AMC ने Military Medical Diplomacy में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है: रक्षा मंत्री

Text of RM’s speech on the occasion of Army Medical Corps Raising Day in New Delhi.

सबसे पहले मैं आप सभी को, Army Medical कोर के, 262वें Raising Day की, हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

वैसे तो AMC Day, 3 अप्रैल को आयोजित होता है; और मुझे आप सबके बीच 3 अप्रैल को ही आना था। पर कुछ कारणों से मैं उपस्थित नहीं हो सका। लेकिन मेरे मन में था, कि मैं एक बार आप सबके बीच जरूर आऊं। इसलिए 2 दिन बाद ही सही, मैं इस अवसर पर, आप लोगों के बीच उपस्थित हूँ।

आज यहाँ, ‘Advanced ऑर्थोपेडिक Centre’,Advanced Centre for ऑप्थैल्मिक and Visual Sciences’, और ‘Advanced ऑन्कोलॉजी Centre’ के लिए, भूमि पूजन सम्पन्न हुआ। इसकी भी मैं आप सबको बधाई देता हूँ।

मुझे यह देखकर बड़ी ख़ुशी हुई, कि ये जो तीनों centers बनने जा रहे हैं, यह centres, अपने आप में, Modern technology और Expert care का एक सशक्त combination होगें। इन centres में, अलग-अलग experts मिलकर, एक साथ इलाज कर सकेंगे, जिससे हमारे सैनिकों, और उनके परिजनों को, बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा।

इनके साथ ही, एक और अन्य महत्त्वपूर्ण event, कि आज Base hospital के नए, Modern, और State-of-the-Art medical facility का भी निर्माण कार्य प्रारंभ हो रहा है। इसके लिए भी मैं आप सभी को बधाई देता हूँ। Base hospital की इस नई facility से, मरीजों का इलाज, और बेहतर, और सुविधाजनक हो सकेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

आज जिन hospitals को पुरस्कार मिल रहा है, मैं उन hospitals को, वहाँ के officers, doctors और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं देता हूँ। ये आप सभी के समर्पण, और निरंतर काम करने का परिणाम है। मुझे विश्वास है, कि आप सभी आगे भी, ऐसे ही, पूरी निष्ठा और लगन के साथ देश की सेवा करते रहेंगे।

साथियों, Raising Day किसी भी संस्था के लिए कोई मामूली बात नहीं होती है। यह एक बड़ा अवसर होता है। संस्थाएँ अपने इतिहास को देखते हुए, आगे का roadmap तय करती हैं। अपने अनुभवों से सीखती हैं; और भविष्य की दिशा भी तय करती हैं।

आपकी 262 वर्षों की लंबी यात्रा रही है। इतनी बड़ी journey में, Army Medical कोर ने, जिस प्रकार देश के कोने-कोने में अपनी सेवाएँ प्रदान की हैं, वह अपने आप में अद्भुत है। ऊँचे पहाड़ों से लेकर दुर्गम जंगलों तक, peace-time से लेकर आपदा के समय तक, आपकी सेवाएँ हर स्थान तक पहुँची हैं। जहाँ भी देशवासियों को, और देश के बाहर भी, आपके सहारे की आवश्यकता पड़ी; Medical Forces के रूप में आप वहां पहुंचे हैं। केवल पहुँचे हैं, बल्कि पूरी ताकत के साथ पहुँचे हैं, और लोगों का भरोसा जीता है। इसके लिए मैं आप सभी को बधाई देता हूँ।

साथियों, कई बार मुझे लगता है, कि किसी राष्ट्र का भी जीवन वृत्तान्त एक व्यक्ति के जीवन जैसा ही होता है। जैसे एक व्यक्ति का बचपन होता है, फिर युवावस्था आती है, और उसके बाद वह mature age में पहुँचता है। उस mature age में उसके पास, एक ओर अपने बुजुर्गों का अनुभव और आशीर्वाद भी होता है; और दूसरी ओर बच्चों का, यानि नई पीढ़ी का ज्ञान भी होता है, और innovation की क्षमता भी होती है।

