सबसे पहले मैं “नौसेना शौर्य वाटिका” के उद्घाटन के अवसर पर, उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ की जनता को बधाई देता हूँ।
लखनऊ में आप सबके बीच आना, आप सबसे मिलना हमेशा मुझे अच्छा लगता है। इच्छा रहती है, कि लखनऊ के लिए, आप लोगों के लिए मैं क्या कुछ नहीं कर दूँ।
लखनऊ में इस ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटित होना, मेरे लिए भी बड़े सम्मान और गौरव का क्षण है।
आने वाले समय में, ‘नौसेना शौर्य वाटिका’, लखनऊ के लिए, एक प्रेरणास्थल और tourist hub बनने के साथ-साथ, यह लखनऊ की पहचान बनेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। ये सारी चीज़ें, बदलते और बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश की तस्वीर हैं। लखनऊ अब तहज़ीब और संस्कृति का शहर होने के साथ-साथ, राष्ट्रभक्ति और सैन्य गौरव का भी प्रतीक बन रहा है।
उत्तर प्रदेश जिस तरह से विकास के रास्ते पर चल रहा है, उसे आज हम सभी देख रहे हैं। हम सभी जानते हैं, कभी उत्तर प्रदेश की पहचान, गुंडाराज और बिगड़े हुए law and order से होती थी। लोग डर में जीते थे। investors यहाँ आने से कतराते थे। लेकिन आज का उत्तर प्रदेश बदल चुका है। ‘One District One Mafia’ के लिए जाना जाने वाला उत्तर प्रदेश, आज ‘One District One Product’ के लिए जाना जा रहा है। यह परिवर्तन किसी और की वजह से नहीं, बल्कि हम सबके जनप्रिय मुख्यमंत्री, श्री योगी आदित्यनाथ जी के मजबूत नेतृत्व का नतीजा है। आपने जिस तरह से प्रदेश के law and order को संभाला है, वह अपने आप में एक मिसाल है। लखनऊ समेत, उत्तर प्रदेश की समस्त जनता यह अनुभव कर रही है, कि-
उत्तर प्रदेश अब लहलहा रहा हैं ।
उत्तर प्रदेश अब जगमगा रहा हैं ।
उत्तर प्रदेश अब आगे बढ़ रहा हैं ।
साथियों, जब इस शौर्य वाटिका का निर्माण प्रस्तावित हुआ, तो योगीजी ने इसमें बड़ी ही सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई। हम यह भलीभाँति समझते हैं, कि ‘जो राष्ट्र अपनी सेनाओं का सम्मान करता है, वही राष्ट्र दुनिया में सम्मान पाता है।’ इस भाव से योगीजी ने अपने व्यक्तिगत हस्तक्षेप से इकाना स्टेडियम के पास, और गोमती wetlands से सटी, यह prime location, इस परियोजना के लिए उपलब्ध कराई। इतना ही नहीं, जिस तेज़ी से आपकी सरकार ने बजट स्वीकृत किया, और हर अहम पड़ाव पर आपने स्वयं निगरानी करके, इस काम को रिकॉर्ड समय में पूरा करवाया, वह प्रशंसनीय है।
साथियों, आम तौर पर, जब कभी हम “भारतीय नौसेना” का नाम सुनते हैं, तो हमारे जेहन में, समुद्र की लहरें, मुंबई का गेटवे ऑफ़ इंडिया, विशाखापत्तनम का बंदरगाह, कोच्चि के जहाज, यही सब चीज़ें आती हैं। आम धारणा यही है, कि Navy का अस्तित्व सिर्फ समुद्री इलाकों तक ही सीमित है। तो फिर आख़िर लखनऊ जैसे शहर में, जो समुद्र से सैकड़ों कोस दूर है, इस नौसेना शौर्य वाटिका की ज़रूरत क्यों पड़ी? आखिरकार Navy का अवध की धरती से क्या रिश्ता है?
