Text of RM’s speech at the ‘Forces First Conclave’ in New Delhi.
रिपब्लिक टी.वी. द्वारा आयोजित यह ‘फोर्सेज फर्स्ट’ कॉन्वलेव भारत के सुरक्षा चक्र से जुड़े पहलुओं और पक्षों को समझने और समझाने कि दृष्टि से की गई अच्छी पहल है। इसके लिए मैं अर्नब गोस्वामी और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूँ। यह इस कॉनक्लेव का तीसरा संस्करण है, मगर मेरा इसमें First Appearance है। पहले दो कॉनक्लेव्स में व्यस्तताओं के कारण नहीं आ पाया। मगर इस बार जब अर्नब जी मुझे आमन्त्रित करने आए तो मैंने तय कर लिया था, कि इस बार ज़रूर आऊँगा। और आज मैं आपके बीच मौजूद हूँ।
साथियों, जब भी भारत की रक्षा शक्ति की चर्चा होती है, तो हमारे मन में सबसे पहले भारत की रक्षा कर रहे वीर सैनिकों की छवि उभरती है। सीमाओं पर तैनात हमारे जवान, समुद्र की अथाह गहराइयों में राष्ट्र की सुरक्षा में जुटे हमारे नौसैनिक और आकाश की ऊँचाइयों पर देश की रक्षा करने वाले हमारे वायु योद्धा, ये सभी हमारे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं। जो देश अपने सैनिकों का सम्मान करना नहीं जानता, उसका भविष्य कभी सुरक्षित नहीं हो सकता।
इसलिए जब हम Nation First की बात करते हैं तो उसके साथ-साथ ही जुड़ा हुआ है, Forces First का भाव। आज मैं आपसे रक्षा क्षेत्र से जुड़े जिन बदलावों और परिवर्तन की बात करना चाहता हूँ, वे नेशन फ़र्स्ट और फोर्सेज फर्स्ट के भाव का ही Expression और Extension है।
साथियों, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार पिछले बारह वर्षों से काम कर रही है। यह बात तो आप सब ज़रूर ही मानते होंगे कि भारत में जब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार आई है, उसके बाद से ही हमने nation first और forces first के भाव के साथ डिफेंस सेक्टर के Revival और उसकी strengthening को अपनी सबसे बड़ी priorities में से एक बनाया है।
सरकार में आने पर हमारे सामने जो सबसे बड़ी चुनौती थी वह डिफेंस से जुड़ा एक माइंडसेट बना हुआ था, उसको लेकर थी। डिफेंस को लेकर जिस लांग टर्म प्लानिंग और विज़न की ज़रूरत थी, उसका सर्वथा अभाव था। देश की रक्षा जरूरतों से जुड़े निर्णयों को लेने में टाल मटोल करने की एक प्रवृत्ति दिखती थी। देश में एक robust defence industrial complex होना चाहिए, इस पर तो पहले की सरकारों में कोई चर्चा ही नहीं होती थी। उनकी हमेशा कोशिश यही रहती थी कि भारत में बनाने के बजाय विदेशों से import कर लेंगे।
इसलिए सबसे पहला काम जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने किया है, वह है डिफेंस से जुड़े पुराने माइंडसेट को हमने बदल दिया है। हमारी सरकार ने तय किया कि भारत अपनी defence preparedness को न केवल मज़बूत करेगा बल्कि डिफेंस की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत imports पर अपनी dependency कम करेगा। साथ ही, देश में एक ऐसा defence industrial complex भी तैयार करेगा जो केवल भारत की जरूरतों को नहीं बल्कि दुनिया में भारत से defence exports की संभावनाओं को भी मज़बूत करेगा। इस नज़रिए से हमने डिफेंस सेक्टर पर काम किया है।
मेरा कहने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि हमसे पहले की सरकारों के मन में राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना को मज़बूत करने का भाव नहीं था। अंतर प्राथमिकताओं और nation first और forces first जैसे नजरिये का था। अंतर माइंडसेट का था। हमने वह सब बड़े ही प्रभावी तरीके से बदला है।
रक्षा क्षेत्र में भारत को सशक्त बनाने का जो हमारा नजरिया है, वह भारत की क्षमता पर विश्वास करने का है। लेकिन पुरानी सरकारों का जो नजरिया था, वह कहीं न कहीं भारत के potential and capability को लेकर doubtful था। वह भारत की क्षमता पर शायद उतना विश्वास नहीं करते थे, जितना हमारी सरकार करती है। मैं इसका उदाहरण आपको देना चाहूंगा, कि रक्षा क्षेत्र में भारत को मज़बूत बनाने की दिशा में हमने जो सबसे बड़ा काम किया है, वह डिफेंस इंडस्ट्रियल सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का है।
साथियों, किसी भी देश की असली ताक़त केवल उसकी सेना और सैनिकों की संख्या से नहीं मापी जाती। उसकी शक्ति इस बात से तय होती है कि संकट की घड़ी में क्या वह देश अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर सकता है। क्या उस देश में सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने वाले हथियार और नई टेक्नॉलजी मौजूद है?
