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Agriculture Today Group द्वारा आयोजित इस Conclave में आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। वर्ष 2015 में भी मुझे Agriculture Leadership Conclave में आने का अवसर मिला था। लेकिन श्री एम. जे. खान जी और Agriculture Today Group के साथ मेरा जुड़ाव बहुत पुराना है। जब मैं श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली सरकार में कृषि मंत्री था तब से मैं इनके कार्यों से परिचित हूँ।
श्री एम. जे. खान जी ने कृषि को नई सोच, नई ऊर्जा और नई दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। 200 से अधिक शोध-पत्रों और लेखों के माध्यम से उन्होंने कृषि विमर्श को समृद्ध किया है। Agriculture Today Group और Agriculture Leadership Conclave जैसे Initiatives के माध्यम से किसानों के हितों को आगे बढ़ाया है। नई-नई तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने का कार्य किया है।
2015 में मुझे डॉ. एम. जे. खान के द्वारा शुरू किए गए Indian Chamber of Food and Agriculture का शुभारंभ करने का भी अवसर प्राप्त हुआ था। आज, यह संस्था, श्री सुरेश प्रभु जी के नेतृत्व में नयीं ऊंचाइयों को छू रही है। किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है। और कृषि में नवाचार और निवेश को बढ़ावा दे रही है।
मुझे विश्वास है कि श्री एम. जे. खान और यह संस्था, किसानों और कृषि को अधिक समृद्ध, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
साथियों,
आज, Agriculture Leadership Awards से सम्मानित सभी व्यक्तियों और संस्थाओं को, मैं अपनी शुभकामनाएं देता हूँ। मुझे विश्वास है कि आप सभी, कृषि क्षेत्र के विकास के लिए काम करते रहेंगे।
इन पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए, मैं जस्टिस पी. सदाशिवम जी तथा समस्त निर्णायक मंडल को हार्दिक बधाई देता हूँ।
साथियों,
जब हम किसी अच्छे कार्य के लिए किसी व्यक्ति को कोई Award देते हैं तो सिर्फ उस व्यक्ति का सम्मान नहीं करते, बल्कि समाज में उत्कृष्ट कार्य करने की संस्कृति को भी मजबूत करते हैं।
इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और नवाचार करने वाले लोगों को सम्मानित करने की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है।
तमिलनाडु की श्रीमती पप्पाम्मल जी, हिमाचल प्रदेश के श्री हरिमन शर्मा जी और ओडिशा की श्रीमती कमला पुजारी जी जैसे अनेक कृषि कर्मयोगियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इस वर्ष भी कृषि क्षेत्र से जुड़े आठ विशिष्ट व्यक्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
साथियों,
मुझे इस बात की बहुत प्रसन्नता और गर्व है कि हमारी सरकार ने ही हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन जी को भी भारत रत्न से सम्मानित किया।
डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन जी ने विदेश में कई बहुत आकर्षक वेतन वाली Jobs को ठुकराकर, भारत और भारत के किसानों के लिए कार्य करना चुना। वो कहते थे कि उनका मन भारत में बसता है। उन्होंने विदेश से आधुनिक ज्ञान प्राप्त करके, भारत की खाद्य समस्या का समाधान खोजने को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।
डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जी द्वारा किये गए कार्यों के बल पर ही भारत Foodgrains में आत्मनिर्भर बन सका। जब मैं पिछली बार यहाँ आया था तो वो हमारे साथ थे, लेकिन आज नहीं हैं। डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जी हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे। और आने वाली सभी पीढ़ियाँ सदैव, उनकी ऋणी रहेंगी।
साथियों,
कृषि और किसानों से जुड़े कार्यक्रमों में आना, मेरे लिए सदैव सुखद अनुभव होता है। मेरा जन्म किसान परिवार में हुआ। कृषि मेरे जीवन, संस्कार और पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है। श्रद्धेय अटल जी की सरकार में कृषि मंत्री के रूप में, मैंने किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी।
उस समय कृषि ऋण पर ब्याज दरों को घटाकर आधा किया गया था। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए Farmer Commission की स्थापना की गई थी। Farm Income Insurance Scheme और Kisan Call Centre जैसी शुरुआत भी की गईं थीं।
साथियों,
आजादी के बाद, भारत ने वो दौर भी देखा है जब हमें Foodgrains के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। Foodgrains देने वाले देश, हम पर अपनी शर्तें थोपते थे। और मुझे बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि देश के लिए यह बहुत Humiliating स्थिति थी। लेकिन इस कटु अनुभव ने भारत को कई सीख भी दीं।
