भारत की डिफेंस कंपनियों का सामर्थ्य बढ़ेगा, तो देश की सुरक्षा और अधिक मज़बूत होगी: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech at the Inaugural Ceremony of the “Defence Manufacturing Complex” in Shirdi, Maharashtra.

सबसे पहले तो मैं, शिरडी की इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक भूमि से, एक नए युग के शंखनाद पर, आप सबको बधाई देता हूँ। इसे मैं नए युग का शंखनाद इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि आज, रक्षा और अन्तरिक्ष के क्षेत्र में, भारत की आत्मनिर्भरता का, एक सुनहरा अध्याय लिखा जा रहा है।

मैं NIBE Group को, यहाँ उपस्थित आप सभी गणमान्य जनों को, और पूरे देश को, इस ऐतिहासिक अवसर पर हार्दिक बधाई देता हूँ।

मैं, विशेष रूप से महाराष्ट्र की जनता को बधाई देता हूँ। जब से देवेंद्र फडणवीस जी ने, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी संभाली है, यह प्रदेश लगातार विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है। सुशासन, शांति और स्थिरता के इस माहौल ने, महाराष्ट्र को विकास की नई ऊँचाइयाँ दी हैं।

साथियों, आज का यह कार्यक्रम, एक नहीं, दो नहीं, बल्कि कई milestones वाला कार्यक्रम है। पहला तो यह, कि Artillery shells बनाने के एक आधुनिक कारखाने का उद्घाटन हो रहा है, जिसकी वार्षिक क्षमता 5 लाख shells बनाने की होगी। दूसरा, Universal Rocket Launching System से जुड़े missile complex की भी आधारशिला रखी जा रही है। और तीसरा, Black Sky के साथ एक ऐसा contract किया जा रहा है, जो satellite assembling की दिशा में, हमारी प्राइवेट इंडस्ट्री को, अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

इसके अलावा 15 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला, Renewable Bio-Energy Compressed Biogas Plant भी स्थापित हो रहा है; जो स्वदेशी पेटेंट तकनीक पर आधारित होगा। यानी धरती से लेकर आकाश तक, Artillery shells से लेकर सैटेलाइट तक, आज का दिन, हमारे पूरे रक्षा और अंतरिक्ष ecosystem के लिए, एक बहुत बड़ा दिन है।

साथियों, जब भी हम सैन्य तैयारियों की बात करते हैं, तो आम तौर पर, बंदूक, टैंक, मिसाइल, fighter jets की चर्चा होती है। लेकिन, जिस प्रकार एक योद्धा के लिए, उसका अस्त्र महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका गोला-बारूद । आज जिस plant का उद्घाटन हो रहा है, यह advanced explosives, RDX, और आधुनिक propulsion तकनीक पर आधारित होगा। यह plant निश्चित रूप से, हमारे सशस्त्र बलों की operational ज़रूरतों को पूरा करते हुए, भारत के रक्षा उद्योग को मज़बूत बनाने की दिशा में भी, एक बड़ा कदम है।

साथियों, हमारी रक्षा उद्योग आज जिस स्थिति में है, उसके लिए हमने लंबी यात्रा तय की है। यदि हम इसके इतिहास पर नज़र डालें, तो हम सभी जानते हैं, कि आज़ादी से पहले ही, हमारे यहाँ ordnance factories की स्थापना हो चुकी थी। East India Company के दौर में, भारत के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक योगदान को अक्सर हम नज़रअंदाज़ कर जाते हैं। जब हम कहते हैं, कि अंग्रेज़ भारत से कच्चा माल ले गए, तो हमारा ध्यान कपास, मसाले, या चाय पर जाता है। किंतु, एक और बेहद महत्वपूर्ण कच्चा माल था, Potassium nitrate, यानी शोरा। यह वही पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल gunpowder बनाने में किया जाता है। भारत में उस समय, शोरा का बड़ा भंडार पाया गया। East India Company ने इससे, अपनी सैन्य शक्ति मजबूत की। सदियों पहले भी हमारी धरती ही थी, जो दुनिया में ताकत का एक बड़ा स्रोत बनी। यानी, भारत की रक्षा उद्योग की जड़ें, बहुत गहरी हैं।