यदि किसी देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक हथियार, गोला-बारूद, नेवीगेशन सिस्टम, मिसाइलें, रडार, ड्रोन और Warfare से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हों, तो उसकी strategic और Military Autonomy भी सीमित हो जाती है। हम इसको पूरी तरह बदलने की नीयत से काम कर रहे हैं।
यही कारण है कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में केवल आधुनिकीकरण नहीं किया, बल्कि एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत की है। यह परिवर्तन Dependency to Self-Reliance की ओर, और Consumer से Producer बनने की यात्रा से जुड़ा हुआ है।
साथियों, आत्मनिर्भरता एक दिन, एक महीने या एक-दो साल में नहीं हासिल होती है। यह केवल कारखाने लगाने से भी नहीं आती। जैसा कि मैंने प्रारम्भ में ही कहा कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत सोच बदलने से होती है। उससे पॉलिसी बदलती है। पॉलिसी से सिस्टम बदलता है। सिस्टम से इंडस्ट्री पर असर पड़ता है। इंडस्ट्री यानि उद्योग बदलते हैं तो उत्पादन बढ़ता है। और जब उत्पादन बढ़ता है, तब राष्ट्र आत्मविश्वास से भर उठता है। यानि यह एक ऐसा चक्र है, जिसको घुमाए बिना भारत की रक्षा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाना संभव ही नहीं है।
इसी नई सोच के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों का हमने एक लंबा सिलसिला प्रारम्भ किया है। सबसे पहले उन नियमों को बदला गया जो वर्षों से भारत के डिफेंस प्रोडक्शन के विकास की गति रोक रहे थे। उदाहरण के लिए पहले देश में बहुत से ऐसे products थे, जिनको बनाने के लिए डिफेंस प्रोडक्शन का लाइसेंस लेना पड़ता था। हमने वह लिस्ट घटा दी। रक्षा उत्पादन के लिए जो लाइसेंस व्यवस्था थी, उसको भी हमने काफ़ी simplify कर दिया है। पहले की तुलना में लाइसेंस के लिए मंजूरी देने वाली एजेंसियों की संख्या कम की गई। Defence Manufacturing के लिए ‘Ease of Doing Business’ को नई प्राथमिकता दी गई। आज परिणाम हमारे सामने है।
इसका बड़ा परिणाम देश में एक Dynamic Defence Ecosystem के निर्माण के रूप में दिखाई दिया। जहाँ कुछ वर्ष पहले रक्षा क्षेत्र में बहुत कम कंपनियाँ काम कर रही थीं, वहीं आज पाँच सौ से अधिक कंपनियाँ Defence Manufacturing का काम कर रही हैं और सैकड़ों नए औद्योगिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। और मैं तो यहां तक कहता हूं कि आज भारत में Defence Manufacturing की यूनिट लगाना किसी भी अन्य सामान्य इंडस्ट्री जैसा ही है। यह बदलाव Policy Making का है।
नीतियाँ बदलने के साथ-साथ सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया। निर्णय यह कि भारत की सेना के Modernisation का फायदा भारत के उद्योगों को मिले। इसीलिए Defence Procurement में व्यापक सुधार किए गए। हमने नए Defence Procurement Manual बनाये। नई Defence acquisition Procedure के माध्यम से ‘Buy Indian-IDDM’ जैसी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट का 75 फीसदी भाग भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए सुरक्षित किया गया। वैसे आप लोगों की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि इस साल हम नया DAP लेकर आ रहे हैं, जिसके कारण देश में Defence Production को एक नई रफ़्तार और ताक़त मिलेगी।
मुझे यह देखकर भी बड़ी ख़ुशी होती है, कि इस पूरे परिवर्तन की प्रक्रिया में Public Sector और Private Sector, दोनों कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। पिछले बारह वर्षों में मोदीजी के नेतृत्व में, हमने Public sector और Private sector के बीच की खाई को, लगभग पाट दिया है।
