भारत का युवा तकनीक बनाता है, पाकिस्तान के युवा आतंक फैलाते हैं: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Text of RM’s speech at the Convocation ceremony of Noida International University in Noida.

Noida International University में आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं आज Degree प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देता हूँ।

दीक्षांत समारोह एक छात्र के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता हैं। एक ऐसा पड़ाव जब आप अपनी शिक्षा हासिल करके, अपनी डिग्री प्राप्त करके, अपने Professional Carrier की शुरुआत करते हैं।

मैं आप सभी को इस नई Journey के लिए शुभकामनाएं देता हूँ। इस यात्रा के लिए आपको तैयार करने में आपके गुरुजनों, आपके माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए आज के दिन उनके सामने अपनी कृतज्ञता और आभार व्यक्त करना मत भूलिएगा।

My Young Friends, मैं जिस पीढ़ी से आता हूँ, उसे बेबी बूमर कहा जाता है। आपकी पीढ़ी को Gen Z कहा जाता है। इस बीच में कई और पीढ़ी भी आई हैं। हर पीढ़ी अपने को बेहतर मानती है, और यह स्वाभाविक भी है। लेकिन आज मैं आपसे कुछ अलग कहना चाहता हूँ- आपकी पीढ़ी सबसे Latest भी है, और Best भी है।

Gen Z को अक्सर गलत समझा जाता है। उन्हें Lazy या Entitled कह दिया जाता है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। मैं मानता हूँ कि आपकी Generation, Self-Driven है, अपने फैसले खुद लेने वाली है। आपकी Generation, Collaboration में विश्वास करती है।

आपकी Generation, Diversity को Accept करती है। आप समस्याओं के समाधान के लिए Practical सोच रखते हैं। आप Flexibility चाहते हैं। आप Autonomy चाहते हैं। आप अपने प्रति Accountable भी हैं। आप काम को अपने तरीके से और बेहतर ढंग से करना चाहते हैं। आप Authenticity को महत्व देते हैं।

एक बड़े विचारक ऑगुस्त कोम्त ने कहा है “Demography Is Destiny”. यानी किसी भी देश का भविष्य उसकी आबादी की संरचना से तय होता है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारी 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। यह सिर्फ एक Statistics नहीं है, यह एक शक्ति है।

लेकिन इस शक्ति को सही दिशा तब मिलती है, जब यह अनुभव के साथ जुड़ती है। इसलिए यह एक असाधारण अवसर भी है- Intergenerational Collaboration करने का।

जिस पीढ़ी से मैं आता हूँ उसमें अनुशासन, धैर्य और स्थिरता पर जोर दिया जाता था। आपकी पीढ़ी Innovation और Adaptability पर जोर देती है। जब दोनों पीढ़ियों की ताकत मिलेगी, तो विकास की गति और भी तेज होगी। जब अनुभव और ऊर्जा मिलेंगे, जब परंपरा और आधुनिकता साथ चलेंगी, तब हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे।

प्रिय विद्यार्थियों, अक्सर Convocations में महान लोगों के जीवन के प्रेरणादायक किस्से सुनाए जाते हैं। उनकी सफलता और असफलता की कहानियाँ सुनाई जाती हैं। मैं यह मानता हूँ कि दूसरों की कहानियाँ सुनना अच्छा है, उनसे सीखना भी जरूरी है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है, अपनी खुद की कहानी लिखना। आपकी परिस्थितियाँ, आपके संघर्ष और आपके सपने—ये सभी आपको अलग बनाते हैं।

इसलिए अपनी क्षमताओं को पहचानें। अपनी शक्तियों को पहचानें। और फिर काम करें। जैसे हनुमान जी के पास अपार शक्ति थी, लेकिन वे अपनी शक्तियों को भूल गए थे। तब जामवंत जी ने उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया था। और फिर हनुमान जी एक छलांग में समुद्र लांघ गए थे। जैसे हनुमान जी को उनकी शक्ति याद दिलानी पड़ी, वैसे ही हमें भी खुद को याद दिलाना होगा कि हम क्या कर सकते हैं?

