Text of RM’s speech at ‘Aditya Birla Memorial Polo Cup’ Finals in New Delhi.
अभी, थोड़ी देर तक, मुझे यह खेल देखने का मौका मिला। और सच कहूँ, कि आप सब जैसे खिलाड़ी हों, तो दर्शक बनने का भी अपना अलग आनंद है। इन 7,8 minutes में मुझे, आप लोगों की, सालों की मेहनत और समर्पण दिखा है।
Sport, दरअसल participate करने वाली ही चीज है। जीत-हार तो बस इसके दो पहलू भर हैं। इसलिए मेरी तरफ से, जीतने वालों को भी बधाई, और बाकी सभी participants को भी बधाई।
साथियों, इस प्रकार के खेल के जो आयोजन हैं, वो महज किसी खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ऐसे आयोजन, कई तरह के messages लेकर सामने आते हैं। जैसे, आज आयोजित यह खेल, एक ऐसे महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने का अवसर भी है, जिन्होंने भारतीय उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण में असाधारण योगदान दिया।
मैं इस मंच से, आदित्य विक्रम बिड़ला जी को, राष्ट्र के प्रति किये गए उनके योगदान के लिए, श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। मैं राजश्री बिड़ला जी, श्री कुमार मंगलम बिड़ला जी, तथा संपूर्ण आदित्य बिड़ला समूह की भी सराहना करना चाहूँगा, जो इस प्रकार की सार्थक पहलों के माध्यम से उनकी स्मृति को जीवित रखे हुए हैं।
साथियों, आदित्य विक्रम बिड़ला जी ने, अपने जीवन में excellence, vision और dedication के जो मानक स्थापित किए, वे आज भी हम सभी को प्रेरणा देते हैं। बिड़ला परिवार ने भारत के industrial development, social और educational welfare के क्षेत्र में भी, बहुत बड़ा योगदान दिया है। और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, आदित्य विक्रम बिड़ला जी ने भी, Indian Industries को global level पर नई पहचान दिलाई।
उनके व्यक्तित्व की एक बड़ी विशेषता यह भी थी, कि उनके अंदर leadership के साथ-साथ, खेलों के प्रति एक विशेष लगाव था। पोलो में भी उनका बड़ा interest था। इसलिए उनकी स्मृति में, पोलो कप का आयोजन, मैं समझता हूँ, उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक सार्थक प्रयास है।
साथियों, पोलो केवल शक्ति और गति का खेल नहीं है। यह खेल तालमेल, रणनीति, समन्वय, अनुशासन और साहस का अद्भुत संगम है। पोलो का इतिहास भारत में अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी रहा है।
इतिहासकर बताते हैं, कि पोलो की शुरुआत मणिपुर में लगभग 2000 वर्ष पूर्व ही हो गई थी। मणिपुर में इस खेल को, स्थानीय भाषा में “सागोल कांगजेई” कहा जाता है। यह तथ्य इस बात को दर्शाता है, कि पोलो केवल आधुनिक खेल नहीं है, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी खेल परंपरा से जुड़ा हुआ है।
भारत के कई क्षेत्रों, जैसे कश्मीर और लेह में भी, पोलो खेल के ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं। इसलिए पोलो को, भारत का एक “हेरिटेज स्पोर्ट” कहा जा सकता है।
साथियों, पोलो ही नहीं, अनेक Games के क्षेत्र में भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। पर साथ ही, हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस प्रकार के medals, championships और global recognition की अपेक्षा की जाती है, उस दिशा में हमें अभी और दूरी तय करने की जरूरत है। हमारे पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हमारे युवाओं में passion भी है,
और dedication भी है, लेकिन हमें उन्हें सही infrastructure, training ecosystem और international exposure देने की आवश्यकता है।
इसके लिए सरकार अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रही है। पिछले एक दशक में भारत ने खेलों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। हमारे प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।
खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसे कार्यक्रमों और
देशभर में खेल Infrastructure के अभूतपूर्व विकास ने युवाओं को आगे बढ़ने के लिए नया मंच प्रदान किया है।
National Sports Governance Act, और ‘खेलो भारत नीति’ जैसे प्रयासों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बहुत लाभ होगा। खेल संगठनों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
