कारगिल की हर चोटी भारतीय सेना के शौर्य की गवाह है: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech on 27th Kargil Vijay Diwas at Kargil War Memorial (Ladakh).

सर्वप्रथम मैं कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारत माता के उन जाँबाज सपूतों को नमन करता हूँ, जो मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटे।

मैं ऑपरेशन विजय की सफलता के 26 वर्ष पूरे होने पर समस्त देशवासियों को बधाई देता हूँ।

साथियों, जो तिरंगा कारगिल war memorial पर इतनी शान से लहरा रहा है, इसकी आन, बान और शान की एक बहुत बड़ी कीमत है। आज से ठीक 27 वर्ष पूर्व, 1999 की इसी जुलाई में, हमारी मातृभूमि पर एक कायरतापूर्ण और कुटिल हमला हुआ था। पाकिस्तान ने, अपनी सेना के घुसपैठियों के माध्यम से, छल-बल और deceit का सहारा लेते हुए, हमारी चोटियों पर कब्ज़ा कर लिया था। ये वो चोटियाँ थीं, जो सर्दियों में खाली रहती थीं, और दुश्मन ने उसी संधिकाल का फायदा उठाया। लेकिन दुश्मन, हमारी सेना के शौर्य और संकल्प की ऊँचाई को भाँपने में चूक गया। हमारे जवानों ने सिर्फ पहाड़ की ऊँचाइयों को ही नहीं, बल्कि मानवीय सीमाओं की हर परिभाषा को भी पार करके दिखाया।

18,000 से 20,000 फीट की ऊँचाई। जहाँ तापमान, रात को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। जहाँ ऑक्सीजन की भारी कमी हो, जहाँ साधारण इंसान का जीवित रहना ही एक चुनौती है। और इसके ऊपर एक और चुनौती थी, strategic disadvantage. यानि दुश्मन ऊपर, बंकरों में सुरक्षित बैठा था, और हमारे जवानों को, सीधी खड़ी चढ़ाई चढ़कर, उनकी गोलियों की बौछार का सामना करते हुए, नीचे से ऊपर की ओर आक्रमण करना था। Military Science की हर किताब में, यह एक असंभव सा ऑपरेशन था। लेकिन हमारे जवानों के शौर्य के सामने, हर किताबी ज्ञान छोटा पड़ गया।

और हमारी इस विजय का मूल्य, हमारे 500 से अधिक वीर सपूतों ने अपना अनमोल जीवन देकर चुकाया। मुझे अच्छे से याद है, उस दौर में, जब हमारे बलिदानियों के पार्थिव शरीर, तिरंगे में लिपटे हुए, उनके गाँवों और शहरों में पहुँच रहे थे, तो उस समय जो करुणा और गौरव का मिलाजुला भाव उभरा था, वह भुलाए नहीं भूलता है। कोई नई-नवेली दुल्हन थी, जिसके हाथों की मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था, लेकिन उसके माथे का सिन्दूर धूल गया। कोई माँ थी, जो अपने लाल के लौटने की राह देखते-देखते, अपनी आँखों की ज्योति खो बैठी। किसी के बच्चे ने तो अपने पिता का चेहरा सिर्फ तस्वीरों में ही देखा था।

उन बलिदानियों की उम्र, 22, 24, 26 साल थी। उनकी पूरी ज़िंदगी उनके सामने पड़ी थी, हज़ारों सपने आँखों में थे, लेकिन जब राष्ट्र ने पुकारा, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के, अपने सारे सपने, अपना पूरा भविष्य, इस देश के नाम कर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन की उन सारी परेशानियों को दरकिनार करते हुए राष्ट्र के अस्तित्व को बचाने का प्रयास किया, क्योंकि उनके मन में यह भावना थी कि-

तेरा वैभव अमर रहे माँ,

हम दिन चार रहें ना रहें।

आज भी हमारी माएँ अपने बच्चों को जब वीरता की कहानियां सुनाती है, तो उनकी कहानियों में कैप्टन मनोज पांडे, कैप्टन विक्रम बत्रा और इन जैसे न जाने कितने वीरों का जिक्र होता है। हमने इन वीरों को अपनी धरोहर बना कर रखा है, और आने वाली न जाने कितनी पीढ़ियां इनके शौर्य से प्रेरणा लेती रहेंगी।