प्रिय विद्यार्थियों, आज से चार दिन बाद 14 अप्रैल को बाबासाहब अंबेडकर जी की जयंती है। बाबासाहब को बचपन में बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ा। उनके साथ अन्याय हुआ। लेकिन स्कूल में एक Common नल से पानी तक नहीं पीने दिया जाता था। उनके जीवन में हर कदम पर बाधाएँ आयीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शिक्षा व संघर्ष के दम पर इतिहास बदल दिया।

आज, जब आप सब अपने जीवन के एक नए पड़ाव पर खड़े हैं, तो आप सभी को बाबासाहब के जीवन से सीख लेनी चाहिए। आपको भी अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन हार मानना विकल्प नहीं है। बस हिम्मत के साथ आगे बढ़ते रहना है।

प्रिय विद्यार्थियों, एक बहुत ही प्रसिद्ध और प्रेरणादायक पुस्तक है ‘दी एल्केमिस्ट’ (The Alchemist) जिसे आप में से कई लोगों ने पढ़ा होगा। इस पुस्तक में एक बेहद सुंदर कहानी आती है। एक व्यापारी अपने बेटे को दुनिया के सबसे ज्ञानी व्यक्ति के पास “खुशी का रहस्य” जानने के लिए भेजता है। लंबी यात्रा के बाद वह युवक उस ज्ञानी के महल में पहुँचता है। युवक, ज्ञानी व्यक्ति से पूछता है कि असली खुशी क्या है? वह ज्ञानी व्यक्ति उस युवक को तुरंत उत्तर देने के बजाय उसे एक चम्मच में तेल डालकर देता है। और कहता है कि जाओ पहले यह महल घूमकर आओ, लेकिन ध्यान रहे कि तेल गिरना नहीं चाहिए।

वह युवक पूरा महल घूमकर वापस आता है, तो ज्ञानी व्यक्ति उससे पूछता है कि उसने महल में क्या देखा? तब उस युवक को एहसास होता है कि उसका ध्यान केवल इस बात पर था कि चम्मच से तेल न गिरे। उसने महल की सुंदरता देखी ही नहीं। तब ज्ञानी व्यक्ति उससे कहता है, फिर से जाओ और महल की सभी चीजों को ध्यान से देखो। इस बार वह युवक महल की अद्भुत कलाकृतियाँ, बगीचे, और हर एक सुंदर चीज़ को ध्यान से देखता है। लेकिन जब लौटकर आता है तो चम्मच से तेल गिर चुका होता है।

तब ज्ञानी व्यक्ति मुस्कुराकर कहता है कि, खुशी का असली रहस्य यही है कि आप दुनिया की सभी सुंदरताओं को देखें, अपने सपनों का पीछा करें, जीवन का आनंद लें, लेकिन साथ ही अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भी कभी न भूलें। यही संतुलन, सच्ची खुशी और सफलता की कुंजी है।

इस कहानी में आपके Ambitions, Dreams और Opportunities, “महल की खूबसूरती” की तरह हैं। और “चम्मच में तेल” आपकी Responsibilities, Values और Relationships हैं। जीवन में आगे बढ़ते समय, आपको दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा। यही संतुलन—आपकी असली सफलता और खुशी तय करेगा।

प्रिय विद्यार्थियों, कभी-कभी हमें लगता है कि सफलता का मतलब सिर्फ अपने लिए कुछ हासिल करना है। अपना नाम बनाना। पैसा कमाना। लेकिन जीवन की सार्थकता और असली महानता दूसरों के लिए कुछ करने में होती है। जीवन में बड़ा काम करने के लिए बड़ा मन होना जरूरी है। छोटे मन का व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता है।

आपको शायद पता न हो, लेकिन जिस व्यक्ति ने आज Car में Use होने वाली Seat Belt बनाई थी, उसने इसका पेटेंट Public कर दिया था। सोचिए, इस कदम ने आज तक कितनी जानें बचाईं होंगी।

ऐसे ही जब जोनस साक (Jonas Salk) से पूछा गया था कि उनके द्वारा बनायी गए Polio वैक्सीन का पेटेंट किसके पास है, तो उनका जवाब था कि क्या कोई सूरज का पेटेंट करा सकता है? नहीं। सूरज सब लोगों का है। इसलिए उनकी Vaccine का पेटेंट भी सभी लोगों के पास है।