दरअसल इस सवाल का जवाब, हमारे देश के इतिहास, और भूगोल की गहरी समझ में छिपा हुआ है। भूगोल के अनुसार, हमारा प्यारा भारत, तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। तो एक तरफ तो हमारी सीमाओं पर, हमारे जवान खड़े रहते हैं। और दूसरी तरफ हमारे समुद्र में, यानी हिन्द महासागर में, हमारी नौसेना उपस्थित रहती है।
और इस हिन्द महासागर से, हमारी अर्थव्यवस्था, हमारा व्यापार, हमारी ऊर्जा जरूरतें सब जुड़ी हुई हैं। और उस हिन्द महासागर की जो लोग सुरक्षा करते हैं, वो लोग भारत के हर गाँव, हर क़स्बे, हर शहर से आते हैं। हमारी Navy, पूरे देश का asset है। उसकी ताक़त, देश के हर नागरिक के संकल्प और विश्वास से आती है, चाहे वह समुद्र के पास रहता हो, या हज़ारों किलोमीटर दूर लखनऊ में रहता हो।
इसके अलावा आप देखिए कि हमारी गोमती नदी, लखनऊ की जीवन धारा है। और इसी गोमती नदी के नाम पर, एक INS गोमती नाम की warship भी है। जिसे 1988 में हमारी नौसेना में शामिल किया गया था। जिस तरह गोमती नदी बहती हुई, आगे चलकर गंगा में समाती हैं, और फिर गंगा सागर में पहुँचकर अनंत समुद्र से जुड़ जाती है, ठीक उसी तरह INS गोमती भी, हिन्द महासागर में गया, और गोमती और लखनऊ को इसने गौरवान्वित किया।
साथियों, हर जहाज के आगे, उसका symbol लगा होता है। उसका आधिकारिक चिह्न, जिसे हम Crest कहते हैं। INS गोमती के क्रेस्ट पर, हमारे लखनऊ का ऐतिहासिक ‘छत्तर मंज़िल’ अंकित था। जब ये जहाज हिंद महासागर में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा होता था, उस वक्त इसकी पहचान सीधे-सीधे इसी छत्तर मंज़िल और गोमती नदी से जुड़ी थी। यानी हमारी गोमती और लखनऊ का नाता तो, Navy के साथ लंबे समय से है। और इसी अटूट बंधन का उत्सव मनाने के लिए, आज यहाँ ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ शुरू किया गया है।
आज इस पार्क में आप जो कुछ भी देख रहे हैं, वो सब real हैं। एकदम असली युद्ध सामग्री, जो कभी आईएनएस गोमती की शान हुआ करती थी। Navy का जो बड़ा सा जहाज आप लोग देखते हैं, उसमें बहुत से उपकरण लगे होते हैं जो उसे घातक बनाते हैं। उसके विशालकाय मिसाइल लांचर, जो दुश्मन के जहाजों पर सटीक वार करने में सक्षम थे। उसके torpedo tube, जो पानी के भीतर घात लगाए बैठी पनडुब्बियों का सफाया कर सकती थीं। उसके radars, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से आते खतरे को भाँप लेते थे। उसके मुख्य तोप की माउंटिंग, जिसकी गर्जना सुनकर दुश्मन के होश उड़ जाते थे। इसके अलावा, Navy में प्रयोग होने वाले सर्विलांस Aircraft, Multirole हेलिकॉप्टर, और टारपीडो आदि, अब लखनऊ की धरती पर स्थापित हैं। इसीलिए मैं कह रहा हूँ, कि यह पार्क कोई साधारण पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रेरणा स्थल है। यह शौर्य वाटिका, आने वाली पीढ़ियों को बताएगी, कि आज़ादी और सुरक्षा की कीमत क्या होती है।
कई लोग यह सोच सकते हैं, कि आखिर इस तरह की शौर्य वाटिका का यहाँ क्या काम? इससे क्या होगा? पर इस पर हमें सोचने की जरूरत है साथियों।
आज के दौर में हम सब अपने रोज़मर्रा के जीवन में बहुत उलझ गए हैं। कोई नौकरी-चाकरी में लगा है, कोई घर-परिवार की जिम्मेदारियों में, कोई अपने बिजनेस-व्यापार में लगा है। ऐसे में, बहुत सारी चीज़ें जो हमारे लिए बेहद अहम होती हैं, हम उनसे अनजाने में कटते चले जाते हैं। हमारी सीमाओं की हिफाज़त करने वाले हमारे सैनिकों का बलिदान, उनका रोज़ का संघर्ष, इन सब चीज़ों से हमारा आत्मीय रिश्ता, रोज़मर्रा की भाग-दौड़ में पीछे छूट जाता है। ऐसे में यह शौर्य वाटिका हमें एक बार रुककर, ठहरकर सोचने पर मजबूर करेगी, कि जिन लोगों की वजह से, हमारी ये सारी ज़िंदगी सुरक्षित चल रही है, उनका योगदान हमारी ज़िंदगी में कितना बड़ा है। उनके प्रति हमारी नई पीढ़ी कृतज्ञता का अनुभव करेगी।
