Text of RM’s speech at the Inauguration of Fragrance Park in Chowk, Lucknow.
आज लखनऊ उत्तर के इस ऐतिहासिक चौक क्षेत्र में इस फ्रेगरेंस पार्क के लोकार्पण के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है।
मेरा मानना है कि Modern Cities केवल सड़कों, Malls, बड़ी इमारतों से नहीं बनती हैं। एक शहर, सही मायने में Modern तब बनता है, जब वहाँ पर्याप्त Open Space हों, जहाँ बच्चे खेल सकें। बुजुर्ग टहल सकें। लोग प्रकृति के निकट आ सकें। और जहाँ सुविधाओं के साथ सुकून भी हो।
मैं समझता हूँ कि इसी सोच के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा यह पार्क विकसित किया गया है। यह केवल एक पार्क नहीं है, बल्कि ऐसा स्थान है जहाँ लोग रोजमर्रा की भागदौड़ से सुकून पा सकेंगे। और प्रकृति के निकट कुछ पल बिता सकेंगे।
मैं विधायक श्री नीरज बोरा जी और लखनऊ विकास प्राधिकरण को भी इस कार्य के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
साथियो,
हमारी Urban Population तेजी से बढ़ रही है, Urban Areas में निर्माण कार्य बढ़ रहा है, यातायात बढ़ रहा है। और हमारे जीवन की गति भी लगातार तेज होती जा रही है।
ऐसे में Open Spaces और Green Areas केवल शहर की सुंदरता नहीं बढ़ाते हैं, बल्कि वे एक स्वस्थ और संतुलित शहरी जीवन की आवश्यकता हैं।
हम सभी जानते हैं कि आज की जीवन शैली में एक ही परिवार के लोग एक ही घर में रहते हुए भी अक्सर एक-दूसरे के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाते हैं। आज, बच्चे और युवा स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताते हैं। और घर के बड़े अपने काम में बहुत Busy रहते हैं।
ऐसे में पार्क जैसे Public Places समाज को जोड़ने का भी काम करते हैं। यहाँ लोग मिलते हैं, बातचीत करते हैं, बच्चे साथ खेलते हैं, बुजुर्ग अपने अनुभव साझा करते हैं और समाज में जुड़ाव बढ़ता है। यानी पार्क वास्तव में किसी भी शहर के Social Infrastructure का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
साथियो,
शहरों का विकास ऐसा होना चाहिए कि Concrete और Nature के बीच संतुलन बना रहे। लखनऊ मेरा संसदीय क्षेत्र है। यहाँ के विकास को लेकर मेरी सोच यह है कि यहाँ Holistic और Inclusive Development हो।
यहाँ आधुनिक Infrastructure के साथ पर्याप्त Green Spaces हों। बेहतर Connectivity के साथ साफ और सुंदर Public Spaces हों। शहर में सड़कें और Flyovers बनें, और साथ ही पेड़ भी लगें और पार्क भी बनें।
मैं हमेशा यह प्रयास करता रहा हूँ कि लखनऊ का विकास केवल आंकड़ों में दिखाई न दे, बल्कि हर नागरिक अपने जीवन में उसे महसूस करे। यहाँ का Infrastructure और Services तो बेहतर हों ही, लोगों की Quality of Life भी बेहतर हो। और मैं समझता हूँ कि इस काम में हम सफल भी हुए हैं।
साथियों,
जब किसी पार्क, सड़क या सार्वजनिक स्थल को किसी महान व्यक्ति के नाम से जोड़ा जाता है, तो उसका उद्देश्य केवल नाम देना नहीं होता। यह हमारी सामूहिक स्मृति को जीवित रखने का भी एक माध्यम होता है। इसका उद्देश्य यह भी होता है कि आने वाली पीढ़ियां उन महान व्यक्तित्वों को याद रखें और उनसे प्रेरणा ले सकें।
इस पार्क का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय जी के नाम पर रखा गया है और यहाँ शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
जो बच्चे इस पार्क में खेलने आएंगे, संभव है कि वे अपने माता-पिता से पूछें कि लाला लाजपत राय कौन थे? तब उन्हें पता चलेगा कि पंजाब केसरी लाला लाजपत राय देशवासियों में स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना जगाने वाले महान देशभक्त थे। भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी थे।
जब कोई युवा भगत सिंह की प्रतिमा के सामने खड़ा होगा, तो शायद वह उनके साहस और बलिदान के बारे में पढ़ना चाहेगा। और तब उसे पता लगेगा कि जब भगत सिंह को फाँसी के लिए ले जाया जा रहा था, तब वे और उनके साथी आजादी का गीत गा रहे थे। फाँसी के फंदे की ओर बढ़ते हुए भी उनके भीतर भय नहीं था। बल्कि इस बात की खुशी थी कि वे अपनी मातृभूमि के लिए प्राण देने जा रहे थे। जब फांसी का फंदा उनके गले में था तो उनके होंठों पर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा था।