जब फ्रेडरिक बैंटिंग, चार्ल्स बेस्ट, और जेम्स कॉलिप (Frederick Banting, Charles Best और James Collip) ने इंसुलिन की खोज की थी तो उसका पेटेंट सिर्फ 1 डॉलर में एक यूनिवर्सिटी को दे दिया था। ताकि यह दवा हर उस इंसान तक पहुँचे जिसे इसकी जरूरत है।

इसी तरह जगदीश चंद्र बोस जी ने रेडियो वेव्स और Botany के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम किया था। लेकिन उन्होंने अपने शोध का पेटेंट लेने से मना कर दिया था। उनका मानना था कि ज्ञान किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है। यह पूरी मानवता की धरोहर है।

इससे हमें यह सीख मिलती है कि जब आप अपनी जिंदगी में आगे बढ़ें, कुछ नया बनाएं, कुछ हासिल करें—तो एक बार यह जरूर सोचें: क्या यह सिर्फ मेरे लिए है, या इससे दुनिया भी कुछ बेहतर हो सकती है? क्योंकि अंत में, सबसे बड़ी सफलता वही है जो सिर्फ आपकी नहीं, बल्कि साझी हो।

साथियों, एक सामान्य व्यक्ति अपनी Professional Life में करीब 10,000 दिन काम करता है। यानी, एक सामान्य व्यक्ति अपने Career को लगभग 80,000 घंटे देता है।

आप अपनी ज़िंदगी का इतना बड़ा हिस्सा काम में लगाते हैं। लेकिन अगर आपको इसमें आनंद नहीं आएगा तो आप कार्य तो करेंगे, लेकिन यह आपको Contentment और Sense of Fulfilment नहीं देगा।

इसलिए बात सिर्फ पैसा कमाने की नहीं है। क्योंकि सिर्फ Material चीजों के पीछे भागने से आपका जीवन व्यर्थ कहलाएगा। इसलिए आप जो भी काम करें, उसमें खुशी ढूंढें।

सवाल यह नहीं है कि आप क्या बनेंगे—Engineer, Doctor, Entrepreneur, Civil Servant या Researcher। सवाल यह है कि आप यह क्यों बनेंगे, और किसके लिए बनेंगे। क्या आपका काम सिर्फ एक Paycheck के लिए होगा, या वह किसी की ज़िंदगी में फर्क भी लाएगा? क्या आप भीड़ का हिस्सा बनकर चलेंगे, या अपनी एक अलग दिशा तय करेंगे?

याद रखिए, Career सिर्फ Survival का साधन नहीं है, यह आपके व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है। जब आपका काम आपके जीवन के Purpose और Larger Cause से जुड़ जाता है, तब वह आपको खुशी देता है। संतुष्टि देता है।

साथियों, मुझे हमेशा लगता है कि यदि युवाओं को परिभाषित करने के लिए एक शब्द है, तो वह है—ऊर्जा। युवा वास्तव में ऊर्जा का अथाह भंडार हैं। लेकिन इस ऊर्जा को सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक है। युवाओं की ऊर्जा सृजन और विकास में भी लगाई जा सकती है, और यदि वह दिशा भटक जाए तो विनाश का कारण भी बन सकती है।

जैसे जब भारत का युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग करता है तो दुनिया को बेहतर करने वाली Technology बढ़ती है, लेकिन वहीं हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के कुछ युवा अपनी Energy से दुनिया में Terrorism बढ़ा रहे हैं।

मैं समझता हूँ कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत हमारे युवाओं को दिशा देने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

साथियों, मैं Physics का शिक्षक रहा हूँ। तो आपको Nuclear Fission (फिशन) और Fusion (फ्यूज़न) की प्रक्रिया से एक बात समझाना चाहता हूँ। ये दोनों ही Reactions ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। सूर्य को ऊर्जा देने वाली प्रक्रिया फ्यूज़न है। Power plants में होने वाली Reaction, Nuclear fission है। लेकिन Nuclear Fission में Radioactive Waste निकलता है। जबकि Fusion में ऐसी समस्या नहीं आती।

यह फर्क हमें एक गहरी सीख देता है कि हर सफलता बराबर नहीं होती है। सफलता प्राप्त करने के बाद हम पीछे क्या छोड़ रहे हैं यह भी बड़ा सवाल है। क्या हमारी सफलता के बाद समाज को उसके “Side Effects” झेलने पड़ेंगे? या फिर हम ऐसी उपलब्धियाँ हासिल करेंगे जो समाज को बेहतर करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा न बनें।