लेकिन, स्वतंत्रता के बाद एक लंबा समय ऐसा रहा, जब हम अपनी पुरानी क्षमताओं और आधुनिक रक्षा जरूरतों के बीच प्रभावी तालमेल नहीं बिठा सके। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि रक्षा उत्पादन में private sector को पर्याप्त अवसर नहीं मिला और defence industry मुख्यतः public sector units तथा ordnance factories तक सीमित रही। लेकिन प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमने यह समझा कि आत्मनिर्भर भारत और Make in India के लिए private sector की ऊर्जा का उपयोग आवश्यक है। इसलिए नीतिगत सुधार किए गए, FDI liberalize किया गया, strategic partnership model लागू हुआ, Positive Indigenisation Lists लाई गईं, और i-DEX, ADITI तथा TDF जैसी योजनाओं से young innovators को प्रोत्साहन दिया गया।

जब हमने Positive Indigenisation Lists जारी की, तो कुछ लोगों ने सवाल उठाए, कि क्या भारत अपने बूते पर, ऐसे हथियार बना पाएगा? लेकिन हमें अपनी धरती पर, अपने लोगों पर भरोसा था। जो देश चंद्रयान और मंगलयान भेज सकता है, उसे गोला-बारूद बनाने में कितनी देर लगेगी? हमने यह अनुभव किया, कि जो देश अपने हथियार खुद बनाता है, वही अपनी तक़दीर लिखता है। अब दुश्मनों को जवाब हमारी सेना देगी, और ताकत हमारे कारखाने देंगे। और हमारी सोच का नतीजा आज सबके सामने है। आज स्थिति यह है साथियों, कि विदेशी कंपनियाँ भी हमसे जुड़ना चाहती हैं, हमारे साथ technology transfer करना चाहती हैं। यानी कि, हम रक्षा क्षेत्र में मज़बूती के साथ, अपनी पहचान बढ़ा रहे हैं।

और आज, मुझे यह कहते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है, कि हमारे द्वारा किये गए प्रयास रंग ला रहे हैं। पहले, जहाँ रक्षा उत्पादन में Private Sector की भूमिका नगण्य थी, आज वह लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। और हमारा लक्ष्य है, कि आने वाले वर्षों में इसे 50 प्रतिशत तक ले जाएँ। आज का यह Artillery shells बनाने का कारखाना, यह missile complex, और यह अंतरिक्ष complex, इसी बदलाव के जीवंत प्रमाण हैं। यह वो नया भारत है, जहाँ Private Sector केवल nuts and bolts का supplier नहीं, बल्कि पूरे के पूरे advanced एवं state-of-the art weapon system का innovator और उत्पादक बन रहा है। जब सरकार का vision और Private Sector का innovation साथ आता है, तब राष्ट्र नई ऊँचाइयाँ छूता है; और आज हम वही होते हुए देख रहे हैं।

साथियों, जब हम Private Sector को बढ़ावा देने की बात करते हैं, तो उसके पीछे एक बड़ा कारण यह होता है, कि private sector में risk लेने की क्षमता होती है। Private sector मतलब, efficiency. Private sector मतलब, economic development. Private sector मतलब, Research and development. Private sector मतलब, imagination. इसलिए रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में, Private sector के आ जाने से, यहाँ और भी ज्यादा investment और विकास देखने को मिल रहा है।

जैसे, आज जिन plants की शुरुआत हो रही है, वे केवल उत्पादन इकाइयाँ नहीं, बल्कि research-oriented hubs भी बनने जा रहे हैं, जहाँ advanced explosives से लेकर next generation weapons तक पर काम होगा। इससे हमारी armed forces की क्षमता और अधिक मजबूत होगी। Universal Rocket Launching System का missile complex, भारत के भावी युद्ध प्रणाली को नई दिशा देगा। स्वदेशी तकनीक से युक्त यह rocket system हमारी सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा और रणनीतिक रूप से game changer साबित होगा। यहाँ से निकला ‘सूर्यास्त्र’, दुश्मनों के मंसूबों का सूर्यास्त करने के लिए काफी होगा भाइयों और बहनों; यह मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ।

