सबसे महत्वपूर्ण है, सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा: रक्षा मंत्री

श्री एम. वेंकैया नायडू जी की Biography, जनप्रिय नेता वेंकैया नायडू: उदयगिरि से उपराष्ट्रपति तक का विमोचन करना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से प्रसन्नता और सम्मान का विषय है।

समय के साथ, जीवन की बहुत-सी यादें, धीरे-धीरे धुंधली हो जाती हैं। घटनाएँ याद रहती हैं, लेकिन उनके पीछे के प्रसंग और संदर्भ कई बार पीछे छूट जाते हैं। ऐसे में एक अच्छी Biography हमें उन स्मृतियों को फिर से जीने और उन प्रसंगों को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती है। और जब Biography वेंकैया जी जैसे व्यक्ति की हो, जिन्होंने कई दशकों तक भारतीय राजनीति को करीब से देखा है और प्रभावित किया है, तब वह Biography एक महत्वपूर्ण Historical Account भी बन जाती है।

साथियो,

आचार्य यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद जी द्वारा लिखी गई यह Biography केवल घटनाओं का संकलन नहीं है। बल्कि यह वेंकैया जी के व्यक्तित्व, उनके संघर्ष, उनकी संवेदनशीलता और जनहित के प्रति उनके कमिटमेंट  को सामने लाने का एक सार्थक प्रयास भी है।

वेंकैया जी की यह Biography पाठकों को प्रेरणा देगी। विशेष रूप से युवाओं के मन में यह भावना मजबूत करेगी कि जीवन में सफलता केवल पद प्राप्त करने से नहीं, बल्कि सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहने से मिलती है। समाज के लिए काम करने से मिलती है। और अपने हित से ऊपर देशहित रखने से मिलती है। Nation First और Self-Last का जो भाव है, उसके वेंकैया जी Living Example यानि जीवंत उदाहरण है।

 

 

साथियो,

इस पुस्तक के लेखक आचार्य प्रसाद जी की साहित्यिक यात्रा बहुत समृद्ध है। वे हिंदी और तेलुगु दोनों भाषाओं के विद्वान हैं। प्रसाद जी की विद्वता, सहज भाषा और साहित्यिक दृष्टि इस पुस्तक को बहुत रोचक बनाती हैं। मैं उन्हें इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। वे इस बात को भी साबित करते है कि हिन्दी भाषा, उत्तर और दक्षिण दोनों को जोड़ने का काम बखूबी कर सकती है।

साथियो,

मुझे पार्टी के संगठन से लेकर सरकार तक, वेंकैया जी के साथ काम करने का अवसर मिला है। साथ काम करते हुए स्वाभाविक रूप से रिश्ते बनते हैं। लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका व्यवहार, सहजता और आत्मीयता उन रिश्तों को एक अलग गहराई दे देती है।

वेंकैया जी का व्यक्तित्व भी ऐसा ही है। इसलिए वेंकैया जी से मेरा संबंध केवल राजनीतिक नहीं रहा है। बल्कि हमेशा बहुत ही भावनात्मक और आत्मीयता से पूर्ण रहा है।

वैसे तो वेंकैया जी मेरे Senior हैं, लेकिन उनके और मेरे सार्वजनिक जीवन में कई समानताएँ भी रही हैं। हम दोनों लोगों ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। हम दोनों लोगों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर राष्ट्र और समाज के लिए काम करने की प्रेरणा मिली। हम दोनों लोगों को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर मिला। आपातकाल के दौरान हम दोनों लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया और जेल भी गए। 2014 के बाद हम दोनों लोगों को कैबिनेट में भी साथ काम करने का अवसर मिला।

मैंने उनके साथ काम करते हुए उनके व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा है और उनके जीवन को बहुत करीब से देखा है। वेंकैया जी के जीवन में देशभक्ति और जनसेवा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता रही है। और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरा समर्पण रहा है।

साथियो,

वेंकैया जी की जीवन-यात्रा एक साधारण किसान परिवार और एक छोटे से गाँव से शुरू हुई। विद्यार्थी जीवन से ही उनमें राष्ट्र और समाज के लिए कुछ करने की ललक थी। छात्र राजनीति से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्र सरकार में मंत्री और फिर देश के उपराष्ट्रपति तक पहुँची।

हर भूमिका उनके लिए नई Responsibilities और Challenges लेकर आई। लेकिन उनकी सहजता और सादगी हमेशा कायम रही। हम सभी ने उनकी कार्यशैली और व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा है।

 

 

साथियो,

जब वेंकैया जी पहली बार MLA बने और आंध्र प्रदेश विधानसभा पहुंचे, तो उन्होंने बहुत ही मुखरता से सदन के भीतर वंचित वर्गों, किसानों, विद्यार्थियों, और महिलाओं के मुद्दे उठाए।

