‘सिन्दूर महारक्तदान यात्रा’ करुणा का नया आयाम है: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech at the ‘Sindoor Maha Raktdan Yatra’ in New Delhi.

सबसे पहले, “सिंदूर महा रक्तदान यात्रा” के आयोजन पर, मैं आप सभी को बधाई देता हूँ।

वैसे तो रोजमर्रा की public life में, कई events में मुझे जाने का अवसर मिलता है। हर event का अपना एक महत्व होता है। कोई event देश की economic development से जुड़ा होता है, कोई social development से जुड़ा होता है, कोई Direct Defence sector से जुड़ा होता है। लेकिन आज का occasion इन सबसे अलग है। आज हम सब जिस अवसर पर एकत्र हुए हैं, वह महा रक्तदान यात्रा का अवसर है। और यह इसलिए ख़ास है, क्योंकि यह मानवता, सहृदयता और राष्ट्रप्रेम से जुड़ा अवसर है।

आज के इस आयोजन को, विशेष, अनमोल और ऐतिहासिक बनाने का श्रेय, महाराष्ट्र की पावन धरती से आए हमारे एक हज़ार खिलाड़ी और पहलवान साथियों को जाता है। सांगली जैसे खेल-प्रेमी जिले से, माननीय उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे जी के नेतृत्व में आप लोगों का यहाँ पहुँचना, इस बात का प्रतीक है, कि जब राष्ट्र की बात आती है, तो हम सब एक हो जाते हैं। मैं आप सभी को इस gesture के लिए बधाई देता हूँ।

साथियों, रक्तदान को हम हमेशा से “जीवनदान” या “महादान” कहते आए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसके पीछे scientific और spiritual, दोनों ही reason हैं। Scientific हिसाब से आप देखिये, तो Science ने space में satellite भेज दिए, Artificial intelligence से robotic surgery possible कर दी, Genome editing के माध्यम से बीमारियों पर काबू पाने के नए आयाम खुले हैं। लेकिन आज तक blood का कोई artificial option भी हमारे सामने नहीं आ पाया है।

रक्त का निर्माण किसी factory में नहीं हो सकता, किसी प्रयोगशाला में नहीं गढ़ा जा सकता। यह केवल एक स्वस्थ मानव शरीर के भीतर ही बनता है और केवल एक मानव ही इसे दूसरे मानव को दे सकता है। यही बातें रक्तदान को सभी दानों में सर्वोपरि बनाती हैं।

और आज जब सांगली से आए हमारे सैकड़ों वीर खिलाड़ी और पहलवान अपना रक्त देंगे, तो यह एक सुरक्षा कवच बनकर भविष्य में, ज़रूरतमंद जवानों और उनके परिवारों के लिए एक credible reserve के रूप में खड़ा रहेगा। वैसे तो आप सभी athletes हैं, आपकी physical strength आपकी पहचान है। लेकिन आज आपने इस physical strength से भी बड़ी शक्ति का परिचय दिया है। आज आपने compassion, यानि करुणा की शक्ति का परिचय दिया है।

मुझे बताया गया, कि पिछले साल जम्मू के आर्मी अस्पताल, उधमपुर के कमांड अस्पताल, श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल और जम्मू के AIIMS में भी इसी प्रकार आप जैसे साथियों ने रक्तदान किया था। यह कोई छोटी और साधारण बात नहीं है।

वैसे भी महाराष्ट्र और उसका इतिहास स्वयं में वीरता और करुणा का ही इतिहास रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज के काल से लेकर आधुनिक भारत तक वही परम्परा चली आ रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन हमें यही सिखाता है, कि physical strength का सर्वोत्तम उपयोग,  दूसरों की रक्षा और राष्ट्र की सुरक्षा में निहित है। और आज उन्हीं की धरती से आए आप सभी मराठा वीरों का योगदान भी, इतिहास के पन्नों पर याद रखा जाएगा।

इस आयोजन में, आप सभी एक हज़ार unit का जो विशाल भंडार समर्पित करके जा रहे हैं, वह भारतीय सेना के हर जवान और उनके परिवार के लिए यह विश्वास है,  कि जब कभी उन्हें ज़रूरत पड़ेगी, राष्ट्र उनके साथ खड़ा मिलेगा। इससे बड़ी राष्ट्र-सेवा और क्या हो सकती है!

साथियों, इस रक्तदान यात्रा का नाम भी बड़ा अद्भुत है। “सिंदूर” महारक्तदान यात्रा, यह नाम खुद में एक symbol है। आप सबको याद होगा, जब पहलगाम में धर्म पूछकर हमारे निर्दोष नागरिकों पर कायराना आतंकी हमला किया गया था। तो उसके बाद हमारी सेनाओं ने Operation Sindoor की शुरुआत की। हमने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों और उनके सरपरस्तों को नेस्तनाबूत किया, और दुनिया को यह बताया, कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए, किसी भी हद तक जा सकता है। Operation Sindoor के माध्यम से, हमने दुनिया को बताया, हमारी नारी शक्ति के सिन्दूर की रक्षा करने के लिए, हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

आज इस रक्तदान यात्रा में, हम उसी “सिंदूर” का एक और आयाम देख रहे हैं। Operation Sindoor वीरता का आयाम था, और ये सिन्दूर महारक्तदान यात्रा, करुणा का आयाम है। तब हमने सीमा के पार जाकर, यह ensure किया था, कि भारत की संतानों पर हाथ उठाने वालों का अंजाम बुरा होगा। और आज हम अपनी सीमा के अंदर ही, अपने ही रक्त से यह ensure कर रहे हैं, कि देश की सेवा में घायल हुआ एक भी सैनिक, रक्त की कमी से न जूझे।

और इस संदर्भ में, आज यहाँ जो एकता मुझे दिख रही है, वह तो और भी incredible है। यहाँ उपस्थित सभी लोग, अलग-अलग परिवारों से, अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमियों से, और अलग-अलग खेल विधाओं से आए हैं। और जब आप blood donate करेंगे, तो आप में से आपको यह भले न पता चले, कि आपका blood भविष्य में किसकी धमनियों में प्रवाहित होगा। लेकिन एक चीज़ आपको पूरे भरोसे के साथ मालूम रहेगी, वह यह, कि जहाँ भी आपका रक्त जाएगा, वह एक इंसान होगा। और वह इंसान एक भारतीय सैनिक होगा, या किसी सैनिक के परिवार का कोई सदस्य होगा। यही भरोसा, यही विश्वास, भारत की आत्मा है। यही “वसुधैव कुटुम्बकम्” की जीवंत अभिव्यक्ति है। इस पूरी प्रक्रिया में दाता और प्राप्तकर्ता, दोनों ही राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।

मैं सभी नागरिकों, विशेषकर युवा साथियों से आग्रह करूँगा, कि हम blood donation को एक आयोजन नहीं, एक culture बनाएँ। 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के सौ वर्ष मनाएगा, तब हमारा सपना केवल एक विकसित अर्थव्यवस्था का नहीं होना चाहिए, हमारा सपना एक ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए, जहाँ हर कोई स्वस्थ हो, सुरक्षित हो। और यदि कोई जरूरत पड़े, तो उसके पास रक्त जैसे बहुमूल्य द्रव्य का भी संचयन हो। स्वस्थ रहने के लिए तो हमारे प्रधानमंत्री जी ने, Khelo India और Fit India के माध्यम से देश को vision दिया ही है। हम सभी को, ख़ासकर युवाओं को उनका अनुसरण करना चाहिए। क्योंकि जितना हम fit रहेंगे, उतना ही हम समाज के लिए asset बनकर भी रहेंगे, और तभी हम रक्तदान जैसा पुनीत कार्य भी कर पाएँगे।

मैं इस अवसर पर पुनः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे जी, शिवसेना क्रीड़ा सेना के चंद्रहार पाटिल जी और उनके साथ आए पूरे प्रतिनिधिमंडल का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आपके नेतृत्व ने इस नेक कार्य को एक जनांदोलन का रूप दे दिया है।

मैं Surgeon Vice Admiral आरती सरीन जी, उनकी पूरी टीम, और Base hospital, दिल्ली कैंट के कमांडेंट, मेजर जनरल विशाल चौधरी, और यहाँ के प्रत्येक कर्मचारी को, इस आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। आप सभी डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ़, हमारी सेनाओं के health की backbone हैं। आप सभी हमारी सेनाओं की बड़ी ताकत हैं। आप सभी इसी प्रकार राष्ट्र सेवा में रत रहेंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

इस अवसर पर अधिक कुछ न कहते हुए, आप सभी को इस पुनीत कार्य के लिए बहुत-बहुत बधाई देते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

धन्यवाद, जय हिन्द!