इसलिए जब आप आगे बढ़ें, तब हमेशा यह सोचिए कि आप दुनिया को कैसा भविष्य दे रहे हैं। क्योंकि असली सफलता वही है—जो ऊर्जा भी दे, और उजाला भी, बिना किसी के जीवन में अंधेरा किए।

देवियो और सज्जनो, आज Technology का जमाना है। हम 4th Industrial Revolution के दौर में हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि Technology अपना Purpose खोती जा रही है। दुनिया के ज्यादातर बुद्धिमान लोग सिर्फ Commercial Interests के लिए काम कर रहे हैं। Technology और Talent का उपयोग इंसान की जिंदगी बेहतर बनाने में कम, और Profit Generation में ज्यादा हो रहा है।

इसे एक उदाहरण से समझिए। एक कंपनी के वैज्ञानिक, AI की मदद से गंभीर बीमारियों की दवा बनाने पर काम कर रहे थे। लेकिन उस कंपनी के मालिकों ने उन वैज्ञानिकों से उनके सारे संसाधन ले लिए। और उन लोगों को दे दिए जो चैटबॉट (Chatbot) बनाने के काम में लगे थे।

यानी जिस AI का उपयोग मानव जीवन को बचाने के लिए किया जा सकता था, उसका इस्तेमाल पूरी तरह से Consumer Product बनाने पर किया जाने लगा।

मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि Commercial Activities करना या Consumer Products बनाना गलत है। Wealth Generation और Prosperity अत्यंत आवश्यक हैं। Indispensable हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हम Commerce को Social Cause से ऊपर रख देते हैं, और Profit को Larger Good से ज्यादा Priority देते हैं।

इसलिए आज इस बात की ज़रूरत है कि Technology सिर्फ Market की मांग के हिसाब से नहीं, बल्कि मानवता की असली ज़रूरतों के हिसाब से भी आगे बढ़े।

हमें ऐसी सोच विकसित करनी होगी जहाँ Innovation का उद्देश्य सिर्फ Profit नहीं, बल्कि Purpose भी हो।

Universities और Institutions को चाहिए कि वे छात्रों को सिर्फ Skills नहीं, बल्कि Values भी दें — ताकि वे यह तय कर सकें कि उनकी प्रतिभा का उपयोग किस दिशा में हो।

यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम एक ऐसा Ecosystem बनाएं जहां Empathy, Compassion, Ethics जैसे मूल्यों को सराहा जाए। Incentives ऐसे होने चाहिए जो उन Innovations को बढ़ावा दें जो समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करें।

प्रिय विद्यार्थियों, AI Age के दौर में Edge पाने के लिए हमें कई कार्य करने होंगे। जैसे मशीनें हमारे सवालों के जवाब दे सकती हैं, पर उनसे हमें सही सवाल पूछना सीखना होगा।

इस दौर में Success का मतलब होगा—खुद को लगातार Reinvent करना। जो जितनी जल्दी सीखेगा, उतनी ही जल्दी आगे बढ़ेगा। यानी आज “Learning to Learn” सबसे बड़ी Superpower है।

Leadership, Vision, Courage और Emotional Intelligence जैसी Values के बिना आगे बढ़ना बहुत मुश्किल होगा। क्योंकि AI के इस दौर में वही लोग आगे बढ़ेंगे जो Inspire कर सकें, Guide कर सकें और Uncertainty में भी लोगों को साथ लेकर चल सकें।

और एक और महत्वपूर्ण बात, AI का युग Opportunities से भरा है, और जो लोग Risk लेने, Innovate करने और कुछ नया Create करने की सोच रखेंगे, वही Future को Shape करेंगे।

प्रिय विद्यार्थियों, भारत में कई ऐसे Innovators सामने आए हैं जिन्होंने अपनी Inventions और Creative Thinking से लोगों की जिंदगी बेहतर बनाया है। जैसे एक इंजीनियर ने ऐसा Smart System बनाया जो घरों में बिजली की बर्बादी को पहचानकर उसे कम करता है। इसी तरह कुछ Innovators ने Portable Diagnostic Devices बनाए हैं, जो Rural Areas में भी बीमारियों की Diagnosis करने में मदद कर रहे हैं।