उसी प्रकार, आज भारत को भी एक, mature और stable stage में देखा जा सकता है। आजादी के बाद लगभग 70-80 वर्षों की यात्रा में, भारत ने अनुभव भी अर्जित किया है, और नए मार्ग भी बनाए हैं। आज हमारे पास आप जैसे कुछ संस्थान और संगठन हैं, जो अपनी परंपरा, अनुभव और निरंतर कार्य के कारण, हमारे विकास को एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, आप ही जैसे लोगों का progressive mindset, और नया दृष्टिकोण भी, देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। इन दोनों के संतुलन से ही, कोई देश विकास की ओर बढ़ता है। भारत आज उसी दिशा में आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है, और इसको लेकर हमें आगे बढ़ते ही चले जाना है।

साथियों, जब भी हम किसी देश के विकास की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान उसके आर्थिक विकास पर जाता है। जैसे- वहाँ की GDP क्या है? per capita income कितनी है? capital growth कैसी है। ये तरीका काफी हद तक सही भी है, लेकिन विकास की तस्वीर इससे कहीं बड़ी होती है। मेरा मानना है, और मैं यहाँ कहना चाहूँगा, कि किसी भी growth और development के parameters, केवल आर्थिक नहीं होते। इनके अलावा भी इसके कुछ महत्वपूर्ण आयाम होते हैं, और उनमें से एक अत्यंत जरूरी आयाम है, किसी देश के लोगों का स्वास्थ्य।

ये बात सही है, कि आज देश में prosperity लगातार बढ़ रही है। हम आर्थिक विकास की राह पर तेजी से अग्रसर हैं, और लोगों का जीवन अधिक comfortable हो रहा है। लेकिन इसके साथ ही, एक दूसरी सच्चाई भी सामने आ रही है। समृद्धि के साथ-साथ नई बीमारियाँ भी जन्म ले रही हैं। लोगों की lifestyle बदल रही है, और उसी के साथ lifestyle diseases भी तेजी से बढ़ रही हैं। एक comfortable life सबके लिए जरूरी है, सबके लिए desirable भी है, लेकिन अगर उसमें balance नहीं है, तो वही comfort कई समस्याओं का कारण भी बन जाता है। ऐसे समय में, medical sector की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, कि वह लगातार इन बदलती चुनौतियों को समझे, उनसे deal करे, और इसके लिए खुद को समय के अनुसार update करता रहे।

भारत की जो परंपरा रही है, उसमें तो इस balance को बहुत पहले ही समझ लिया  गया था।  श्रीमद्भगवद्गीता में एक श्लोक आता है-

युक्ता हार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।

युक्तस्वप्नावबोधस्य, योगो भवति दुःखहा॥

गीता कहती है, कि जो व्यक्ति अपने खान-पान, जीवनशैली, काम-धाम और विश्राम के बीच balance रखता है, वही शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। आज के समय में यदि हम अपने जीवन को देखें, तो हम अक्सर extremes में जीते हैं। कभी हम over eating कर लेते हैं, तो कभी dieting के नाम पर, खुद को जरूरत से ज्यादा restrict कर देते हैं। कभी over-work करते हैं, तो कभी पूरी तरह lazy हो जाते हैं। कुछ लोग जरूरत से ज्यादा सोते हैं, तो कुछ लोग ठीक से सो ही नहीं पाते।

यह imbalance ही, आज कई physical और mental समस्याओं की जड़ बनता जा रहा है। इसलिए यह समझना आवश्यक है, कि जीवन का हर कार्य; खाना, सोना, काम करना या आराम करना, सब अपने आप में एक प्रकार का योग है। जब इन सभी में संतुलन स्थापित होता है, तभी सही मायने में आप healthy बन सकते हैं। और यही वह दिशा है, जिसमें हमें आगे बढ़ना है। जहाँ development केवल economic growth तक सीमित न होकर, holistic हो, और health को development का एक central pillar माना जाए।

यहाँ R&R में, OPD के सामने, मुस्कराते हुए जो भगवान बुद्ध बैठे हुए हैं, तो वे यूँ ही नहीं बैठे हुए हैं। इनकी यह मूर्ति हमें यह स्मरण कराती है, कि स्वास्थ्य केवल शरीर का विषय नहीं है, बल्कि मन की शांति से भी उसका गहरा संबंध है। बुद्ध का जीवन हमें यह सिखाता है, कि संतुलन, संयम और mind-full-ness ही, overall well-ness की कुंजी है। इसलिए, हमें अपने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को, प्राचीन दर्शन से जोड़ना होगा, तभी जाकर हम एक अच्छा health model भी लोगों के सामने रख पाएँगे। और इसके लिए हमें एक component पर खास ध्यान देना है, और वह है research.