यह कृतज्ञता बहुत जरूरी है। इसका एक उदाहरण आप देखिये। हम सब जब छुट्टी वाले दिन बड़े इमामबाड़े की भव्यता देखने जाते हैं, जब हम चौक में जाकर चिकन का बढ़िया कुर्ता खरीदते हैं, जब हम अपने परिवार के साथ किसी restaurant में खाना खाने जाते हैं, तब हम बड़े खुश होते हैं। लेकिन क्या हम कभी उस पल सोचते हैं, कि यह सब क्यों हो पा रहा है? हम यह सब इसलिए कर पा रहे हैं, क्योंकि हम सुरक्षित हैं। सबसे पहली और सबसे ज़रूरी चीज़ हमारी सुरक्षा है, और वह हमें हमारी सेनाएँ दे रही हैं। हम सुरक्षित हैं, तभी तो हम त्योहार मना पाते हैं, business कर पाते हैं, बच्चों को पढ़ा पाते हैं। तो यह जो शौर्य वाटिका और museum है, ये केवल स्थापत्य कला या बनावट का नमूना भर नहीं हैं। ये हमें हर पल, हमारी सेनाओं की याद दिलाती रहती हैं, और हमारे भीतर उनके प्रति कृतज्ञता का जो एहसास है, उसे ताज़ा करती रहती हैं। मुझे बड़ी ख़ुशी होगी, जब लाखों की तादाद में लोग यहाँ आएँगे, और अपने वीरों को याद करेंगे, उनकी विरासत को, उनकी legacy को याद करेंगे।
मैं आप सभी को एक और बात बताना चाहूँगा। मेरे पास अक्सर बहुत बड़ी संख्या में, हमारी सेनाओं के retired platforms और उपकरणों के लिए स्कूल, कॉलेज और संस्थानों से चिट्ठियाँ आती हैं। किसी को retired tank चाहिए होता है, किसी को fighter aircraft, तो किसी को कोई helicopter चाहिए होता है। मेरा हमेशा से यही प्रयास रहता है, कि जिन equipment ने दशकों तक हमारी सेवा की है, वो retire होने के पश्चात हमारे स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय में प्रदर्शित हों। क्योंकि जब हमारी नई पीढ़ी उन्हें अपनी आँखों के सामने देखेगी, छूएगी, तो उनके भीतर राष्ट्र निर्माण का जोश जागेगा। और आज जो नौसेना शौर्य वाटिका आपके सामने है, इसके पीछे भी यही सोच है।
साथियों, आप सब तो देख ही रहे हैं, कि आज दुनिया में क्या-क्या चल रहा है। यूक्रेन-रूस विवाद हो, या फिर हाल के समय में middle east में चल रहे युद्ध हों, हर तरफ उथल-पुथल चल रही है। और ये पूरी उथल-पुथल हमें सिखा रही है, कि दुनिया की शांति और समृद्धि की चाबी, समुद्री मार्गों की सुरक्षा के पास ही है। समुद्र में आपकी उपस्थिति, एक तरह से ताकत का भी प्रतीक होती है।
जैसे, इसका एक example आप देखिये। पिछले साल, पहलगाम में एक कायराना आतंकी हमला हुआ। आतंकियों ने धर्म पूछकर हमारे निर्दोष नागरिकों की हत्या की। उस घटना के बाद, पूरे देश का खून खौल उठा। उसके बाद, हमारी तीनों सेनाओं ने मिलकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। हमारी सेनाओं ने सटीक हमले करके, पाकिस्तान में स्थित आतंकी ढाँचे को, पूरी तरह तबाह कर दिया। हमारी Army और Air force ने तो अपनी भूमिका निभाई ही, लेकिन जो भूमिका हमारी Navy ने निभाई, वो भी बहुत महत्त्वपूर्ण थी। हमारी Navy, पूरी ताकत के साथ, अरब सागर में उपस्थित थी। जिसने दुश्मन के मन में लगातार भय बनाए रखा। इसका नतीजा ये हुआ, कि पाकिस्तान की पूरी नौसेना डर कर अपने बंदरगाहों में दुबक कर बैठ गयी।
साथियों, हमारी सेनाओं की ये ताकत, हमारी लगातार की गयी मेहनत और सतर्कता का नतीजा है। 2014 में जब प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, हमारी सरकार आई, तबसे ही हमने इस बात पर विशेष ध्यान दिया, कि भारत सही मायने में तभी ताक़तवर कहलाएगा, जब हमारी सेनाओं को हथियार के लिए, दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। इसलिए हमारे प्रधानमंत्री जी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का vision दिया।
