सबसे पहले, मैं आप सभी को, कारगिल विजय के उपलक्ष्य में आयोजित, ‘शौर्य विजय यात्रा’ के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
आज का यह अवसर, Motorcycle Expedition को हरी झंडी दिखाने भर का नहीं, बल्कि उस अदम्य भावना को नमन करने का है, जिसके चलते हमारे वीरों ने, भारत की आन, बान और शान के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। मैं उस संकल्प को नमन करने आया हूँ, जो हमारे अमर बलिदानियों की स्मृति को, पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का प्रण लेकर आगे बढ़ रहा है।
साथियों, आपकी इस यात्रा का नाम ही, अपने आप में एक प्रेरणा है, ‘शौर्य विजय यात्रा’। और इसका Motto, “One Ride, One Nation, One Salute”, इस अभियान की आत्मा को अत्यंत सार्थक रूप से व्यक्त करता है। एक यात्रा, एक राष्ट्र और एक सलाम, इससे अधिक सुंदर, और सशक्त संदेश शायद कोई हो ही नहीं सकता।
आज से सत्ताईस वर्ष पहले, 1999 में, भारतीय सेनाओं ने Operation Vijay के माध्यम से, इतिहास रच दिया था। वह केवल एक सैन्य विजय नहीं थी, बल्कि साहस, धैर्य, अनुशासन और अदम्य राष्ट्रभक्ति का ऐसा अध्याय था, जिसे विश्व की सेनाएँ आज भी अध्ययन और सम्मान की दृष्टि से देखती हैं।
लगभग 20 हज़ार फीट की ऊँचाई, जहाँ साँस लेना भी कठिन हो जाता है, जहाँ ऑक्सीजन कम होती है, जहाँ तापमान माइनस 40 डिग्री तक पहुँच जाता है, ऐसे दुर्गम और प्रतिकूल वातावरण में हमारे वीर सैनिकों ने असंभव को संभव कर दिखाया। जहाँ प्रकृति ने रास्ते बंद कर दिए थे, वहाँ हमारे सैनिकों ने अपने साहस से, इतिहास का नया रास्ता बना दिया।
चुनौती केवल प्राकृतिक नहीं थी। दुश्मन ऊँचाइयों पर बैठा था, जबकि हमारे जवानों को, नीचे से ऊपर चढ़ते हुए, गोलियों और तोपों की भीषण वर्षा के बीच लड़ाई लड़नी थी। लेकिन भारतीय सैनिकों के साहस के आगे हर बाधा छोटी पड़ गई। उन्होंने एक-एक चोटी, एक-एक पहाड़ी, और एक-एक बंकर को, शत्रु के कब्ज़े से मुक्त कराया, और तिरंगे की आन को अखंड और अक्षुण्ण रखा।
साथियों, यह विजय हमें बिना मूल्य चुकाए नहीं मिली थी। इसकी कीमत पाँच सौ से अधिक वीर सपूतों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर चुकाई।
वे युवा थे। किसी की आयु बाईस वर्ष थी, किसी की चौबीस, किसी की छब्बीस। किसी के जीवन की नई शुरुआत हुई थी, किसी की माँ उसकी राह देख रही थी, किसी का शिशु अभी इस संसार में आया भी नहीं था। लेकिन जब मातृभूमि ने पुकारा, तब उन्होंने अपने सारे सपने, अपना पूरा भविष्य और अपना संपूर्ण जीवन, बिना किसी शिकायत और बिना किसी शर्त के, भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया।
कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, राइफलमैन संजय कुमार और ऐसे असंख्य वीरों के नाम भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं। उन्हें केवल इतिहास नहीं याद रखेगा, बल्कि इस देश की हर पीढ़ी, हर नागरिक और इस राष्ट्र की मिट्टी भी सदैव स्मरण रखेगी।
मुझे बताया गया है, कि ‘शौर्य विजय यात्रा’ के हमारे ये Riders अगले 14 दिनों में लगभग 1,900 किलोमीटर की यात्रा करेंगे। यहाँ, यानी National War Memorial से प्रारंभ होकर, चंडीमंदिर, पंजाब, हिमाचल और लद्दाख के दुर्गम मार्गों से होते हुए, 26 जुलाई—Kargil Vijay Diwas के पावन अवसर पर, कारगिल के पवित्र War Memorial पहुँचेंगे। यह केवल दूरी तय करने की यात्रा नहीं होगी; यह इतिहास, त्याग और राष्ट्रभक्ति से संवाद करने की यात्रा होगी।
मुझे इस अभियान की एक और विशेषता अत्यंत प्रेरित करती है। इस अभियान में भारत का उत्तर भी है, दक्षिण भी; पूर्व भी है और पश्चिम भी। यहाँ Serving Officers भी हैं, Veterans भी हैं और साथ में Civilians भी हैं।
सही मायने में, यही तो भारत की पहचान है।
भिन्न पृष्ठभूमियाँ, भिन्न भाषाएँ, भिन्न परंपराएँ, लेकिन तिरंगा एक, राष्ट्र एक और हमारे वीरों के प्रति श्रद्धा एक।
कारगिल की विजय एक तिथि भर नहीं है; यह भारत का स्थायी संकल्प है कि हमारी भूमि, हमारी अस्मिता और हमारे सम्मान पर उठने वाली हर नज़र का उत्तर भारत पूरी शक्ति से देगा।
साथियों, आज इस अवसर पर, आपको एक कलश में War memorial की पवित्र मिट्टी भी सौंपी जा रही है। इसे आप अपने साथ कारगिल लेकर जाएँगे और वहाँ हमारे अमर बलिदानियों की स्मृति में अर्पित करेंगे। मिट्टी का अपना एक दर्शन होता है, एक message होता है। मनुष्य इसी मिट्टी में जन्म लेता है, इसी पर चलकर अपने जीवन का निर्माण करता है और अंततः इसी में समाहित हो जाता है। लेकिन जो वीर मातृभूमि के लिए अपना जीवन अर्पित कर देते हैं; उनका बलिदान उसी मिट्टी की चेतना बन जाता है। आज यहाँ की मिट्टी जब कारगिल की उस पवित्र भूमि से मिलेगी, तो यह राष्ट्र की वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और हमारे अमर बलिदानियों के शौर्य का मिलन होगा।
मुझे यह देखकर बड़ा अच्छा लगा, आप लोगों को यात्रा की मंगलकामना के लिए, यहाँ NCC के प्यारे cadets उपस्थित हैं। मुझे पूरा विश्वास है, कि आपकी यह यात्रा, देशवासियों, ख़ासकर युवाओं में राष्ट्रभक्ति की नई चेतना जगाएगी, समाज की स्मृति में कारगिल के अमर बलिदानियों को सदैव जीवंत रखेगी और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगी, कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों और हमारे संस्कारों में भी होती है।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, मैं आप सभी की सुरक्षित, सफल और प्रेरणादायी यात्रा की मंगलकामना करता हूँ। इस आयोजन के लिए, आयोजकों को बधाई देते हुए, मैं अपना निवेदन समाप्त करता हूँ।
धन्यवाद।