भविष्य में कौन से skills की माँग होगी, इसकी पहचान अभी करनी जरूरी है: रक्षा मंत्री

Text of RM’s speech at the PM-SETU Industry Conclave in Lucknow.

सबसे पहले, Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs, यानि PM-SETU Conclave के इस भव्य आयोजन के लिए, मैं आयोजकों को बधाई देता हूँ। यह Conclave, भारत के युवाओं, तथा भारत के औद्योगिक भविष्य को दिशा देने वाला, एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

मैं उत्तर प्रदेश सरकार, और Ministry of Skill Development and Entrepreneurship का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। आपने Defence, Academia और Industries को एक मंच पर लाकर, यह सिद्ध कर दिया है, कि इस तरह के integrated प्रयास, भारत की जरूरत हैं।

मुझे यह जानकर भी बड़ी खुशी हुई, कि आज National Skill Development Corporation, और Cantonment Board, Lucknow के बीच, एक letter of intent भी exchange हुआ है। इसके तहत हमारे नौजवानों को Armed Forces और uniformed services में करियर के लिए तैयार किया जाएगा। इससे पहले, Project Shaurya के रूप में, जो pilot centre बागपत में स्थापित हुआ था, वहाँ से जो अनुभव हमें हासिल हुए हैं, वो निश्चित रूप से इस प्रयास में भी सहायक सिद्ध होंगे। मुझे पूरा विश्वास है, कि इस collaboration से, भारत को, जिस institutionalized, affordable, और scalable pre-recruitment preparation ecosystem की जरूरत है, वह हमें जरूर मिलेगी। और यह partnership हमारे युवाओं और हमारी सेनाओं के लिए helpful साबित होगा।

साथियों, आज चूँकि इस conclave में Defence sector, Academia और Industries से जुड़े हुए कई लोग बैठे हैं, इसलिए इस अवसर का लाभ उठाते हुए, मैं अपने कुछ विचार आप सबसे साझा करना चाहूँगा। आज हमारा उत्तर प्रदेश, हर sector में विकास के नये आयाम गढ़ रहा है। Gross state domestic product यानी GSDP के आँकड़े इसकी प्रत्यक्ष गवाही देते हैं। जो GSDP वर्ष 2017 में महज 14.5 लाख करोड़ रूपये था, वही वर्ष 2025 में बढ़कर 30 लाख करोड़ रूपये के record आँकड़े को भी पार कर चुका है। उत्तर प्रदेश का export भी लगभग 2017 के 84,000 करोड़ रूपये की तुलना में बढ़कर 2025 में 1 लाख 86 हज़ार करोड़ रूपये हो गया है। उत्तर प्रदेश अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी state economy है।

साथियों, जब भी हम विकसित भारत की बात करते हैं, तो हमारे सामने infrastructure, technology, manufacturing, और investment का vision उभरता है। और स्वाभाविक भी है। ये  चीज़ें किसी भी राष्ट्र के विकसित होने के लक्षण भी हैं। लेकिन मैं इससे इतर, एक और चीज़ की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहूँगा। कोई भी राष्ट्र जब विकसित होता है तो उस देश के भव्य कारखानों के पीछे, modern aircraft के पीछे, हर missile और हर electronic system के पीछे, एक अदृश्य लेकिन सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होता है, और वह है, Skilled Human Resource.

कोई भी राष्ट्र दुनिया की सबसे advanced मशीनें खरीद सकता है, लेकिन जब तक उसके पास उन मशीनों को कुशलता से operate करने, और सुधारने वाले लोग नहीं हैं, जब तक उसके पास Skilled Human Resource नहीं है, तब तक वो राष्ट्र ज़्यादा लंबे समय तक sustain नहीं कर सकता। इसलिए, जब हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, तो हमें यह समझना होगा, कि Skilled Human Capital, अपने आप में एक Critical National Infrastructure है।