एक बार उन्होंने विधानसभा के संयुक्त सत्र में तत्कालीन राज्यपाल के 7 मिनट Late होने पर असंतोष व्यक्त करते हुए, बिना झिझके और डरे अपनी बात रखी थी। यह घटना बताती है कि उनके लिए समय, अनुशासन और सदन की गरिमा कितनी महत्वपूर्ण रही है।

वेंकैया जी ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन से जुड़ी चुनौतियों को करीब से देखा है। इन अनुभवों ने उनके मन में गाँवों के विकास और बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने की एक गहरी प्रतिबद्धता पैदा की। यही प्रतिबद्धता उनके सार्वजनिक जीवन में हमेशा दिखाई दी।

एक बार विधानसभा में कांग्रेस के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए वेंकैया जी ने कहा था कि “Gandhiji gave a call — ‘Back to villages’, but these leaders have turned their back on villages.”

जब वेंकैया जी आंध्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बने तो उन्होंने स्वयं गाँव-गाँव जाकर लोगों से मुलाकात की। उनकी परेशानियों को और करीब से देखा।

श्रद्धेय अटल जी की सरकार में वेंकैया जी को केंद्र में मंत्री बनने का अवसर मिला। उस समय वेंकैया जी को कई मंत्रालयों का विकल्प दिया गया था। लेकिन वेंकैया जी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को चुना। ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में उन्होंने गाँवों की बुनियादी जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2000 में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ को शुरू करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। एक कैबिनेट Meeting में उन्होंने कहा था कि अगर गाँव तक सड़क नहीं पहुँचेगी तो VDO, BDO, DEO, Doctor, Actor, Collector, Tractor भी गाँवों तक नहीं पहुँचेंगे।

वेंकैया जी के गाँवों से जुड़ाव का एक और उदाहरण मुझे याद आता है। जब वेंकैया जी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तब उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर देशव्यापी ‘गाँव चलो अभियान’ की शुरुआत की थी। इस अवसर पर उन्होंने National Reconstruction के लिए फिर से गाँवों की ओर लौटने का आह्वान किया था।

साथियो,

वेंकैया जी के व्यक्तित्व की एक खास खूबी यह रही है कि वे गंभीर से गंभीर विषय को भी अपने Wit और Humor के साथ प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता रखते हैं। खासतौर पर उनके One Liners तो बहुत ही मशहूर हुए।

इस पुस्तक में आंध्र प्रदेश विधानसभा में उनके एक भाषण का जिक्र है। कांग्रेस सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बोलते हुए वेंकैया जी ने पोतना जी के भागवतम की एक कविता का सहारा लिया था। इस कविता में भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकशिपु से कहते हैं कि भगवान विष्णु यहाँ हैं या वहाँ नहीं हैं, ऐसा संदेह मत करो। वे सर्वव्यापी हैं। तुम जहाँ भी उन्हें खोजोगे, वे वहीं मिलेंगे।

वेंकैया जी ने इससे प्रेरणा लेते हुए कहा था कि काँग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार यहाँ हैं, वहाँ नहीं हैं, ऐसा संदेह मत करो। काँग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार सर्वव्यापी हैं। तुम जहाँ भी खोजोगे काँग्रेस सरकार में वहीं भ्रष्टाचार मिलेगा।

वेंकैया जी बहुत ही कम शब्दों में लेकिन बड़े ही असरदार तरीके से अपनी बात कह देते हैं। एक बार उन्होंने UPA का सटीक विश्लेषण करते हुए कहा था कि “The UPA, which was DPA, Divided Progressive Alliance, has now become NPA, Non-Performing Alliance.”

 

साथियो,

2007 में, जब मैं भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष था तो देशभर से भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की चिंताएँ सामने आ रही थीं। किसानों के हितों की रक्षा के लिए और उनकी परेशानियों को सामने लाने के लिए, हमने वेंकैया जी के नेतृत्व में एक समिति बनाई थी। वेंकैया जी ने किसानों से संवाद किया। उनकी समस्याओं को समझा। और इन समस्याओं के लिए समाधान भी सुझाए।

इसी तरह 2013 में, जब ओडिशा में फैलिन Cyclone से भारी तबाही हुई, तब मैंने वेंकैया जी से बात की और उनसे प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थिति का जायजा लेने का आग्रह किया। उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और लोगों से मिलकर उनकी स्थिति को समझा। लौटकर उन्होंने लोगों की परेशानियों के बारे में विस्तार से बताया था। वहाँ विस्थापित लोगों के Rehabilitation के लिए कई सुझाव दिए थे।

साथियों,

जब 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार बनी, तब वेंकैया जी कैबिनेट में मेरे वरिष्ठ साथी थे। इस दौरान वेंकैया जी ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्होंने मोदी जी के बहुत सारे Visions और योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम किया। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, ‘HRIDAY’ और ‘AMRUT’ जैसी योजनाओं के Implementation में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वेंकैया जी मेरी स्मृति में अकेले ऐसे Union Minister है जिन्होंने Rural Development Ministry के साथ-साथ Urban Development Ministry भी चलाई है।

