हमारे सैनिकों के भीतर यह अदृश्य शक्ति, यह आत्मबल और यह राष्ट्रभक्ति जीवित है: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech at Shaurya Bhoj in Dras, (Kargil).

सबसे पहले, मैं भारत माता के उन जाँबाज सपूतों को नमन करता हूँ, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए, अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया।

साथियों, कल कारगिल विजय दिवस है। एक सैनिक के रूप में तो, स्वाभाविक है कि आपके लिए कल का दिन बहुत बड़ा दिन है। लेकिन एक नागरिक के रूप में, हम सबके लिए भी वह दिन बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है।

आज हम सब एक खुली हवा में सर उठा के साँस इसलिए ले पा रहे हैं, क्योंकि तब कारगिल में, minus temperature में भी, हमारे सैनिकों ने ऑक्सीजन की कमी के बावजूद, अपनी बंदूकें नीची नहीं की थी।  आज कश्मीर में भारत का ध्वज पूरे गौरव के साथ इसलिए लहरा रहा है, क्योंकि 1999 में कारगिल के युद्ध में भारत के सैनिकों ने, अपने शौर्य का परिचय देते हुए, दुश्मनों की छाती में अपना तिरंगा लहरा दिया था।

और आज आप सभी सैनिकों के बीच उपस्थित होकर, मैं जिस गर्व की अनुभूति कर रहा हूं, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। आपलोगों के साथ कुछ समय व्यतीत करना, मेरे लिए हमेशा एक सुखद अनुभव होता है।

मैं जब भी आप सबके बीच आता हूं, आप सबसे मिलता हूं, तो आपके अंदर एक अलग प्रकार का उत्साह मुझे दिखता है। आप सब इतनी मुश्किलें सहते हैं, बावजूद इसके, आपकी आंतरिक शक्ति इतनी मज़बूत है कि वो मुश्किलें आपका कुछ बिगाड़ नहीं पाती। यही आंतरिक शक्ति आपको हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

मुझे पूरा विश्वास है, कि जब तक हमारे सैनिकों के भीतर यह अदृश्य शक्ति, यह आत्मबल और यह राष्ट्रभक्ति जीवित है, तब तक दुनिया की कोई भी ताकत भारत की ओर बुरी नज़र उठाने का साहस नहीं कर सकती। आपके इसी अदम्य साहस और अटूट संकल्प के कारण, देश का प्रत्येक नागरिक निश्चिंत होकर अपने सपनों को साकार कर पा रहा है।

साथियों, मैं लगभग 50 वर्षों से, सार्वजनिक जीवन में कार्यरत हूँ। कई पदों पर मैंने अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। हमेशा सुरक्षा बलों के साथ मेरा एक विशेष लगाव रहा है, चाहे वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में रहा हो, या फिर केंद्र सरकार के गृह मंत्री के रूप में रहा हो। लेकिन एक रक्षा मंत्री के रूप में, अपने सुरक्षा बलों को, अपनी सेनाओं को, और अपने जवानों को, नज़दीक से जानने का जो अवसर मुझे मिला, उससे मुझे बहुत सारी चीज़ें सीखने को मिलीं।

एक रक्षा मंत्री के रूप में, आए दिन मुझे अपनी सेनाओं से संबंधित, अलग-अलग कार्यक्रमों में जाना होता है। इस दौरान पिछले कुछ सालों में, मुझे आपकी बहुत सी परंपराओं को नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला है। और उन सब में जो चीज़ मेरे दिल को सबसे ज़्यादा छूती है, वह बड़ा खाना ही है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि यही एकमात्र ऐसा स्थान है, जहाँ अधिकारी और जवान दोनों एक साथ, समानता के साथ बैठकर भोजन करते हैं। दोनों को एक ही प्रकार का भोजन परोसा जाता है। और यह कोई छोटी बात नहीं है, यह अपने आप में teamwork का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। यह इस बात का प्रमाण है कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी, एक-दूसरे का सम्मान करते हुए, किस प्रकार सभी की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जा सकता है।

आज दुनिया की बड़ी-बड़ी companies, बड़े-बड़े institutions, इस बात पर लाखों रुपये ख़र्च करते हैं, कि team-building कैसे हो। बड़े-बड़े experts बुलाते हैं। कार्यशालाएं कराते हैं। presentation दिखाते हैं। और आप लोग यह काम, हमेशा से इस बड़ाखाना की परम्परा के माध्यम से करते आ रहे हैं।