और साथियों, यही कारण है, कि कारगिल विजय दिवस, हमारे लिए एक सामान्य दिन भर नहीं है। यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा का दिन है, जो व्यक्तिगत सफलता और राष्ट्रीय कर्तव्य के बीच का अंतर समझना चाहता है। यह दिन हमें सिखाता है कि ‘sacrifice’ और ‘service’ का भाव ही किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होता है।

साथियों, कारगिल के war memorial को जब आप देखेंगे, तो आपको पूरा भारत देखने को मिलेगा। उन बलिदानियों में आपको हिमाचल, नागालैंड, मेघालय, तमिलनाडु, और भारत के हर क्षेत्र का नाम देखने को मिलेगा। उनमें आपको मंदिर जाने वालों का नाम देखने को मिलेगा। वहाँ मस्जिद जाने वालों का नाम देखने को मिलेगा। तो वहीं गुरुद्वारे और गिरिजाघरों में जाने वालों का भी नाम देखने को मिलेगा।

इन तमाम विविधताओं के बावजूद, इन बलिदानियों का ख़ून एक ही रंग का है। और यह ख़ून इसी एक मिट्टी में गिरा है। जो लोग इस देश को तोड़ने के सपने देखते हैं, उन्हें एक बार इस दीवार को देखना चाहिए। यह दीवार अपने आप में उनके दुःस्वप्नों का जवाब है।

साथियों, हमारे सैनिकों ने, हमेशा अपने शौर्य का परिचय दिया है। अभी हाल ही में हमने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का एक वर्ष पूरा किया । उस Operation के दौरान, हमारी सेनाओं ने, आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों को ऐसा जवाब दिया है, जिसे वो आजीवन नहीं भूल पाएँगे। Operation Sindoor ने यह साफ कर दिया, कि अब भारत को आतंकवाद के सहारे डराने का सपना देखने वालों का अंजाम क्या होगा। भारत पाकिस्तान के हर misadventure का जवाब उसकी कल्पना से कहीं अधिक कठोर तरीके से देने की क्षमता रखता है। और मैं इस मंच से, यह साफ़ संदेश देना चाहता हूँ, कि भारत की संप्रभुता की ओर बढ़ने वाले हर नापाक कदम का यही अंजाम होगा।

साथियों, हमारा intention साफ है, कि अब पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी, और अगर बात होगी भी तो सिर्फ PoK पर होगी जो कि भारत का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध तरीके से कब्जा किया था।

पाकिस्तान ने इस समय आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति का हिस्सा बना लिया है। वहाँ पर Military और Militants के बीच का फर्क मिट चुका है। वहाँ की सेना, आतंकवादी संगठनों को संरक्षण ही नहीं देती है, उनके साथ मिलकर काम भी करती है। इसलिए हमने Operation Sindoor के समय ही साफ कर दिया है, कि भारत अब आतंकियों और उनका पोषण करने वाली सरकारों को अलग-अलग नहीं देखेगा।

साथियों कारगिल युद्ध को बीते हुए लगभग 27 साल हुए। और इतने वर्षों में आज भारत और पाकिस्तान के रास्ते साफ़-साफ़ अलग दिख रहे हैं। आज भारत Innovation के नए रास्ते खोज रहा है, तो पाकिस्तान Infiltration के नए रास्ते खोज रहा है। भारत Chip Design कर रहा है, तो पाकिस्तान Terror Design में लगा हुआ है। भारत Start-up Eco-system खड़ा कर रहा है, तो पाकिस्तान Terror Eco-system खड़ा कर रहा है। भारत Semi-conductors बना रहा है, तो पाकिस्तान Suicide Bombers तैयार कर रहा है। भारत Space Missions के लिए जाना जा रहा है, तो पाकिस्तान Proxy Missions चला रहा है। भारत अंतरिक्ष में Satellites भेज रहा है, तो पाकिस्तान आज भी आतंकियों को सीमाओं के पार भेजने में लगा है। भारत दुनिया को Software दे रहा है, तो पाकिस्तान दुनिया को Sleeper Cells दे रहा है। भारत Data Centres बना रहा है, तो पाकिस्तान Radical Centres बना रहा है। भारत UPI से दुनिया को जोड़ रहा है, तो पाकिस्तान हवाला से आतंकवाद को जोड़ रहा है। यानि हमारे रास्ते अलग-अलग हैं, ऐसे में अगर पाकिस्तान अपने घटिया मंसूबे लेकर हमारी समृद्धि के रास्ते में रोड़ा लेकर आता है, तो उसे करारा जवाब देने के लिए भी हमारी सेनाएँ तैयार बैठी हैं।

साथियों, आजकल आप देख रहे होंगे, दुनिया के अनेक क्षेत्रों में conflict चल रहे हैं। कई जगहों पर कई वर्षों से युद्ध चल रहा है। Middle east और Russia-Ukraine में चल रहे conflict भी वर्षों से चल रहे हैं। ऐसे लंबे संघर्ष केवल सेनाओं की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और पूरे राष्ट्र की क्षमता, उसके धैर्य तथा संकल्प की भी परीक्षा लेते हैं।

आज भारत के पास एक capable और professional armed force है। इसके साथ-साथ हमारे पास विभिन्न Reserve Forces तथा अन्य सहयोगी व्यवस्थाएँ भी हैं। लेकिन मेरा फिर भी मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दीधारी सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक दायित्व भी है। प्रत्येक नागरिक के भीतर राष्ट्र प्रथम का भाव, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सदैव जागृत रहनी चाहिए।

मैं यह नहीं कह रहा कि हर नागरिक को सैनिक बनना है, लेकिन हर नागरिक में सैनिक जैसी चेतना अवश्य होनी चाहिए। यदि कभी राष्ट्र ऐसी परिस्थिति का सामना करे, जहाँ देश को अपने नागरिकों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग की आवश्यकता हो, तो प्रत्येक भारतीय मानसिक रूप से, नैतिक रूप से और जरूरी training के साथ राष्ट्र की रक्षा के लिए आगे आने को तैयार रहे। जिस तरह से हर सैनिक पहले एक भारतीय होता है; उसी तरह प्रत्येक भारतीय के भीतर भी एक सैनिक का साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति सदैव जीवित रहनी चाहिए।

अभी कुछ ही दिन पहले, दिल्ली में National War Memorial से, मैंने शौर्य विजय यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी। वो riders अपने साथ National War Memorial की पवित्र मिट्टी का एक कलश लेकर आए, और आज वही मिट्टी कारगिल war memorial पर अर्पित हो रही है। मैं उन riders से भी कहूँगा, कि आपकी यह bike rally भी उसी एकता की भावना का प्रतीक है, जिस भावना को, हमारे सैनिक अपने अंदर धारण किये हुए होते हैं।

साथियों, जैसा कि आप सब जानते हैं, हम सब 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण की ओर अग्रसर हैं। यह संकल्प सिर्फ economic prosperity का नहीं है, बल्कि यह strategic power, cultural pride और social harmony का भी संकल्प है। और यह संकल्प, तभी सिद्ध होगा, जब राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में, हम सब कारगिल के शहीदों जैसी निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का परिचय दें।

हमारी सरकार, हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। कारगिल युद्ध ने हमें सिखाया था, कि हमें अपनी सीमाओं पर हर मौसम में, हर परिस्थिति में, हमेशा सजग रहना होगा। और इसलिए हमने न केवल अपनी सीमाओं पर बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया है, बल्कि अपनी सैन्य ताकत को भी समय के अनुसार आधुनिकतम बनाया है। चाहे वह श्रद्धेय अटल जी के समय शुरू की गई strategic road projects की बात हो, या आज सीमाओं पर बन रही tunnels और bridges की, हमने हर वो काम किया है, जो हमारे जवानों की operational efficiency को बढ़ा रहा है।

आज हम न केवल ज़मीन पर, बल्कि space और cyber domain में भी उतने ही सक्षम हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत, हम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

साथियों, मुझे इसी संदर्भ में परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय की पंक्तियाँ याद आ रही हैं। उन्होंने एक बार कहा था, “अगर मौत मेरे कर्तव्य को पूरा करने से पहले आ गई, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं मौत को ही मार दूंगा।” यह वाक्य अपने आप में इस बात को दिखाता है, कि हमारे सैनिक अपने कर्तव्य के सामने मौत को भी कुछ नहीं समझते हैं।