जब वेंकैया जी देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति बने तो उन्होंने संसद की गरिमा बढ़ाने के कार्य किए। उनके कार्यकाल में 170 से ज्यादा Bills सदन में Pass और Discuss हुए। राज्यसभा की Productivity 70 प्रतिशत बढ़ी। और सदन में सदस्यों की उपस्थिति भी बढ़ी।

राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने कई Colonial Practices को समाप्त करने का कार्य किया। जैसे सदन में Papers Table करने के समय “I beg to lay…” कहने की परंपरा थी। वेंकैया जी ने पहले ही दिन कहा था कि “No need to beg… this is independent India.” इसके बजाय “I rise to lay…” कहा जाए। इसी तरह उन्होंने His Excellency जैसे Colonial शब्द की जगह Honourable Vice President के प्रयोग को प्रोत्साहित किया।

वेंकैया जी ने हमेशा मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को सम्मान देने की वकालत की है। जब वो राज्यसभा के सभापति थे, तो सदस्यों को पहली बार डोगरी, कोंकणी, कश्मीरी और संथाली भाषाओं में अपनी बात रखने का अवसर मिला। असमिया, बोडो, गुजराती, मैथिली, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं का भी कई वर्षों बाद सदन में प्रयोग हुआ।

सदन में वेंकैया जी के शब्द और One-liners, अक्सर Tense माहौल को हल्का कर देते थे। जैसे एक बार राज्यसभा में विपक्ष के सदस्य लगातार हंगामा कर रहे थे और सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी। ऐसे में वेंकैया जी ने अपने खास अंदाज में कहा था कि “My operation depends on your cooperation; otherwise, there will be separation.” ऐसे ही, एक बार एक सांसद ने Point of Order Raise किया। वेंकैया जी ने अपने खास अंदाज में जवाब दिया, “There is no order in your Point of Order.”

वेंकैया जी ने उपराष्ट्रपति के रूप में अपना कार्यकाल पूरा होने पर दी गई Farewell Speech में सदस्यों को धैर्य और सहनशीलता रखने की सलाह दी थी। उन्होंने अपने खास अंदाज में कहा था, “If you don’t have patience, you will become a patient.”

साथियो,

वेंकैया जी के सार्वजनिक जीवन में एक बात हमेशा साफ दिखाई दी है कि उन्होंने कभी किसी पद को पाने की महत्वाकांक्षा नहीं रखी। जब वेंकैया जी के उपराष्ट्रपति बनने की बातें शुरू हुई थीं तब भी उन्होंने अपने अंदाज में कहा था कि वह ना तो राष्ट्रपति बनना चाहते हैं, और ना ही उपराष्ट्रपति, वह ‘ऊषा’ के पति बने रहकर ही खुश हैं।

ऐसे ही जब उनके President बनने की अटकलें लगाई जा रही थीं, तब भी उन्होंने साफ कहा था कि “I never aspired to be the President, will never become a dissident and will never be confined to the residence.” यानी उन्हें President बनने की महत्वाकांक्षा नहीं है। उनका Dissident बनना संभव ही नहीं है। और सिर्फ Residence तक ही वो सीमित रहने वाले नहीं हैं।

यह सभी बातें बताती हैं कि उनके लिए राजनीति का अर्थ कोई भी पद पाना नहीं रहा है। बल्कि लोगों की सेवा करना, लोगों के बीच रहना, उनसे मिलना और उनकी समस्याओं का समाधान करना रहा है।

साथियों,

 

वेंकैया जी के जीवन और उनकी कार्य शैली से एक बात हम सभी को सीखने को मिलती है और वह है सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा। आजकल राजनीति में Political Discourse की Language में जैसी गिरावट देखने को मिल रही है, वह न केवल चिंताजनक है बल्कि शर्मनाक है। मैं कोर्इ निचले स्तर की राजनीति की बात नहीं कर रहा हूं। अभी कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदीजी के बारे में जो अशोभनीय टिप्पणियां की है, वे बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है।

संसदीय राजनीति में प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जैसे पद की अपनी एक गरिमा होती है, उनकी एक मर्यादा होती है।

साथियों,

इस पुस्तक में वेंकैया जी के जीवन से जुड़े अनेक किस्से हैं, उनके जीवन मूल्य हैं, उनके संघर्ष हैं, उनके आदर्श हैं। इस पुस्तक में आचार्य प्रसाद जी ने सही अर्थों में गागर में सागर भरने का कार्य किया है। मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक न केवल वेंकैया जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी, बल्कि पाठकों को समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को निभाने की प्रेरणा भी देगी।

इस पुस्तक की सफलता की शुभकामना के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

धन्यवाद।