Text of RM’s speech at the statue Unveiling ceremony of Avantibai Lodhi in Lucknow.
मैं सबसे पहले वीरांगना अवंतीबाई लोधी जी को नमन करता हूँ। आज उनकी इस प्रतिमा का लोकार्पण करके, मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।
1857 में स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम में उन्होंने जिस साहस के साथ अंग्रेजों का सामना किया, वह भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण हमेशा सभी को प्रेरणा देता रहेगा।
साथियो,
रानी अवंतीबाई लोधी जी ने अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में अपने राज्य की बागडोर संभाली और सुशासन के कीर्तिमान स्थापित किए।
जब अंग्रेजों ने उनके राज्य को छलपूर्वक छीनने का प्रयास किया, तब उन्होंने झुकना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने न केवल अंग्रेजों के विरुद्ध स्वयं हथियार उठाए, बल्कि आसपास के और भी राजाओं और जमींदारों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने उस समय पड़ोसी राज्यों को संदेश भिजवाये थे कि “देश की रक्षा करनी है तो कमर कसकर तैयार हो जाओ, नहीं तो चूड़ियाँ पहनकर घर में बैठ जाओ।”
1857 में वे केवल 27 वर्ष की थीं। सोचिए, कितनी कम उम्र में वे अंग्रेजों की शक्तिशाली सत्ता के सामने डटकर खड़ी हुई थीं।
खैरी के युद्ध में, किसानों और आम लोगों की सेना के बल पर वाडिंग्टन को हराकर रानी अवंतीबाई लोधी जी ने असाधारण सैन्य नेतृत्व और पराक्रम का सबूत दिया।
वाडिंगटन ने जब रानी अवंतीबाई पर दोबारा हमला किया, तब उसकी सेना बहुत बड़ी थी। लेकिन फिर भी अवंतीबाई लोधी जी ने अंग्रेजी सेना का जमकर मुकाबला किया।
साथियो,
जब अंग्रेजी सेना ने उन्हें घेर लिया, तब भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया। बल्कि रणभूमि में अपनी ही तलवार से आत्मबलिदान कर दिया। जानते हैं क्यों? क्योंकि अवंतीबाई लोधी जी ने संकल्प लिया था कि वे जब तक जिंदा हैं तब तक दुश्मन के हाथ उन्हें छू भी नहीं पाएंगे।
रानी अवंतीबाई जी का जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय के सामने कभी नहीं झुकना चाहिए। कभी भी, किसी भी कीमत पर, आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहिए। और जब बात मातृभूमि की रक्षा की हो तो अपना सर्वस्व न्योछावर करने से भी नहीं डरना चाहिए।
साथियो,
रानी अवंतीबाई लोधी जी की यह प्रतिमा केवल उनकी स्मृति को संजोने भर का माध्यम नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों को, उनके शौर्य, स्वाभिमान, नेतृत्व और बलिदान की कहानी बताने का माध्यम भी है।
जब भी कोई बच्चा इस प्रतिमा को देखेगा, तो उसके मन में यह प्रश्न उठेगा कि यह वीरांगना कौन थीं? वह अवंतीबाई जी के बारे में जानने के लिए उत्सुक होगा।
तब उसे पता चलेगा कि यह वही रानी थीं, जिन्होंने ताकतवर दुश्मन के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। यहाँ से गुजरने वाला हर व्यक्ति इस प्रतिमा को जब भी देखेगा तो गर्व से भर जाएगा।
इसलिए, यह प्रतिमा केवल लोहे और पत्थर की मूर्ति नहीं है। यह भारत के गौरवशाली इतिहास की सजीव मूरत है।
साथियो,
हमारी सरकार का हमेशा यह प्रयास रहा है कि भारत अपने नायकों को पहचाने, उनका सम्मान करे, और उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाए। हमारा प्रयास है कि अतीत की वीरता की कहानियों से वर्तमान को आत्मविश्वास मिले और भविष्य के लिए मार्गदर्शन मिले।
हमारे आदर्श और हमारे प्रेरणास्रोत बाहर से Imported नहीं होने चाहिए। हमारे युवाओं को देश के उन महान व्यक्तित्वों के बारे में जानना चाहिए, जिन्होंने भारत के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
रानी अवंतीबाई जैसी वीरांगनाओं से लेकर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महान राष्ट्रनिर्माताओं तक, भारत का इतिहास ऐसे महान व्यक्तित्वों से भरा हुआ है। हमारी सरकार इस गौरवशाली विरासत को सम्मान देने और इसे नई पीढ़ी के सामने लाने का काम कर रही है।
जैसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर से जुड़े पाँच स्थानों को ‘पंच तीर्थ’ के रूप में विकसित किया है। महू से लेकर मुंबई तक, लंदन से लेकर नागपुर और दिल्ली तक, बाबासाहब के जीवन से जुड़े ये स्थान आज प्रेरणा के तीर्थ बन चुके हैं।
