विकास की नई पहचान है ‘लखनऊ कैंट’: रक्षा मंत्री

Text of RM’s speech at the Inauguration and Foundation Stone Laying of Various Development Projects in Lucknow

आज, लखनऊ की इस ऐतिहासिक धरती पर, लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड में, एक साथ अनेक projects के शिलान्यास पर, आप सभी को मैं अपनी ओर से हार्दिक बधाई देता हूँ।

मुझे प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश सरकार, रक्षा मंत्रालय, और उद्योग जगत मिलकर विकास के इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। जब केंद्र और राज्य सरकार की सोच एक दिशा में चलती है, तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। मैं योगी जी को उनके नेतृत्व के लिए बधाई देता हूँ और विश्वास व्यक्त करता हूँ कि उत्तर प्रदेश विकास और सुशासन के नए मानदंड स्थापित करता रहेगा।

साथियों, आज का दिन लखनऊ छावनी के लिए बड़ा महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आज हम लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से 12 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं।

मैं इन परियोजनाओं को केवल निर्माण कार्यों की सूची के रूप में नहीं देखता। मेरे लिए ये परियोजनाएँ लखनऊ छावनी के भविष्य के प्रति हमारी commitment हैं। ये 12 परियोजनाएँ 12 संकल्प हैं, एक बेहतर छावनी का संकल्प, एक स्वच्छ छावनी का संकल्प, बेहतर जलापूर्ति का संकल्प, बच्चों के बेहतर भविष्य का संकल्प, युवाओं को खेल के बेहतर अवसर देने का संकल्प, सम्मानजनक नागरिक सुविधाओं का संकल्प और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ती हुई छावनी का संकल्प।

साथियों, आज भारत, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाएँ और आधुनिक इमारतें नहीं हैं। विकसित भारत का अर्थ है कि जब बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा मिले, जब किसी परिवार के घर में साफ पानी पहुँचे, जब किसी युवा को खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और जब किसी दिव्यांग बच्चे को यह महसूस न हो कि वह समाज से पीछे है। यही विकास है।

मेरा मानना है कि विकसित भारत की यात्रा बड़े शहरों से शुरू होकर हर मोहल्ले, हर बस्ती और हर परिवार तक पहुँचनी चाहिए। आज लखनऊ छावनी में हो रहा काम इसी सोच का हिस्सा है।

साथियों, समय बदलता है, शहर बदलते हैं और लोगों की जरूरतें भी बदलती हैं। इसलिए नियमों में भी बदलाव आवश्यक है। लखनऊ सहित छावनी क्षेत्रों में नए building bye-laws लागू किए गए हैं। जहाँ पहले G+2 अर्थात तीन मंजिलों की व्यवस्था थी, वहीं अब stilth + ground + 3 अर्थात पाँच मंजिला भवन का प्रावधान है। यह बदलाव उन परिवारों के लिए नई संभावना लेकर आया है, जो अपने घर को अपनी बदलती जरूरतों के अनुरूप विकसित करना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य है कि छावनी क्षेत्र अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ें।

और साथियों, बदलाव केवल इमारतों में नहीं होना चाहिए, हमारी पहचान में भी होना चाहिए। लखनऊ छावनी परिषद ने ब्रिटिश काल से चले आ रहे कुछ बाजारों के नाम बदलकर उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा से जुड़े महान व्यक्तित्वों के नाम दिए हैं। Royal Artillery Bazar अब एकता बाजार, British Cavalry Bazar का नाम ऊदा देवी बाजार, British Infantry Bazar का नाम मातादीन वाल्मीकि बाजार और एक अन्य British Infantry Bazar का नाम मंगल पांडे बाजार रखा गया है। Kanedy Market का नाम अटल बिहारी वाजपेयी बाजार रखा गया है।

नाम बदलना केवल बोर्ड बदलना नहीं है। नाम बदलना स्मृति बदलना है। जब कोई बच्चा ऊदा देवी बाजार से गुजरेगा, तो उसके मन में सवाल उठेगा—ऊदा देवी कौन थीं? और जब वह उनके बारे में पढ़ेगा, तो उसे 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की उस वीरांगना की कहानी मिलेगी, जिन्होंने लखनऊ में अंग्रेजों के विरुद्ध साहसपूर्वक संघर्ष किया। मातादीन वाल्मीकि का नाम हमें स्वतंत्रता संग्राम में वंचित और श्रमिक वर्ग की भूमिका की याद दिलाता है। मंगल पांडे साहस और प्रतिरोध के प्रतीक हैं। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम राष्ट्रसेवा, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रेरणा देता है।

मुझे विश्वास है कि इन नए नामों के साथ लखनऊ छावनी की सड़कों और बाजारों में केवल पते नहीं बदलेंगे, एक नई प्रेरणा चलेगी। यही हमारी विरासत भी है और यही हमारे विकास की दिशा भी।

साथियों, आज लखनऊ छावनी में हो रहा विकास केवल ईंट, सीमेंट और मशीनों का विकास नहीं है। यह लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास है। कहीं घर तक पानी पहुँचाने का प्रयास है, कहीं बच्चे को शिक्षा और अवसर देने का प्रयास है, कहीं जरूरतमंद को इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास है और कहीं युवाओं को खेल तथा भविष्य की नई दिशा देने का प्रयास है।

साथियों, आज मैं लखनऊ छावनी परिषद की पूरी टीम की सराहना करना चाहता हूँ। लखनऊ छावनी परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने यह दिखाया है कि यदि सोच स्पष्ट हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और काम करने की इच्छा हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। मैं छावनी परिषद की पूरी टीम को बधाई देता हूँ और अपेक्षा करता हूँ कि यही गति आगे भी बनी रहेगी।

साथियों, आज की 12 परियोजनाएँ केवल 12 परियोजनाएँ नहीं हैं। ये 12 संकल्प हैं।

स्वच्छ छावनी का संकल्प, हर घर तक बेहतर पानी का संकल्प, बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का संकल्प, दिव्यांग बच्चों को समान अवसर देने का संकल्प, युवाओं को खेल का बेहतर मंच देने का संकल्प, परिवारों को सम्मानजनक सार्वजनिक सुविधाएँ देने का संकल्प, यातायात और पार्किंग को व्यवस्थित करने का संकल्प और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक छावनी बनाने का संकल्प।

हमारा लक्ष्य केवल आज की समस्या का समाधान करना नहीं है। हमारा लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ी पीछे मुड़कर देखे और कहे, हमारे समय में लखनऊ छावनी ने विकास की नई छलांग लगाई थी।

मुझे पूरा विश्वास है कि लखनऊ छावनी परिषद, सेना, रक्षा मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, उद्योग जगत और यहाँ के नागरिक, सभी मिलकर इस संकल्प को पूरा करेंगे। सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। लेकिन नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।