साथियों, पिछले कुछ वर्षों में medical sector में हम काफी आगे बढ़े हैं। पूरे देश में, हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, निरंतर health infrastructure का निर्माण हो रहा है। AIIMS से लेकर Medical colleges की संख्या लगातार बढ़ी है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से, स्वास्थ्य सुविधाएँ सभी के लिए सुलभ बनी हैं। हम cancer treatment, bypass surgery और critical care जैसे क्षेत्रों में भी आगे आ रहे हैं। कई बड़े संस्थानों में, complex surgeries, अब अधिक accessible, और affordable हो रही हैं। लेकिन जब बात frontier technologies और deep research की आती है, तो उसमें अभी भी हमें लंबा रास्ता तय करना है। उदाहरण के तौर पर, cancer research में early detection technologies,  और personalized medicine के क्षेत्र में, दुनिया के कई देश हमसे आगे हैं। इसी प्रकार cardio-vascular diseases के, advanced predictive models, और mental health के neuro-research में भी, हमें अपनी क्षमता को, और मजबूत करना होगा।

इसी से जुड़ा एक और क्षेत्र है, pharmaceutical का। इस sector में भी self-reliance अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि भारत दुनिया का, एक बड़ा medicine supplier जरूर है, लेकिन high-end drug innovation, और original research के क्षेत्र में, अभी भी dependency दिखाई देती है। इसलिए यह समय है, कि हम generic production से आगे बढ़कर, innovation-driven pharmaceutical ecosystem की ओर अपना ध्यान केंद्रित करें। साथ ही हमें नई दवाओं की खोज, clinical research को मजबूत करने, और global quality standards को अपनाने पर भी ध्यान देना होगा। MSMEs और start-ups को pharma innovation में जोड़ना, बेहतर testing infrastructure विकसित करना, और skilled manpower तैयार करना भी जरूरी है। इससे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों में एक leader के रूप में भी उभरेगा।

साथियों, यह सब कुछ हमारे लिए इसलिए आवश्यक है, क्योंकि आज के दौर में हमें जिन जिन क्षेत्रों में काम करना है, उसमें एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है, और वह है ‘Health security.’

जब भी इस दौर में हम security की बात करते हैं, तो उसमें केवल सीमाओं की रक्षा शामिल नहीं है, बल्कि health security भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आप देखिये, कि अगर हम Operation Sindoor जैसे बड़े operations को सफलतापूर्वक अंजाम देते हैं, तो उसके पीछे health security का एक बड़ा role होता है। जब हमारे सैनिकों का विश्वास मज़बूत रहता है, कि किसी भी परिस्थिति के लिए, एक बेहतर medical support उनके साथ है, तो वे बिना किसी चिंता के अपने मिशन को पूरा करने में सफल होते हैं। इसलिए Health security पर constantly positive approach की आवश्यकता है।

साथियों, आज इस महत्त्वपूर्ण अवसर पर, एक और विषय पर मैं आपका ध्यान ले जाना चाहूँगा, और वह विषय है clinical trials का। आज दुनिया के कई advanced देशों में, clinical trials, industry sponsored होते हैं। वहाँ research, treatment और innovation, इन सबको ध्यान में रखा जाता है। हमारे यहाँ भी इस दिशा में काम हो रहा है, लेकिन अभी भी trial reforms की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस होती है। हमें यह देखने की जरूरत है, कि Armed Forces Medical Services इस क्षेत्र में, किस प्रकार अपना meaningful contribution दे सकती हैं, ताकि हमारी medical capability केवल इलाज तक सीमित न रहे, बल्कि knowledge creation तक भी पहुँचे। यहाँ अपने-अपने क्षेत्र के important, और जाने-माने लोग बैठे हुए हैं, तो मुझे विश्वास है, कि इस ओर भी आप विचार करेंगे।