ऐसे ही महाराजा सुहेलदेव जी का भव्य स्मारक बहराइच में बनाया गया है। सभी लोग भारत की वीरांगनाओं के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा ले सकें, इसके लिए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने UP PAC की तीन नई महिला Battalions का नाम भारत की वीरांगनाओं के नाम पर रखने का फैसला किया है।
लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी जी और गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी जी के नाम पर PAC की Battalions का नाम रखा गया है। ऐसे ही बदायूं में रानी अवंतीबाई लोधी जी के नाम पर PAC की नई Battalion का गठन किया जा रहा है।
ये सभी कार्य प्रतीकात्मक नहीं हैं। Symbolic नहीं हैं। यह इस बात का भी प्रमाण है कि हम भारत के महापुरुषों और वीरांगनाओं के विचारों और उनके योगदान को समाज के सामने लाना चाहते हैं। ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास को जान सकें, अपने नायकों को पहचान सकें और उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।
साथियो,
रानी अवंतीबाई लोधी जी को हम मातृभूमि के प्रति समर्पण और बलिदान के लिए याद करते हैं। लेकिन उनकी गौरव गाथा को दो और वजहों से याद किया जाना चाहिए।
पहली वजह यह है कि रानी अवंतीबाई लोधी जी ने अपने जीवन और आदर्शों से यह सिखाया कि अन्याय और दासता के विरुद्ध डटकर खड़ा होना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने दिखाया कि देशभक्ति और वीरता किसी जाति, वर्ग या Gender की सीमा में बंधी नहीं होती। स्वतंत्रता और देशप्रेम की ज्वाला हर हृदय में प्रज्वलित होती है।
दूसरी वजह यह है कि, रानी अवंतीबाई लोधी जी ने केवल अंग्रेज़ी हुकूमत को चुनौती नहीं दी, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था को भी चुनौती दी जो महिलाओं को लंबे समय तक कम आँकती रही है। उनका पूरा जीवन महिला सशक्तीकरण और समानता के मूल्य का भी जीवंत उदाहरण है।
साथियो,
हमारे देश की वीरांगनाओं ने रणभूमि में भी अपना शौर्य दिखाया है, और राजपाट में भी सुशासन के नए कीर्तिमान लिखे हैं।
भारत की महिलाओं ने हर युग में अपनी क्षमता साबित की है। आज भारत की महिलाएं; सेना, पुलिस, विज्ञान, खेल, शिक्षा, प्रशासन और हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं।
वे सियाचिन की ऊंचाइयों से लेकर समंदर की गहराइयों तक देश की सुरक्षा को और भी मजबूत कर रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला पायलटों और महिला सैनिकों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह नए भारत की नारी शक्ति है जो हर क्षेत्र में आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही है। नारी शक्ति को और आत्मविश्वासी और सशक्त बनाने के लिए हमारी सरकार ने उन्हें अधिकार, अवसर, सुरक्षा और सम्मान देने का काम किया है।
आज, सैनिक स्कूलों के दरवाजे लड़कियों के लिए खोले गए हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना से लड़कियों को सशक्त बनाया जा रहा है। लखपति दीदी जैसी पहलों से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।
इन सभी प्रयासों का उद्देश्य यही है कि महिलाओं को उनके सभी अधिकार मिलें। और वे पूरे आत्मविश्वास और गरिमा के साथ आगे बढ़कर विकसित भारत की यात्रा का हिस्सा ही न बनें, बल्कि उसे नेतृत्व भी दें।
साथियो,
याद कीजिए पहले की सरकारों के समय में देश की राजधानी तक में महिलाएं सुरक्षित नहीं थीं।
लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। आज सबको पता है कि यह योगी जी की सरकार है। यहाँ महिलाओं की तरफ आँख उठाने वाले, उठने लायक नहीं रहते हैं।
पहले, बेटियों के माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे। लेकिन आज अपराधी और उनके घरवाले चिंतित रहते हैं। पहले महिलाओं को गलत नज़र से देखने वालों की हिम्मत और हौसले बुलंद रहते थे। लेकिन योगी जी ने ऐसे अपराधियों के हौसले भी तोड़े हैं। उनकी हिम्मत भी तोड़ी है। उनके ठिकाने भी तोड़े हैं। और उनके घुटने भी तोड़े हैं।
साथियो,
रानी अवंतीबाई जी ने अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनकी वीरता और उनके आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ। मैं मानता हूँ कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
मैं वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी जी को नमन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूँ।