किसान सिर्फ अन्न नहीं उगाता, वह पूरी अर्थव्यवस्था को उगाता है: रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech at the “Unnat Krishi Mahotsav” in Raisen, MP

 

सबसे पहले मैं इस मंच से, यहाँ उपस्थित अन्नदाता भाइयों-बहनों समेत, देश भर के किसानों को नमन करता हूँ। आप सभी के बीच, इस “कृषि महोत्सव” में आकर, मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही है।

रायसेन की धरती पर, इस मेले का आयोजन, निश्चित रूप से, हमारे किसान भाइयों और बहनों के लिए लाभदायक साबित होगा। न केवल लाभदायक साबित होगा, बल्कि उनके जीवन की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

यह राष्ट्रीय कृषि मेला, “सरकारी योजनाओं का साथ, बिचौलियों से मुक्त बाज़ार” और “सुरक्षित उपज, समृद्ध किसान” की थीम पर केंद्रित है। मुझे बताया गया, कि यहाँ विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत, वेयरहाउस और कोल्ड‑स्टोरेज पर, सरकार की ओर से दी जा रही छूट, और ब्याज की आर्थिक सहायता की, विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि किसान, फसल कटाई के बाद, वैज्ञानिक तरीके से भंडारण कर, सही समय पर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।

मैं इस भव्य मेले के आयोजन के लिए, मंत्रिमंडल के हमारे साथी, कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान, मध्य प्रदेश के जनप्रिय मुख्यमंत्री श्री मोहन जी यादव, प्रदेश के कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, और इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों को मैं अपनी बधाई देता हूँ।

मैं मध्य प्रदेश की जनता को, इस बात के लिए विशेष बधाई देता हूं, कि मध्य प्रदेश लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है। यहाँ मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री; भूतपूर्व ही नहीं बल्कि मैं कहूँगा अभूतपूर्व मुख्यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान जी उपस्थित हैं। आप मध्य प्रदेश से दिल्ली भले चले गए हों, पर मैं देखता हूँ, कि मध्य प्रदेश आपके मन में जस का तस विद्यमान है। अपने कार्यकाल में आपने, जनता के सर्वांगीण विकास के लिए, जो जो प्रयास किए, उन्होंने, भारत के हृदय प्रदेश को, यानी मध्य प्रदेश को, एक अलग पहचान दी है। और खुशी की बात यह है, कि आपकी जनोन्मुखी, विकास की विरासत को, प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री मोहन जी यादव ने न सिर्फ अच्छे से संभाला है, बल्कि उस विरासत को आगे भी बढ़ाया है। मैं इसके लिए आप दोनों को, और प्रदेश की जनता को बधाई देता हूँ।

साथियों, मध्य प्रदेश की इस माटी में कुछ तो खास बात है। यहाँ के किसानों की मेहनत, उनकी लगन, अपने आप में एक प्रेरणा है। वैसे तो जब भी समय मिलता है, मैं मध्य प्रदेश आता रहता हूँ। यहाँ के लोगों से मिलना, उनसे बातचीत करना, एक अलग ही अनुभव होता है। आपका अतिथि सत्कार, आपकी बोली, आपका व्यवहार हमेशा मेरा दिल जीत लेता है।

और उसमें भी यदि मैं, अपने किसान साथियों की बात करूँ, तो आप सबसे मिलना तो, हमेशा ही एक अलग अनुभव होता है। आप सभी इस देश की ताकत हैं। आपके बिना इस देश की थाली में अन्न नहीं पहुँच सकता; जीवन आगे नहीं बढ़ सकता। आज मैं आप सबके बीच, किसी रक्षा मंत्री के तौर पर नहीं आया हूँ, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर आया हूँ, जो खुद भी एक किसान परिवार से आता है। आप सबके बीच आना, तो हमेशा अपने परिवार के बीच आने जैसा होता है।

और इसीलिए साथियों, हमारी हमेशा यह सोच रहती है, कि हम अपने किसान भाइयों और बहनों के लिए कुछ बेहतर कर सकें। हमारे प्रधानमंत्री जी ने हमेशा कहा है, कि किसान हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। और यह सिर्फ कहने की बात नहीं है। बीते सालों में हमारी सरकार ने, किसानों के लिए जो काम किए हैं, वे अपने आप में बेमिसाल रहे हैं।