साथियों, Medical sector में, आमतौर पर, हमें एक challenge और भी देखने को मिलता है, कि हमारे hospitals में workload बहुत अधिक होता है। OPD में हमें भारी भीड़ देखने को मिलती है। surgical schedules बेहद tight होते हैं। Doctors लगातार treatment और surgeries में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में research, training और teaching जैसे important aspects पीछे छूटने लगते हैं। यह एक practical challenge है, जिसे स्वीकार करना होगा। यानी जो डॉक्टर हैं, वो केवल काम ही काम कर रहे हैं। research  के लिए उन्हें समय नहीं मिल पा रहा। इसलिए जो इतना work load है, इसे कैसे balance  किया जाए, इस पर भी आपको विचार करने की जरूरत है।

इसके अतिरिक्त एक और important aspect, data का है। आज के समय में, data investment भी बहुत जरूरी है। इतनी population, और इतने बड़े healthcare infrastructure के बावजूद, अब तक हमने data collection और synthesis पर अधिक ध्यान नहीं दिया है। लेकिन अब हमें इस gap को भरना होगा। Hospitals में रोज़ाना हजारों cases आते हैं, doctors अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखते हैं, लेकिन यह knowledge, अक्सर individual level तक ही सीमित रह जाती है। यह institutional memory, या national resource में परिवर्तित नहीं हो पाती।

इसे आप ऐसे समझिये, कि किसी एक डॉक्टर के पास, किसी खास बीमारी के 50 मरीज आते हैं। धीरे-धीरे वह doctor, उस बीमारी को समझने में, काफी skilled हो जाता है। लेकिन वही knowledge, दूसरे अस्पताल तक, structured form में नहीं पहुँचती। वहाँ जब उस बीमारी का मरीज आता है, तो दूसरे डॉक्टर के लिए वह पहला case होता है। इस तरह knowledge creation हर जगह अलग-अलग तरीके से शुरू होती है, जबकि उसे साझा होकर आगे बढ़ना चाहिए।

यही कारण है, कि एक मजबूत SOP, और स्टैंडर-डाइज्ड प्रोटोकॉल की आवश्यकता है। अगर किसी बीमारी पर, पहले से पर्याप्त clinical experience मौजूद है, तो वह experience, system के माध्यम से, अन्य doctors और hospitals तक पहुँचना चाहिए। इससे treatment faster, efficient, और evidence-based बनता है। यह individual capability के साथ-साथ, system efficiency को भी बढ़ाएगा। इसके लिए एक national-level data pool तैयार करना, इस दिशा में बहुत बड़ा कदम हो सकता है। इससे policies को बेहतर input मिलेगा। नए medical practices को, validate करने में मदद मिलेगी। Effective treatments को, बड़े स्तर पर replicate किया जा सकेगा, और धीरे-धीरे हमारा healthcare system, reactive नहीं, बल्कि proactive बनेगा।

साथियों, आज के समय में जब दुनिया तेजी से बदल रही है, तो Defence और Healthcare, दोनों क्षेत्रों में भी हमें उतनी ही तेज गति से आगे बढ़ना होगा। आज हम सब देख रहें हैं, कि ये Artificial Intelligence का दौर है, और ऐसे में healthcare में AI-based simulator training को अपनाना, समय की आवश्यकता बन चुका है। मुझे यह जानकर बड़ी ख़ुशी हुई, कि AH-RR ने already इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिया है। आपका यही vision, आपको एक अस्पताल से कहीं अधिक, एक भरोसे का प्रतीक बनाता है।

आपके यहाँ एक सिपाही से लेकर, Armed forces के supreme commander तक, सभी निश्चिंत होकर, अपना उपचार कराते हैं। यह जो भरोसा है, वह वर्षों की सेवा, अनुशासन, और उत्कृष्ट चिकित्सा व्यवस्था से बना है। यह भरोसा, आपकी सबसे बड़ी पहचान है, इसलिए आपको इसी तरह लगातार technology update भी करते रहना होगा, ताकि बदलते समय के अनुसार, यह भरोसा और मज़बूत हो।