आज हम ‘Whole of Government Approach’ के साथ ही नहीं, बल्कि ‘Whole of Country Approach’ के साथ चल रहे हैं। और मैं तो कहता हूँ, कि अब तो हम ‘Whole of the People Approach’ तक भी पहुँच गए हैं। चाहे Individual Innovator हो, बड़ी कंपनी हो, स्टार्टअप हो, या MSME हो, हर कोई राष्ट्र रक्षा के इस महायज्ञ में अपनी Nation First और Forces First की भावना से आहुति दे रहा है। यह जो Public-Private Partnership का मॉडल हमने अपनाया है, उसने Defence Manufacturing को एक closed environment से निकाल कर, जन आंदोलन बना दिया है।
मुझे यह कहते हुए ख़ुशी होती है, कि हमारी सेनाओं की तैयारी, हमेशा Up to date, Up to mark, and up to standard रहती है। और इसके सबसे बड़े उदाहरण के रूप में तो, Operation Sindoor ही हमारे सामने है। इस Operation के 1 वर्ष पूरे हो चुके हैं। जब भी Operation Sindoor की बात आती है, तो मुझे अपनी सेनाओं का शौर्य याद आता है। आतंकियों और उनके सरपरस्तों को, जो मुंहतोड़ जवाब हमारे सैनिकों ने दिया, उससे पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा हो गया।
साथियों, आतंकवाद के ख़िलाफ़ भी हमारी सरकार ने पूरी दुनिया के सामने अपने बदले हुए नज़रिए को स्पष्ट किया है। आतंकवाद के विरुद्ध zero tolerance हमारे लिए केवल statement नहीं है बल्कि Line of Action है। आतंकवाद के ख़िलाफ़ हम दरवाज़े पर ही नहीं बल्कि घर में घुस कर मारेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सारी दुनिया ने यह देख लिया है।
हमारी सेनाओं का पराक्रम तो हमेशा ही अद्भुत रहा है, मगर जिस Military Edge की तलाश सेनाओं को रहती है, वह edge हाल के वर्षों में डिफेंस सेक्टर में आए तेज़ी से हो रहे बदलाव से आई है। मैंने मानता हूँ कि यदि ये बदलाव हमने नहीं किए होते तो ऑपरेशन सिंदूर जैसे complex operation को अंजाम देना लगभग असंभव होता।
ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में technological warfare का एक शानदार नमूना था। इस operation में आकाश तीर, आकाश मिसाइल सिस्टम, और ब्रह्मोस जैसी advanced मिसाइल systems के साथ-साथ, अनेक latest equipment का भी उपयोग किया गया। इसने यह साबित किया, कि हमारी सेनाएं बदलाव को समझ भी रही हैं, और उसे आत्मविश्वास के साथ उपयोग भी कर रही हैं। यह सब इसलिए संभव हो रहा है क्योंकि पिछले बारह वर्षों में एक नई ज़मीन तैयार की गई है।
साथियों, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता भारत के उद्योगों पर विश्वास का प्रमाण है। रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए, हमारी सेनाओं द्वारा, 5 positive Indigenization lists जारी की गई हैं। इनमें शामिल defence equipment, weapon system और platforms की कुल संख्या 509 है। इनका production, अब, अनिवार्य रूप से भारत की धरती पर किया जा रहा है। ठीक इसी प्रकार, हमारी DPSUs द्वारा भी, 5 lists जारी की गई हैं। इनमें शामिल strategically-important LRUs, यानि Line Replacement Units, Sub-systems, Spares & Components समेत कुल items की संख्या 5,012 हैं। इनमें से 3255 आइटम्स को indigenised कर चुके हैं।
हम बेहद मज़बूती के साथ, planned तरीके से, आत्मनिर्भर, और सशक्त रक्षा क्षेत्र की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। हमने अब तक पाँच Positive Indigenisation List घोषित की है। जल्द ही हम एक और लिस्ट लेकर आने वाले है।
साथियों, आज देश का रक्षा उत्पादन लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है। जबकि 2014 के आसपास जहाँ हमारा domestic defence production लगभग 40 हजार करोड़ रूपये का ही था। इस साल हमारा टारगेट है कि डिफेंस प्रोडक्शन दो लाख करोड़ रुपए के माइलस्टोन को पार कर जाये। दो-तीन साल पहले हमने हमारा लक्ष्य साल 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए का defence production करने का बनाया था, और जैसी रफ़्तार दिख रही है उसको देख कर मुझे पूरा विश्वास है कि हम अपने लक्ष्य को अवश्य हासिल करने में कामयाब होंगे।
आपको यह जानकर भी ख़ुशी होगी कि साल 2013-14 में भारत से होने वाला जो डिफेंस एक्सपोर्ट केवल 686 करोड़ का था वह आज 2025-26 में बढ़ कर 38000 करोड़ से अधिक हो गया है। करीब सौ देशों को हमारे देश में बने डिफेंस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं। हमने पिछले साल यह टारगेट रखा था कि हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट तीस हज़ार करोड़ रुपये हो और वह हमने बहुत ही शानदार तरीके से हासिल किया है। अब हमारा लक्ष्य है कि साल 2029 तक भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पचास हज़ार करोड़ रुपए पहुँच जाये। हम मानते हैं कि यह होकर रहेगा।
साथियों, भारत का केवल रक्षा निर्यात नहीं बढ़ा है। मैं मानता हूँ, इससे भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। भारतीय तकनीक पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है।
यह सब कैसे हुआ? हमने निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाया। डिफेंस एक्सिम पोर्टल शुरू किया गया। ऑनलाइन अनुमोदन व्यवस्था लागू हुई। ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस जैसी व्यवस्था लाई गई। Quality Certification की प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया। ग्रीन चैनल नीति लागू हुई। सेल्फ सर्टिफिकेशन व्यवस्था लाई गई। इन सुधारों ने भारतीय उद्योगों को Global Competition के लिए तैयार किया है।
साथियों, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल बड़े उद्योगों को लगा देने से संभव नहीं होगी ।इसके लिए Research, Development और Innovation का माहौल भी चाहिए। नई सोच चाहिए। युवा प्रतिभा चाहिए।
साथियों, इसी सोच के साथ हमने innovative ideas लाने वाले युवाओं को डिफेंस सेक्टर में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। मैं यहाँ विशेष रूप से innovations for defence excellence, यानि iDEX का जिक्र करना चाहूँगा। iDEX को हम defence sector में innovation, तथा technology को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए हैं। इसके अंतर्गत हम innovative solutions लाने के लिए challenge post करते है, और जो startups select होते हैं, उनको हम 1.5 करोड़ रुपए तक की financial assistance प्रदान करते हैं। अब हम iDEX से आगे बढ़ते हुए iDEX prime ले आए, और 1.5 करोड़ की मदद को हमने बढ़ाकर 10 करोड़ तक किया है।
हमारी DPSUs, और services ने जितने भी challenges दिए, हमारे युवाओं ने उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, और सफलतापूर्वक उन challenges को स्वीकार करके, उसे अंजाम दिया। अब इस मुहिम में आगे बढ़ते हुए, अब हमने prime को भी upgrade करके ‘ADITI’ scheme को launch किया, जहां हम अपने युवाओं को, तथा उनके startups को, उनकी innovation में मदद के लिए पूरे 25 करोड़ तक की financial assistance दे रहे हैं।
साथियों, हमारा एकदम clear target है कि हमारी स्टार्टअप्स और एमएसएमई के हाथों को मज़बूती दी जाए। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने 2400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी स्टार्टअप्स/एमएसएमई से करने की मंजूरी दी है, और 1500 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स new technology के development के लिए स्वीकृत किए गए हैं।
हमने मार्च 2026 तक IDex के माध्यम से 676 स्टार्टअप्स और innovators को engage किया और 551 कांट्रैक्ट्स हमने साइन किए हैं। आज देशभर के स्टार्टअप्स ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक Defence Technologies पर काम कर रहे हैं।
साल 2018 में जहाँ रक्षा क्षेत्र में कुछ दर्जन स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या दो हजार से अधिक हो चुकी है। सैकड़ों स्टार्टअप्स को रक्षा मंत्रालय द्वारा Challenges दिए गए है, उन्हें आर्थिक सहायता मिली, प्रोटोटाइप बने और अनेक तकनीकों की खरीद के लिए approvals भी दिए गए है।
यानि आज भारत का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं है। वह भारत की सुरक्षा का Technological Partner बन चुका है। डीआरडीओ ने भी इस परिवर्तन को नई दिशा दी है।
आज डीआरडीओ केवल Defence Research & Development करने वाला संस्थान नहीं है। वह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाला National Innovation Platform बन चुका है।
देशभर में Centre of Excellence स्थापित किए गए हैं। Young Scientists Labs का विस्तार किया गया है। प्रत्येक वर्ष हजारों इंजीनियर और ट्रेनीज डीआरडीओ के साथ जुड़ रहे हैं।
भारत के Defence Architecture की सबसे बड़ी शक्ति उसकी Entrepreneurial spirit है। आज रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आज हमारे साथ DPSUs हैं। Private Industries हैं। सत्रह हजार से अधिक एमएसएमई हैं। हजारों Supply Units हैं। देशभर के Innovation Centres हैं। यही भारत का नया रक्षा औद्योगिक परिवार है।
इस परिवर्तन को और गति देने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर स्थापित किए गए। इन कॉरिडोरों ने निवेश आकर्षित किया। नई फैक्टरियाँ स्थापित हुईं। Advance Defence Manufacturing इस corridors में हो रहा है और कई defence कम्पनीज तो Global Manufacturing की Supply Chain से जुड़े हुए है।
इन दोनों डिफेंस कॉरिडोर्स में करीब 70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावित हैं, जिनमें करीब 10,000 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट हो भी चुका है। इससे युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित हुए। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर आज आत्मनिर्भर भारत की सफलता का एक सशक्त उदाहरण बन चुका है।
सरकार ने केवल उद्योगों को अवसर नहीं दिया। उन्हें बाज़ार भी दिया। ‘SRIJAN’ पोर्टल के माध्यम से रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सेनाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले आयातित उपकरणों की सूची, उद्योगों के लिए उपलब्ध कराई गई। परिणामस्वरूप हजारों रक्षा उपकरणों का Indigenisation हो रहा है।
‘SRIJAN DEEP’ के माध्यम से चालीस हजार से अधिक Manufacturers & Sellers के साथ-साथ लाखों उत्पादों का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है। इससे भारत की डिफेन्स सप्लाइ चेन पहले से कहीं अधिक मजबूत और संगठित बनी है।
साथियों, एक और महत्वपूर्ण रिफार्म हमने किया है जिसकी चर्चा कम होती है। वह है OFBs का corporatisation. हमने देखा, कि जो हमारी Ordnance factories हैं, वो उस पुरानी व्यवस्था में भी अच्छा काम कर रही थीं, लेकिन नए समय को देखते हुए, नई जरूरतों को देखते हुए, हमने Ordnance factories का Corporatisation किया, ताकि वह और ज्यादा technology friendly बन सकें, वह और ज्यादा output दे सकें, उनकी accountability बढ़ सके। और ऐसा नहीं है, कि हमने बिना सोचे-समझे उनका Corporatisation किया। हमने उनके employees के हितों का भी ध्यान रखा, और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी ध्यान रखा।
नतीजा हमारे सामने है आज Ordnance Factories अपने नए स्वरूप में बहुत ही अच्छा काम कर रही हैं और loss making entities की जगह profit making units बन चुकी हैं। मैं मानता हूँ कि दो सौ साल से भी अधिक पुराने structure को बदलना इस सदी का अब तक का एक बहुत बड़ा रिफार्म है। इस साल अक्टूबर में OFB corporatisation को पाँच वर्ष पूरे हो जाएँगे और जो परिवर्तन इन पाँच वर्षों में आया है, वह सराहनीय है।