इसीलिए मैं मानता हूँ कि जब हम ऐसे Infrastructure का निर्माण करते हैं और उसे अपने महान राष्ट्रनायकों की स्मृतियों से जोड़ते हैं, तो हम Infrastructure के साथ Inspiration भी तैयार करते हैं।
साथियो,
लाला लाजपत राय और भगत सिंह अलग-अलग पीढ़ियों से आते थे। एक ओर लाला लाजपत राय थे। उनमें वर्षों के संघर्ष से अर्जित नेतृत्व क्षमता थी। राष्ट्रीय आंदोलन का लंबा अनुभव था। दूसरी ओर भगत सिंह थे जो युवा भारत की ऊर्जा, साहस, निर्भीकता और क्रांतिकारी चेतना के प्रतीक थे।
लेकिन इन दोनों को जोड़ने वाला सूत्र एक ही था। और वह सूत्र था राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव और भारत की स्वतंत्रता का लक्ष्य।
यहाँ लाला लाजपत राय का नाम और भगत सिंह की प्रतिमा ऐसी लगती है मानो दो पीढ़ियों का संवाद हो। एक ओर अनुभव है, दूसरी ओर ऊर्जा। एक ओर वर्षों के संघर्ष से प्राप्त परिपक्वता है, दूसरी ओर युवावस्था का साहस और जोखिम उठाने का जज्बा। एक ओर वह पीढ़ी है जो रास्ता दिखाती है, दूसरी ओर वह पीढ़ी है जो उस रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प और साहस लेकर चलती है।
और साथियों, इन दोनों महान विभूतियों को एक साथ स्मरण करना, आज के भारत के लिए भी एक बहुत बड़ा संदेश है। यह संदेश देता है कि राष्ट्र निर्माण केवल किसी एक पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि हर पीढ़ी इसमें अपनी भूमिका निभाती है।
किसी भी समाज, किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए अनुभव भी चाहिए और ऊर्जा भी। हमें बुजुर्गों के विवेक और ठहराव की भी आवश्यकता है और युवाओं के साहस की भी।
यदि केवल अनुभव हो और नई ऊर्जा न हो, तो समाज आगे बढ़ने की गति खो सकता है। और यदि केवल ऊर्जा हो लेकिन अनुभव और मार्गदर्शन न हो, तो वह ऊर्जा दिशाहीन हो जाती है।
इसलिए राष्ट्र निर्माण में अनुभव और ऊर्जा दोनों की आवश्यकता होती है।
लाला लाजपत राय और भगत सिंह, दोनों महापुरुषों का यहाँ होना, यही संदेश देता है कि चाहें पीढ़ी अलग हो, चाहें विचारधारा अलग हों, चाहें कार्यशैली अलग हो, लेकिन हम सभी का उद्देश्य एक ही होना चाहिए। और वह उद्देश्य है देश का विकास, देश की प्रगति, देश की समृद्धि।
इसीलिए मैं कहता हूँ कि चाहें Millennials हों या Gen-Z, चाहें Baby Boomers हों या Gen X; सभी को देशहित में काम करना है।
साथियो,
आज भारत एक आजाद देश है। लोकतान्त्रिक देश है। संवैधानिक गणराज्य है। Welfare State है। लेकिन हमको इन सभी आदर्शों को बनाए रखने के लिए भी संघर्ष करना होगा। क्योंकि जब हम यह भूल जाते हैं कि इन उपलब्धियों के पीछे कितने लोगों का संघर्ष और बलिदान है, तब हम उन उपलब्धियों की कद्र करना भूल जाते हैं। और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी भूलने लगते हैं।
स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं है, उसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। लोकतंत्र केवल वोट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें अपने कर्तव्यों का पालन करना, संविधान का सम्मान करना और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी शामिल है।
हम आपस में लड़कर पहले भी कई बार अपनी स्वतंत्रता खो चुके हैं। कुछ लोगों ने हमेशा इसका फायदा उठाया है। उन्होंने अपने संकीर्ण हितों के लिए, भारत के साथ बार-बार विश्वासघात किया है। ऐसे लोगों ने बिना हथियार के भी, सिर्फ अपनी सोच और कृत्यों से भारत को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें स्वतंत्रता दिलाई। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस स्वतंत्रता को बनाएं रखें। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम भारत को अर्थव्यवस्था, ज्ञान, और विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया में Number 1 बनाएं।
साथियों,
मुझे पूर्ण विश्वास है कि लाला लाजपत राय के नाम पर बना यह फ्रेगरेंस पार्क लखनऊ की सुंदरता में एक नई खुशबू जोड़ेगा और भगत सिंह की प्रतिमा हर पीढ़ी को साहस, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देती रहेगी।
इसी संकल्प के साथ कि हम सब मिलकर अपने लखनऊ को और बेहतर, सुंदर और गौरवशाली बनाने के लिए कार्य करते रहेंगे, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।