यहाँ बहुत से किसान साथी मौजूद हैं। आपमें से अनेक लोग ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी होंगे। इस योजना के तहत, हर साल हमारे किसान साथियों के बैंक खातों में, छह-छह हजार रूपये डाले जाते हैं। ये रकम तीन-तीन किस्तों में आती है। ये पैसा कोई दान नहीं है, ये आपकी मेहनत का सम्मान है। ये पैसा इसलिए दिया जाता है ताकि आप बीज खरीद सकें, खाद खरीद सकें, या अपने खेतों में कोई जरूरी काम कर सकें। अब तक इस योजना के तहत, हजारों करोड़ रूपये सीधे किसानों के खातों में गए हैं। बिना किसी बिचौलिए के, बिना किसी झंझट के। यह आप सभी किसानों के प्रति, हमारी सरकार की तरफ से एक कृतज्ञता है।

इसी तरह, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ भी, सरकार द्वारा किसान भाइयों को दिया गया एक अनमोल उपहार है। हम यह समझते हैं, कि खेती का काम, जोखिम भरा काम है। कभी बारिश कम हो जाए, कभी ओले पड़ जाएँ, कभी कीड़े लग जाएँ। पहले जब ऐसी स्थिति आती थी, तो किसानों की कमर टूट जाती थी। अब सरकार ने फसल बीमा योजना को बहुत मजबूत किया है। अगर कुदरती आफत से आपकी फसल खराब हो जाती है, तो उसके बदले में आपको मुआवजा मिलता है। ये मुआवजा सीधे आपके खाते में आता है। ये किसी भी किसान के लिए, मैं समझता हूँ बहुत बड़ी राहत है।

सरकार ने, उपज बेहतर करने के लिए ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ भी किसान भाइयों को दिए हैं। आपमें से भी अनेक लोगों के पास यह card होगा। इस योजना में हर किसान को एक कार्ड दिया जाता है, वह अपनी मिट्टी की जाँच करा सकता है। ताकि, पता चले कि उसकी जमीन में क्या कमी है, कौन से पोषक तत्व कम हैं, कौन सी फसल के लिए क्या खाद डालनी चाहिए। इससे किसान का बेवजह पैसा बर्बाद नहीं होता। किसान को पता चलता है, उसकी जमीन को क्या चाहिए। इससे उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है।

हमने किसानों के लिए, योजनाएँ तो बनाई ही हैं, साथ ही साथ खेती से जुड़े हुए अन्य चीजों पर भी ध्यान दिया है। जैसे, हमने गाँव-गाँव में सड़कें बनाई हैं, बिजली पहुँचाई है, पानी के प्रबंध किए हैं। किसान को अगर उसकी उपज बेचने के लिए बाजार तक पहुँचना है, तो जाहिर सी बात है, उसके लिए अच्छी सड़क चाहिए। पहले कई जगहों पर कच्चे रास्ते थे, जहाँ ट्रक नहीं आ पाते थे। अब सरकार ने लाखों-करोड़ों रूपये खर्च करके, गाँवों को शहरों से जोड़ा है। सरकार ने बिजली के connection घर-घर तक पहुंचाए हैं, ताकि अच्छी सिंचाई हो सके। हमने देश भर की मंडियो को online किया, ताकि किसान एक जगह पर बैठकर, देश में कहीं भी अपनी उपज बेच सकें। ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ को हमेशा बढ़ावा दिया है। ये सब छोटी बातें नहीं हैं। बल्कि इन प्रयासों से किसानों के जीवन में बहुत बड़े बदलाव आए हैं।

हमारी सरकार ने, हमेशा यही कोशिश है, कि हर किसान के पास सुविधा पहुँचे। हमारी सरकार किसानों को समर्पित सरकार है। मैं खुद लगभग 50 साल से राजनीतिक जीवन में हूँ। ईश्वर की कृपा से, और आप सभी के आशीर्वाद से, अलग-अलग पदों पर मैंने जिम्मेदारी निभाई। एक समय पर तो मैं, कृषि मंत्री भी रहा हूं। लेकिन मैं कहीं भी रहा, मेरे अंदर का किसान कभी नहीं गया। मैं जहाँ भी रहा, मेरे अंदर का किसान जीवित रहा। किसी भी पद पर रहा, मैंने यही प्रयास किया, कि कैसे अपने किसान साथियों के लिए कुछ कर सकूँ।

जैसे, अभी मेरे पास रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी है। आम तौर पर, रक्षा मंत्री को सिर्फ सेनाओं से, और देश की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है। जो कि सही भी है। हमारा तो काम ही है, देश की सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत रखना। लेकिन इस जिम्मेदारी में भी मेरे अंदर का किसान नहीं गया। आपमें से बहुत से लोग जानते होंगे, कि देश भर में हमारी सेना के cantonment इलाके हैं। ये वो जगहें हैं, जहाँ हमारे जवान रहते हैं, अपने परिवार के साथ रहते हैं, और देश की सेवा के लिए हर समय तैयार रहते हैं। इन छावनियों में रक्षा मंत्रालय ने, एक बहुत अच्छी पहल शुरू की है।

पहले क्या होता था, कि सेना के जवानों को सब्जी, फल और दूसरी खाने की चीजें, बाहर से मंगवानी पड़ती थीं। दूर-दूर से ट्रकों में सब्जियाँ आती थीं। इससे कई बार खाने में ताजगी नहीं रह पाती थी। लेकिन अब हमने एक नया तरीका निकाला है। हमने तय किया है, कि जो cantonment इलाके हैं, उनके आसपास जो भी किसान हैं, उन्हीं किसानों से ही, जैविक खेती वाले, सब्जियाँ और फल मंगवाए जाएँगे।

यानी कि आप किसान भाई, अपने खेतों में जैविक तरीके से, बिना किसी केमिकल खाद के, जो सब्जियाँ और फल उगाते हैं, वह सीधे हमारे जवानों की थाली में पहुँचेगी। इससे आपको फायदा होगा, क्योंकि आपकी पैदावार को हमारे सैनिकों तक पहुँचाया जाएगा, उसकी अच्छी कीमत आपको मिलेगी। और दूसरी ओर, इससे हमारे जवानों को भी फायदा हो रहा है, क्योंकि उन्हें ताजा और साफ खाना मिल रहा है।

साथियों, हमने अपने किसानों को, आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए, सेनाओं में, पिछले कुछ वर्षों में, Millets के, श्री-अन्न के आटे को बढ़ावा दिया है। यानी ज्वार, बाजरा, रागी के बने आटे को हमने अपनी सेनाओं के लिए उपलब्ध कराना शुरू किया है। हमने, Canteen Stores Department, यानी CSD में भी, बड़ी संख्या में श्री अन्न और प्राकृतिक उत्पादों को स्थान दिया है।

मुझे बताया गया है, कि हमारी इस पहल से, पिछले कुछ महीनों में, cantonment के आसपास के किसानों की आय में, अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। और सबसे अच्छी बात यह है, कि इससे हमारे किसानों को, जैविक खेती के लिए भी प्रोत्साहन मिल रहा है। यानी हम, अपने प्रयासों से, जय जवानजय किसान के नारे को, फिर से चरितार्थ कर रहे हैं।

साथियों, हमें इस बात का एहसास है, कि एक किसान पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चलाता है। मैं यह बात, पूरी जिम्मेदारी से, फिर से कह रहा हूँ, कि एक किसान पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चलाता है। आपने सुना होगा कि अर्थव्यवस्था तीन हिस्सों में बँटी होती है – पहला होता है, प्राथमिक क्षेत्र, जिसमें खेती और पशुपालन जैसी चीज़ें आती हैं। दूसरा होता है, द्वितीयक क्षेत्र, जिसमें उद्योग धंधे आते हैं। तीसरा होता है, तृतीयक क्षेत्र, जिसमें बैंक, ट्रांसपोर्ट, दुकानें, होटल, स्कूल, इंटरनेट जैसी सेवाएँ आती हैं।