हमारे प्रधानमंत्री जी का भी यही vision है, कि हम भारत की demographic strength को demographic dividend में बदलें। PM-SETU भी इसी दिशा में एक सशक्त कदम है। इस योजना के तहत 200 Hub और 800 Spoke के model पर 1,000 Government ITIs का upgradation किया जा रहा है। Modern labs, digital learning, नए जमाने के courses, यह सब कुछ इसमें शामिल है। इन infrastructures के upgradation के साथ-साथ, हमारे युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी क्षमताओं का upgradation इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।

हमने इस पर इसलिए ध्यान दिया है, क्योंकि वर्षों से, हमारी vocational education एक ही method पर चलती आ रही है। पहले training लो, फिर परीक्षा दो, और फिर certificate प्राप्त करो। लेकिन दुनिया अब बदल चुकी है, इसलिए हमारी skilling system को भी बदलना होगा। आज training की शुरुआत वहीं से होनी चाहिए, जहाँ industry की वास्तविक जरूरत है। हमारा curriculum, हमारे equipment, और हमारे instructors, सबको industries की needs को, reflect करना होगा। Apprenticeship के माध्यम से विद्यार्थियों को hands-on exposure देना होगा, और training से रोजगार तक का एक clear road रखना होगा। ताकि हमारा युवा देख सके कि जो skill वह सीख रहा है, उससे वह कैसा career बना सकता है। और यही transformation PM-SETU लाना चाहता है।

भविष्य में जो ITIs होंगे, वो अपने आस-पास की economy से अलग-थलग नहीं रह सकतीं। जो technology nearby industries में use हो रही है, वही हमारे ITIs में पढ़ाई जानी चाहिए। जो equipment shop floor पर मिलेंगे, वही हमारे labs में होने चाहिए। हम ITI को केवल training centre के रूप में नहीं देख रहे हैं। हम उसे भारत के अगले industrial transformation की foundation के रूप में देख रहे हैं।

मैं अपने industry partners से भी कहना चाहूँगा, कि PM-SETU को एक सरकारी योजना या केवल equipment बांटने का अवसर मत मानिए। इसे एक ऐसे अवसर के रूप में देखिए, जहाँ आप अपनी industry के लिए essential skilled workforce को स्वयं तैयार कर सकते हैं। Industries को इन ITIs को shape करने में, actively participate करना होगा।

ऐसा इसलिए जरूरी है, समय लगातार बदल रहा है। इसलिए भारत ने भी अपनी जरूरतें उसी अनुसार बदली हैं। आज हम रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। आज देश अपने defence industrial ecosystem में, एक fundamental transformation देख रहा है। हम indigenous design को प्रोत्साहन दे रहे हैं, domestic manufacturing को मजबूत कर रहे हैं, और private sector तथा MSMEs की भागीदारी बढ़ा रहे हैं। लेकिन यह सब तभी संभव है, जब हमारे पास skilled technical manpower का एक बड़ा और stable pool हो।

एक modern defence manufacturing facility में केवल scientists और engineers ही नहीं चाहिए। वहाँ precision machinists, technicians, quality-control professionals और maintenance experts की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। इसलिए, यदि हमें आत्मनिर्भर Defence Industry बनाना है, तो हमें एक आत्मनिर्भर Talent Pipeline भी बनानी होगी।

उत्तर प्रदेश इस दिशा में एक incredible example बनकर उभर रहा है। उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में, सरकार ने यहां 39 Government ITIs को मिलाकर 8 PM-SETU clusters की पहचान की है।

यहाँ पर चूँकि मंत्रिमंडल के मेरे साथी, श्री जयंत चौधरी जी और उत्तर प्रदेश के Vocational Education and Skill Development Minister श्री कपिल देव अग्रवाल जी भी उपस्थित हैं, तो इस अवसर का लाभ उठाते हुए, मैं आप दोनों से ही कुछ अपील करना चाहता हूँ। मेरा आग्रह है, कि उत्तर प्रदेश के Defence Industrial Corridor की आवश्यकताओं के अनुरूप, कुछ चुनिंदा PM-SETU Hub ITIs को विशेष capabilities के साथ develop करने पर विचार किया जाए। Local industrial strengths के आधार पर, अलग-अलग hubs में precision manufacturing, aerospace, electronics या unmanned systems जैसी expertise develop की जा सकती हैं। इससे Hub-and-Spoke model को strategic गहराई मिलेगी।