इस प्रकार, भारत एक ऐसी खेल संस्कृति का निर्माण कर रहा है, जहाँ खिलाड़ियों और युवाओं को अवसर, संसाधन और सम्मान तीनों मिल सके।
आज भारत के खिलाड़ी ओलंपिक, पैरालंपिक और एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्व मंच पर लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। यह खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम तो है ही, ऐसे राष्ट्रीय दृष्टिकोण का भी परिणाम है, जिससे खेलों को और खिलाड़ियों को उचित सम्मान और संसाधन मिल रहे हैं।
लेकिन इतने बड़े स्तर पर excellence, सिर्फ सरकारी प्रयास से संभव नहीं है। इसमें सबकी भागीदारी जरूरी है। ऐसे समय में private institutions, corporate houses और sports promoters की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जिस प्रकार industrialization, technology और education के क्षेत्र में, private participation ने नई ऊर्जा और नई गति प्रदान की है, उसी प्रकार खेलों के क्षेत्र में भी public–private partnership की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है।
जब private players और industries के लोग खेलों से जुड़ते हैं, तब एक तरफ तो resources आते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक professional approach, long-term vision और sustainable support system भी develop होता है।
इससे खिलाड़ियों को बेहतर coaching, world-class facilities, और international level की preparation का अवसर मिलता है। युवा खिलाड़ियों को एक credible platform मिलता है, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है, और देश के खेल परिदृश्य में नई संभावनाएँ दिखाई देने लगती हैं।
मेरा मानना है, कि यदि government, private sector और अन्य सामाजिक समूह, एक साथ मिलकर काम करें, तो आने वाले समय में भारत Polo के क्षेत्र में भी,
विश्व स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बना सकता है। मुझे विश्वास है, कि इस प्रकार के आयोजन, भारत में Polo की परंपरा को, और अधिक सशक्त बनाएंगे और आने वाली पीढ़ियों को भी इस प्रतिष्ठित खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
भारत चूँकि एक युवा देश है, तो हम जैसे युवा देश के लिए, यह अवसर और भी बड़ा है। यदि हम खेलों के क्षेत्र में सही policy support, infrastructure development और private participation को प्रोत्साहित करें, तो यह क्षेत्र न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर,
भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाएगा, बल्कि देश की sports economy को भी एक नई दिशा देगा। मुझे पूरा विश्वास है, कि जब खेल और अर्थव्यवस्था के इस mutual synergy को हम और अधिक मजबूत बनाएंगे, तब भारत में sports culture भी सशक्त होगा, और देश की economic vitality भी नई ऊंचाइयों तक पहुँचेगी।
एक रक्षामंत्री होने के नाते, मुझे इस बात की खुशी होती है, कि Indian Army ने, पोलो में talented players को लाने में, और
इस खेल की समृद्ध विरासत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। Indian Polo Association के साथ मिलकर, भारतीय सेना ने भी, इस विरासत को जीवंत, और प्रासंगिक बनाए रखने में, अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे विश्वास है, कि हम सभी मिलकर, पोलो का, तथा दूसरे sports का भी भारत में एक positive culture develop करेंगे। ताकि हमारे युवा talent सामने आएँ, और भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करें।
मैं इस आयोजन से जुड़े सभी खिलाड़ियों, आयोजकों और सहयोगियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
मुझे पूरा विश्वास है, कि आपके प्रयास, आने वाले समय में इस खेल को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे, और भारत की खेल संस्कृति को और अधिक समृद्ध बनाएंगे।
इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर, आदित्य विक्रम बिड़ला जी की स्मृति को नमन करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।