साथियों, हम सब इस समय भौगोलिक रूप से ठीक-ठाक ऊँचाई पर मौजूद हैं। जब मैं आपके बीच इतनी ऊँचाई पर मौजूद हूँ, तो मुझे एक बात बहुत गहराई से महसूस हो रही है। आप सबके बीच यह ऊँचाई, मुझे केवल भौगोलिक नहीं लग रही है, यह ऊँचाई, केवल पहाड़ों और बर्फ से ढकी चोटियों की ऊँचाई नहीं लग रही है। बल्कि यह ऊँचाई आपके भीतर के आत्मविश्वास की है, मानवता की है, और देश के लिए कुछ कर गुज़रने की अदम्य भावना की है।

आपने ग़ौर किया होगा, जब हम किसी हवाई जहाज़ में बैठते हैं और धीरे-धीरे ऊपर उठते हैं, तो ज़मीन पर बनी हर सीमा धुंधली होने लगती है। पहले हमारे गाँव की सरहद, फिर मोहल्ले की, फिर क़स्बे की, फिर ज़िले की और फिर प्रदेश तक की सीमाएँ एक-एक करके मिटती चली जाती हैं। एक ऊँचाई ऐसी आती है जहाँ से पूरा देश एक मालूम पड़ता है। ठीक यही बात मानव के जीवन पर भी लागू होती है। जैसे-जैसे इंसान का मन ऊँचा उठता जाता है, वैसे-वैसे जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा, इन सबकी बनावटी दीवारें ढहने लगती हैं। और आप सब उसी ऊँचाई के जीते-जागते उदाहरण हैं।  यह जो सीमाओं से परे उठने की क्षमता है, यही आपकी असली ताक़त है, और यही ताक़त कारगिल जैसी लड़ाइयों में हमें विजय दिलाती है।

जब मैं इस भावना की ऊँचाई की बात कर रहा हूँ, तो मेरे जेहन में आप सबके परिवार जन भी आते हैं। जब मैं आप लोगों से मिलता हूँ, तो मैं प्रत्यक्ष रूप से आपके परिजनों से भी मिल ही रहा होता हूँ। सीमा पर तैनात हर जवान के पीछे उसके परिवार का भी उतना ही बड़ा योगदान होता है, जितना खुद उस जवान का। आप यहाँ दुश्मनों से हमारी रक्षा कर रहे होते हैं, तो वहाँ घर में आपके परिजन एक अलग तरह की लड़ाई लड़ रहे होते हैं। आज आप सबके बीच भोजन पर बैठकर, मैं आपके परिवारजनों को भी दिल से नमन करना चाहता हूँ।

साथियों, कल जब हमारे मन में कारगिल के विजय को लेकर गौरव का भाव होगा, तो हमें यह याद रखना है, कि आज भी हमारे सामने चुनौतियाँ कम नहीं हुई हैं। आज भी हमारे दुश्मन की नीयत नहीं बदली है।  वो आज भी proxy war, और घुसपैठ जैसे गंदे हथकंडे अपनाता है। मुझे पूरा विश्वास है, कि हमारी सेना ऐसी किसी भी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है।

और हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, हमारी सरकार ने भी इस बात पर पर्याप्त ध्यान दिया है, कि हमारे सैनिकों का मनोबल कभी कम न हो। हमने आधुनिकीकरण पर बहुत बल दिया है। आपको संसार के सर्वश्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र, सर्वश्रेष्ठ उपकरण और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण मिले, यह हमारी प्रतिबद्धता है। और मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है, कि आप लोग भी हर नवीन तकनीक को अपनाकर, सदैव एक कदम आगे रहते हैं।

आप सबके साहस की चर्चा हमारे भारत के अंदर तो होती रहती है, लेकिन मैं जब भारत से बाहर जाता हूं, तो भी मुझे कई लोगों से सुनने का अवसर मिलता है, कि भारतीय सैनिक बड़े साहसी होते हैं। और आपके बीच आके आप सभी वीर जवानों का जो साहस और जोश मैं महसूस करता हूँ, वह अतुलनीय होता है। मैं आप सभी को आश्वस्त करता हूं, कि जिस तरह से आप राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तत्पर हैं, उसी तरह से सरकार भी हमारी सेनओं के कल्याण के लिए सदैव तत्पर है।

साथियों, यह सदी हमारी है, आने वाला वक्त हमारा है। और प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हमने जिस प्रकार से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है, मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सेना भी आने वाले समय में निश्चित रूप से दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेना होगी। मुझे यह भी विश्वास है,कि आप लोगों के सहयोग से, हम इस उद्देश्य को भी जल्द से जल्द प्राप्त कर लेंगे।

देश को आप पर गर्व है। आपके समर्पण और शौर्य से ही यह राष्ट्र सुरक्षित है, और आपकी निष्ठा से ही इसका भविष्य उज्ज्वल बनेगा। मेरा विश्वास और मेरी शुभकामनाएँ, सदैव आपके साथ हैं। अंत में, एक बार फिर, आप लोगों को भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ देते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

जय हिन्द