मैं विशेष रूप से हमारी DPSUs और प्रमुख defence-sector companies से अपील करना चाहता हूँ, कि वे PM-SETU में आगे आएं। इस partnership को केवल मशीनें देने, या infrastructure support से कहीं ऊपर उठकर देखें।

भविष्य में कौन से skills की माँग होगी, इसकी पहचान अभी करनी जरूरी है। और फिर उससे संबंधित trades, curriculum और equipment के साथ instructors को upgrade करना होगा।

लक्ष्य यह होना चाहिए कि जब एक युवा PM-SETU ITIs में प्रवेश करे, तो उसे पता हो कि industry में कौन सी technology use हो रही है, कौन से skills valued हैं, और classroom से shop floor तक पहुँचने का मार्ग क्या है।

आप Defence industry का ही example ले लीजिये। Defence industry लंबे समय तक traditional equipment के भरोसे रही। आज भी traditional equipment का महत्व कम नहीं हुआ है। लेकिन आज कई तरह की नई चुनौतियां भी आई है। आज Artificial Intelligence, robotics, automation, unmanned systems और drones जैसी technologies, Defence sector में आकार ले रही हैं। सिर्फ Defence Sector ही नहीं, बल्कि कई और sectors में भी नये changes आ रहे हैं। इसलिए हमारे ITIs को भविष्य की इस technological revolution को अपनाने वाले institutions बनने होंगे।

इसके साथ-साथ हमें Apprentice-ships के महत्व पर भी जोर देना होगा। Institute में सीखे गए ज्ञान, और employer की अपेक्षाओं के बीच, अक्सर अंतर देखने को मिलता है। Apprentice-ship वह bridge है, जो इस अंतर को पाटता है। मैं अपने Industry Partners से कहूँगा, कि वे विद्यार्थियों के लिए meaningful apprenticeship और industry-exposure के अवसर अवश्य बनाएं। इससे युवा अधिक employable बनता है, और industry को early-stage में ही प्रतिभा पहचानने का मौका मिलता है।

साथ ही, मैं एक और आवश्यक पहलू जोड़ना चाहूँगा। वह यह कि, केवल ITIs का modernisation ही पर्याप्त नहीं है, हमें अपने instructors के continuous professional development में भी निवेश करना होगा। हमें Instructors को industrial facilities में समय बिताने, नई technologies समझने और contemporary manufacturing practices से परिचित होने के अवसर प्रदान करने होंगे।

PM-SETU की सफलता का मापदंड यह नहीं होगा, कि कितनी machines बांटी गई, कितने certificates दिए गए। इसकी सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि कितने लोगों के करियर बदले, कितने सपनों को उड़ान मिली। कितने students को अच्छी नौकरियाँ मिलीं। कितने लोगों की income बढ़ी। यही outcomes हैं, जिन्हें हमें achieve करना है।

आज हम जिस transformation की बात कर रहे हैं, वह केवल व्यवस्था बदलने की बात नहीं है। यह भारत में vocational education की एक नई संस्कृति बनाने की बात है। यह उस युवा को dignity, aspiration और अवसर देने की बात है, जो technical career चुनता है। यह एक ऐसा workforce तैयार करने की बात है, जो पूरी दुनिया में compete कर सके।

सरकार, Industries और Institutions के बीच, partnership के माध्यम से ही, हम ये achieve कर पाएंगे। यदि हम इसमें सफल हुए, तो PM-SETU केवल एक skilling programme नहीं रहेगा। यह रोजगार, औद्योगीकरण, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संकल्प के बीच सशक्त सेतु बनेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

और मुझे पूर्ण विश्वास है कि उत्तर प्रदेश, अपने standard, अपनी औद्योगिक क्षमता, अपनी युवा आबादी और अपने Defence Industrial Corridor के साथ, पूरे देश को इस क्षेत्र में रास्ता दिखाएगा।

अंत में, एक बार फिर मैं उत्तर प्रदेश सरकार, Ministry of Skill Development and Entrepreneurship, तथा सभी stakeholders को इस आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। इस conclave की सफलता की कामना करते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद