BRO ने सिद्ध किया है कि देश-सेवा के जज़्बे से हर चुनौती पार की जा सकती है: रक्षा मंत्री

Text of RM’s speech at the BRO Tech Symposium in New Delhi

सबसे पहले, मैं Border Roads Organization को, Strategic Infrastructure Development Conclave के आयोजन पर बधाई देता हूँ।

यह conclave ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत Infrastructure Development और Strategic Preparedness में एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है। अभूतपूर्व परिवर्तनों के दौर में, BRO की शानदार भागीदारी के लिए, मैं DG BRO, और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूँ।

साथियों, इस Conclave की जो Theme है- Accelerating Strategic Infrastructure through Technology, Innovation and Execution Excellence. यह एक ऐसे आत्मविश्वास से भरे भारत के Aspirations को दर्शाता है, जो World-Class Infrastructure बनाने, अपनी National Security को और मज़बूत करने, और 2047 तक एक Developed Nation के रूप में उभरने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

वैसे तो मैं समय-समय पर BRO के अपने साथियों से मिलता ही रहता हूँ। हमारी बातचीत भी होती ही रहती है। लेकिन आज का अवसर चूँकि अलग है, इसलिए मैं आप सबसे, देश-दुनिया पर भी कुछ विचार साझा करूँगा।  चूँकि यह Conclave, Infrastructure के ऊपर आधारित है, इसलिए मैं Infrastructure की importance से ही अपनी बात शुरू करता हूँ।

साथियों, यदि हम इतिहास के पन्ने पलटकर देखें, तो एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है, किसी भी सभ्यता का सबसे भरोसेमंद पर्याय उसका architecture और उसका infrastructure ही रहा है। प्राचीन भारत के उत्तरापथ, और दक्षिणापथ से लेकर शेरशाह सूरी की सड़क-ए-आज़म तक, या फिर दुनिया की हर महान सभ्यता के भव्य निर्माणों तक, आप देखेंगे तो पाएँगे कि इतिहास, सभ्यताओं को आज भी बहुत हद तक, उनके बनाए roads, bridges, और infrastructure projects के कारण ही उन्हें जानता है।

यही कारण है कि infrastructure को केवल development के एक factor के रूप में नहीं, बल्कि development के synonym के रूप में देखा जाता है। जहाँ जितना developed infrastructure, वहाँ उतनी ही developed civilisation होता है। इतिहास भी हमें यही बताता है। और आज हम जो Infrastructure खड़ा कर रहे हैं, वह आने वाले सौ-दो सौ वर्षों तक हमारी Civilization की पहचान बनेगा।

हालाँकि, यह एक अलग बात है, कि अनेक कारणों से स्वतंत्रता के बाद हम इस दिशा में उतना Focus नहीं दे पाए, जितना देना चाहिए था। मैं यह नहीं कहूँगा कि कुछ हुआ ही नहीं, ऐसा कहना Fair नहीं होगा। जिसकी जितनी Capability और जितना Vision रहा, उसने अपने-अपने ढंग से Contribution दिया, और उसे पूरी तरह नकार देना भी उचित नहीं है। लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है, कि हमारी Capability और हमारी Requirement, दोनों के अनुपात में जितना Focus दिया जाना चाहिए था, उतना नहीं दिया गया।

पिछले दस-बारह वर्षों में आप सबने यह Transformation अपनी आँखों से देखा है। इस दौर में हमने गाँव-गाँव, शहर-शहर, पहाड़, पर्वत, नदी, सबको आपस में जोड़ने का एक Mission चलाया। और यह जुड़ाव केवल Road Transport तक सीमित नहीं रहा। हमने सड़क से, रेल से, हवाई मार्ग से, और Digital infrastructure के माध्यम से सबको जोड़ने, यानी हर प्रकार की connectivity प्रदान करने पर बल दिया।

हमने यह ensure किया कि दूर-दराज़ के किसी भी क्षेत्र में रहने वाला कोई भी नागरिक Mainstream से कटा हुआ महसूस न करे। और साथियों, हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हमने Connectivity को Civilization के Development का एक अनिवार्य अंग माना। हमारा लक्ष्य केवल भारत के नक्शे पर सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि भारत के हर नागरिक के मन में, यह विश्वास बनाना है, कि देश का कोई भी कोना अब दूर नहीं है। हम यह समझते हैं, कि जिस देश का Infrastructure मज़बूत होगा, उसी देश का Future भी सबसे मज़बूत होगा। इसलिए हम आगे भी, भविष्य में इसी प्रकार, कार्य करते रहेंगे।

साथियों, मैं Border Roads Organization को, केवल एक construction agency या एक unit भर के रूप में नहीं देखता हूँ। मैं इसे अपने परिवार की तरह देखता हूँ। और एक परिवार के सदस्य के नाते, जब मैं आपकी अब तक की उपलब्धियों पर दृष्टि डालता हूँ, विशेषकर पिछले एक दशक की, तो मन गर्व से भर जाता है। रोहतांग की अटल टनल हो, दुनिया की सबसे ऊँची मोटरेबल सड़क उमलिंग ला हो, या लगभग तेरह हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर बनी सेला टनल हो, ये सब आपके श्रम और सामर्थ्य के जीते-जागते प्रमाण हैं। ये उपलब्धियाँ अपने आप में चमत्कार हैं। लेकिन इन सबके पीछे आपके श्रम, समर्पण और मेहनत के बराबर जो बात मैं सबसे महत्वपूर्ण मानता हूँ, वह है, आप लोगों द्वारा technology का continuous adaptation. Technology के adaptation के मामले में मैं BRO को अग्रिम पंक्ति का संगठन मानता हूँ।

जैसे आप देखिए, कि दुनिया की सबसे ऊँची मोटरेबल सड़क बनाने के लिए, एक विशेष प्रकार की technology चाहिए, एक अलग process चाहिए, एक अलग technic चाहिए, लेकिन आपने हर तरीके से इन technics को adapt किया है।

इसी तरह, Tunnelling Technology का उदाहरण लीजिए। शहरों में Metro Construction से लेकर पहाड़ों में Highways Construction तक, इस Tunnelling Technology ने जो Revolution ला दी है, वह अपने आप में बेमिसाल है। अटल टनल हो, सेला टनल हो, आज जिस गति से आप सभी लोग कठिन से कठिन Terrain में, ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों में, सड़कें और Highways बना पाने में सक्षम हैं, ऐसा हमारे इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। इसी तरह अनेक अन्य examples गिनाए जा सकते हैं। यह मानव-संकल्प और उसके पीछे खड़ी Modern Technology की Combined Victory है।

Infrastructure development में हर चुनौती अपने साथ एक नई technological demand लेकर आती है, और आप हर बार उस माँग पर खरे उतरते हैं। Technology के adaptation के प्रति आपका यह निरंतर समर्पण, आपका सबसे बड़ा गुण है।

इन गुणों के साथ आपने जो भी Constructions किए हैं, वे हमारी Development Journey के Milestones हैं। और साथियों, मैंने ‘Milestones’ शब्द का प्रयोग बहुत सोच-समझकर किया है। जैसे, जो Milestone सड़क के किनारे लगा होता है, वह हमें क्या बताता है? वह हमें बताता है कि हम अब तक कितनी दूरी तय कर चुके हैं। वह हमारी अब तक की Journey का Record होता है। ठीक इसी प्रकार, ये जो Infrastructure Milestones हैं, ये सब पूरे राष्ट्र की Developmental Journey को बताते हैं। ये milestones हमारी Progress के Landmarks हैं।

साथियों, एक महत्त्वपूर्ण बात, मैं आपसे जो कहना चाहता हूँ, वह यह, कि हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं, जब दुनिया का Strategic Landscape बहुत तेज़ी से बदल रहा है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हम conflicts देख रहे हैं। यह भी देख रहे हैं कि आज Warfare का स्वरूप भी बदल रहा है। आज बहुत कुछ Air Power, Precision और Modern Technology से तय होता दिखता है। लेकिन ज़रा गहराई से सोचिए तो, Air Power भी तो आखिरकार land Infrastructure पर ही टिकी हुई है। बिना Air Base के, बिना Airfield के, बिना Land-Based Platform के, कोई भी Aircraft आकाश में नहीं उठ सकता। शक्ति चाहे कितनी भी Advanced क्यों न हो, उसे खड़े होने के लिए एक ठोस ज़मीन चाहिए ही चाहिए।

और BRO हमारे सीमावर्ती और कठिन क्षेत्रों में Airfields भी बनाता है। यानि Technology चाहे कितनी भी बदल जाए, हम चाहे ज़मीन से आकाश तक और आकाश से समुद्र तक कितनी भी Progress कर लें, Ports, Airfields, Roads और Tunnels, इनकी भूमिका कतई कम नहीं होने वाली। Warfare का स्वरूप जितना भी बदल जाए, इस Basic Infrastructure का महत्व हमेशा बना रहेगा।

और इसका सीधा अर्थ यह है, कि BRO के कामों का Relevance भी, आने वाले युग में लंबे समय तक बना रहने वाला है। BRO, राष्ट्र की एक अनिवार्य शक्ति बना रहेगा, और इसके लिए लगातार नई नई technologies अपनाते रहना आज के समय की एक बड़ी जरूरत है। युद्ध का पहला मोर्चा कभी-कभी सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर बनता है जो सैनिक को सीमा तक पहुँचाती है। इसलिए जो सड़क बनाता है, वह भी राष्ट्र की सुरक्षा का उतना ही बड़ा प्रहरी है।

BRO ने पिछले साढ़े छह दशकों में अपने Motto, “श्रमेण सर्वं साध्यम्”, अर्थात् “श्रम से सब कुछ संभव है”, को पूरी तरह साकार किया है। इन दशकों में BRO ने स्वयं को एक Road Construction Agency से बदलकर, दुनिया के सबसे सम्मानित Strategic Infrastructure Organizations में से एक बना लिया है। चाहे लद्दाख की बर्फ़ीली ऊँचाइयाँ हों, अरुणाचल प्रदेश के ऊबड़-खाबड़ पर्वत हों, उत्तर-पूर्व के घने जंगल हों, राजस्थान के तपते रेगिस्तान हों, जम्मू-कश्मीर का कठिन इलाका हो, या नक्सल प्रभावी क्षेत्र हों, BRO के कर्मयोगियों ने बार-बार यह सिद्ध किया है, कि जब देश-सेवा का जज़्बा हो, तो कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।

और यह जुड़ाव केवल roads या transportation तक ही सीमित नहीं रहा है। सड़क, रेल, हवाई मार्ग और digital connectivity के साथ-साथ हमने “Vibrant Village programme” के अंतर्गत, हम सीमावर्ती गाँवों को, जिन्हें कभी अंतिम गाँव कहा जाता था, उन्हें हम देश के प्रथम गाँव के रूप में विकसित कर रहे हैं।  हमने यह ensure किया है, कि देश का कोई भी नागरिक, mainstream से कटा हुआ महसूस न करे। और BRO ने इस commitment को पूरा करने में, बड़ी भूमिका निभाई है।

हालाँकि साथियों, मैं यह भी कहना चाहूँगा, कि Infrastructure Development केवल सरकार की Responsibility नहीं है। इसके लिए एक Collective Efforts की आवश्यकता होती है। Industries को Innovation करना होगा, Academia को Research में आगे बढ़ना होगा, Engineers को Solutions develop करने होंगे, और Administrators को उन्हें ज़मीन पर उतारना होगा। हमें मिलकर एक ऐसा Ecosystem बनाना होगा, जो Excellence को प्रोत्साहित करे और जहाँ हर Stakeholders मिलकर अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाए।

साथियों, आप सभी लोग इस बात से सहमत होंगे, और अपने Experience से जानते होंगे, कि जब हम एक बार किसी बड़े और कठिन Target को Achieve कर लेते हैं, तो वह धीरे-धीरे हमारे लिए आसान हो जाती है, हमारे Routine का हिस्सा बन जाती है। हम उस Experience को Replicate करते हैं, उससे नई बातें सीखते हैं, और फिर उससे आगे और बेहतर करने का रास्ता खुलता जाता है। हमारा Base मज़बूत होता जाता है, हमारी Methodology में सुधार आता है, हमारी Process और हमारी तकनीक, दोनों निखरती चली जाती हैं।

मुझे याद है, मैंने कुछ समय पहले भी आप लोगों से कहा था कि जिस प्रकार की Technology पर, जिस प्रकार के Challenges पर आप लोग निरंतर महारत हासिल करते जाते हैं, उन्हें आप Record कीजिए, उनका Documentation कीजिए, उनका Survey कराइए। और मुझे यह जानकर बड़ी ख़ुशी हुई, कि आप लोगों ने यह काम किया भी है। आज भी आप लोगों ने तीन महत्वपूर्ण Publications जारी किए हैं।

ये Publications, Experiences को Record करने, Technical Knowledge को फैलाने, Innovation को encourage करने, और Institutional Memory को सहेजने में, बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

लेकिन मैं चाहता हूँ कि यह Knowledge sharing यहीं न रुके। यह ज़रूरी नहीं है, कि हर Engineer हर बार zero से शुरू करके, नए सिरे से परेशान होकर ही सीखे। बल्कि वह अपने पहले के Engineers के Experience से सीखे, उनके Struggles और उनकी Successes से सीखे। मेरा Suggestion है, कि इस Knowledge को हमारे Training Institutes तक ले जाया जाए, ताकि नए Recruits और Researchers इससे नई चीज़ें सीख सकें। मुझे विश्वास है, कि आप इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

इसलिए मैं Conclave में उपस्थित, आप सभी लोगों से अपील करता हूँ, कि आप open और Constructive Discussion कीजिए। जिससे हम ईमानदारी से Challenges और Bottlenecks की पहचान करें, दुनिया भर की Best Practices की बारीकी से जाँच करें, Traditional Thinking को चुनौती दें, और ऐसे Practical Suggestions तैयार करें, जिन्हें वास्तव में Ground Level पर लागू किया जा सके। हमारा प्रयास हो, कि हम ऐसा भारत बनाएँ, जहाँ सीमाएँ केवल सुरक्षित ही न हों, बल्कि सबसे जुड़ी हुई भी हों; जहाँ विकास, और राष्ट्रीय सुरक्षा एक ही मार्ग पर एक साथ चले। जहाँ हर निर्माण, राष्ट्रनिर्माण का पर्याय बन जाए।

मुझे पूरा विश्वास है, कि आप इस दिशा में सकारात्मक प्रयास करेंगे। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं BRO को उसकी शानदार Achievements के लिए बधाई देते हुए, खासकर DG-BR को बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। मैं इस Conclave की सफलता की कामना करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।

जय हिंद !