हमें याद दिलाया कि Foodgrains में आत्मनिर्भरता केवल कृषि का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी प्रश्न है। भारत के रक्षा मंत्री के रूप में मैं यह कहना चाहता हूँ कि देश की Food Security से; National Security, Strategic Autonomy, और Sovereignty जुड़ी हुई हैं।
यानी यह कहा जा सकता है कि सीमा पर जवान और खेत में किसान एक ही काम कर रहे हैं। और वह है देश की और देश के आत्मसम्मान की सुरक्षा।
साथियों,
हमारी सरकार ने, पिछले 12 वर्षों में, देश के किसानों और कृषि को सशक्त करने का कार्य किया है। कृषि और किसान कल्याण विभाग का बजट पिछले 12 वर्षों में लगभग 5 गुना बढ़ा है। देश के खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 93 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। जिस भारत को कभी दुनिया से Foodgrains माँगने पड़ते थे, वह भारत आज कई देशों को Foodgrains भेजता है। भारत अनाज के साथ-साथ फल, सब्जियों, दूध और शहद के उत्पादन में भी दुनिया में अग्रणी देश बनकर उभरा है।
भारत के कई उत्पाद पहली बार अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं। जैसे भारत का सांगोला और ‘भगवा अनार’ ऑस्ट्रेलिया को भेजा जा रहा है। लंदन और बहरीन को ड्रैगन फ्रूट का निर्यात किया जा रहा है। पहली बार भारत के लाल चावल को अमरीका भेजा जा रहा है। भारत के जीआई-टैग वाले पुरंदर अंजीर अब यूरोप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। ‘वजाकुलम अनानास’ UAE की Market में बिक रहा है।
इससे किसानों के लिए नए अवसर खुले हैं और उनकी आय भी बढ़ रही है।
साथियों,
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, हमारी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वर्षों तक, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। UPA सरकार ने कभी इस रिपोर्ट की सुध नहीं ली। लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया कि स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू हो और हमारे किसान भाई-बहनों को उनकी उपज पर कम से कम डेढ़ गुना MSP मिले।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से भी किसानों को अब तक लगभग साढ़े 4 लाख करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। पीएम फसल बीमा योजना के जरिए किसानों को सुरक्षा कवच दिया गया है। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं।
साथियों,
यूपीए सरकार के दौरान सिर्फ पांच करोड़ किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलता था, आज इसका ढाई गुना यानी करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को क्रेडिट कार्ड का लाभ मिला है।
यूपीए सरकार के 10 साल में किसानों को 7 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण दिया गया था। जबकि हमारी सरकार इसका चार गुना यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है।
आप सोचिए 2004-2014 तक खाद पर 5 लाख करोड़ रुपए की Subsidy दी गई थी। हमारी सरकार ने 2014 के बाद 10 साल में 13 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की Subsidy दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें बहुत बढ़ी हैं, लेकिन हमारी सरकार ने भारत के किसानों पर एक पैसे का भी बोझ नहीं बढ़ने दिया है।
पिछले 12 वर्षों में, 10,000 से अधिक Farmers Producer Organisations बनाए गए हैं। 26 करोड़ Soil Health Cards वितरित किए गए हैं। 6 नए आधुनिक यूरिया प्लांट्स स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने खेती और किसानों के लिए जो काम किया है, आज दुनिया उसकी तारीफ कर रही है। Food and Agriculture Organisation (FAO) ने प्रधानमंत्री मोदी जी को Agricola Medal देकर सम्मानित किया है। यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
साथियों,
किसान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक की ताकत देना हमारी सरकार की प्राथमिकता रही है।
हमने कृषि से जुड़े हुए Research and Development के कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया है। आज विश्व का सबसे पहला Nano-Fertiliser भारत मे बना है। करोड़ों किसानों की Farmer ID बनाई जा चुकी है। करोड़ों खेतों का Digital सर्वेक्षण किया जा चुका है।
किसानों को समय पर सही जानकारी मिले, इसके लिए National Pest Surveillance System की शुरुआत की गई है। ‘Per Drop More Crop’ जैसे अभियान Micro-Irrigation और Precision Farming को बढ़ावा दे रहे हैं।
कृषि में AI के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत-विस्तार Platform की शुरुआत की गई है। यह Platform कृषि से जुड़ी नई जानकारियों को देश के हर किसान तक उनकी अपनी भाषा में पहुँचाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में ‘ड्रोन दीदी योजना’ की शुरुआत की गई है। आज, महिलाओं को कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे कृषि और देश की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान मिल रही है।