आज भारत केवल अपने लिए रक्षा उपकरण नहीं बना रहा। भारत विश्व का एक Credible Security Partner बन रहा है। हिंद महासागर से लेकर इंडो-पैसिफिक तक भारत की भूमिका निरंतर मजबूत हो रही है।
साथियों, अभी पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के दौरे पर गए हुए थे। मुझे और हर भारतीय को उस समय गौरव की अनुभूति हुई, जब इण्डोनेशिया के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक मंच से यह कहा, कि मोदीजी के द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के शानदार प्रभाव को देखते हुए, वे इसे अपने देश में भी copy कर रहे हैं। और उन्होंने पीएम से विनोदपूर्ण लहजे में पूछा, कि मोदीजी कहीं आपका इस पर कोई कॉपीराइट तो नही है। प्रधानमंत्री मोदीजी ने हंसते हुए कहा, नहीं-नहीं ऐसा नहीं है, आप इन्हें अपने यहाँ बिल्कुल लागू करें।
साथियों, एक समय था, जब भारत अपने विकास के मॉडल को लेकर कभी अमेरिका की copy, कभी योरोप की copy तो कभी रूस की copy करने का प्रयास करता था, मगर अब हालात बदल चुके हैं। आज मोदीजी के नेतृत्व में भारत उस मुकाम तक पहुंचा है, कि दूसरे देश, अब भारत की नीतियों का अनुसरण कर रहे हैं। मुझे लगता है, यह स्थान जो मोदीजी ने बनाया है, वह अपने आप में नए युग की शुरुआत है।
साथियों, प्रधानमंत्री जी की इस यात्रा ने इण्डोनेशिया में ब्रह्मोस मिसाइल डील से लेकर प्रंबानन मंदिर के जीर्णोद्धार तक,ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम सप्लाई से लेकर, न्यूजीलैण्ड से व्यापार दुगना करने तक, भारत और दुनिया के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण इण्डो-पेसेफिक क्षेत्र में, भारत के कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई बुलंदी दी है।
साथियों, इसी तरह से हमारी रक्षा कूटनीति अब केवल रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है। उसमें Technical Cooperation, Industrial Collaboration और Global supply chain का भी महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन इस पूरी यात्रा की सबसे Inspiring Story क्या है?
सबसे Inspiring बात यह है कि इस परिवर्तन का क्रेडिट किसी एक व्यक्ति को या संस्थान को नहीं जाता है। यह परिवर्तन हमारे वैज्ञानिकों ने किया। हमारे सैनिकों ने किया। हमारे इंजीनियरों ने किया। हमारे स्टार्टअप्स ने किया। हमारे एमएसएमई ने किया। हमारे उद्योगों ने किया। और सबसे बढ़कर, भारत के युवाओं ने किया। यही अमृतकाल का भारत है। एक ऐसा भारत जो चुनौतियों से घबराता नहीं, अवसरों का निर्माण करता है। एक ऐसा भारत जो केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता, बल्कि विश्व की शांति और स्थिरता में भी रचनात्मक योगदान देता है।
साथियों, मुझे पूर्ण विश्वास है कि जब भारत वर्ष 2047 में अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब दुनिया भारत को केवल सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में नहीं, बल्कि सबसे विश्वसनीय, सबसे आधुनिक और सबसे आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में भी देखेगी।
मोदीजी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने एक ऐसे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है जो सशक्त भी हो और सुरक्षित भी हो, जहाँ हमारे सैनिकों के हाथों में स्वदेशी तकनीक हो, हमारे वैज्ञानिकों के पास नए-नए अवसर हों, हमारे युवाओं के पास Innovation की ताकत हो, हमारी industries के पास Globally Compete करने की क्षमता हो। यही नए भारत का संकल्प है। यही विकसित भारत 2047 का मार्ग है।
आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।