने के लिए जरूरी है कि Technology के Development पर ध्यान दिया जाए।
रुस्तम, घातक और नागास्त्र जैसे Indigenous Unmanned Aerial Vehicles हमने विकसित किए हैं। Operation Sindoor के दौरान Drone Warfare में हमारी Capabilities दुनिया ने देखी हैं।
आपको पता ही होगा कि हमें ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ भी शुरू किया है जो भविष्य की युद्ध चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है।
आज, हम AI-based Indigenous Defence Technologies पर काम कर रहे हैं। AI का इस्तेमाल Threat Prediction, Early Warning और Faster Decision-Making के लिए किया जा रहा है। Bharat Electronics Limited (BEL) में इस वर्ष ही मैंने Centre of Excellence for Artificial Intelligence का Inauguration किया था।
यह तो हुई Terrain और Technology की बात। आज हमारी Thinking में भी बहुत बदलाव आया है। आज हमने अपने सैनिकों को खुली छूट दी है। Operational Freedom दी है। आज हमारी सेनाएँ जानती हैं कि Political Leadership दृढ़ और निर्णायक है और हर स्थिति में उनके साथ खड़ी है।
हमने अपने सैनिकों की Operational Capabilities बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि उनका Welfare सुनिश्चित करने का भी काम किया है। Veterans और उनके परिवारों के Welfare पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जैसे ECHS सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
“Right Pension, Right Pensioner, Right Time” के उद्देश्य से SPARSH Platform की शुरुआत की गई है। वर्षों से अटका ‘One Rank One Pension’ की नीति भी लागू हो चुकी है।
हमारे वीर जवानों के साहस, बलिदान और सेवा का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके जीवन में सुविधा सुनिश्चित करके भी होना चाहिए। इसी भावना के साथ, इस महीने ही ‘सेना मेडल’ से सम्मानित सभी जवानों और उनके परिवार के कुछ सदस्यों को Lifetime Free Train Travel Facility प्रदान की गई है।
साथियो,
मैं मानता हूँ कि National Security Is ‘Truly Resilient’ When It Is ‘Self-Reliant’. यानी राष्ट्रीय सुरक्षा वास्तव में तब ही मजबूत होती है, जब वह आत्मनिर्भर हो।
इसीलिए आज Design in India, Develop in India और Manufacture in India के Vision के साथ काम किया जा रहा है।
पिछले 12 वर्षों में Defence Research and Development Allocation में 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। 2014–15 में यह Allocation लगभग 13,700 करोड़ रुपये था। यह आज 29,000 करोड़ से अधिक हो गया है।
2022–23 से Defence R&D Budget का 25 प्रतिशत हिस्सा Industry, Start-ups और Academia के लिए खोला गया है, ताकि वे भी Defence Innovation में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें।
रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में Licensing Rules सरल किए हैं। Defence Acquisition Procedure (DAP) के माध्यम से स्वदेशी सिस्टम्स को प्राथमिकता दी गई है।
अभी तक 10 Positive Indigenisation Lists में 5,521 Items शामिल किए जा चुके हैं। यानी जिन रक्षा उपकरणों और Components के लिए हम Import पर निर्भर थे, अब उन्हें देश में ही बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
अभी पिछले महीने ही हमने यह निर्णय लिया है कि DRDO द्वारा विकसित Conventional Missile Systems की Technology, Indian Industries को भी Transfer की जाएगी।
Research को बढ़ावा देने के लिए DRDO ने 15 Industry Academia Centres of Excellence स्थापित किए हैं।
बहुत ही कम देशों के पास Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle (MIRV) जैसी आधुनिक तकनीक है। भारत ने इस तकनीक से लैस, Agni-5 Missile का परीक्षण भी कर लिया है।
हम Domestic Supply Chain को मजबूत करने पर भी काम कर रहे हैं। जैसे Srijan Defence Equipment Empowerment Platform के जरिए देश के Defence Manufacturers, MSMEs और Vendors को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इस Platform पर अब तक 41,000 से अधिक Vendors और 2.7 लाख से अधिक Products, लिस्ट किए जा चुके हैं।
हमने देश के अलग-अलग हिस्सों में Defence Manufacturing को बढ़ावा देने के लिए Defence Industrial Corridors भी विकसित किए हैं।
हमने केवल बड़े Defence Manufacturers पर निर्भर रहने के बजाय Start-ups और MSMEs को भी Defence Innovation से जोड़ा है।
आज, स्वदेशी Dhruv-NG हेलीकॉप्टर का ONGC के Offshore Operations के लिए उपयोग किया जा रहा है। इसमें लगे स्वदेशी ‘शक्ति इंजन’ का DGCA सर्टिफिकेशन भी हो चुका है। यह भी भारत की एयरोस्पेस क्षमता में आत्मनिर्भरता का एक बड़ा प्रमाण है।
ऐसे बहुत से आँकड़े और उदाहरण मैं दे सकता हूँ। लेकिन मैं कहता हूँ कि Defence में Self-reliant India की ताकत देखनी है, तो आसमान में देखिए जहाँ हमारे Pilots ‘तेजस’ Aircraft और ‘प्रचंड’ Helicopter के साथ भारत की शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं।
समुद्र की ओर देखिए, जहाँ भारत का पहला Indigenous Aircraft Carrier, INS Vikrant, हमारी Maritime Security को मजबूत कर रहा है।
जमीन पर देखिए जहाँ हमारी थल सेना, अर्जुन Tanks, और भारत में बनी First Long Range Artillery Gun धनुष के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है।
हमारी बढ़ती Technological Capability देखनी है, तो Akash Missile System और BrahMos जैसे स्वदेशी Platforms को देखिए। भारत में बनी एशिया की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर फैक्ट्री देखिए। Fifth-Generation Fighter Aircraft और 6th-Generation Fighter Jets बनाने की दिशा में आगे बढ़ता भारत देखिए।
साथियो,
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सारी बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं। पर आप मैं आपको एक बात का विश्वास दिलाता हूँ कि आज हमारा Defence System वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसे भविष्य की सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
भारत के साथ किसी भी तरह का Misadventure करने की सोचने वालों को, अब ऐसा जवाब मिलेगा। और यह बात मैं नहीं बोल रहा हूँ, बल्कि भारत के नौजवानों, सैनिकों और वैज्ञानिकों के सामर्थ्य में मेरा विश्वास बोल रहा हैं।
जय हिन्द, जय भारत, धन्यवाद।