आज का दिन रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। एक समय अंतरिक्ष क्षेत्र मुख्यतः ISRO तक सीमित था, लेकिन प्रधानमंत्री जी के vision और सरकार के reforms के कारण private sector के लिए भी यह क्षेत्र खुला है। IN-SPACe के गठन और ISRO की तकनीक व सुविधाओं को साझा करने से private companies अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसी दिशा में NIBE Limited, और BlackSky के बीच हुआ agreement, satellite assembling के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा।

आज satellites केवल defence तक सीमित नहीं हैं; वे मौसम पूर्वानुमान, कृषि, आपदा प्रबंधन, GPS navigation, tele-medicine और education जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुझे खुशी है कि यह establishment केवल high-technology industry नहीं, बल्कि MSMEs, छोटे उद्योगों और local economy के लिए भी एक बड़ा ecosystem तैयार करेगा। ammunition, missile, rocket systems और satellite parts के production से ancillary units, suppliers और vendors जुड़ेंगे, रोजगार बढ़ेगा, और Shirdi सहित आसपास के युवाओं को cutting-edge technology का skill-set प्राप्त होगा; एवं वे और अधिक सामर्थ्य के साथ राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें सकेंगे।

साथियों, आज security और economy को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। मजबूत अर्थव्यवस्था ही मजबूत सेना और आधुनिक रक्षा क्षमता का आधार बनती है, और मजबूत सुरक्षा निवेश, उद्योग और विकास के लिए stable माहौल तैयार करती है। लेकिन आज trade, supply chain और rare earth minerals तक का weaponization हो रहा है। ऐसे समय में, अगर defense manufacturing के लिए हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं तो, हमारी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।

इसीलिए defense manufacturing केवल युद्ध की जरूरत नहीं, बल्कि शांति, विकास और economic resilience की भी आवश्यकता है। Manufacturing sector, खासकर defense manufacturing, भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। इसी सोच के तहत, पिछले वर्षों में हमने साहसिक reforms किए, जैसे Ordnance Factory Boards का corporatization, ताकि उन्हें अधिक प्रभावी, पारदर्शी, आधुनिक और competitive बनाया जा सके। और इस corporatization के बाद, आज वे और भी ज्यादा शक्ति से काम कर रही हैं।

 

साथियों, भविष्य के युद्धों में सबसे बड़ा अंतर इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि आपके पास सैनिकों की संख्या कितनी है, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका देश Munition और Automation की दृष्टि से कितना Advanced और Capable है। इसकी झलक हम रूस यूक्रेन के युद्ध में देख रहे हैं और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में भी देख रहे हैं। भारत ने भी अपनी इस शक्ति का परिचय operation sindoor के दौरान दिया था ।

आज के युद्धों में  speed और precision बहुत महत्वपूर्ण है। ड्रोन, automated system और AI आधारित सिस्टम दुश्मन पर ज्यादा सटीक हमला कर सकते हैं और अपने सैनिकों की जान भी बचा सकते हैं।

इसका एक और लाभ सीमा सुरक्षा से भी जुड़ा है। भारत का भौगोलिक क्षेत्र बहुत कठिन है। हर जगह सैनिकों की तैनाती करना आसान नहीं होता। ऐसे में ऑटोमेटेड निगरानी सिस्टम, रोबोटिक वाहन और सेंसर दिन-रात सीमा की निगरानी कर सकते हैं। इससे सुरक्षा भी बढ़ती है और कठिन परिस्थितियों में तैनात सैनिकों पर दबाव भी कम होता है।

मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आज भारत की Private Industries भी future warfare की अच्छी खासी समझ रखती हैं और उस दिशा में लगातार काम कर रही हैं। भारत को Munition और Automation का हब बनाने के लिए सबको मिल जुल कर काम करना होगा। महाराष्ट्र में Nibe के साथ-साथ सोलर इंडस्ट्रीज भी बहुत अच्छा काम कर रही हैं। भारत की डिफेंस कंपनीज का जब सामर्थ्य बढ़ेगा तभी देश का सुरक्षा चक्र और अधिक मज़बूत होगा।

