Text of RM’s speech at the flag-in Ceremony of the firs- ever Tri-Services All Women Circumnavigation Sailing Expedition.
सबसे पहले मैं, first ever Tri-services All-women Circum-navigation Sailing Expedition, ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ के इस ऐतिहासिक अभियान की सफल पूर्णता पर, हमारी तीनों वीर महिला अधिकारियों, पूरी expedition team, भारतीय नौसेना, थल सेना, वायु सेना तथा इस अभियान से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मी को हृदय से बधाई देता हूँ।
आज मेरा मन था कि मैं स्वयं आप सबके बीच उपस्थित होकर इस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बनूँ। किन्तु कुछ कारणों से मैं व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सका। यद्यपि मैं आपसे आज virtual माध्यम से जुड़ा हूँ, लेकिन मेरा मन, और मेरी शुभकामनाएँ आप सबके साथ हैं।
कुछ महीने पहले, जब मैंने Indian Army Sailing Vessel, यानी IASV त्रिवेणी को इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए Flag Off किया था, तब मैंने कहा था कि आप केवल समुद्र की यात्रा पर नहीं जा रही हैं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास की यात्रा पर निकल रही हैं। आज, जब आप सभी officers, सुरक्षित लौटकर आई हैं, तो मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि आपने केवल पृथ्वी की परिक्रमा नहीं की, बल्कि करोड़ों भारतीयों के हृदयों को भी गर्व से भर दिया है।
आज का यह समारोह केवल Flag In Ceremony नहीं है। यह भारत के संकल्प का स्वागत है। यह भारतीय नारी के साहस का अभिनंदन है। यह Tri-Services Jointness की सफलता का उत्सव है। और यह उस नए भारत का उत्सव है, जो चुनौतियों को देखकर रुकता नहीं, बल्कि उन्हें पार करके इतिहास लिखता है। कुछ यात्राएँ बस दूरी नहीं नापतीं, वे इतिहास लिखती हैं। ‘IASV त्रिवेणी’ की यह यात्रा भी ऐसी ही यात्रा है।
जब यह अभियान प्रारम्भ हुआ था, तब आपके सामने लगभग 22,000 nautical miles की लंबी समुद्री यात्रा थी। ‘Cape of Good Hope’ की प्रचंड लहरें थीं, ड्रेक पैसेज की कठिन परिस्थितियाँ थीं, महीनों तक समुद्र के बीच अकेलापन था, अनिश्चित मौसम था और प्रकृति की कठिनतम परीक्षाएँ थीं। मुझे बताया गया, कि यह vessel मौसम की समस्याओं के चलते लगभग 72 घंटों तक एक जगह फंसा भी रहा, और एक बार emergency repair के चलते इसका route भी थोड़ा divert करना पड़ा।
लेकिन आज आप सभी यह सिद्ध करके लौटी हैं, कि किसी भी तूफ़ान से बड़ा यदि कुछ है, तो वह मनुष्य का साहस है। समुद्र की लहरें ऊँची अवश्य हो सकती हैं, लेकिन भारत की बेटियों का हौसला उनसे कहीं अधिक ऊँचा है।
मुझे आशा ही नहीं, दृढ़ विश्वास था कि आप सफल होंगी, क्योंकि आपकी शक्ति केवल आपके प्रशिक्षण में नहीं थी; आपकी शक्ति आपके अनुशासन, आपकी टीम भावना और आपके राष्ट्रप्रेम में थी।
इतिहास इस अभियान को केवल एक maritime expedition के रूप में याद नहीं करेगा। इसे उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जब भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों ने एक ही ध्वज, एक ही संकल्प और एक ही उद्देश्य के साथ, पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की शक्ति उसकी एकता में है।
आज जब पूरा विश्व Joint Operations, Integrated Commands और Multi-domain Warfare की बात कर रहा है, तब IASV त्रिवेणी ने समुद्र के बीच उस Jointness को जीकर दिखाया है। जहाँ समन्वय होता है, वहाँ सामर्थ्य कई गुना बढ़ जाती है। और जहाँ तीनों सेनाएँ साथ चलती हैं, वहाँ विजय स्वयं रास्ता बना लेती है।