महात्मा गांधी का दृढ़ विश्वास था कि भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है। गाँवों की समृद्धि का सबसे मजबूत आधार कृषि है। हमारा संकल्प केवल कृषि का विकास करना ही नहीं है, बल्कि कृषि को अत्याधुनिक और लाभकारी बनाना भी है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके लिए हमारी सरकार निरंतर और तेज़ गति से कार्य कर रही है।
देवियों और सज्जनों
भारत के किसान अपने अनुभव, परंपरागत ज्ञान और प्रयोगों से कृषि को नई दिशा दे रहे हैं। यह हमारे किसानों की प्रतिभा का ही प्रमाण है कि नोबेल पुरस्कार विजेता जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ ने बिहार के किसानों को वैज्ञानिकों से भी बेहतर बताया था। उनका मानना था कि भारत के इन किसानों के कार्यों से सभी को सीखना चाहिए।
यानी भारत का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ज्ञानदाता भी है। हमारे किसानों के अनुभव बहुत समृद्ध हैं। उनके नवाचार ने कृषि को नई दिशा दी है। जैसे महाराष्ट्र की राहीबाई सोमा पोपरे जी ने देशी बीजों के संरक्षण का अभियान चलाया। मुरादाबाद के श्री रघुपत सिंह जी ने पारंपरिक बीजों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बिहार की ‘किसान चाची’ श्रीमती राजकुमारी जी ने खेती को महिला सशक्तिकरण और स्वरोज़गार का माध्यम बनाया। महाराष्ट्र के श्री श्रीरंग देवबा लाड जी ने कपास की खेती में नई तकनीक विकसित की, वहीं ओडिशा की कुमारी साबरमती जी ने जैविक खेती और जैव विविधता के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
ये सभी उदाहरण बताते हैं कि हमारे देश का किसान अपनी परंपराओं से जुड़ा है, लेकिन पुरानी सोच से बंधा हुआ नहीं है। उसका परंपराओं से जुड़ा होना, पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं है। वह, अपनी विरासत में मिले ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक के साथ जोड़कर खेती को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है।
परंपरा और प्रौद्योगिकी का यह संगम भारतीय कृषि की सबसे बड़ी शक्ति बन सकता है। इसलिए हमारी सरकार का प्रयास है कि किसानों के इस ज्ञान को सम्मान भी मिले, पहचान भी मिले और दुनिया तक पहुँच भी मिले।
मैं यहाँ उपस्थित कृषि जगत से जुड़े सभी साथियों से भी आग्रह करता हूँ कि वे भी देश के किसानों की ऐसी Best Practices को व्यापक स्तर पर सामने लाएँ। जिससे और भी लोग उनसे प्रेरणा ले सकें।
साथियों,
आज भारतीय कृषि, ‘हरित क्रांति’ के बाद, अपने सबसे बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि उद्यमिता और निवेश का केंद्र बन रही है। Agri-Startups, Organic Farming, Food Processing, Agri-Logistics और Agri-Export; कृषि क्षेत्र में, नए अवसर और नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं।
मैं देश के युवाओं से कहना चाहता हूँ कि वे कृषि को इस नए दृष्टिकोण से देखें। आप अपने कार्यों से ऐसी कृषि-व्यवस्था का निर्माण करने में मदद कर सकते हैं जो आधुनिक भी हो, आत्मनिर्भर भी हो; स्मार्ट भी हो, प्रकृति के अनुकूल भी हो; और Sustainable भी हो।
साथियों,
गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा है “God is where the tiller is tilling the hard ground”. यानी ईश्वर वहीं निवास करते हैं, जहाँ किसान श्रम करता है। हमारे किसान भाई-बहनों का पसीना जब मिट्टी में मिलता है तो मिट्टी सोना बन जाती है।
यह हमारे किसानों की मेहनत का ही फल है की हमने Agriculture Production में कई Record बनाए हैं। लेकिन आने वाले समय में हमें Produce More के साथ-साथ Produce Better, Produce Greener, Produce Smarter और Produce Healthier के मंत्र को भी अपनाना होगा।
इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी ने Chemical Fertilizers पर निर्भरता कम करने और Organic Farming को अपनाने का आह्वान किया है। इससे न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। फसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी। किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। और Sustainable Development Goal Achieve करने में भी मदद होगी।
आज, भारत Organic Farmers की संख्या के मामले में दुनिया में ‘नंबर वन’ पर है। “Evergreen Revolution” के Vision के साथ आगे बढ़ते हुए, हमें एक ऐसी कृषि व्यवस्था का निर्माण करना है, जो किसान के लिए लाभकारी हो, पर्यावरण के लिए अनुकूल हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो। यही विकसित भारत की कृषि यात्रा का अगला और स्वर्णिम अध्याय होगा।
साथियों,
मैं एक बार पुनः सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूँ तथा इस Conclave की सफलता की कामना करता हूँ। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय जवान। जय किसान। जय विज्ञान।