साथियों, हमने Make in India, Defence corridors, i-DEX, ADITI, तथा और भी कई initiatives के माध्यम से, यह ensure किया, कि हम भारतीय सेनाओं के लिए अत्याधुनिक हथियार, भारत में ही निर्मित करें, और यदि संभव हो, तो हम उसे भारत के बाहर निर्यात भी करें। जब हमने रक्षा क्षेत्र में निर्यात की ओर ध्यान देने की बात की, तब हमारे इस plan को कई लोगों ने शंका की दृष्टि से देखा, क्योंकि भारत का रक्षा क्षेत्र कभी अपने निर्यात के लिए नहीं जाना जाता था। हम तो हमेशा हथियार वगैरह खरीदने के लिए जाने जाते थे, export करने के लिए नहीं।
लेकिन मुझे यह कहते हुए अब ख़ुशी होती है, कि भारत का रक्षा क्षेत्र, अब पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ रहा है। पिछले दस वर्षों में हमने जो मेहनत की है, उसका परिणाम आज हमें मिल रहा है। 2014 में हमारा domestic defence production, मात्र 46,000 करोड़ रूपये था, यानि हमलोग भारत में सिर्फ 46,000 करोड़ रूपये के हथियार और साजो-सामान बना पाते थे। लेकिन आज वहीं बढ़कर, डेढ़ लाख करोड़ रूपये से भी अधिक हो चुका है। यही नहीं, अभी कुछ ही समय में नए आंकड़े आने वाले हैं, जिसमें domestic defence production आपको record पौने दो लाख करोड़ रूपए का देखने को मिलेगा।
इसके अलावा 2014 तक भारत का जो Defence export है, वह बहुत कम हुआ करता था। हम 1,000 करोड़ रुपये से भी कम के हथियार और साजो-सामान, दुनिया को बेच पाते थे, लेकिन आज वही बढ़कर, लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इस तरह की अनेक उपलब्धियाँ हमने हासिल की हैं।
इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश का, विशेषकर लखनऊ का, बड़ा महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। मेरा हमेशा यह प्रयास रहता है, कि लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश की जनता का, हमारी सेनाओं के साथ सीधा और भावनात्मक जुड़ाव बने। यूँ तो उत्तर प्रदेश की धरती पहले से ही सेना में अपनी भागीदारी के लिए जानी जाती है, यहाँ के जवानों ने हर युद्ध में बढ़-चढ़कर, कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा की है। लेकिन हमने इसे और आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। इसी सोच के तहत, हमने यहाँ DRDO की प्रयोगशालाएँ शुरू की। Defence corridor के माध्यम से उत्तर प्रदेश, भारत के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बना रहा है। यहाँ लखनऊ में ब्रह्मोस का भी निर्माण हो रहा है। और भी कई तरह से उत्तर प्रदेश, defence manufacturing को मज़बूत कर रहा है।
न केवल defence के क्षेत्र में, बल्कि health, education, agriculture, science and technology, trade & Commerce, roads, highways airports, यानि हर क्षेत्र में ‘U.P.’, आज ‘up’ हो रहा है, यानि ऊंचाई छू रहा है। यह सब अपने आप में बड़ा ही सकारात्मक परिवर्तन है।
मैं उत्तर प्रदेश की जनता, विशेषकर लखनऊ के लोगों को बधाई देता हूँ। हमारी नौसेना की आत्मा का, एक गौरवशाली हिस्सा, आज हम लखनऊ को, आपको सौंप रहे हैं। अब इसकी देखभाल कीजिए, इसे स्वच्छ रखिए, और सबसे ज़रूरी, अपने बच्चों को यहाँ जरूर लाइए… ताकि वे जान सकें कि वर्दी केवल कपड़ा भर नहीं होती, बल्कि राष्ट्रसेवा का अटूट संकल्प होती है। अगली बार जब लखनऊ में आपके दोस्त-रिश्तेदार आएँ, तो उन्हें यहाँ भी ज़रूर लाइएगा। यह पूरा परिसर, एक ऐसा गंतव्य बनेगा, जहाँ देश-विदेश के सैलानी भारत के समुद्री वैभव को जानने आएँगे।
अंत में, एक बार फिर, मैं उत्तर प्रदेश सरकार, यहाँ के अधिकारीगण, और हर उस व्यक्ति को बधाई देता हूँ, जिसने इस project में अपना योगदान दिया।
मेरी यही प्रार्थना है, कि गोमती नदी के तट पर बसे इस नगर में, यह शौर्य वाटिका सदियों तक हमारी नौसेना के पराक्रम और यश का गान करती रहे। इसी कामना के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद।
जय हिंद!