जहाँ तक research और expansion की बात है, तो मैं यह मानता हूँ, कि R&R hospital जैसी facilities, देश के अन्य हिस्सों में भी विकसित होनी चाहिए। यह देश का एक मात्र premier institute है, जो अभी फिलहाल दिल्ली में स्थित है। लेकिन ऐसे संस्थान तो, देश के चारों कोनों में होने चाहिए। ताकि देश के हर क्षेत्र में, सभी जगह हमारी forces को, बेहतर medical facilities मिल सकें। यह आवश्यक नहीं, कि हर जगह greenfield project ही बने, या कोई बिल्कुल नया संस्थान खड़ा किया जाए, बल्कि brownfield project  में भी अपार संभावनाएँ हैं। जहाँ पहले से command hospitals या base hospitals मौजूद हैं, उनको modern facilities के साथ upgrade करके, उन्हें इसी स्तर तक लाया जा सकता है। मैं तो हमेशा ही इसको लेकर प्रयास करता रहता हूँ, कि देश भर में, हमारे सैनिकों को सर्वोत्तम उपचार, और facilities उपलब्ध हों। हमारे जो सैनिक, तपती गर्मी और कड़ाके की ठंड में दिन-रात, हर परिस्थिति में, देश की सेवा में लगे रहते हैं, उनके लिए best health facility ensure करना, हमारे सरकार की सर्वोच्च priority रही है। मुझे पूरा विश्वास है, कि इस ओर भी आप सभी इसपर विचार करेंगे ।

साथियों, एक बात का मुझे बड़ा गौरव होता है, कि आप सभी ने Medical sector में काम करते हुए, भारत के लोगों की सेवा तो की ही है, साथ ही साथ आपने देश के लिए, Military medical diplomacy में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिस प्रकार नेपाल, और अन्य स्थानों पर, आप लोगों के द्वारा medical camps लगाए गए, वह बड़ा महत्त्वपूर्ण कदम रहा।

ख़ासकर अगर मैं Eye camps की चर्चा करूँ, तो उसके माध्यम से, glaucoma surgery, और जो Eye care services दी गईं, वह भारत के soft power का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। इन सब प्रयासों से, पड़ोसी देशों के साथ, हमारे संबंध मजबूत होते हैं, और आम लोगों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है।

साथियों, आज के समय में, medical sector को isolation में नहीं देखा जा सकता। Medical sector अपने आप में, Economically, diplomatically और Socially, हर dimension के साथ जुड़ा हुआ है। इसी का एक और aspect, Civil-military fusion भी है।

अभी कुछ समय पहले ही, जिन Eye camps और medical initiatives का विस्तार, अलग-अलग क्षेत्रों, यानी पूरब से लेकर पश्चिम, और उत्तर से लेकर दक्षिण तक हुआ, उनका लाभ केवल defence personnel तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता को भी मिला है। यह कोई छोटी बात नहीं है, बड़ी बात है। इस तरह के स्वास्थ्य सेवाओं के, देश भर में प्रसार की, यह जिसकी भी दृष्टि रही हो, जिसका भी vision रहा हो, उसकी मैं सराहना करता हूँ, और उनको बधाई देता हूँ।

साथियों, आज चूँकि मैं हमारी सेनाओं से जुड़े हुए medical professionals के बीच उपस्थित हूँ, तो एक और बात मैं आपसे करूँगा। हमारी Military Nursing Service की जो nurses हैं, जो हमारी Medical Forces की bedrock हैं, उनको retirement के बाद ex-servicemen का दर्जा नहीं मिलता था। एक लंबे समय से यह demand pending पड़ी थी। लेकिन हमारी सरकार ने, अब यह निर्णय लिया है, कि अब उन्हें भी, ex-servicemen का दर्जा दिया जाएगा। यह बड़े ही हर्ष की बात है, और इसके लिए मैं इस service को बधाई देता हूँ।

इस अवसर पर अधिक कुछ न कहते हुए, Army Medical कोर के इस Raising Day पर, मैं Armed Forces Medical Services के उन सभी वीरों को नमन करता हूँ, जो लगातार राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।

साथ ही मैं सभी veterans को भी धन्यवाद देता हूँ, जिनके योगदान ने AFMS को आज इस ऊँचाई तक पहुँचाया है, और मुझे पूरा विश्वास है, कि हमारे युवा अधिकारी भी, इस विरासत को, 2047 के विकसित भारत तक, और उससे आगे भी, नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे।

अंत में, आज यहाँ ‘अर्ली न्यूरो-डेवलपमेंटल इंटरवेंशन’ जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर, पुस्तक का भी विमोचन होने वाला है। मैं उसके Editors, और Writers को भी, अपनी बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

आप सब ने मुझे यहां आमंत्रित किया, इसके लिए आप सभी का आभार व्यक्त करते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद । जय हिन्द!