आज, कई Startups, Semiconductor Chip बनाकर भारत के आत्मनिर्भरता के मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं। एक Innovator ने एक ऐसा Robotic System बनाया है जो Armed Forces की खतरनाक इलाकों में मदद कर सकता है। ऐसे ही, किसी ने Unsafe Drinking Water को पहचानने का आसान तरीका बनाया है, तो किसी ने सूखे Borewells को फिर से Revive करके लोगों तक पानी पहुंचाया है।

वहीं कुछ Innovators ने ऐसे सस्ते Prosthetic Hands और Mobility Devices बनाए हैं, जिससे दिव्यांग लोगों का जीवन आसान हुआ है।

इन सभी उदाहरणों में एक चीज Common है। इन लोगों ने अपने आस-पास की समस्याओं को देखा, समझा और फिर ऐसा समाधान निकाला जो सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी हो।

यह जिम्मेदारी अब आप जैसे युवा Graduates के कंधों पर भी है। जब आप कल किसी कंपनी, स्टार्टअप या Research Lab का हिस्सा बनेंगे, तब यह निर्णय आपका होगा कि आप अपनी प्रतिभा को सिर्फ Algorithms को Optimize करके Profits बढ़ाने में लगाएंगे या मानवता को Uplift करने में।

आप Sales बढ़ाकर सिर्फ Shareholders की Wealth बढ़ाएंगे या समाज की असली समस्याओं का समाधान निकालकर कुछ Worthwhile करेंगे।

देवियों और सज्जनों, आज भारत एक नए नवाचार युग की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को Innovation का हब बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। पिछले दशक में भारत का Research and Development Expenditure दोगुना हो गया है। Registered Patents की संख्या कई गुना बढ़ गई है। वर्ष 2015 में हम Global Innovation Index में 81वें स्थान पर थे। वहीं 2025 में हम 38वें स्थान पर पहुँच गए हैं।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र अब उड़ान भर रहा है। भारत की Bio-economy पिछले 11 सालों में 16 गुना से अधिक बढ़ गई है।

केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष एक लाख करोड़ रुपये के ‘रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन फंड’ की शुरुआत की थी। इस वर्ष भी डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए 20,000 करोड़ रुपये का कोष बनाया गया है। Atal Tinkering Labs के बजट में 6 गुना वृद्धि हुई है।

यह सब बातें एक स्पष्ट संदेश देती हैं कि हम अपने युवाओं को इस Tech-age में पीछे नहीं रहने देंगे। और यह Ensure करेंगे कि हमारा युवा नवाचार के बल पर “विकसित भारत” के सपने को साकार करने में अधिक से अधिक योगदान दे।

साथियों, आज Depression और Anxiety जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। जबकि आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ हमारे पास पहले से अधिक संसाधन, अवसर  और सुविधाएं हैं। हमारी Life Quality बेहतर हुई है। लेकिन फिर भी एक खालीपन है।

आप Materially Wealthy होने के साथ-साथ Mentally Healthy रहें, यह अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सभी को पहले Self-Centered से Purpose-centered होना होगा। इसलिए हर रोज कुछ ऐसा काम करने की कोशिश करें जिसमें किसी Reward की चाह न हो।

यह कोई भी काम हो सकता है। जैसे किसी की मदद करना, किसी की बात ध्यान से सुनना या किसी को Genuinely Appreciate करना। इससे धीरे-धीरे दिमाग “मैं” से “हम” की तरफ शिफ्ट होने लगता है।

दूसरा, Real Connections पर काम करना ज़रूरी है। आज हम Digitally Connected हैं, लेकिन Emotionally Disconnected होते जा रहे हैं। कोशिश करें कि हर दिन किसी अपने से बिना किसी Distraction के बात करें। जब आप खुलकर बात करते हैं तो Sense of Belonging बढ़ता है।

तीसरा है Gratitude. आप एक Gratitude Journal बना सकते हैं। जिसमें आप हर दिन यह लिख सकते हैं कि आप किसके लिए Thankful हैं। इससे उन चीजों पर ध्यान जाता है जो आपके पास हैं, न कि उन पर जो आपके पास नहीं हैं।

अंत में मैं आप सब के अत्यंत उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। मुझे विश्वास है कि आप अपने परिवार का, समाज का और राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगे। और भारत को एक समावेशी और समृद्ध राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित करने में अपना योगदान देंगे।

धन्यवाद।