मान लीजिए, एक किसान ने गेहूँ उगाया। अब ये गेहूँ कहाँ जाता है? पहले किसान उसे बाजार ले जाता है। उस गेहूं को ढोने के लिए ट्रक या टेम्पो चाहिए। फिर वो गेहूँ आटा मिल में पहुँचता है। वहाँ उसे पीसकर आटा बनाया जाता है। फिर वो आटा, बिस्कुट बनाने वाली फैक्ट्री में जाता है, या ब्रेड बनाने वाली फैक्ट्री में जाता है। वहाँ मजदूर लगते हैं, मशीनें लगती हैं, पैकेजिंग होती है। फिर वो बिस्कुट दुकानों तक पहुँचता है। और अंत में आप उस बिस्कुट को खाते हैं, यानी आप भी उस पूरी चेन का हिस्सा होते हैं।

अगर किसान गेहूँ न उगाए, तो आटा मिलों में कैसे काम होगा? ट्रांसपोर्ट का काम भी प्रभावित होगा। फैक्ट्रियों और दुकानों की गतिविधियों पर भी असर दिखाई देगा। यानी कि एक तरह से, किसान की मेहनत, इस पूरी व्यवस्था की एक अहम शुरुआत है, जिससे कई लोगों को काम और रोजगार मिलता है। असल में, किसान उस आधार की तरह हैं, जिन पर यह पूरी चेन चलती है। तो चाहे कोई भी क्षेत्र हो, कोई भी व्यक्ति हो, सबकी जड़ें किसान की जमीन में ही गड़ी हैं।

इसलिए मैंने कहा, कि किसान सिर्फ अन्न नहीं उगाता, वह पूरी अर्थव्यवस्था को उगाता है। वह रोज़गार को उगाता है। उद्योग को उगाता है। सेवाओं को उगाता है। किसान के बिना ये सब कुछ बेजान है। इसलिए, हम खेती के पेशे को, बड़े सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। मैं ख़ासकर अपने युवा साथियों से कहना चाहूँगा, कि आप इस पेशे से ज्यादा से ज्यादा जुड़ें।

हमारे देश के युवा आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। तकनीक और नवाचार में उनका योगदान सराहनीय है। यह गर्व की बात है कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। लेकिन यह भी आवश्यक है, कि जितना ध्यान सर्विस, स्पेस और अन्य क्षेत्रों पर दिया जा रहा है, उतना ही कृषि क्षेत्र पर भी दिया जाए। अक्सर खेती को पारंपरिक और कठिन कार्य समझा जाता है, जबकि आज इसे आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक सरल और लाभकारी बनाया जा सकता है।

युवाओं के पास ज्ञान, ऊर्जा और नवाचार की क्षमता है, जिसे कृषि की ओर भी मोड़ने की आवश्यकता है। ड्रोन, सेंसर, और मोबाइल तकनीक के जरिए खेती को स्मार्ट बनाया जा सकता है। जैसे मिट्टी की नमी की जानकारी, मौसम का पूर्वानुमान, और फसलों की निगरानी तकनीक के सहारे की जा सकती है। इसके अलावा, बिना मिट्टी के खेती, छतों पर बागवानी जैसे नए प्रयोग कम संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव बना रहे हैं।

खाद्य प्रसंस्करण भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहाँ कच्चे उत्पादों को मूल्यवर्धित करके अधिक लाभ कमाया जा सकता है। साथ ही, स्टार्टअप संस्कृति के माध्यम से युवा सीधे उपभोक्ताओं तक उत्पाद पहुँचाकर बिचौलियों की भूमिका कम कर सकते हैं। इन सबकी भी पर्याप्त जानकारी इस मेले में दी जाएगी।

कुल मिलाकर साथियों, कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। यदि युवा इसमें जुड़ते हैं, तो नवाचार बढ़ेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी और देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। सरकार भी इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि खेती, आने वाले समय में गर्व का विषय बने, और हमारे किसान अपनी पूरी आन, बान, शान और सम्मान के साथ जीवन जिएँ।

मुझे यह विश्वास है, कि हमारे हर पुनीत प्रयास में, बाबा महाकाल की कृपा बनी रहेगी, और आप सबका आशीर्वाद बना रहेगा। मैं फिर से आप सबका धन्यवाद करता हूँ, कि आपने मुझे यहाँ आमंत्रित किया। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ, कि वह आपके खेतों को हरा-भरा रखें, तथा देश का पेट भरने का जो पुण्य आप कमा रहे हैं, उसमें दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि करे।

इसी आशा और विश्वास के साथ, मैं इस महोत्सव की सफलता की शुभकामनाएं देते हुए, और मुझे इस अवसर पर आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।