इसी तरह कैप्टन विक्रम बत्रा ने भी कहा था “तिरंगा लहराकर आऊंगा या उसमें लिपटकर, पर आऊंगा जरूर।” लोग मुसीबतों से बचते हैं। परेशानियों से भागते हैं। किसी भी खतरे से जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहते हैं। लेकिन कैप्टन विक्रम बत्रा ने एक चोटी पर कब्जा करने के बाद कहा था ‘ये दिल मांगे मोर’। यानि रुक कर बैठ जाना, हमारे जवानों की फ़ितरत नहीं है।

और आज यही भावना हमारी रक्षा नीति में भी दिखती है। जब हमारी सरकार बनी थी तो भारत 65 से 70 प्रतिशत Defence Equipment, Import करता था। लेकिन आज इसके ठीक विपरीत हम 65 प्रतिशत Defence Equipment भारत में ही Manufacture कर रहे हैं। लेकिन हम वहीं नहीं रुके।

आज हमारे सैनिकों के पास Indigenously Developed Air Defence Control System ‘आकाशतीर’ है। हमने Next Generation आकाश मिसाइल बना ली है। हमारे पास Pinaka Multi-barrel Rocket Launcher है, Air-to-Air missile, ASTRA है, प्रचंड और ध्रुव जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टर हैं, तेजस लड़ाकू विमान है, अर्जुन टैंक है और आधुनिक drones तथा counter drones Systems हैं। भारत का पहला स्वदेशी Aircraft Carrier आईएनएस विक्रांत भी भारतीय नौसेना में शामिल हो गया है।

लेकिन अभी भी ‘ये दिल मांगे मोर’। हम इतने पर नहीं रुकेंगे। आगे भी हम भारत में ही और अधिक Modern Weapons, Next-Generation Fighter Aircrafts, Submarines, और Missiles बनाने के लिए कार्य करते रहेंगे।

लेकिन साथियों, सिर्फ सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। राष्ट्र की सुरक्षा, सिर्फ सीमाओं पर तैनात जवानों का काम नहीं है; यह हर नागरिक का कर्तव्य है। कारगिल ने हमें दिखाया, कि जब देश पर संकट आया, तो जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा की सारी दीवारें ढह गईं। यह भावना, यह एकता, यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

साथियों, मैं सरकार की तरफ से यह आश्वासन देता हूँ, कि भारत के सैनिकों का कल्याण और हमारे राष्ट्र की सुरक्षा, हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। वह समय गया जब दिल्ली में बैठे हुए लोग सेना को प्राथमिकता नहीं देते थे। आज दिल्ली में भी वैसे लोग बैठे हुए हैं जो भारत की सुरक्षा के लिए सेना को घर में घुसकर मारने की भी खुली छूट दे देते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारी सेना के पास पहले यह क्षमता नहीं थी। हमारी सेना पहले भी इतनी ही शक्तिशाली थी, बस कमी थी तो एक राजनीतिक इच्छाशक्ति की। और मैं आप लोगों को यहां इस मंच से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि केंद्र सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं है। सरकार पूरी तन्मयता से अपनी सेना के साथ खड़ी है। देश की जनता और देश की संसद अपने सैनिकों पर पूरा भरोसा करती है। और हम यह जानते हैं कि जब तक आप सीमाओं पर हमारी रक्षा कर रहे हैं, भारत की ओर आंख उठाकर देखने की हिम्मत भी, किसी के अंदर नहीं हो सकती है।

केवल कारगिल ही नहीं, बल्कि आजादी के बाद से आज तक जब-जब राष्ट्र के सामने कोई चुनौती आई है, तब-तब आप सभी वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान से भारत का गौरव, विश्व पटल पर और अधिक ऊँचा किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी आगे भी इसी समर्पण, निष्ठा और पराक्रम के साथ मातृभूमि की सीमाओं की रक्षा करते रहेंगे।

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आप सभी को “ऑपरेशन विजय” की गौरवगाथा और कारगिल विजय दिवस की वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।

जय हिन्द !