साथियों, इस अभियान का यह अत्यंत प्रेरणादायक पक्ष है, कि इस पूरे अभियान का नेतृत्व हमारी महिला अधिकारियों ने किया।
आज भारत की नारी केवल अवसर की प्रतीक्षा नहीं करती, बल्कि अवसरों का निर्माण करती है। वह केवल भागीदारी नहीं करती, बल्कि नेतृत्व करती है। वह केवल इतिहास पढ़ती नहीं, बल्कि इतिहास रचती भी है। आज देश की प्रत्येक बेटी, IASV त्रिवेणी की इस यात्रा में अपना भविष्य देख रही है।
आज देश के प्रत्येक माता-पिता यह अनुभव कर रहे होंगे कि उनकी बेटियाँ भी विश्व के सबसे कठिन अभियानों का नेतृत्व कर सकती हैं।
आप जहाँ-जहाँ गईं, वहाँ आपने केवल भारत का राष्ट्रीय ध्वज ही नहीं पहुँचाया, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी परिचय कराया।
विभिन्न देशों के बंदरगाहों पर आपके संवाद, आपके व्यवहार और आपके व्यक्तित्व ने भारत की उस सॉफ्ट पावर को भी मजबूत किया, जिसकी आज पूरी दुनिया प्रशंसा करती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो IASV त्रिवेणी केवल एक समुद्री पोत नहीं रहा। यह भारत की समुद्री कूटनीति का चलता-फिरता दूत बन गया।
कुछ राष्ट्र अपनी बात शब्दों से कहते हैं। भारत अपने मूल्यों, अपने आचरण और अपने साहस से दुनिया का विश्वास जीतता है।
साथियों, IASV त्रिवेणी आत्मनिर्भर भारत की भी एक जीवंत पहचान है। देश में डिज़ाइन और निर्मित इस पोत ने पूरी दुनिया के समुद्रों में भारत की तकनीकी क्षमता, हमारे नवाचार और हमारे आत्मविश्वास का परिचय दिया है। यह Vessel, भारत की Engineering Excellence, Indigenous Capability, और Strategic Confidence का चलता-फिरता प्रमाण था। त्रिवेणी ने जितनी समुद्री मील तय की हैं, उतने ही कदम भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाए हैं।
साथियों, पिछली बार मैंने एक प्रसिद्ध पंक्ति का उल्लेख किया था, कि “Ships are the nearest things to dreams, that hands have ever made.” आज इस वाक्य का अर्थ और भी अधिक स्पष्ट हो गया है। सपने केवल देखे नहीं जाते। सपनों को अनुशासन आकार देता है, परिश्रम गति देता है और साहस उन्हें मंज़िल तक पहुँचाता है। आपकी यह यात्रा उसी सत्य का प्रमाण है।
समुद्र की विशालता आज भी उतनी ही बड़ी है, जितनी सदियों पहले थी। लेकिन मनुष्य की इच्छाशक्ति उससे कहीं अधिक विशाल है। इसीलिए इतिहास हमेशा समुद्र का नहीं, समुद्र को पार करने वालों का लिखा जाता है।
Dear officers, आप इस अभियान पर जब निकली थीं, तब मेरे समेत समस्त भारतीयों की शुभकामनाएँ आपके साथ थीं। आज जब आप लौटी हैं, तब भी मुझ समेत सभी भारतीयों का गौरव आपके स्वागत के लिए खड़ा है। आज प्रत्येक भारतीय आपके इस साहस को सलाम कर रहा है।
आपने यह सिद्ध किया है कि भारतीय सैनिक चाहे किसी भी वर्दी में हो, चाहे किसी भी सेवा का हो, उसके लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। आपने यह भी सिद्ध किया है कि भारतीय नारी यदि संकल्प कर ले, तो उसके लिए कोई क्षितिज अंतिम नहीं होता। मैं आप सभी को पुनः हृदय से बधाई देता हूँ।
आपके परिवारों को भी मेरी विशेष शुभकामनाएँ, जिन्होंने इतने लंबे समय तक धैर्य, विश्वास और गर्व के साथ आपका साथ दिया।
मैं आपकी उज्ज्वल भविष्य यात्रा, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।
इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर IASV त्रिवेणी की पूरी टीम का राष्ट्र की ओर से हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।
भारत आपकी इस उपलब्धि को सदैव गर्व के साथ याद रखेगा।
जय हिन्द!