क्षेत्रीय शांति के लिए SCO को संरक्षक बनकर काम करना होगा: रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह

Hindi Text of RM’s speech at the SCO Defence Ministers’ Meeting in Bishkek (Kyrgyzstan).

किर्गिज़ republic के नेतृत्व में, इस गरिमामयी सभा को संबोधित करना मेरे लिए गौरव का विषय है। सबसे पहले मैं, अपने मेज़बान मित्र का, उनके आत्मीय स्वागत और गर्मजोशी से भरे आतिथ्य के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँI साथ ही मैं, चुनौतीपूर्ण – वैश्विक एवं क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में, SCO के प्रभावी नेतृत्व के लिए उन्हें बधाई देता हूँ।

SCO एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ दुनिया की प्राचीनतम सभ्यताएँ बसती हैं। यह क्षेत्र पुराने व्यापारिक मार्गों की उद्यमिता की भावना, और हमारे लोगों के साहस व पराक्रम से आलोकित है। यहाँ एक ऐसा साझा सांस्कृतिक परिवेश है, जहाँ सभ्यताएँ आपस में मिलती हैं, समुदाय परस्पर जुड़ते हैं, और व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ गहराई से गुंथा हुआ है।

Excellencies, आज के दौर में SCO की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जब वैश्विक दृष्टिकोण खंडित दिखाई देने लगा है, और देश दिन-ब-दिन अंतर्मुखी होते जा रहे हैं।

वर्तमान समय में दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ बढ़ता unilateralism और conflict, एक कठोर सच्चाई बनकर सामने आए हैं। सहमति की बुनियाद कमजोर पड़ती दिख रही है और मतभेदों का स्वर पहले से अधिक मुखर हो गया है।

Excellencies, हम आज ऐसे समय में एकत्र हुए हैं जब दुनिया अभूतपूर्व संकटों का सामना कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में लगातार हुए संघर्षों ने, जान-माल का भारी नुकसान किया है, और यह सिलसिला चिंताजनक रूप से जारी है। Defence और security से जुड़े होने के नाते, यह हमारे लिए आत्ममंथन का समय है, ताकि हम इस स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठा सकें।

इसी समय हम extremism, radicalism और terrorism के रूप में एक और गंभीर चुनौती का सामना कर रहे हैं। आज के उभरते world order में आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आया है। इसी पृष्ठभूमि में SCO एक ऐसे organisation के रूप में सामने आया, जो हमारे shared values पर आधारित है। इस संगठन ने हमेशा आतंकवादी विचारधाराओं और गतिविधियों की कड़ी निंदा की है, और आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक संघर्ष को अपना आधार बनाया है। इसलिए, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, इस संगठन के मूल सिद्धांतों में शामिल है।

Excellencies, पिछले वर्ष तियान-जिन Declaration ने, आतंकवाद के विरुद्ध हमारे दृढ़ और एकजुट रुख को स्पष्ट रूप से सामने रखा था। कुछ ही दिन पहले, 22 अप्रैल को, हमने पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। उस घटना ने न केवल एक क्षेत्र, बल्कि पूरी मानवता को झकझोर दिया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमने यह स्पष्ट कर दिया, कि आतंकवाद के केंद्र, अब सजा पाने से किसी भी प्रकार से बच नहीं सकते।

आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति, यह हमारे ‘zero-tolerance’ के दृष्टिकोण का प्रमाण था, जिसे इस प्रतिष्ठित मंच ने भी स्वीकार किया। लेकिन हमारी collective credibility, अपनी कसौटी पर तब खरी उतरती है, जब इसकी निरंतरता बनी रहे। हमें यह नहीं भूलना चाहिए, कि आतंकवाद का न कोई देश होता है और न कोई धर्म। Terrorism, और innocent humanitarian loss के लिए, कोई भी वजह, चाहे वह वास्तविक हो या काल्पनिक, जायज़ नहीं है।