इसलिए हमारी सरकार लगातार इस बात पर ज़ोर दे रही है कि Critical Technologies और Advanced systems में मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिले। Munition और Automated Systems में भारत frontrunner बन कर उभरे इसके लिए सरकार हर ज़रूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।

कुछ लोग मानते हैं कि मशीनों पर ज्यादा निर्भरता इंसानी फैसलों को कमजोर कर सकती है। यह चिंता कुछ हद तक सही है, लेकिन तकनीक का उद्देश्य सैनिकों की क्षमता को घटाना नहीं बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाना है। अंतिम निर्णय हमेशा इंसानों के हाथ में ही रहना चाहिए।

चूँकि भविष्य के युद्धों में आधुनिक हथियार और ऑटोमेटेड सिस्टम की भूमिका बहुत बड़ी हो रही है, इसलिए भारत का इस दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। मैं देश की सभी डिफेंस कंपनीज़ से शिरडी मी इस धरती से यही आग्रह करना चाहता हूँ कि आप लोग भविष्य के युद्धों के लिए भारत का सामर्थ्य बढ़ायें।

हम जब इतिहास पर नज़र डालते हैं, तो हमें दिखता है, कि महाराष्ट्र ने हमेशा, सुरक्षा और स्वाभिमान की मिसाल पेश की है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने, Navy और forts की जो व्यवस्था खड़ी की थी, वो सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं थी, बल्कि एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का मॉडल भी था। उन्होंने स्थानीय संसाधनों से हथियार बनाए, स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित किया, और एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जो विदेशी ताकतों को चुनौती दे सके। आज शिरडी की इस धरती पर, छत्रपति शिवाजी महाराज की ही प्रेरणा से, हम एक बार फिर आत्मनिर्भरता का किला खड़ा कर रहे हैं। जिस महाराष्ट्र ने देश को छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा राजा दिया, लोकमान्य तिलक जैसे क्रांतिकारी दिए, वो धरती भला सुरक्षा के क्षेत्र में पीछे कैसे रह सकती है। इसी धरती से “स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा निकला था। असल मायने में तिलक के सपने को, हम अब साकार कर रहे हैं।

इन सब प्रयासों में, सुखद बात यह है, कि private sector अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। यह दिखाता है, कि सरकार की सही policies और support से, हमारा private sector किसी भी challenge का सामना करने में सक्षम है। बस ज़रूरत है एक भरोसे की, एक साझेदारी की। और आज का दिन, यही भरोसा जगा रहा है।

मैं NIBE Group के तमाम managers, engineers, scientists, कर्मचारियों, और इन projects से जुड़े सभी stakeholders को बधाई देता हूँ। मुझे विश्वास है, कि इस पहल से स्थानीय स्तर पर एक पूरा ecosystem develop होगा। सैकड़ों MSMEs को बल मिलेगा, हज़ारों युवाओं को हुनर और रोज़गार मिलेगा। मेरी, सभी private players से अपील है, कि और अधिक संख्या में आगे आएँ, Defence और Aerospace में invest करें।

हम सब मिलकर संकल्प लें, कि हम भारत को, defence और space technology में, पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाएँगे। आत्मनिर्भर भारत यानी – सुरक्षित भारत। आत्मनिर्भर भारत यानी – सक्षम भारत; और आत्मनिर्भर भारत यानी – शक्तिशाली भारत।

साथियों, महाराष्ट्र तो गणपति बप्पा का प्रदेश है। और आप सब तो जानते हैं, कि इस प्रदेश की एक और खासियत है, कि यहां पर हर जिले में गणपति जी का एक विशिष्ट रूप है। जिस शिर्डी की पावन भूमि पर हम खड़े हैं, वहाँ पंचमुखी विष्णु गणपति जी की महिमा बरसती है। बिना उनके आशीर्वाद के, भला हम अपने लक्ष्यों को कैसे प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए अंत में, श्री पंचमुखी विष्णु गणपति जी के आशीर्वाद की कामना करते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद। जय हिंद!