राज्यों में निवेश के अवसरों पर मुख्यमंत्रियों के सत्र (प्रवासी भारतीय दिवस ) में केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह का आरंभिक संबोधन (09-जनवरी, 2015).

राज्यों में निवेश के अवसरों पर मुख्यमंत्रियों के सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह का आरंभिक संबोधन

प्रवासी भारतीय दिवस 2015

मैं 13वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन के इस सत्र में भाग ले रहे सभी राज्यों के आदरणीय मुख्यमंत्रियों का स्वागत करता हूं। मैं इस अवसर पर ढ़ाई करोड़ प्रवासी भारतीयों की कड़ी मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं जिसने उनकी कार्य संस्कृति, अनुशासन और स्थानीय समुदाय के साथ सफल एकीकरण के लिए दुनिया भर में आदर कमाया है। आप सच में भारत की अदम्य भावना का मूर्त रूप हैं जिस पर हम सबको गर्व है।

आज से ठीक एक सौ वर्ष पहले आधुनिक युग में सत्य एवं अहिंसा की उज्ज्वल मशाल यानी महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे। जैसा कि आप सभी जानते हैं गांधीजी की भारत वापसी ने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष को दिशा दी।

महात्मा गांधी को विश्वास था कि राजनीतिक आजादी से ही देश का सामाजिक एवं आर्थिक कायाकल्प तथा सांस्कृतिक पुनरुद्धार होगा। खादी और स्वदेशी के लिए गांधी जी का आह्वान अर्थव्यवस्था में कमी की समस्या से निपटने और जनता में विश्वास की भावना जगाने का प्रयास था। स्वदेशी के बिना स्वराज अधूरा होगा जिससे मोटे तौर पर हमारे देश की आर्थिक ओजस्विता के महत्व का पता चलता है।

जब श्री अटल बिहारी जी भारत के प्रधानमंत्री बने तो उन्हें हमारी अर्थव्यवस्था में कमी की समस्याओं का सामना करना पड़ा। वे हमारी अर्थव्यवस्था को कमी की अर्थवस्था से आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में बदलने में सफल रहे। उन्होंने सुशासन एवं विकास को अपनी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया तथा उन्होंने इस प्रयास में जनता की भागीदारी सुनिश्चित की। विदेश रह रहे भारतीयों से जुड़ना श्री अटल जी की ही परिकल्पना थी जिसने इस वार्षिक समागम को जन्म दिया और 2003 में पहला प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह आयोजन महात्मा गांधी के अपनी मातृभूमि वापस लौटने के ऐतिहासिक महत्व का प्रतीक है तथा प्रवासी भारतीय दिवस की सफलता प्रत्येक प्रवासी में भारतीयता की भावना भरना है।

महात्मा गांधी कहते थे कि भारत उसके कुछ शहरों में नहीं बल्कि उसके सात सौ हजार गांवों में बसता है और वह बात आज भी सत्य है। एक तरफ शहरीकरण में तीव्र वृद्धि ने शहरों में नए अवसर पैदा किए हैं तथा दूसरी तरफ हमारे गांव भी पीछे नहीं छोड़े जा सकते। विकास की प्रक्रिया को हमारे देश के दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचाना है तथा दूरदराज के क्षेत्रों में हमारे गांवों को भी विकास के दायरे में लाया जाना चाहिए। अगर हम अपने ग्रामीण क्षेत्रों को विकसित करने में नाकाम रहे तो इससे हमारे समाज के अधिकतर तबकों में अलगाव और दुख की भावना पैदा होगी।

भारत की समृद्धि की संभावना उसके गांवों, शहरों और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की आर्थिक वृद्धि में निहित है। सुशासन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके वस्त्र क्षेत्र में भारत की सफलता से लेकर पर्यटन में आकर्षक क्षेत्रों की संभावना तलाशने के लिए पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी होकर ही प्रत्येक राज्य की सफलता से राष्ट्र की शक्ति एवं प्रतिष्ठा बढ़ाई जा सकती है। इसीलिए राज्यों में निवेश के अवसरों पर आज के सत्र का विशेष महत्व है।

लोकतंत्र में हम सामूहिक बुद्धि और सामूहिक जिम्मेवारी का पालन करते हैं। कोई भी राज्य अपने आप में द्वीप नहीं है तथा सभी राज्यों में और केंद्र एवं राज्यों के बीच सक्रिय सहयोग एवं संबंध होना चाहिए। हम यहां इस बारे में अपने विचार एवं अनुभव साझा करने के लिए एकत्र हुए हैं कि यह महान राष्ट्र अधिक प्रगति एवं समृद्धि के पथ पर कैसे बढ़ सकता है।

केंद्र एवं राज्यों को अपने लोगों के सपने एवं आकांक्षाएं पूरी करने के लिए एक दिशा में मिलकर काम करने की जरूरत है। केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने अर्थव्यवस्था को फिर पटरी पर लाने के लिए अनेक उपाय किए हैं। हमारे पास आशावाद के अनेक कारण हैं क्योंकि हम निवेशकों का भरोसा हासिल करने के लिए निरंतर सुधारात्मक उपाय कर रहे हैं। सरकार ने अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने और हमारी आर्थिक वृद्धि के इंजन को चालू करने के लिए अनेक नीतिगत उपाय किए हैं।

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