इस संदर्भ में, SCO के Regional Anti-Terrorist Structure ने, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत की Chairmanship के दौरान ,‘Countering Radicalization leading to Terrorism, Separatism and Extremism’ के विषय में जारी, Heads of State का joint statement, हमारी shared commitment को दिखाता है। इन तीनों evils से निपटने के लिए, एक unified front की जरूरत है, जो safe havens को खत्म करे, और किसी भी political exceptions को अस्वीकार करे। हमें state-sponsored, cross-border terrorism को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जो किसी भी देश की संप्रभुता पर, सीधा आघात करता है। इस विषय में दोहरे मानदंडों के लिए कोई स्थान नहीं है, और SCO को, उन लोगों के खिलाफ उचित कदम उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए, जो आतंकवाद को समर्थन, आश्रय या संरक्षण देते हैं।

आजकल एक ‘New world order’ की चर्चा अक्सर सुनने को मिलती है। लेकिन प्रश्न यह है — कि क्या हमें एक ‘New world order’ चाहिए, या एक ऐसी दुनिया चाहिए जो ज्यादा orderly हो? हमें ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा मिले; जहां मतभेद विवाद का रूप न लें और विवाद, विनाश का कारण न बनें। आज की असली चुनौती किसी व्यवस्था की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि स्थापित नियमों और सिद्धांतों पर प्रश्नचिह्न लगाने की प्रवृत्ति है। हमें एक ऐसे वैश्विक सहमति की ओर बढ़ना होगा, जहां सह-अस्तित्व, सहयोग और करुणा को हर हालत में संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और अव्यवस्था पर प्राथमिकता दी जाए।

Excellencies, SCO दुनिया की एक बड़ी आबादी को represent करता है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है, कि हम अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता ensure करें। हमें dialogue और diplomacy का रास्ता अपनाते रहना चाहिए, न कि ज़ोर-जबरदस्ती काI हमें इसे हिंसा और युद्ध का युग नहीं बनने देना है, बल्कि शांति और समृद्धि का युग बनाना है। यहाँ मैं, महात्मा गाँधी का एक संदेश याद दिलाना चाहूँगा कि an eye for an eye makes everyone blind” और “हर कदम उठाने से पहले हमें सोचना चाहिए, कि उसका गरीब और जरुरतमंदों के जीवन पर क्या असर पड़ेगा”।

Defence और security के लिए उत्तरदायी लोगों के रूप में, हमारी बड़ी जिम्मेदारी है, कि हम भाईचारा और सद्भावना को बनाए रखें। हमें यह याद रखना होगा, कि शक्ति की असली परीक्षा, इसे गरीब और कमजोर के खिलाफ इस्तेमाल करने में नहीं है, बल्कि उन लोगों के हित में इस्तेमाल करने में है, जो खुद की रक्षा नहीं कर सकते।

SCO, उभरते हुए वैश्विक व्यवस्था को बनाये रखने में एक सकारात्मक भूमिका निभा पायेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि SCO, आपसी मतभेदों को सुलझा कर सकता है या नहीं, एवं अपने vision को वास्तविकता में बदल सकता है या नहीं I भारत यह मानता है कि SCO के पास शांति और स्थिरता बनाये रखने के लिए, आवश्यक शक्ति एवं संकल्प है । ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, नसल और धर्म के सभी मतभेदों से परे, इसी दर्शन को सामने लाता है।

Excellencies, अंत में, मैं यह दोहराना चाहता हूँ,  कि भारत, SCO के mandate के क्रियांवनों में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।  Equality, Mutual Respect और Deeper Understanding के आधार पर, SCO सदस्यों के बीच, अधिक सहयोग और आपसी विश्वास, इस संस्था को, उम्मीदों का प्रकाशस्तंभ, और शांति के लिए आदर्श बना सकते हैं। मुझे पूरा विश्वास है, कि आज की हमारी चर्चा, shared security challenges की समझ को और गहरा करेगी, और Defence तथा security arena में, भविष्य में आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों को खोजेगीI

हमारे क्षेत्र के शांतिपूर्ण भविष्य के लिए, SCO को अन्तराष्ट्रीय मानकों का एक संरक्षक बनकर काम करना होगा। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटकर, हम अपने क्षेत्रीय सुरक्षा को अपनी खुशहाली का आधार बना सकते हैं। हमारी सफलता इसी में है, कि हम स्पष्टता और एकजुट उद्देश्य के साथ, आपसी सहयोग करें। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर, अपने मेज़बान का, और आप सभी का, आभार प्रकट करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ। आइए हम सब साथ मिलकर, इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने सर्वोत्तम प्रयास करेंI

बहुत-बहुत धन्यवाद।